Ekatma Manavvaad Ke Praneta Deendayal Upadhyaya
Author:
Amarjeet SinghPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Other0 Ratings
Price: ₹ 400
₹
500
Available
Awating description for this book
ISBN: 9789351867999
Pages: 304
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Kasturba Gandhi: A Complete Biography
- Author Name:
A.K. Gandhi
- Book Type:

- Description: Kasturba Gandhi (née Kapadia) was born on April 11, 1869, at Porbandar, Gujrat. She married Gandhiji at the tender age of thirteen. A popular adage says that there is a woman behind every successful man. This statement appears to be literally true when it comes to Kasturba who adopted all the edicts, rights or wrongs of Gandhiji and played a vital role in transforming Gandhi into Mahatma Gandhi. She walked shoulder to shoulder with him in jails and during the racial discrimination movement in South Africa. Her popularity was humongous, and Gandhiji once said, “Those people who came into close contact with me and Ba, many among them had more faith in Ba than in me.” Ba breathed her last on February 22, 1944, in a prison. This biography of Kasturba Gandhi enables us to get a clear glimpse into the soul of a girl, who played a pivotal role during the years of freedom struggle in India from the tender age of thirteen to her death.
Jammu Kashmir Ke Jannayak Maharaja Hari Singh
- Author Name:
Kuldeep Chand Agnihotri
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Yenangvikarh
- Author Name:
Smt. Meera Jaiswal
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sherlock Holmes ki Detective Stories
- Author Name:
Sir Arthur Conan Doyle
- Book Type:

- Description: This book does not have any description.
Science Encyclopaedia
- Author Name:
Dr. Sheo Gopal Mishra
- Book Type:

- Description: "आज का युग विज्ञान का युग है । विज्ञान की निरंतर खोजों से मानव प्रगति के सोपान- पर-सोपान चढ़ता चला जा रहा है । ब्रह्मांड के सब रहस्यों को वह विज्ञान के सहारे जान लेना चाहता है । इम संबंध में बड़े-बड़े अनुसंधान कार्य हो रहे हैं । विज्ञान आज विभिन्न रूपों में मानव की सेवा का रहा है । विज्ञान-प्रदत्त अनेकानेक वरदानों- जैसे बिजली, आवागमन के द्रुतगामी साधन, दुरभाष, दूरदर्शन, इंटरनेट, फैक्स, अणु-परमाणु ऊर्जा आदि-से मानव जीवन में कई गुना सुविधा, व्यवस्था और गति आ गई है; लेकिन मानव की ज्ञान-पिपासा अभी शांत नहीं हुई है । विज्ञान का क्षेत्र अत्यंत व्यापक है । जीवन का कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं, जो इससे प्रभावित न हो । प्रस्तुत कोश में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी को विशेष रूप से शामिल किया गया है । इस प्रकार आदिकाल से लेकर आज तक जो भी वैज्ञानिक एवं प्राविधिक प्रगति हुई है, उससे प्रत्येक व्यक्ति को परिचित होना चाहिए । इस विविध ज्ञान राशि को सुलभ कराने के उद्देश्य से ही प्रस्तुत ' सचित्र विज्ञान विश्वकोश ' की रचना की गई है । पाठकगण विषय को सुविधापूर्वक और आसानी से समझ सकें- इस हेतु आवश्यकतानुसार आकर्षक चित्र भी दिए गए हैं । विश्वास है, सुधी पाठक प्रस्तुत कोश का अवगाहन तथा समुचित ज्ञानवर्द्धन कर अपनी अनेकानेक जिज्ञासाओं का शमन कर सकेंगे । "
Satya Nadella : Microsoft Ka Badalta Chehra
- Author Name:
Jagmohan S. Bhanver
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Shaheed Bhagat Singh : Kranti Ka Sakshya
- Author Name:
Sudhir Vidyarthi
- Book Type:

