Manik Raitang ki Bansuri
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मानिक रायतंग की बाँसुरी’ डॉ. सुनीता की बच्चों और किशोर पाठकों के लिए लिखी गई बत्तीस अनूठी और भावनात्मक कहानियों का संग्रह है, जिनमें लोकजीवन की सुगंध है तो साथ ही दादी-नानी की कहानियों सरीखा अद्भुत रस और आकर्षण भी। डॉ. सुनीता बच्चों की जानी-मानी कथाकार हैं, जिनकी बाल कहानियाँ अपनी सादगी और सरलता के कारण सीधे बच्चों के दिलों में उतर जाती हैं। वे जिस भी कथानक को उठाती हैं, उसे मन के भावों में पिरोकर इतनी शिद्दत से लिखती हैं कि हमारा मन भी कहानी के पात्रों के साथ ही कभी हँसता तो कभी उदास हो जाता है और कभी मस्ती में भरकर खुशी और उल्लास के गीत भी गाता है। ‘मानिक रायतंग की बाँसुरी’ संग्रह की हर कहानी का अलग रंग, अलग अंदाज, अलग खुशबू है। बच्चे और किशोर पाठक ही नहीं, बड़े भी इन कहानियों से एक विशेष जुड़ाव महसूस करेंगे। वे इनमें बहुत कुछ ऐसा पाएँगे, जिनसे उनका जीवन महक उठेगा और उनमें औरों के लिए कुछ करने की प्रेरणा उत्पन्न होगी। अनुक्रम 1. एक था चला, एक थी थांगी — 9 2. उड़नेवाला घोड़ा — 15 3. मानिक रायतंग की बाँसुरी — 22 4. मेरा पहाड़ ऊँचा है — 25 5. लौ रीनडो और ली — 30 6. रींगा दादी की बेटियाँ — 34 7. फूल बन गई बेलमुठी — 37 8. बाघ भाई, जरा रुको — 43 9. मेरी तो दावत हो गई — 46 10. किट-किट गिलहरी — 49 11. चिनमा को लगा तीर — 54 12. बूढ़े हराकू ने सिया सबक — 59 13. मुझे पुकार लेना — 65 14. चार तारोंवाला बाजा — 70 15. निताई का बेटा — 79 16. जादुई तालाब — 82 17. कहानी टुइचौंग नदी की — 87 18. मोरांग की पुकार — 91 19. उसी चट्टान पर — 97 20. चार सहेलियाँ — 103 21. पक्षियों का दोस्त — 107 22. अमीर सहेली, गरीब सहेली — 111 23. लिजाबा ने बनाई दुनिया — 117 24. हरियल पक्षी — 121 25. किस्सा खोहरमहा का — 123 26. दरवाजा खोलो थाबेटन — 125 27. माँ का लाड़ला बेटा — 130 28. सैंडरैंबी बन गई रानी — 134 29. चम-चम सोने के गहने — 143 30. राजकुमार निंजुपानू का सपना — 147 31. मनमौजी छूरा और जादूगरनी — 155 32. और सामने था पहाड़ — 162
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मानिक रायतंग की बाँसुरी’ डॉ. सुनीता की बच्चों और किशोर पाठकों के लिए लिखी गई बत्तीस अनूठी और भावनात्मक कहानियों का संग्रह है, जिनमें लोकजीवन की सुगंध है तो साथ ही दादी-नानी की कहानियों सरीखा अद्भुत रस और आकर्षण भी। डॉ. सुनीता बच्चों की जानी-मानी कथाकार हैं, जिनकी बाल कहानियाँ अपनी सादगी और सरलता के कारण सीधे बच्चों के दिलों में उतर जाती हैं। वे जिस भी कथानक को उठाती हैं, उसे मन के भावों में पिरोकर इतनी शिद्दत से लिखती हैं कि हमारा मन भी कहानी के पात्रों के साथ ही कभी हँसता तो कभी उदास हो जाता है और कभी मस्ती में भरकर खुशी और उल्लास के गीत भी गाता है।
