Beautiful Poem (Series-3)
Author:
Dr.Sanjay RoutPublisher:
ISL PUBLICATIONSLanguage:
EnglishCategory:
Poetry0 Ratings
Price: ₹ 170
₹
200
Available
This book is not just a collection of poems, but it is also a platform for young artists to showcase their talent. The beauty and grace of these poems will touch the hearts of readers, who are sure to appreciate the sense of optimism and pride that these young writers have imbibed in their words.
ISBN: 8222665224
Pages: 79
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Rameshraaj
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- Description: विगत पचास वर्षों से साहित्य की सेवा में लीन सुकवि रमेशराज ने साहित्य की विभिन्न विधाओं में अनवरत लिखा है। व्यंग्य, लेख, निबंध, लघुकथा, कहानी, गीत, ग़ज़ल से लेकर हाइकु, जनक छंद, रसिया, लांगुरिया, कहमुकरी, चतुष्पदी, कवित्त, घनाक्षरी, दोहे, मुक्तछंद कविताएं, तेवरी, अर्थात् हिंदी साहित्य की लगभग सभी विधाओं पर शास्त्रसम्मत तरीके से अपनी क़लम का जादू बिखेरा है। मौलिक प्रयोगों के अंतर्गत लीक से हटकर दो मौलिक छंद -”नव कुंडलिया राज छंद” तथा “सर्प कुंडली राज छंद” भी छंदकाव्य में जोड़े हैं। बच्चों के लिए कविताएं लिखना निस्संदेह एक सरल कार्य नहीं। रमेशराज ने बच्चों के लिए भी खूब गीत कहानियां लिखी हैं। देश के बड़े-बड़े विद्वान साहित्यकारों को लेकर खूब परिचर्चाएं आयोजित की हैं, जिनमें उन्होंने अपने बाल्यकाल की रोचक घटनाओं पर प्रकाश डाला है। अब तक सात बालगीत संग्रह प्रकाशित होने के उपरांत आपका आठवां सद्यः प्रकाशित बालगीत संग्रह-“मम्मी यदि मैं बादल होता” बच्चों को विभिन्न प्रकार से शिक्षित ही नहीं करता, उन्हें गुणी और ज्ञानवान बनाने का एक उत्तम प्रयास भी करता है। एक बच्चा अपनी मम्मी से बादल बनकर सूखते खेतों पर बरसने की बात कहता है तो दूसरा बच्चा अपनी मम्मी के साथ गीता पढ़ने की बात करता है। पुस्तक के बालगीतों में ऐसे भी कई मोहक दृश्य हैं जिनमें बच्चे तुतलाते हुए मीठी-मीठी बातें करते हैं। नकली मूंछें लगाकर दादा जी बनते हैं। गुब्बारों में हवा भरकर उन्हें फोड़ते हैं और आनंदित होते हैं। जामुन आम और मीठे फल खाने के लिए चुपके से पेड़ों पर चढ़ते हैं। अपनी शरारतों पर मम्मी या दादी की डांट खाने से बचने के लिए तरह तरह के बहाने या किस्से गढ़ते हैं। इन गीतों में बच्चों का हमें नटखट स्वभाव ही देखने को नहीं मिलता, बल्कि कुछ बच्चे ऐसे भी हैं जो भविष्य में बड़े होकर देश के लिए सैनिक बनकर सीमाओं पर दुश्मन के दांत खट्टे करने की बात कहते हैं। वे वीर भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल बनना चाहते हैं। शिवाजी की तरह तलवार लेकर अरिदल का विनाश करने की सौगंधें खाते हैं। वे कहते हैं कि संसार को नई रोशनी से जगमग करेंगे। ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाएंगे। सद्भाव का अमृत सबको पिलाएंगे। कुल मिलाकर रमेशराज ने अपने इस बालगीत संग्रह “मम्मी यदि में बादल होता” में बच्चों के अल्हड़ बेफिक्र नटखट बालजीवन को सजीवता प्रदान की है तो दूसरी तरफ उन्हें ऐसा भावी नागरिक बनाने की कोशिश की है जो अपने पारिवारिक, सामाजिक और राष्ट्र के दायित्वों को समझे और उनका पालन करे। ~विनोद भारती 'व्यग्र'
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