Khwab Se Rishta

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Author:

Shahryar

Language:

Hindi

Category:

Poetry

299

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शहरयार ने अपनी शायरी में जिस सादगी के साथ आज के इंसान की तकलीफ़ और दुःख-दर्द का बयान किया है वो अपने आप में एक मिसाल है। उन्होंने उर्दू शायरी के क्लासिकी रंग को बरक़रार रखते हुए जिस तरह आधुनिक वक़्त की समस्याओं का चित्रण अपनी शायरी में किया है वो क़ाबिल-ए-तारीफ़ है। प्रस्तुत किताब में नुमाइन्दा शायर शहरयार की कुल्लियात से उनकी चुनिन्दा ग़ज़लों, नज़्मों और फ़िल्मी नग़मों को शामिल किया गया है। यह किताब देवनागरी लिपि में आ रही है और इसका संकलन फ़रीदून शहरयार ने किया है। नई नस्ल के पाठकों को ये किताब काफ़ी पसंद आने वाली है। "शहरयार उर्दू के अग्रणी आधुनिक शायरों में शामिल हैं और बतौर गीतकार , 'फ़िल्म उमराव जान', के गीतों के लिए मशहूर हैं। शहरयार अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू (हिन्द) अलीगढ़ में लिटरेरी सहायक भी रहे और अंजुमन की पत्रिकाओं 'उर्दू दब' और 'हमारी ज़बान' के संपादक के तौर पर भी काम किया। उनकी किताब 'ख़्वाब के दर बंद हैं ' के लिए उन्हें साहित्य अकादमी अवार्ड से भी नवाज़ा गया। शहरयार साहब फ़िराक़ गोरखपुरी, कुर्रतुलऐन हैदर, और अली सरदार जाफ़री के बाद चौथे ऐसे उर्दू साहित्यकार हैं जिन्हे ज्ञानपीठ सम्मान भी मिला। उर्दू शायरी में अहम भूमिका निभाने के लिए उन्हें और भी कई ख़िताब दिए गए हैं जिनमें उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी पुरस्कार, फ़िराक़ सम्मान, और दिल्ली उर्दू पुरस्कार प्रमुख हैं। संग-ए-मील पब्लिकेशंस, पाकिस्तान से उनका कुल्लियात प्रकाशित हुआ जिसमें उनकी शायरी के छ: संग्रह शामिल हैं । यही कुल्लियात 'सूरज को निकलता देखूँ' के नाम से भारत से भी प्रकाशित हो चुका है। उनके कलाम का अनुवाद फ्रेंच, जर्मन, रूसी, मराठी, बंगाली और तेलगू में हो चुका है। "

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ISBN
9789394494213
Pages
174
Avg Reading Time
6 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

शहरयार ने अपनी शायरी में जिस सादगी के साथ आज के इंसान की तकलीफ़ और दुःख-दर्द का बयान किया है वो अपने आप में एक मिसाल है। उन्होंने उर्दू शायरी के क्लासिकी रंग को बरक़रार रखते हुए जिस तरह आधुनिक वक़्त की समस्याओं का चित्रण अपनी शायरी में किया है वो क़ाबिल-ए-तारीफ़ है। प्रस्तुत किताब में नुमाइन्दा शायर शहरयार की कुल्लियात से उनकी चुनिन्दा ग़ज़लों, नज़्मों और फ़िल्मी नग़मों को शामिल किया गया है। यह किताब देवनागरी लिपि में आ रही है और इसका संकलन फ़रीदून शहरयार ने किया है। नई नस्ल के पाठकों को ये किताब काफ़ी पसंद आने वाली है। "शहरयार उर्दू के अग्रणी आधुनिक शायरों में शामिल हैं और बतौर गीतकार , 'फ़िल्म उमराव जान', के गीतों के लिए मशहूर हैं। शहरयार अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू (हिन्द) अलीगढ़ में लिटरेरी सहायक भी रहे और अंजुमन की पत्रिकाओं 'उर्दू दब' और 'हमारी ज़बान' के संपादक के तौर पर भी काम किया। उनकी किताब 'ख़्वाब के दर बंद हैं ' के लिए उन्हें साहित्य अकादमी अवार्ड से भी नवाज़ा गया। शहरयार साहब फ़िराक़ गोरखपुरी, कुर्रतुलऐन हैदर, और अली सरदार जाफ़री के बाद चौथे ऐसे उर्दू साहित्यकार हैं जिन्हे ज्ञानपीठ सम्मान भी मिला। उर्दू शायरी में अहम भूमिका निभाने के लिए उन्हें और भी कई ख़िताब दिए गए हैं जिनमें उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी पुरस्कार, फ़िराक़ सम्मान, और दिल्ली उर्दू पुरस्कार प्रमुख हैं। संग-ए-मील पब्लिकेशंस, पाकिस्तान से उनका कुल्लियात प्रकाशित हुआ जिसमें उनकी शायरी के छ: संग्रह शामिल हैं । यही कुल्लियात 'सूरज को निकलता देखूँ' के नाम से भारत से भी प्रकाशित हो चुका है। उनके कलाम का अनुवाद फ्रेंच, जर्मन, रूसी, मराठी, बंगाली और तेलगू में हो चुका है। "

Book Details

  • ISBN
    9789394494213
  • Pages
    174
  • Avg Reading Time
    6 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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