- Description: विगत कुछ वर्षों से शहीदे–आज़म भगतसिंह के बुत को अपनी–अपनी तरह तराशने की कोशिशें इतिहास, राजनीति और संस्कृति की दुनिया में हमें दिखाई पड़ीं। बुद्धिजीवियों और प्रगतिशीलों के मध्य भगतसिंह विमर्श का मुद्दा बने रहे। उनके अदालती बयान, आलेख, पत्र, निबन्ध, जेल नोटबुक उन्हें एक सचेत बौद्धिक क्रान्तिकारी बनाते हैं। वहीं दूसरी ओर उनका बेहद सक्रिय क्रान्तिकारी जीवन जिसकी शुरुआत उन्होंने 1925–26 से की थी और जिसका अन्त 23 मार्च, 1931 को लाहौर जेल में उनकी फाँसी से हुआ। अर्थात् कुल मिलाकर लगभग छह–सात वर्षों की तूफ़ानी ज़िन्दगी जहाँ वे काकोरी केस के रामप्रसाद बिस्मिल को फाँसीघर से छुड़ाने की ख़तरनाक योजना में अपनी प्रारम्भिक जद्दोजेहद करते दिखाई देते हैं। तब ‘बलवन्त सिंह’ नाम से उनकी इब्तदाई गतिविधियाँ जैसे भविष्य के गम्भीर क्रान्तिधर्मी की रिहर्सलें थीं। काकोरी की फाँसियों (1927) के पश्चात् भगतसिंह विचार की दुनिया में अद्भुत छलाँग लगाते हैं—अपने पूर्ववर्ती क्रान्तिकारी आन्दोलन को बहुत पीछे छोड़ते हुए। भगतसिंह के समस्त दस्तावेज़ों, अदालती बयानों, पत्रों, रेखाचित्रों, निबन्धों, जेल नोटबुक और उनके मूल्यांकन सम्बन्धी अभिलेखीय साक्ष्यों के बीच उनके साथियों के लिखे संस्मरणों की यह प्रथम कृति भगतसिंह से प्यार करनेवाले लोगों के हाथों में सौंपते हुए मुझे निश्चय ही बड़ी प्रसन्नता है। इन दुर्लभ स्मृतियों को सामने रखकर वे भगतसिंह के जीवन और उस युग के क्रान्तिकारी घटनाक्रम की एक स्पष्ट छवि निर्मित करने के साथ ही अपने समय के सवालों से टकराने के लिए आगे की अपनी क्रान्तिकारी भूमिका की भी खोजबीन कर सकेंगे, ऐसी आशा है।
Meri Pyari Gudiya
- Author Name:
Maya Verma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Khel-Khel Mein Ganit
- Author Name:
Gupta +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
JPSC Jharkhand | Samanya Adhyayan Paper-1 | Samanya Vigyan Evam Prodyogiki "सामान्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी" Prarambhik Pariksha - 2024
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Leo Tolstoy
- Author Name:
Ramesh Ranjan
- Rating:
- Book Type:

- Description: "रूस के महान् लेखक लियो टाल्सटॉय 19वीं सदी के एक सम्मानित लेखक थे। युवावस्था में कुछ समय उन्होंने रूसी सेना में नौकरी की और इसी दौरान क्रीमियन युद्ध (1855) में भाग लिया। अगले वर्ष ही उन्होंने नौकरी छोड़ दी और लेखन आरंभ कर दिया, जिसकी नींव उनके बचपन में ही पड़ चुकी थी। उनके उपन्यास ‘वॉर ऐंड पीस’ (1865-69) तथा ‘एना कैरनीना’ (1875-77) विश्व साहित्य की महान् रचनाओं में शामिल हैं। आर्थिक दृष्टि से अति संपन्न और सम्मानित होने के बावजूद वे आंतरिक शांति के लिए तरसते रहे। आखिरकार सन् 1890 में घर-बार और धन-संपत्ति त्यागकर वे गरीबों की सेवा करने लगे और 20 नवंबर, 1910 को कंगाली की हालत में गुमनाम वृद्ध के रूप में मृत्यु को प्राप्त हुए। मानव मन को छूनेवाली सामाजिक समदर्शिता और पारस्परिकता का बोध करानेवाली अगणित पठनीय रचनाओं के महान् लेखक की प्रेरणादायी जीवनी।"
Warren Buffett
- Author Name:
Dinkar Kumar
- Book Type:

- Description: This book doesn’t have description
Jeewanpurhat Junction
- Author Name:
Ashok Bhowmick
- Book Type:

- Description: Memoirs
Zimmedari Ki Shakti
- Author Name:
Suresh Mohan Semwal
- Book Type:

