Priyapravas
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‘प्रियप्रवास’ एक सशक्त विप्रलम्भ काव्य है जिसकी रचना प्रेम और शृंगार के विभिन्न पक्षों को लेकर की गई है। इस ग्रन्थ का विषय श्रीकृष्ण की मथुरा-यात्रा है, इसी कारण इसका नाम ‘प्रियप्रवास’ है। कथा-सूत्र से मथुरा-यात्रा के अतिरिक्त उनकी और ब्रज लीलाएँ भी यथास्थान इसमें लिखी गई हैं।...</p> <p>श्रीकृष्ण को इस ग्रन्थ में एक महापुरुष की भाँति अंकित किया है, ब्रह्म करके नहीं।...जो महापुरुष हैं, उनका अवतार होना निश्चित है। भगवान श्रीकृष्ण का जो चरित्र प्रस्तुत किया है, उस चरित्र का अनुसन्धान करके आप स्वयं विचार करें कि वे क्या थे।</p> <p>कवि ने अपनी इस कृति में कृष्ण-कथा के मार्मिक यक्ष क्रो किंचित् मौलिकता और एक नूतन दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है।</p> <p>—भूमिका से
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‘प्रियप्रवास’ एक सशक्त विप्रलम्भ काव्य है जिसकी रचना प्रेम और शृंगार के विभिन्न पक्षों को लेकर की गई है। इस ग्रन्थ का विषय श्रीकृष्ण की मथुरा-यात्रा है, इसी कारण इसका नाम ‘प्रियप्रवास’ है। कथा-सूत्र से मथुरा-यात्रा के अतिरिक्त उनकी और ब्रज लीलाएँ भी यथास्थान इसमें लिखी गई हैं।...</p>
<p>श्रीकृष्ण को इस ग्रन्थ में एक महापुरुष की भाँति अंकित किया है, ब्रह्म करके नहीं।...जो महापुरुष हैं, उनका अवतार होना निश्चित है। भगवान श्रीकृष्ण का जो चरित्र प्रस्तुत किया है, उस चरित्र का अनुसन्धान करके आप स्वयं विचार करें कि वे क्या थे।</p>
<p>कवि ने अपनी इस कृति में कृष्ण-कथा के मार्मिक यक्ष क्रो किंचित् मौलिकता और एक नूतन दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया है।</p>
<p>—भूमिका से
Book Details
-
ISBN9789386863744
-
Pages256
-
Avg Reading Time9 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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ग़ज़ल एक विधा के रूप में जितनी लोकप्रिय है, ग़ज़ल कहनेवाले के लिए उसे साधना उतना ही मुश्किल है। दो मिसरों का यह चमत्कार भाषा पर जैसी उस्तादाना पकड़ और कंटेंट की जैसी साफ़ समझ माँगता है, वह एक कठिन अभ्यास है। और अक्सर सिर्फ़ अभ्यास उसके लिए बहुत नाकाफ़ी साबित होता है। यह तक़रीबन एक ग़ैबी है जो या तो होती है या नहीं होती।
मोनिका सिंह की ये ग़ज़लें हमें शदीद ढंग से अहसास कराती हैं कि उन्हें ग़ैब का यह तोहफ़ा मिला है कि ज़ुबान भी उनके पास है और कहने के लिए बात भी। और बावजूद इसके कि ये उनका मुख्य काम नहीं है, उन्होंने ग़ज़ल पर ग़ज़ब महारत हासिल की है। अपने भीतर की उठापटक से लेकर दुनिया-जहान के तमाम मराहिल, ख़ुशियाँ और ग़म वे इतनी सफ़ाई से अपने अशआर में पिरोती हैं कि हैरान रह जाना पड़ता है। शब्दों की किसी बाज़ीगरी के बिना और बिना किसी पेचीदगी के वे अपना मिसरा तराशती हैं जिसमें लय भी होती है और मायने भी।
‘यह सबक मुझको सिखाया तल्ख़ी-ए-हालात ने, साफ़-सीधी बात कहनी चाहिए मुबहम नहीं।' मुबहम यानी जो स्पष्ट न हो। यही साफ़गोई इनकी ग़ज़ल की ख़ूबी है, और दूसरे यह कि ज़िन्दगी से दूर वे कभी नहीं जातीं। वे पूछती हैं—‘जिस मसअले का हल ज़माने पास है तेरे, क्यूँ बेसबब उसकी पहल तू चाहता मुझसे।’ दिल के मुआमलों में भी उनके ख़यालों की उड़ान अपनी ज़मीन को नहीं छोड़ती। दर्द का गहरा अहसास हो या कोई ख़ुशी उनकी ग़ज़ल के लिए सब इसी दुनिया की चीज़ें हैं। ‘ढल रहा सूरज, उसे इक बार मुड़ के देख लूँ, रात लाती कारवाँ ज़ुल्मत भरा वीरान सब/ख़ौफ़ आँधी का कहाँ था, गर मिलाती ख़ाक में, बारहा मिलते रहे मुझसे नए तूफ़ान सब।’
उम्मीद है हिन्दी पाठकों को ये ग़ज़लें अपनी-सी लगेंगी।
Aashad Ki Duphari
- Author Name:
Harsh Ranjan
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- Description: मेरे छठे काव्य संग्रह को मैं आपके हाथों में दे रहा हूँ। ये पुस्तक काफी इंतज़ार के बाद निकली है पर जब निकली है तो क्या निकली है। ये संग्रह एक प्रयोग के लिए जाना जाएगा जो इसमें शामिल वक्तव्य के रूप में हैं। ये वक्तव्य एक कौंध जैसे हैं और आपको इसमें मेरे विचार एक क्षण के लिए पर बिल्कुल स्पष्ट दिखेंगे। सूई से लेकर रॉकेट तक पर कविता लिखने की शिक्षा हमें मिली है और हर बार की तरह संसद से सड़क तक को मैंने लपेटने का प्रयास किया है। आप कविताओं का आनंद लें और मैं अगली पुस्तक की तैयारी में लगता हूँ।.
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