Close To My Heart
Author:
Sushma MalhotraPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 280
₹
350
Unavailable
The book Close to my Heart is an odyssey of my life with love for nature, time spent with my family, personal relations, pains of waiting, separating, and joys of meeting. Most of the poems are vivid imagery, deeply passionate and come straight from the core of my heart. A reader can connect to any poem and experience the same feelings during their lifetime. The mood in the Close to my Heart reflects a variety of experiences of contentment, regret, delight, loneliness, separation and ecstasy in personal, professional, and emotional life. I did not follow any traditional regular poetic scheme; however the flow of the verse sounds rhythmic. Some poems are short and some are long, yet remain focused on a particular theme and topic. Usually it’s the rejection, abandonment and the solitude that turns you to Almighty. Nowhere it is mentioned in the book; however a reader can perceive my trust and subservience to the Omnipotent. Occasionally it takes many pages to express one’s thoughts but anthology Close to my Heart is a squeezed collection of my poems with myriad thoughts and scores of experiences. Any critique or analyst can spend years paraphrasing those thoughts into writing. For a reader’s convenience, anthology is divided into very succinct six sections: Realization, Nature, Prayers, Connection, Charismatic Kullu, and Close to my Heart.
ISBN: 9789390315574
Pages: 176
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Anant Bhatnagar
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- Description: पुरातन की स्मृति और अभाव अक्सर ही कविताओं के प्रेरक कारक होते हैं, या तो हम किसी बीते क्षण को कविता में सम्बोधित करते हैं या फिर किसी भविष्य की कामना हमें कविता में सोचने को प्रेरित करती है। लेकिन इस संग्रह की ज़्यादातर कविताएँ वर्तमान को सम्बोधित हैं और आधुनिक सभ्यता के कुछ नए उपादानों को समझने की कोशिश करती हैं; मसलन—‘मोबाइल फ़ोन’, ‘बाज़ार’, ‘सेज के नाम से जाने जानेवाले विशेष आर्थिक क्षेत्र’ और ‘वह लड़की जो मोटरसाइकिल चलाती है’। >इस नई दुनिया को कवि बिना किसी पूर्वग्रह के एकदम ताज़ा निगाह से देखता और समझता है और पाठक को भी अपनी यात्रा में शामिल करता चलता है—‘क्या/आप नहीं चौंके थे/उस दिन/जब आपने/पहली बार किसी/एक लड़की को/मोटरसाइकिल चलाते/हुए देखा था?’ यह दृश्य कवि को एक नए युग का आरम्भ लगता है, लेकिन इसके भविष्य को लेकर उसे कुछ शंका भी है—‘क्या शादी के बाद भी/चला पाएगी वह मोटरसाइकिल/...क्या/वह आगे बैठी होगी/और पति/होगा/पीछे सवार?’ संग्रह का दूसरा खंड ‘उम्र का चालीसवाँ’ बढ़ती आयु के अहसास की कविताओं का है जिसके विषय में ख़ुद कवि का कहना है कि ‘उम्र के इस संक्रमण काल में रचित ये कविताएँ नितान्त निजी जीवन से लेकर सामाजिक स्तर तक बदलते रिश्तों के प्रति प्रतिक्रिया हैं। इन कविताओं में कई विशुद्ध हास्यबोध की रचनाएँ भी हैं, जिन्हें संग्रह में सम्मिलित करने के पीछे मेरी सोच यह है कि हास्य को केवल मंचीय जुमलेबाज़ी के लिए छोड़ देना हास्यबोध के साथ अन्याय है।’ संक्षिप्त मुहावरे में रची ये कविताएँ हिन्दी कविता-प्रेमियों को निश्चय ही पसन्द आएँगी।
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