- Description: "यदि हम सभी अपनी सोचने की दिशा तथा अपनी आदतों में परिवर्तन करें तो हमारी जिंदगी की दशा और दिशा, दोनों में परिवर्तन हो सकता है। किसी ने सच ही कहा है, ‘ईश्वर चुनता है कि हम किन परिस्थितियों से गुजरेंगे, परंतु हम चुनते हैं कि हम इन परिस्थितियों से कैसे गुजरेंगे।’ जिस तरह एक अँधेरे कमरे में अँधेरा भगाने के लिए प्रकाश लाना आवश्यक है, उसी प्रकार जिंदगी से उदासी, दु:ख, जलन, क्रोध, तनाव आदि को दूर करने के लिए हमें अपना मानसिक स्विच ऑन करना होगा, जिससे हम अपनी सोच एवं आदतों में परिवर्तन करके अपने जीवन को सुखमय बना सकें; और हम व हमारा परिवार ईश्वर की बनाई इस खूबसूरत सृष्टि का भरपूर आनंद ले सकें। अब सवाल यह है कि सोच में परिवर्तन कैसे लाया जाए? उसका एक तरीका, जो समझ में आता है, वह है—अपनी वर्तमान गतिविधियों, आदतों एवं सोच के प्रति जागरूकता पैदा करना; और इसी जागरूकता को पैदा करने की पहल इस पुस्तक में की गई है। इसे पढ़ें और आनंद के साथ वह सब हासिल करें, जो आप करना चाहते हैं। "
Budha Aadmi Aur Samudra (Hindi Translation of The Old Man And The Sea)
- Author Name:
Ernest Hemingway
- Book Type:

- Description: बूढ़ा आदमी और समुद्र' उपन्यास एक बूढ़े गरीब मछुआरे के जीवन-संघर्ष की कहानी है। मछली पकडऩे जाना, मछली पकडऩे की कोशिश करना, उस कोशिश में कामयाब होना, फिर इस सफलता को अंजाम तक लाने की जद्दोजहद का नाम है 'बूढ़ा आदमी और समुद्र'। एक मछुआरे के जीवन-संघर्ष की यह दास्तान काल, समय और सीमा के बंधन से परे है। यह मछुआरा दुनिया के हर कोने में मौजूद है— अपने परिवेश से जूझता हुआ बिना किसी आक्रोश के, बिना किसी तिरस्कार भाव के। शायद यह मछुआरा एक विकसित आत्मा भी है। उसके सारे मनोभाव तात्कालिक हैं। वह समुद्र से, चिडिय़ों से और मछलियों से संवाद करता है। विषम परिस्थितियाँ उसे विचलित नहीं करतीं। उसकी जिजीविषा मरजीवड़े से कम नहीं। प्रकृति और मनुष्य के अंतर्संबंधों को बयान करता हुआ अर्नेस्ट हेमिंग्वे का यह उपन्यास निश्चित ही एक कालजयी रचना है तो फिर हम हिंदी के पाठक इससे क्यों वंचित रहते। अस्तु!
Sampoorna Kahaniyan : Amarkant : Vols. 1-2
- Author Name:
Amarkant
- Book Type:

-
Description:
अमरकान्त हिन्दी के ऐसे कथाकार हैं जिन्होंने किसी वाद या विचारधारा को अपनी रचनात्मकता का आधार नहीं बनाया, बल्कि अपने प्रत्यक्ष अनुभवों और संवेदनापूर्वक देखी गई जीवन-स्थितियों को लेकर जन-पक्षधर और प्रगतिशील कहानियाँ लिखीं। मध्यवर्गीय जीवन, उसके विरोधाभासों और समाज के दैनंदिन व्यवहार में निहित अमानवीयता को खासतौर पर रेखांकित करते हुए उन्होंने एक विराट कथा-संसार का सृजन किया। उनकी कुछ कहानियों के सन्दर्भ में यशपाल ने उनकी तुलना गोर्की से की थी।
वे अपने पात्रों को एक निस्पृह भाव से देखते हैं, और अपनी तरफ से कोई विचार या दृष्टि आरोपित किए बिना, महज मानवीयता के परिप्रेक्ष्य में उन्हें यथावत चित्रित करते हैं, यही विशेषता उनकी कहानियों और उनके रचे पात्रों को असाधारण बना देती है। उनके कथा-संसार में हम आज़ादी बाद के लंबे समय की एक सांस्कृतिक-सामाजिक पड़ताल से रू-ब-रू होते हैं।
यह उनकी कहानियों की समग्र प्रस्तुति है। ‘हत्यारे’ और ‘दोपहर का भोजन’ जैसी कालजयी कहानियों के रचनाकार को यहाँ आप उसकी सम्पूर्ण विशेषताओं के साथ जान पाएँगे।
SBI Junior Associates Customer Support And Sales 2023 Preliminary Exams "प्रारम्भिक परीक्षा" 15 Practice Sets Book in Hindi
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
To Sir, With Love
- Author Name:
E.R. Braithwaite
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bachchan Rachanawali : Vols. 1-11
- Author Name:
Harivansh Ray Bachchan
- Book Type:

