Phir Mujhe Neend Aa Gayi
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"फिर मुझे नींद आ गई" जदीद शाइ’री के नुमाइन्दा शाइ’र रईस फ़रोग़ की तीसरी किताब है जो रेख़्ता बुक्स के " रेख़्ता नुमाइन्दा कलाम" सीरीज़ के तहत शाया हुई है| इससे पहले उनका एक शाइरी-संग्रह "रात बहुत हवा चली" और बच्चों के लिए नज़्मों का संग्रह "सूरज चाँद सितारे" प्रकाशित हो चुकी है| 05 अगस्त 1982 को कराची में उनका निधन हुआ|
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"फिर मुझे नींद आ गई" जदीद शाइ’री के नुमाइन्दा शाइ’र रईस फ़रोग़ की तीसरी किताब है जो रेख़्ता बुक्स के " रेख़्ता नुमाइन्दा कलाम" सीरीज़ के तहत शाया हुई है| इससे पहले उनका एक शाइरी-संग्रह "रात बहुत हवा चली" और बच्चों के लिए नज़्मों का संग्रह "सूरज चाँद सितारे" प्रकाशित हो चुकी है| 05 अगस्त 1982 को कराची में उनका निधन हुआ|
Book Details
-
ISBN9788194876939
-
Pages124
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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सीखने की कोई उम्र नहीं होती। मगर यह सब सीखने में मार्कण्डेय के कवि-रूप को कितनी सफलता मिली या यह सब सीखने में कविता का क्या-क्या दाँव पर लगा—इसकी जाँच–परख इन कविताओं के पाठक अपने विवेक से करेंगे, ऐसी आशा है।
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Instead of limiting poetry to the mere expression of heartfelt emotions, Fahmi Badayuni has made it an object of mental exercise. This book is a collection of his poetry which also includes some of his fresh ghazals. Zamaan Sher Khan or Puttan Khan was born on 4 January 1952 in Bisauli town of Badaun district and is famously known as Fahmi Badayuni. Necessity brought him to the job of an accountant at a young age. When fate turned him away from the job, his interest in Maths and Science opened the doors of coaching classes. He was interested in Shayari and its criticism from a very young age. Around 1980, he started publishing his poetry in some magazines. Till then, two of his poetry collections, “Panchvi Samt” and “Dastaken Nigahon Ki” had been published.
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