Aakhri Paher Ki Dastak
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शमीम हनफ़ी की ग़ज़लें अँधेरे और परछाईं, रंगों के ढलने, भारी पलकें और दुखों की बात करती हैं, लेकिन कभी वैराग्य की बात नहीं करतीं। उनकी ग़ज़लें एक भावनात्मक दृश्य को उकेरती हैं जिसका एक हिस्सा कई बार वो ख़ुद भी होते हैं। शमीम हनफ़ी अपने शब्दों को गहरे गहरे रंगों में रंगते हैं। उनके विचारों को समझने के लिए गहराई में तैरने की जरूरत है। `आख़िरी पहर की दस्तक` उर्दू भाषा के प्रसिद्ध साहित्यालोचक `शमीम हनफ़ी` की आख़िरी कृति है। उनकी काव्य-रचना की दुनिया में परम्परा की लगातार अन्तर्ध्वनियाँ हैं और नयी रंगतें भी। कविता की सीमाओं का तीख़ा अहसास भी उनके यहाँ हैं।
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शमीम हनफ़ी की ग़ज़लें अँधेरे और परछाईं, रंगों के ढलने, भारी पलकें और दुखों की बात करती हैं, लेकिन कभी वैराग्य की बात नहीं करतीं। उनकी ग़ज़लें एक भावनात्मक दृश्य को उकेरती हैं जिसका एक हिस्सा कई बार वो ख़ुद भी होते हैं। शमीम हनफ़ी अपने शब्दों को गहरे गहरे रंगों में रंगते हैं। उनके विचारों को समझने के लिए गहराई में तैरने की जरूरत है। `आख़िरी पहर की दस्तक` उर्दू भाषा के प्रसिद्ध साहित्यालोचक `शमीम हनफ़ी` की आख़िरी कृति है। उनकी काव्य-रचना की दुनिया में परम्परा की लगातार अन्तर्ध्वनियाँ हैं और नयी रंगतें भी। कविता की सीमाओं का तीख़ा अहसास भी उनके यहाँ हैं।
Book Details
-
ISBN9788192664804
-
Pages174
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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