- Description: बच्चन रचनावली (11 खंड) खंड 1 हिन्दी कविता का एक दौर वह भी था जब हिन्दीभाषी समाज को जीवन के गंभीर पक्ष में पर्याप्त आस्था थी, और कविता भी अपने पाठक-श्रोता की समझ पर भरोसा करते हुए, संवाद को अपना ध्येय मानकर आगे बढ़ रही थी। मनोरंजक कविता और गंभीर कविता का कोई विभाजन नहीं था; न मनोरंजन के नाम पर शब्दकारों-कलाकारों आदि के बीच जनसाधारण की कुरुचि और अशिक्षा का दोहन करने की वह होड़ थी जिसके आज न जाने कितने रूप हमारे सामने हैं, और न कविता में इस सबसे बचने की कोशिश में जन-संवाद से बचने की प्रवृत्ति। हरिवंश राय बच्चन उसी काव्य-युग के सितारा कवि रहे हैं। उन्होंने न सिर्फ मंच से अपने पाठकों-श्रोताओं से संवाद किया बल्कि लोकप्रियता के कीर्तिमान गढ़े। कविता की शर्तों और कवि-रूप में अपने युग-धर्म का निर्वाह भी किया और जन से भी जुड़े रहे। यह रचनावली उनके अवदान की यथासम्भव समग्र प्रस्तुति है। रचनावली के इस नए संस्करण में 1983 में प्रकाशित नौ खंड बढ़कर अब ग्यारह हो गए हैं। रचनावली के प्रकाशन के बाद एक स्वतंत्र पुस्तक के रूप में आया बच्चन जी की आत्मकथा का चौथा भाग खंड दस में और पत्रों समेत कुछ अन्य सामग्री खंड ग्यारह में ली गई है। खंड 2बच्चन रचनावली के दूसरे खंड में निम्नलिखित रचनाएँ क्रमानुसार संगृहीत हैं : 'मिलन यामिनी’ (1950), 'प्रणय पत्रिका’ (1955), 'धार के इधर-उधर’ (1957), 'आरती और अंगारे’ (1958), 'बुद्ध और नाचघर’ (1958), 'त्रिभंगिमा’ (1961), 'चार खेमे चौंसठ खूँटे’ (1962)।खंड 3बच्चन रचनावली के इस तीसरे खंड में बच्चनजी की निम्नलिखित रचनाएँ क्रमानुसार संगृहीत हैं : 'दो चट्टानें’ (1965), 'बहुत दिन बीते’ (1967), 'कटती प्रतिमाओं की आवाज’ (1968), 'उभरते प्रतिमानों के रूप’ (1969), 'जाल समेटा’ (1973), 'प्रारम्भिक रचनाएँ भाग 1-2’ (रचनाकाल : 1928-33; प्रकाशन काल : 1943), अतीत की प्रतिध्वनियाँ और मरघट के कुछ पद (रचनाकाल : 1932-33), 'कुछ नवीनतम कविताएँ’ (रचनाकाल : 1973-83)।खंड 4बच्चन रचनावली के इस चौथे खंड में बच्चनजी के द्वारा अनूदित निम्नलिखित काव्य-कृतियाँ क्रमानुसार संगृहीत हैं : 'खैयाम की मधुशाला’ (1935), 'जनगीता’ (1958), 'चौंसठ रूसी कविताएँ’ (1964), 'मरकत द्वीप का स्वर’ (1965), 'नागर गीता’ (1966), 'भाषा अपनी भाव पराये’ (1970), कुछ स्फुट-असंकलित अनुवाद।खंड 5बच्चन रचनावली के इस पाँचवें खंड में बच्चनजी के द्वारा अनूदित शेक्सपियर के चार नाटक निम्न क्रम से संगृहीत हैं : 'मैकबेथ’ (1957), 'ओथेलो’, (1959), 'हैमलेट’ (1969), 'किंगलियर’ (1972)।खंड 6बच्चन रचनावली के इस छठे खंड में बच्चनजी की कुछ गद्य-कृतियों और उनके कुछ स्फुट लेखन को इस क्रम में प्रस्तुत किया गया है : 'कवियों में सौम्य सन्त’ (1960), 'नये-पुराने झरोखे’, (1962), 'टूटी-छूटी कड़ियाँ’ (1973), 'सोपान’ आदि संकलनों—संचयनों की भूमिकाएँ और कुछ असंकलित लेख।खंड 7बच्चन रचनावली के इस सातवें खंड में बच्चनजी की आत्मकथा के प्रथम दो भाग प्रस्तुत किए जा रहे हैं : 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ’ (1969), 'नीड़ का निर्माण फिर’ (1970)।खंड 8बच्चन रचनावली के इस आठवें खंड में आत्मकथा का तीसरा भाग 'बसेरे से दूर’ (1977) और उनकी डायरी 'प्रवास की डायरी’ (1971) प्रस्तुत की जा रही है।खंड 9बच्चन रचनावली के इस नवें खंड में बच्चनजी का विविध लेखन निम्न क्रम में संगृहीत है : वार्ताएँ, साक्षात्कार, पुस्तक-समीक्षाएँ, कहानियाँ, बच्चों के लिए लिखी कविताएँ और पत्र।खंड 10बच्चन रचनावली के इस दसवें खंड में बच्चनजी की आत्मकथा का वह अन्तिम चौथा भाग संकलित किया गया है जो अभी तक 'दशद्वार’ से 'सोपान तक’ शीर्षक से स्वतंत्र रूप में उपलब्ध था। आत्मकथा के पहले तीन भाग 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ’, 'नीड़ का निर्माण फिर’ और 'बसेरे से दूर’ रचनावली के सातवें-आठवें खंडों में पहले से ही संकलित हैं।खंड 11बच्चन रचनावली का यह संस्करण इस खंड के साथ पूर्ण होता है। इस खंड में उनकी कुछ असंकलित कविताओं, एक साक्षात्कार, एक भाषण और एक भूमिका के अतिरिक्त मुख्यत: उनके पत्र हैं। बच्चनजी ने अपने जीवन में इतने अधिक पत्र लिखे थे, जो यदि एकत्र हो सकते तो बीस-पच्चीस मोटे खंडों में समाते। उन्होंने स्वयं कम-से-कम 50 हज़ार पत्र लिखने की बात स्वीकार की है।
21 ANMOL KAHANIYAN
- Author Name:
Premchand
- Rating:
- Book Type:

