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साँस–भर ज़िन्दगी, पेट–भर अन्न, लिप्सा–भर प्यार, लाज–भर वस्त्र, प्राण–भर सुरक्षा—अर्थात् तिनका–भर अभिलाषा की पूर्ति के लिए मनुष्य धरती के इस छोर से उस छोर तक बेतहाशा भागता और निरन्तर संघर्ष करता रहता है। जीवन और जीवन की इन्हीं आदिम आवश्यकताओं रोटी, सेक्स, सुरक्षा, प्रेम–प्रतिष्ठा–ऐश्वर्य, बल–बुद्धि–पराक्रम के इन्तज़ाम में जुटा रहता है। इसी इन्तज़ाम में कोई शेर और कोई भेड़िया हो जाता है, जो अपनी उपलब्धि के लिए दूसरों को खा जाता है, और कोई भेड़–बकरा, हिरण–ख़रगोश हो जाता है, जो शक्तिवानों के लिए उपकरण–भर होता है।</p> <p>राजकमल चौधरी की कविताएँ मशीन और मशीनीकरण, पश्चिमी देशों और पश्चिमी व्यवसायों, संस्कृतियों से प्रभावित–संचालित आधुनिक भारतीय समाज और सभ्यता के इसी जीवन–संग्राम की अन्दरूनी कथा कहती हैं।</p> <p>सन् 1950–1956 के बीच लिखी गई अप्रकाशित कविताओं का यह संकलन हमारे समाज की इन्हीं स्थितियों की जाँच–पड़ताल करता नज़र आता है। सुखानुभूति, जुगुप्सा और क्रोध इनकी तमाम रचनाओं से ये तीन परिणतियाँ पाठकों के सामने बार–बार आती हैं और ऐसा इस संकलन में भी है।</p> <p>राजकमल की कविताओं में घटना और विषय के मुक़ाबले ‘शब्द’ बहुत अर्थ रखता है। ये ‘शब्द’ ही इन कविताओं को कहीं कविता की लयात्मकता में जलतरंग की ध्वनियों के साथ सुखानुभूति से भर देते हैं, कहीं सभ्य इनसान की ग़लीज़ हरकतों के कारण जुगुप्सा उत्पन्न करते हैं और कहीं देवताओं की दानवी प्रवृत्ति पर ज्वालामुखी फटने–सा क्रोध।</p> <p>संकलन की हरेक कविता अपनी मौलिक ताज़गी और निजी गुणवत्ता के कारण भावकों, पाठकों से बहस करती है। भावकों के अन्दर सत्–असत् को लड़ाकर, सत् को विजय दिलाती है। राजकमल की कविता में यही विजय ‘शब्द’ की विजय है।
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साँस–भर ज़िन्दगी, पेट–भर अन्न, लिप्सा–भर प्यार, लाज–भर वस्त्र, प्राण–भर सुरक्षा—अर्थात् तिनका–भर अभिलाषा की पूर्ति के लिए मनुष्य धरती के इस छोर से उस छोर तक बेतहाशा भागता और निरन्तर संघर्ष करता रहता है। जीवन और जीवन की इन्हीं आदिम आवश्यकताओं रोटी, सेक्स, सुरक्षा, प्रेम–प्रतिष्ठा–ऐश्वर्य, बल–बुद्धि–पराक्रम के इन्तज़ाम में जुटा रहता है। इसी इन्तज़ाम में कोई शेर और कोई भेड़िया हो जाता है, जो अपनी उपलब्धि के लिए दूसरों को खा जाता है, और कोई भेड़–बकरा, हिरण–ख़रगोश हो जाता है, जो शक्तिवानों के लिए उपकरण–भर होता है।</p>
<p>राजकमल चौधरी की कविताएँ मशीन और मशीनीकरण, पश्चिमी देशों और पश्चिमी व्यवसायों, संस्कृतियों से प्रभावित–संचालित आधुनिक भारतीय समाज और सभ्यता के इसी जीवन–संग्राम की अन्दरूनी कथा कहती हैं।</p>
<p>सन् 1950–1956 के बीच लिखी गई अप्रकाशित कविताओं का यह संकलन हमारे समाज की इन्हीं स्थितियों की जाँच–पड़ताल करता नज़र आता है। सुखानुभूति, जुगुप्सा और क्रोध इनकी तमाम रचनाओं से ये तीन परिणतियाँ पाठकों के सामने बार–बार आती हैं और ऐसा इस संकलन में भी है।</p>
<p>राजकमल की कविताओं में घटना और विषय के मुक़ाबले ‘शब्द’ बहुत अर्थ रखता है। ये ‘शब्द’ ही इन कविताओं को कहीं कविता की लयात्मकता में जलतरंग की ध्वनियों के साथ सुखानुभूति से भर देते हैं, कहीं सभ्य इनसान की ग़लीज़ हरकतों के कारण जुगुप्सा उत्पन्न करते हैं और कहीं देवताओं की दानवी प्रवृत्ति पर ज्वालामुखी फटने–सा क्रोध।</p>
<p>संकलन की हरेक कविता अपनी मौलिक ताज़गी और निजी गुणवत्ता के कारण भावकों, पाठकों से बहस करती है। भावकों के अन्दर सत्–असत् को लड़ाकर, सत् को विजय दिलाती है। राजकमल की कविता में यही विजय ‘शब्द’ की विजय है।
Book Details
-
ISBN9788126703821
-
Pages204
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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ख़्वाजा रुक्नुद्दीन इश्क़ के उर्दू कलाम का संग्रह "इश्क़-नामा" पहली बार हिंदी पाठकों के समक्ष आ रहा है, जिस में रुक्नुद्दीन इश्क़ द्वारा लिखे गए प्रसिद्ध कलाम शामिल हैं। इसमें हम्द, नात और मंक़बत के अतिरिक्त ग़ज़लें और रुबाई, क़िताएँ शामिल हैं। किताब का संपादन रय्यान अबुलउलाई ने किया है।
Udaas Hain Hum
- Author Name:
Ameer Imam
- Book Type:

- Description:
This book is the third collection of poems by Ameer Imam. His poetry points towards new dimensions and perspectives of life. He is well-versed in the art of capturing unique themes in his verses and expressing fresh ideas. His apt use of similes and metaphors reflects the depth of his creative and individualistic mind. Ameer Imam hails from Sambhal, a city in Uttar Pradesh. He was born on 30th June 1984. He holds a Master’s degree in English and is presently engaged in the teaching profession. Ameer Imam is regarded as a representative poet of his generation. His poetry beautifully blends art and imagination. Two of his poetry collections, Naqsh-e-Pa Hawaon Ke and Subah Bakhair Zindagi, have been published and highly appreciated in literary circles. His first collection, Naqsh-e-Pa Hawaon Ke, was honored with the Sahitya Akademi Yuva Puraskar.
Zindagi Kiya Cheez Hai
- Author Name:
Nida Fazli
- Book Type:

- Description:
“Zindagi Kya Cheez Hai” is an important collection of selected and representative poetry by the renowned Urdu poet Nida Fazli, beautifully published by Rekhta Publications. The ghazals, nazms, dohas, and couplets included in this volume give voice to those emotions and experiences that ordinary people feel every day but often cannot express. Nida Fazli’s language carries the sweetness of folk songs, the simplicity of saint poets, and the pain of the modern human condition all at once. He brought Urdu poetry out of closed rooms and away from difficult symbolism, connecting it instead to streets, homes, relationships, and the everyday lives of common people.
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