Panchamrit
Author:
Ashwini Kumar DubeyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Unavailable
चामृत’ में मैंने संगीत मार्तण्ड रजब अली ख़ाँ, उस्ताद अमीर ख़ाँ, पण्डित कुमार गन्धर्व, श्री कृष्णराव मजुमदार एवं आचार्य गोकुलोत्सव महाराज के व्यक्तित्व और कृतित्व पर चर्चा की है। इन हस्तियों का क़द कितना बड़ा है, यह हमारी नई पीढ़ी को अच्छी तरह समझना चाहिए। दरअसल, शास्त्रीय संगीत एक अमूर्त कला है, जिसका आनन्द लेने के लिए आपको शास्त्रीय संगीत के व्याकरण को जानने की ज़रूरत नहीं है। धीरे-धीरे, सुनते-सुनते अपने आप समझ विकसित होने लगती है और आनन्द आने लगता है।
'पंचामृत’ पढ़कर आप एक बार ज़रूर इन पंच विभूतियों को सुनना और उनके बारे में पढ़ना चाहेंगे। शास्त्रीय संगीत की साधना बहुत कठिन है। यह अत्यन्त श्रम और समय साध्य है। बाबा कहा करते थे—शास्त्रीय संगीत सीखने के लिए एक उम्र बहुत कम है। जबकि स्वयं वे 108 वर्षों तक जिए। 'पंचामृत’ में सम्मिलित सभी विभूतियों ने अपने समय को भली-भाँति पहचाना और उसके एक-एक पल का उपयोग किया, तब जाकर वे इतने महान संगीतकार हो सके। सचमुच, उनको सुनना एक नए अनुभव से गुज़रना है।
—प्राक्कथन
ISBN: 9789388933971
Pages: 174
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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—जावेद अख्तर
कविता किसे कहते हैं? वह शब्द है या शब्दार्थ? भाव है या भाव का भाषिक विस्फोट या फिर अति संवेदनशील लोक-मानस की असाधारण भाव प्रतिक्रिया—इस सब पर बरसों से विचार होता चला आ रहा है और समाज और कला-संस्कृति की परम्परा में इस सबको अलग-अलग समयों में स्वीकार-प्रतिस्वीकार किया जाता है।
यह भी कि कविता को कोई एक सुनिश्चित आकार-प्रकार, सुनिर्धारित ढाँचा या फिर अभिव्यंजना पद्धति आज तक अपनी सीमा रेखा में नहीं बाँध सकी। करोड़ों-करोड़ जाने-माने चेहरों की अपूर्वता और मौलिकता की तरह कविता भी हमेशा अपूर्व और मौलिक को अपनी आधारभूत पहचान मानती आई है—ठीक निसर्ग-सृजन की तरह। तथापि वह एक अभिव्यंजना-कला भी है। कवि द्वारा प्रयुक्त जाने-पहचाने से शब्द जब सर्वथा एक नई मुद्रा में आकर हमसे रोचक या उत्तेजक संवाद करने लगते हैं, हम मान लिया करते हैं, यह तो कविता है। तब भाषा के इस प्रकार की बनावटों को कविता कहना कोई अनहोना कथन कैसे कहा जाए?
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Dr. Rama
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- Description: देशप्रेम, प्रकृति और पहाड़ख्यात लेखक-कवि श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ की कविताओं को पढ़कर रखा नहीं जा सकता है। उसके अंदर की सामाजिक, राष्ट्रीय, सांस्कृतिक चेतना बार-बार आवाज देकर अपनी तरफ बुलाती है। देश प्रेम कवि का मूल भाव है। अपने देश की भाषा, संस्कृति और सभ्यता कवि को विशेष प्रिय है। कवि पहाड़ों से जीवन का संघर्ष सीखता है तो पौराणिक और ऐतिहासिक परंपरा से जीवन को उत्सवधर्मी बनाता है। निशंक राजनीति में रहते हुए लगातार साहित्य सृजन कर रहे हैं और सबसे बड़ी बात है कि विविध विधाओं में लिख रहे हैं। कविताओं के साथ उपन्यास, कहानी, यात्रा-वृत्तांत आदि विधाओं में उनकी लेखनी यह बताती है कि साहित्य उनका पहला प्रेम है, जिससे वह समाज की नब्ज टटोलते हैं। लगभग डेढ़ दर्जन कविता और गीत संग्रहों का सृजन कर चुके निशंक भारतीय साहित्य के महत्त्वपूर्ण कवियों में शुमार हैं। राष्ट्र की गौरवशाली परंपरा उन्हें आह्लादित करती है। उनकी कविताएँ मजदूर वर्ग का व्याख्यान हैं। वह दलित और असहाय लोगों के लिए सहजता का भाव रखते हैं। उनकी कविताओं में आम जन जीवन की पीड़ा और दर्द को साफ-साफ महसूस किया जा सकता है। वह सामाजिक रिश्तों को बहुत बारीकी से प्रस्तुत करते हैं। प्रकृति और देश प्रेम की अजस्र धारा बहानेवाले लोकप्रिय कवि ‘निशंक’ की कविताओं के बिंब दरशाती एक पठनीय पुस्तक।
Mornaach
- Author Name:
Nida Fazli
- Book Type:

- Description: मोरनाच देवनागरी में आनेवाला निदा फ़ाज़ली का ऐसा संकलन है जिसमें उनकी अब तक की अधिकांश कविताएँ निरखी और परखी जा सकती हैं। इसमें पिछले पच्चीस बरसों की उनकी सोच-समझ और सरोकार का फैलाव है और अब तक आए तीनों मजमूओं में से ख़ुद लेखकीय चुनाव—इसीलिए एक अर्थ में यह निदा की प्रतिनिधि कविताओं का संग्रह भी कहा जा सकता है। इसमें ग़ज़लें भी हैं, नज़्में भी और कुछ गीत भी। शुरू का दौर भी है, बीच का भी और इधर का भी, लेकिन जो बात अव्वल से अब तक मुसलसिल बनी हुई है, वह है कवि का हर एक के लिए एक बेलौस लगाव—कुछ लोगों को यह सिनिसिज़्म की हदों को छूने वाला भी लग सकता है लेकिन शायद यह हर आधुनिक रचनाकार की मजबूरी है कि वह माँ, बाप, भाई, बहन, परिवार, स्त्री, प्रेम, समाज और देश—किसी को भी जस का तस स्वीकार नहीं करता। वह उन्हें सन्देह के कठघरे में धकेलकर सवाल करता है—ऐसे कि पहले वह सवाल पलटकर एक-एक कर ख़ुद उसका गिरेबान पकड़ ले और फिर अन्तत: समाज का होकर रह जाए। यही वह सच है जिसे अपने समय का हर सही रचनाकार अपने अनुभव की रोशनी में ही देखना और परखना चाहता है जैसाकि ख़ुद निदा फ़ाज़ली का ही एक दोहा है: वो सूफ़ी का कौल हो, या पंडित का ज्ञान जितनी बीते आप पर, उतना ही सच मान। —शानी
Pratinidhi Kavitayein : Gagan Gill
- Author Name:
Gagan Gill
- Book Type:

- Description: गगन गिल की कविताओं की एक यात्रा स्पष्ट दिखाई देती है—बाहर से भीतर की ओर की। ‘एक दिन लौटेगी लड़की’ शीर्षक उनका संग्रह अपने समय की एक घटना थी। हिन्दी के कविता-संसार ने उसे ख़ूब ही उत्साह से ग्रहण किया था। इस संग्रह की कविताओं ने भीतर से उदास लेकिन फिर भी संसार में अपनी जगह को लेकर पर्याप्त सजग एक लड़की की छवि को प्रकाशित किया। भीतर की वह उदासी, अकेलापन, अपने ‘होने’ और अपने एक ‘स्त्री होने’ का वह अहसास जैसे बड़ा होता गया; संसार का बाहरी शोर और दिल की थपक-थपक जैसे आमने-सामने खड़ी इकाइयाँ हो गईं। इस दौर में उन्होंने जो लिखा वह सृष्टि के पवित्रतम की खोज थी, जो मनुष्य के आत्म की कंदराओं में स्थित होता है। आकांक्षाओं से मुक्त, अपने होने की कील से बिंधा हुआ, सम्पूर्ण और व्यथित। इस चयन में उनकी पूरी चेतना-यात्रा को सुविचारित ढंग से सँजोया गया है—‘मैं जब तक आई बाहर’ संग्रह तक, जिसमें पीड़ा का संचार भीतर और बाहर दोनों तरफ़ होता है। देश और काल की पौरुषपूर्ण व्यवस्था के बीच स्त्री की सूक्ष्म असहमति और अपने दुःख को देखने का साक्षी भाव उनके संवेदनशील और सटीक शब्द-संयोजन में एक अविस्मरणीय अनुभव की तरह अंकित होता है।
Solitude's Embrace
- Author Name:
Anna Belmonte
- Rating:
- Book Type:

- Description: Solitude’s Embrace is born of independent musings, provocative suggestions and novel observations, all pieced together to offer readers a chance to explore their own world with a new perspective. Maybe even spark a script of their own. With everything being outward and flashy, it can be a pleasant change of pace to switch the lens. To look closer to home, turn inward; not with judgment but with curiosity and awe. With over 150 possible branches in these pages to explore, get started to find which ones take root and speak to your individuality – grow a tree of thoughts all your own.
Koltar ke Pair
- Author Name:
Pallavi Sharma
- Book Type:

