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Ghar Se Ghar Tak

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उषाकिरण खान की कहानियाँ अधिकतर ग्रामीण परिवेश की हैं। ग्रामीण जीवन की मान्यताएँ उनके संस्कार-कुसंस्कार, उनके अन्दर की ऊर्जा से पाठकों को रू-ब-रू कराती उनकी कथाएँ सबको साथ लेकर चलती हैं। आधुनिक भाषा में जिन्हें दलित कहा जाता है उनके बीच रहनेवाली उषाकिरण खान की कहानियों में न तो दलितमुक्ति का पाखण्ड है न नारीमुक्ति का आडम्बर है। साहित्यिक भाषा के होते हुए भी छोटे-छोटे वाक्यों में कथा लिखने के कारण सहज सुगम शैली में सब कुछ कह जाना उनकी विशेषता है। उषाकिरण खान एक विदुषी महिला हैं। कहानी ही नहीं सांस्कृतिक, सामाजिक विषयों पर अपनी इतिहासप्रिय लेखनी का समर्थ परिचय देती हैं। उषाकिरण के पात्र कल्पित नहीं होते; आप उन्हें इंगित कर खोज निकाल सकते हैं। प्रस्तुत संग्रह की चुनिन्दा कथाओं में उनके अत्यन्त विपन्न कोशी तटबन्ध के गाँव की स्त्रियों के दु:ख हैं तो विदेश से आयी कन्या के सपनों के गाँव की त्रासदी भी। सामाजिक सद्भाव के प्रतीक की क्षीण आशा है तो तार-तार होती समरसता भी है। यह तय है कि उषाकिरण खान की कथाओं में शिक्षित, अशिक्षित सभी जाति, वर्ग तथा धर्म की स्त्रियों की समीचीन कथा है—सृजनधर्मी स्त्रियों की कथा।

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उषाकिरण खान की कहानियाँ अधिकतर ग्रामीण परिवेश की हैं। ग्रामीण जीवन की मान्यताएँ उनके संस्कार-कुसंस्कार, उनके अन्दर की ऊर्जा से पाठकों को रू-ब-रू कराती उनकी कथाएँ सबको साथ लेकर चलती हैं। आधुनिक भाषा में जिन्हें दलित कहा जाता है उनके बीच रहनेवाली उषाकिरण खान की कहानियों में न तो दलितमुक्ति का पाखण्ड है न नारीमुक्ति का आडम्बर है।

साहित्यिक भाषा के होते हुए भी छोटे-छोटे वाक्यों में कथा लिखने के कारण सहज सुगम शैली में सब कुछ कह जाना उनकी विशेषता है।

उषाकिरण खान एक विदुषी महिला हैं। कहानी ही नहीं सांस्कृतिक, सामाजिक विषयों पर अपनी इतिहासप्रिय लेखनी का समर्थ परिचय देती हैं।

उषाकिरण के पात्र कल्पित नहीं होते; आप उन्हें इंगित कर खोज निकाल सकते हैं।

प्रस्तुत संग्रह की चुनिन्दा कथाओं में उनके अत्यन्त विपन्न कोशी तटबन्ध के गाँव की स्त्रियों के दु:ख हैं तो विदेश से आयी कन्या के सपनों के गाँव की त्रासदी भी। सामाजिक सद्भाव के प्रतीक की क्षीण आशा है तो तार-तार होती समरसता भी है।

यह तय है कि उषाकिरण खान की कथाओं में शिक्षित, अशिक्षित सभी जाति, वर्ग तथा धर्म की स्त्रियों की समीचीन कथा है—सृजनधर्मी स्त्रियों की कथा।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
2024
Weight
642 grams
ISBN-13
9788189914714
Pages
208
Reading time
~7 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22.5 cm
Language
Hindi

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