Alpviram
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उषा प्रियम्वदा का यह उपन्यास एक लम्बे दिवास्वप्न की तरह है जिसमें तिलिस्मी, चमत्कारी अनुभवों के साथ-साथ अनपेक्षित घटनाएँ भी पात्रों के जीवन से जुड़ी हुई हैं। एक ओर यह मृत्यु के कगार पर खड़े परिपक्व व्यक्ति की तर्क विरुद्ध, असंगत, अपने से उम्र में आधी युवती के प्यार में आकंठ डूब जाने की कहानी है पर साथ-साथ एक अविकसित, अप्रस्फुटित, अव्यावहारिक स्त्री के सजग, सतर्क और स्वयंसिद्ध होने की भी यात्रा है। यात्रा का बिम्ब उषा प्रियम्वदा के हर उपन्यास में मौजूद है। चाहे वह कैंसर से उबरने की यात्रा हो या अपने से विलग हुई सन्तान के लौटने तक की। इस उपन्यास की कथा भी प्रमुख स्त्री पात्र की स्वयं चेतन, स्वयं सजग और स्वयं जीवन-निर्णय लेने तक की यात्रा है, और लेखिका के हर उपन्यास की तरह कहानी अन्तिम पृष्ठ पर समाप्त नहीं होती, बल्कि पाठक के मन में अपने अनुसार समाप्ति तक चलती रहती है। इस उपन्यास में प्रवास, इतिहास और साहित्य तीन धाराओं की तरह जुड़ा हुआ है, और लेखिका ने पठनीयता के साथ-साथ पाठक को गम्भीरता से अपना जीवन विश्लेषण करने की ओर प्रेरित किया है। ‘अल्पविराम’ एक प्रेम कथा है। बाकी वृत्तान्त एक चौखटा है, एक फ्रेम। परन्तु फ्रेम के बिना तस्वीर अधूरी है। इसी प्रकार प्रेम कहानी प्रवाल के बिना अपूर्ण है।
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उषा प्रियम्वदा का यह उपन्यास एक लम्बे दिवास्वप्न की तरह है जिसमें तिलिस्मी, चमत्कारी अनुभवों के साथ-साथ अनपेक्षित घटनाएँ भी पात्रों के जीवन से जुड़ी हुई हैं। एक ओर यह मृत्यु के कगार पर खड़े परिपक्व व्यक्ति की तर्क विरुद्ध, असंगत, अपने से उम्र में आधी युवती के प्यार में आकंठ डूब जाने की कहानी है पर साथ-साथ एक अविकसित, अप्रस्फुटित, अव्यावहारिक स्त्री के सजग, सतर्क और स्वयंसिद्ध होने की भी यात्रा है। यात्रा का बिम्ब उषा प्रियम्वदा के हर उपन्यास में मौजूद है। चाहे वह कैंसर से उबरने की यात्रा हो या अपने से विलग हुई सन्तान के लौटने तक की। इस उपन्यास की कथा भी प्रमुख स्त्री पात्र की स्वयं चेतन, स्वयं सजग और स्वयं जीवन-निर्णय लेने तक की यात्रा है, और लेखिका के हर उपन्यास की तरह कहानी अन्तिम पृष्ठ पर समाप्त नहीं होती, बल्कि पाठक के मन में अपने अनुसार समाप्ति तक चलती रहती है। इस उपन्यास में प्रवास, इतिहास और साहित्य तीन धाराओं की तरह जुड़ा हुआ है, और लेखिका ने पठनीयता के साथ-साथ पाठक को गम्भीरता से अपना जीवन विश्लेषण करने की ओर प्रेरित किया है। ‘अल्पविराम’ एक प्रेम कथा है। बाकी वृत्तान्त एक चौखटा है, एक फ्रेम। परन्तु फ्रेम के बिना तस्वीर अधूरी है। इसी प्रकार प्रेम कहानी प्रवाल के बिना अपूर्ण है।
Book Details
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ISBN9789388933568
-
Pages311
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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‘‘तो नील, कल्पना करो कि कोई है, जिससे मैं प्यार करती हूँ, इकतरफा और मैं उससे पिछले सात वर्षों से प्यार करती हूँ। सदा से इकतरफा और मैंने उसे आज तक नहीं बताया है।’’ ‘‘तुम वाकई अद्भुत हो, है न?’’ ‘‘और तुम कितने लोगों को जानते हो, जो किसी को सात वर्षों से चाहते हों और वह भी एकतरफा?’’ ‘‘मेरे खयाल से यह एकतरफा प्यार है, इसीलिए सात वर्षों से चला आ रहा है। अगर यह दोनों तरफ से होता तो शायद इसकी भी नियति मेरी जैसी ही होती।’’ ‘‘जब तक ऐसा कुछ होता नहीं, कोई नहीं जानता।’’ ‘‘मगर तुमने उसे इसके बारे में बताया क्यों नहीं?’’ ‘‘मेरी माँ ने कहा था, अगर मैं किसी से प्यार करती हूँ तो उसे बताने से पहले मुझे अठारह वर्ष पूरे करने होंगे। उसने कहा, उस लड़के से मिलने से पहले मुझे बालिग होना चाहिए।’’ —इसी उपन्यास से प्रेम और अंतरंगता के ताने-बाने में बुना अत्यंत रोचक और पठनीय उपन्यास। एक बार पढ़ना शुरू करने के बाद पाठक इसे खत्म करके ही रुकेंगे।