‘मानिक रायतंग की बाँसुरी’ संग्रह की हर कहानी का अलग रंग, अलग अंदाज, अलग खुशबू है। बच्चे और किशोर पाठक ही नहीं, बड़े भी इन कहानियों से एक विशेष जुड़ाव महसूस करेंगे। वे इनमें बहुत कुछ ऐसा पाएँगे, जिनसे उनका जीवन महक उठेगा और उनमें औरों के लिए कुछ करने की प्रेरणा उत्पन्न होगी।
अनुक्रम
1. एक था चला, एक थी थांगी — 9
2. उड़नेवाला घोड़ा — 15
3. मानिक रायतंग की बाँसुरी — 22
4. मेरा पहाड़ ऊँचा है — 25
5. लौ रीनडो और ली — 30
6. रींगा दादी की बेटियाँ — 34
7. फूल बन गई बेलमुठी — 37
8. बाघ भाई, जरा रुको — 43
9. मेरी तो दावत हो गई — 46
10. किट-किट गिलहरी — 49
11. चिनमा को लगा तीर — 54
12. बूढ़े हराकू ने सिया सबक — 59
13. मुझे पुकार लेना — 65
14. चार तारोंवाला बाजा — 70
15. निताई का बेटा — 79
16. जादुई तालाब — 82
17. कहानी टुइचौंग नदी की — 87
18. मोरांग की पुकार — 91
19. उसी चट्टान पर — 97
20. चार सहेलियाँ — 103
21. पक्षियों का दोस्त — 107
22. अमीर सहेली, गरीब सहेली — 111
23. लिजाबा ने बनाई दुनिया — 117
24. हरियल पक्षी — 121
25. किस्सा खोहरमहा का — 123
26. दरवाजा खोलो थाबेटन — 125
27. माँ का लाड़ला बेटा — 130
28. सैंडरैंबी बन गई रानी — 134
29. चम-चम सोने के गहने — 143
30. राजकुमार निंजुपानू का सपना — 147
31. मनमौजी छूरा और जादूगरनी — 155
32. और सामने था पहाड़ — 162
Book Details
-
ISBN9788193288863
-
Pages168
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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“अपनी कहानियों पर बात करना मेरे लिए कठिन काम है। बहुत हद तक अप्रिय भी। लिखी जा चुकी और प्रकाशित हो चुकी कहानियों से अक्सरहाँ मैं पीछा छुड़ाकर भाग निकलता हूँ, पर मुझे लगता है कि यह मेरा भ्रम ही है। मेरी कहानियों के कुछ पात्र लगातार मेरा पीछा करते हैं और अपनी छवि बदलकर, किसी लिखी जा रही नई कहानी में घुसने की बार-बार कोशिशें करते हैं। कई बार तो घुस भी आते हैं और मैं उन्हें न रोक पाने की अपनी विवशता पर हाथ मलते रह जाता हूँ। जैसे, ‘वधस्थल से छलाँग’ का रामप्रकाश तिवारी, जो ‘यह ग़म विरले बूझे’ या ‘काबर झील का पाखी’ जैसी कहानियों में घुस आया। मैंने अपनी कहानियों में प्रवेश के लिए किसी एक रास्ते का चुनाव नहीं किया। हर कहानी में प्रवेश के लिए मेरी राह बदल जाती है। कभी किसी पात्र की बाँह पकड़कर प्रवेश करता हूँ, तो कभी कोई घटना या व्यवहार या स्मृति या विचार कहानी के भीतर पैठने के लिए मेरी राहों की निर्मिति करते हैं। हमेशा एक अनिश्चय और अनिर्णय की स्थिति बनी रहती है। हर बार नई कहानी शुरू करने से पहले मेरा मन थरथर काँपता है। शायद यही कारण है कि बहुत कम कहानियाँ लिख सका हूँ। मेरे कुछ मित्रों का मानना है कि कहानी और नाटक लिखने के बीच आवाजाही के कारण मेरी कहानियों पर आलोचकों की नज़र नहीं पड़ी। पर यह सच है कि नाटक और कहानी के बीच मेरी यह आवाजाही मुझे बहुत प्रिय है। हर बार नौसिखुए की तरह अथ से आरम्भ करना मुझे पुनर्नवा करता है। मैं यह करते रहना चाहता हूँ।” —भूमिका से
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