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Yuddh Mein Jeevan

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‘...क्योंकि जितना सह लेता है आदमी/उतना लिख नहीं पाता’ ‘युद्ध में जीवन’ सत्ताधारियों की उन महत्त्वाकांक्षाओं पर एक टिप्पणी है जिनसे युद्ध जन्म लेते हैं और मानवता के सदियों से सँजोए, फलते-फूलते स्वप्न पल-भर में ध्वस्त हो जाते हैं। अपने समय की जीवन-विरोधी मुद्राओं को बहुत गम्भीरता और जिम्मेदारी से समझने वाली कवि प्रतिभा चौहान के इस नए संग्रह का आरम्भ उन्हीं कविताओं से होता है जिनका विषय युद्ध है। युद्ध उन्हें व्यथित करता है, दुख से भर देता है, लेकिन वे हताश नहीं होतीं। उनका कवि-मन जानता है कि तथाकथित विजेताओं का ख़बरची जब बताता है कि सरहद के उस पार सब ख़त्म हो चुका है, तब भी कोई बच्चा जिसके दोनों हाथ युद्ध की भेंट चढ़ चुके हैं, पानी में गिरी एक चींटी को बचाने की कोशिश में लगा रहता है—युद्ध से अप्रभावित, परे व शुद्ध। ‘युद्ध में जीवन’ का एक अर्थ यह भी है। जीवन जिसमें प्रेम होता है, रोज़मर्रा के संघर्ष होते हैं, प्रकृति के अनेक-अनेक रंग होते हैं—कभी डरावने, कभी दिलफ़रेब, लेकिन फिर भी उस युद्ध से बेहतर जिसका हासिल सिर्फ़ शून्य होता है। संग्रह में कुछ कविताएँ जीवन के निजी और नम अहसासों की ओर भी इशारा करती हैं जिन्हें हम अपनी इच्छाओं, कामनाओं और उदासियों के बीच सँजोते जाते हैं। कुछ अनुभव, कुछ सबक, कुछ दुख जब कितने हवाओं के झोंके प्यासे ही लौट जाते हैं। एक अनकहे चश्मे की तलाश में और वह प्रेम जो मुझे लिखता रहा / और‍ मिटाता रहा / लिखने और मिटाने के क्रम में / उसने मुझे ग्रन्थ बना दिया। ऐसी ही काव्यात्मक अभिव्यक्तियों और याद रह जानेवाली कविताओं का संग्रह है ‘युद्ध में जीवन’!

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‘...क्योंकि जितना सह लेता है आदमी/उतना लिख नहीं पाता’
‘युद्ध में जीवन’ सत्ताधारियों की उन महत्त्वाकांक्षाओं पर एक टिप्पणी है जिनसे युद्ध जन्म लेते हैं और मानवता के सदियों से सँजोए, फलते-फूलते स्वप्न पल-भर में ध्वस्त हो जाते हैं। अपने समय की जीवन-विरोधी मुद्राओं को बहुत गम्भीरता और जिम्मेदारी से समझने वाली कवि प्रतिभा चौहान के इस नए संग्रह का आरम्भ उन्हीं कविताओं से होता है जिनका विषय युद्ध है।
युद्ध उन्हें व्यथित करता है, दुख से भर देता है, लेकिन वे हताश नहीं होतीं। उनका कवि-मन जानता है कि तथाकथित विजेताओं का ख़बरची जब बताता है कि सरहद के उस पार सब ख़त्म हो चुका है, तब भी कोई बच्चा जिसके दोनों हाथ युद्ध की भेंट चढ़ चुके हैं, पानी में गिरी एक चींटी को बचाने की कोशिश में लगा रहता है—युद्ध से अप्रभावित, परे व शुद्ध।
‘युद्ध में जीवन’ का एक अर्थ यह भी है। जीवन जिसमें प्रेम होता है, रोज़मर्रा के संघर्ष होते हैं, प्रकृति के अनेक-अनेक रंग होते हैं—कभी डरावने, कभी दिलफ़रेब, लेकिन फिर भी उस युद्ध से बेहतर जिसका हासिल सिर्फ़ शून्य होता है।
संग्रह में कुछ कविताएँ जीवन के निजी और नम अहसासों की ओर भी इशारा करती हैं जिन्हें हम अपनी इच्छाओं, कामनाओं और उदासियों के बीच सँजोते जाते हैं। कुछ अनुभव, कुछ सबक, कुछ दुख जब कितने हवाओं के झोंके प्यासे ही लौट जाते हैं। एक अनकहे चश्मे की तलाश में और वह प्रेम जो मुझे लिखता रहा / और‍ मिटाता रहा / लिखने और मिटाने के क्रम में / उसने मुझे ग्रन्थ बना दिया।
ऐसी ही काव्यात्मक अभिव्यक्तियों और याद रह जानेवाली कविताओं का संग्रह है ‘युद्ध में जीवन’!

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2023
Weight
356 grams
ISBN-13
9788119092888
Pages
152
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22 cm
Language
Hindi

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