Charag Dar Charag
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उर्दू शाइ’री ही नहीं दुनिया की सभी ज़बानों के अदब में चराग़ से चराग़ जलाने की रिवायत पायी जाती है। जिस तरह लफ़्ज़ से लफ़्ज़ बनते हैं, मा’नी से मा’नी निकलते हैं बिल्कुल इसी तरह शे’र से शे’र बनते हैं। उर्दू शाइ’री में उस्ताद शायरों की ज़मीनो में ग़ज़लें कहने की रिवायत रही है। ये रिवायत फ़ारसी से सीधे दकनी ग़ज़ल में आई जो आज की उर्दू ग़ज़ल में भी प्रचलित है। इस किताब में उस्ताद शायरों की ज़मीनों में उनकी अगली नस्ल के शायरों की कही गईं ग़ज़लें संकलित की गई हैं। विकास गुप्ता उर्दू के नौजवान स्कॉलर हैं। उनकी ज़ेहानत, उर्दू शे’र-ओ-अदब पर उनकी दस्तरस और उनके हाफ़िज़े के बारे में कुछ कहना शायद मुबालग़ा समझा जाए। मज़हर इमाम (मरहूम) ने उनके बारे में लिखा है कि अदब का इतना गहरा इ’ल्म और शुऊ’र रखने वाले शाज़-ओ-नादिर ही मिलते हैं।
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उर्दू शाइ’री ही नहीं दुनिया की सभी ज़बानों के अदब में चराग़ से चराग़ जलाने की रिवायत पायी जाती है। जिस तरह लफ़्ज़ से लफ़्ज़ बनते हैं, मा’नी से मा’नी निकलते हैं बिल्कुल इसी तरह शे’र से शे’र बनते हैं। उर्दू शाइ’री में उस्ताद शायरों की ज़मीनो में ग़ज़लें कहने की रिवायत रही है। ये रिवायत फ़ारसी से सीधे दकनी ग़ज़ल में आई जो आज की उर्दू ग़ज़ल में भी प्रचलित है। इस किताब में उस्ताद शायरों की ज़मीनों में उनकी अगली नस्ल के शायरों की कही गईं ग़ज़लें संकलित की गई हैं। विकास गुप्ता उर्दू के नौजवान स्कॉलर हैं। उनकी ज़ेहानत, उर्दू शे’र-ओ-अदब पर उनकी दस्तरस और उनके हाफ़िज़े के बारे में कुछ कहना शायद मुबालग़ा समझा जाए। मज़हर इमाम (मरहूम) ने उनके बारे में लिखा है कि अदब का इतना गहरा इ’ल्म और शुऊ’र रखने वाले शाज़-ओ-नादिर ही मिलते हैं।
Book Details
-
ISBN9789394494206
-
Pages200
-
Avg Reading Time7 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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