- Description: कविता सिर्फ बिंबों में नहीं रहती और न ही उस अर्थ में जो अंत में बस एक बात बोलता नज़र आता है। असली कविता तो वही है जो शब्दों के सार्थक समूह की यात्रा में अपने शीतल जल, तरल रंग या गर्म कोलतार की तरह बहती है। यह बहना दरअसल, उन शब्दों के बीच उसका सदा के लिए इस तरह रहना है कि पढ़ती हुई आँखों का स्पर्श उसे जगा दे। पल्लवी शर्मा संग्रह की पहली ही कविता में इस अंतर्धारा की उपस्थिति और इसकी अमोघ प्रभविष्णुता को न्योतती चेतावनी की तरह परोसती हैं, और जब आप आगे बढ़ते हैं तो वह संसार पीछे छूट जाता है जहाँ सामयिक यथार्थ और उसके अखबारी बोल बसते हैं। 'कोलतार के पैर' की कविताएँ आपको क्लोज़ अप के अनोखे चित्रकार जार्जिया ओ कीफ के द्वारा चित्रित कंकाल से सरककर निकलती जीवित जीभ जैसी अनुभूति से आपके आधे-अधूरे मन को मिलवाती हैं। इस संग्रह की कविताओं में यथार्थ तो है मगर उसे खर्चीले विवरणों की जगह उस स्पर्श के रूप में चित्रित किया गया है जो संवेदना को लगभग वह सब बता देता है जो विवरण बताते। लेकिन ऐसा भी नहीं कि पल्लवी में दृश्य नहीं। यहाँ दृश्य भी हैं मगर चित्रों की तरह कभी रूपांतरित तो कभी संघनित और कभी अमूर्त। कवि की चेतना का हाल यह कि 'जैसे एक चित्र खींचा हो किसी ने/और मैं उसका हिस्सा हूँ!' इस संग्रह की कविताएँ आपको रंगों और रेखाओं की दुनिया में ले जाती हैं। तरह-तरह की बातें करते तरह-तरह के रंग! चटख से लेकर मोनोक्रोम और कोलतार और कालिख तक। यह अकारण नहीं कि संग्रह में बिंदियों से चित्र बनाने की अनोखी शैली के लिए प्रसिद्ध यायोई कुसामा की मानसिक रुग्णता को उसी की बिंदियों से चित्रित किया गया है। —विनय कुमार
Pakistani Urdu Shayari Vol. 2
- Author Name:
Narendra Nath
- Book Type:

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Description:
‘नाकामियों ने और भी सरकश बना दिया/इतने हुए ज़लील कि ख़ुद्दार हो गए।’ कर्रार नूरी का यह शे’र इस संकलन में शामिल उनकी ग़ज़ल से है। लेकिन हिन्दी पाठकों में अनेक ऐसे होंगे जिन्होंने उनका नाम नहीं सुना होगा।
पाकिस्तान के दरअसल कुछ ही शायर हैं जिनसे हिन्दी समाज परिचित है। इस शृंखला की योजना इसी को ध्यान में रखकर बनाई गई थी ताकि वे शायर जो किसी कारण भाषा और मुल्क की सीमा लाँघकर भारत के कविता-प्रेमियों तक नहीं पहुँच सके, यहाँ का पाठक उन्हें जान सके। सम्पादक नरेन्द्र नाथ के शब्दों में ‘पाकिस्तानी उर्दू शायरी’ शृंखला का उद्देश्य पाकिस्तान के ‘प्रसिद्ध कवियों के साथ-साथ उन शायरों को भी हिन्दी जगत के सामने लाना है जिनके लिए कविता केवल आत्मरति-भर नहीं, जो अपनी क़लम की नोक को सेंसरशिप की संगीनों से टकराते हुए शोषण के ख़िलाफ़ आवाज़’ उठाते रहे, इसलिए सजी-धजी स्टेजों तक नहीं पहुँच सके।
इस खंड में उन्नीस शायरों की नज़्में, ग़ज़लें और फुटकर अशआर शामिल हैं जिनमें से कुछ, जैसे अहमद नदीम कासमी, अहमद फ़राज़ और क़तील शिफ़ाई, से तो सामान्य पाठक भी वाक़िफ़ है, लेकिन ज़्यादातर उसके लिए नये होंगे।
पाकिस्तान की सरज़मीं पर उगी इन रचनाओं से गुज़रते हुए हम इन दोनों मुल्कों की सांस्कृतिक और भावनात्मक समानताओं से भी साक्षात्कार करते हैं जिसके निशान उनकी शब्दावली से लेकर उन सरोकारों और बिम्बों तक फैले हैं जिन्हें ये रचनाएँ हम तक पहुँचाती हैं। हिमायत अली शायर का यह शे’र देखें :
हर क़दम पर नित-नये साँचे में ढल जाते हैं लोग
देखते-ही-देखते कितने बदल जाते हैं लोग।
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