- Description: हिदी के कालजयी रचनाकार मुंशी प्रेमचंद की कहानियाँ जनसाधारण की समस्याओं, आकांक्षाओं, उलझनों, पारिवारिक विघटन, दहेज-प्रथा, बाल विवाह, राष्ट्रद्रोह, घूसखोरी, अंधविश्वास, ग्रामीण शोषण, आर्थिक वैषम्य इत्यादि विषयों को समेटे हुए अपने पाठकों से एक आत्मीय एवं भावनात्मक नाता जोड़ती हैं। उनकी कहानियों में समस्याओं की जितनी चर्चा है, समाधान की उससे ज्यादा। उनके पात्र अर्थगत दबावों से बेशक पीडि़त हैं, पर वे बाहरी संघर्षों द्वारा समस्याओं पर विजय प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने अपनी कथाओं में नग्न यथार्थ नहीं, वरन् यथार्थ का भरसक चित्रण किया है, क्योंकि नग्न यथार्थ वितृष्णा उपजाता है। पात्र कभी सुख की अनुभूति करते हैं तो कभी दुःख की। इसी को रचनाओं के साथ साहित्यिक न्याय कहा जाता है, जिस पर मुंशी प्रेमचंद खरे उतरे हैं। ‘21 अनमोल कहानियाँ’ उनके ऐसे ही नगीने हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं और समाज की विद्रूपताओं पर गहरी चोट करते हैं।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book