Ashk se Ishq tak
- Author Name:
Aryan Suvada
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"मुझसे दिल्लगी की बातें न कर, मुझसे इश्क की साजिशें न कर, मैं हूँ काफिर इश्क की, मुझसे वफ़ा की उम्मीद न कर।"कहते हैं, मोहब्बत अपने बन्दे खुद चुनती है। उन्हें भी मोहब्बत ने ही चुना था। प्यार की सच्चाई से बेरुख, 'रिया' और प्रेम-गुरु 'अजय',जब मिले तब क्या हुआ? अश्क या इश्क!आधुनिक रहन-सहन, सिर्फ हमारे जीवन को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि कभी-कभी हमारे मन तक में ऐसा कुठाराघात कर जाता है, जिसके घाव समय के साथ नहीं भरते। ऐसे ही घावों से घिरी थी, रिया खुराना और प्यार को धर्म और ईमान की तरह पूजने वाले अजय चौहान की प्रेम कहानी। अजय की जुबान में समझें तो, "कहते हैं लोग, प्यार का पहला अक्षर अधूरा होता है। प्यार करके देखो। क्या पता! वह खुद अधूरा रहकर, तुम को पूरा कर दे।"क्या प्यार का पहला आधा अक्षर, रिया और अजय को पूरा करेगा या...? पढ़िए नए जमाने की ज़रा हटकर प्रेम कहानी... अश्क से इश्क तक
Jwala
- Author Name:
Nirpendra Sharma
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प्रेम की अग्नि में तप कर निखरने की कहानी है ज्वाला प्रतिशोध को भी मोहब्बत में बदल देने की कहानी है ज्वाला एक पल में दिल हार कर, जीवन भर साथ जीने की कहानी है ज्वाला प्रेम में साहस एवं वीरता की सारी सीमाओं के पार जाने की कहानी है ज्वाला। प्रेम, रहस्य, युद्ध, रोमांच, वीरता, शीतलता से भरपूर एक अद्भुत गाथा - ज्वाला!
Aakhiri Premgeet
- Author Name:
Abhishek Joshi
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कहते हैं, एक बार तानसेन ने अकबर को अपना दीप राग सुनाया था, जिससे भरे दरबार में सभी दीपक अपने आप जल उठे। रागों की इसी साधना का असर था कि मेघ भी बरस पड़ते थे। तानसेन के गुरु, 'हरीदास' उनसे भी पहुँचे गायक थे, जो कुछ भी चमत्कार कर सकने में समर्थ थे। आखिरी प्रेमगीत में भी चमत्कार है, एक गायक की राग साधना और अप्सरा के मोहिनी नृत्य के संगम का। आखिरी प्रेमगीत की कहानी हैं, सरगम के भरोसे की, सपनों की, विश्वास की और प्रेम से उसकी शक्ति की। सरगम, जिसे सुरीला होना चाहिए था, वह अप्सराओं को नृत्य में मात देने का हुनर रखती थी। आखिरी प्रेमगीत कहानी है नटराज की साधना की, निश्चय की, सच की लड़ाई की और अपने प्रेम गीतों की सरगम में अथाह प्रेम को भर, उन्हें जीवित करने की। नटराज, जिसे महादेव की तरह सबको नाचकर मोहित करना था, ऐसा गाता था कि स्वर्ग की सभा भी मंत्रमुग्ध हो जाए। आखिरी प्रेमगीत कहानी हर उस व्यक्ति की है, जिसने प्रेम को अपना संगीत, अपना नृत्य, अपनी जीवन की साधना माना हैं।
Sharad ka Chand
- Author Name:
Namrata Singh
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चाँद से प्रेम है तो वैराग्य भी है, चाँद की चाँदनी में इंतज़ार है तो मिलन की रात भी हैं, चाँद से ही पूर्णिमा की शीतल रोशनी है तो अमावस्या की स्याह अंधियारी भी हैं। इसी चाँद की शरद पूर्णिमा में लीलाधर केशव ने रासलीला को रचा भी है, और इसी शरद के चाँद के इंतज़ार में बैठी है सोनिया जिसनें सुनी है तो बस एक कहानी...फ्रांस की सोनिया अपने दोस्तों के साथ मस्त और बिंदास जिंदगी जी रही थी। लेकिन सब कुछ बदल गया जब एक दिन कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने के बाद, भगवान श्री कृष्ण की कथा ने उसके लिए जीवन का नजरिया ही बदल दिया। कौन हैं ये कृष्ण जिसने सोनिया को इतना बेचैन कर दिया था? और आसमान में चमकते उस शरद के चाँद से सोनिया का क्या रिश्ता है? इन्हीं सवालों के जवाब ढूँढती, सोनिया फ्रांस के आसमान से, भारत की पावन जमीन वाराणसी आ पहुँची। वाराणसी की उन गलियों में फिर एक दिन अचानक, नियति की एक वक्रदृष्टि ने पलभर में सब कुछ बदल दिया। अब आसमान में हर साल शरद का चाँद चमकता, पर सोनिया का चाँद न जाने कहाँ डूब गया था।
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