Bolti Anubhootiyan
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Author:
Mahesh BhagchandkaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
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बोलती अनुभूतियाँ की कविताओं के संदर्भ में साध्य का प्रश्न है, तो यहाँ यह साध्य कभी स्वयं कवि ही प्रतीत होता है, जो अपनी कविता के माध्यम से स्वयं तक पहुँचना चाहता है; इस स्थिति में ये कविताएँ आत्मसाक्षात्कार, आत्मचिंतन और आत्माभिव्यक्ति का ही दूसरा रूप लगती हैं। इस संग्रह की कुछ कविताओं में कवि का साध्य समाज और समाज का हित-चिंतन भी दिखाई देता है, यहाँ ये कविताएँ समाज-सुधारिका का बाना पहनकर लोगों के हृदय तक जाती हैं और उनके हृदय को निर्मल बनाती चलती हैं और कहीं-कहीं इस संग्रह की कविताएँ ऐसी भी हैं, जहाँ कवि का साध्य उसका वह आराध्य है, जिसे परमात्मा कहते हैं। कविता में इतनी सादगी, इतना औदात्य, इतनी स्पष्टता, इतनी स्वच्छता, इतना आकर्षण सामान्यतः नहीं मिलता, किंतु इस संग्रह की हर कविता ने हृदय को छुआ है और केवल छुआ ही नहीं, आलोकित भी किया है। यह काम शायद तब ही हो पाता है, जब साधक बनावट से दूर किसी ऐसे वट के नीचे बैठकर तपस्या करे, जिसे आत्मचिंतन का वटवृक्ष कहते हैं, जिसे निश्छल प्रेम के वंशी-वट की संज्ञा दी जाती है, जो समाज-हित की वाट में आनेवाले किसी भी वटमार के फंदे में नहीं फँसा है और जिसे अध्यात्म की संजीवनी वटी मिल गई है। प्रभु इस संग्रह के कवि के इस रूप को ऐसा ही बना रहने दें, यही प्रार्थना है। इस संग्रह में कविताओं के साथ जो रेखांकन हैं, वे भी इतने बोलते हुए हैं, जितनी कि इस संग्रह में कवि की बोलती हुई अनुभूतियों वाली कविताएँ बोल रही हैं।—डॉ. कुँअर बेचैन अनुक्रम भव्यता और दिव्यता का समन्वय है ‘बोलती अनुभूतियाँ’—9 स्वकथ्य—13 काव्य-वीथिका—19-125 1. सूनापन—21 2. इनसान—25 3. ‘यह बता’ : एक प्रश्न—27 4. मैं गिनना चाहता हूँ—29 5. मौत—31 6. खेल साँसों का—35 7. एक चाह—37 8. चलता पहिया—41 9. बीमार—43 10. ग़लती—47 11. नहीं—49 12. परछाईं-सी—51 13. लाचार—53 14. उत्तरार्द्ध—55 15. क़ुदरत—59 16. मैं और मेरा जीवन—61 17. ज़िंदगी के रंग—63 18. अलग-अलग पलों में—67 19. यादें—69 20. जीने का अंदाज़—71 21. आशियाना—73 22. आखिर क्यों—75 23. कशमकश—77 24. एक छोटी-सी हक़ीक़त—79 25. तुम्हारा ज़िक्र—81 26. लिखना—83 27. ग़म—87 28. ग़म कैसा—89 29. चाँदनी की सीढ़ियों मे—91 30. घटना—93 31. ख़याल—95 32. दोस्ती—97 33. समाज—99 34. कलयुग—101 35. गुड़िया—103 36. दादाजी—105 37. अपने—107 38. दूर जाओगे, ये ख़याल न था—111 39. कौन—113 40. दोस्ती के नाम पर?—115 41. जीवन-खेल—119 42. धरती—123
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बोलती अनुभूतियाँ की कविताओं के संदर्भ में साध्य का प्रश्न है, तो यहाँ यह साध्य कभी स्वयं कवि ही प्रतीत होता है, जो अपनी कविता के माध्यम से स्वयं तक पहुँचना चाहता है; इस स्थिति में ये कविताएँ आत्मसाक्षात्कार, आत्मचिंतन और आत्माभिव्यक्ति का ही दूसरा रूप लगती हैं। इस संग्रह की कुछ कविताओं में कवि का साध्य समाज और समाज का हित-चिंतन भी दिखाई देता है, यहाँ ये कविताएँ समाज-सुधारिका का बाना पहनकर लोगों के हृदय तक जाती हैं और उनके हृदय को निर्मल बनाती चलती हैं और कहीं-कहीं इस संग्रह की कविताएँ ऐसी भी हैं, जहाँ कवि का साध्य उसका वह आराध्य है, जिसे परमात्मा कहते हैं।
कविता में इतनी सादगी, इतना औदात्य, इतनी स्पष्टता, इतनी स्वच्छता, इतना आकर्षण सामान्यतः नहीं मिलता, किंतु इस संग्रह की हर कविता ने हृदय को छुआ है और केवल छुआ ही नहीं, आलोकित भी किया है। यह काम शायद तब ही हो पाता है, जब साधक बनावट से दूर किसी ऐसे वट के नीचे बैठकर तपस्या करे, जिसे आत्मचिंतन का वटवृक्ष कहते हैं, जिसे निश्छल प्रेम के वंशी-वट की संज्ञा दी जाती है, जो समाज-हित की वाट में आनेवाले किसी भी वटमार के फंदे में नहीं फँसा है और जिसे अध्यात्म की संजीवनी वटी मिल गई है। प्रभु इस संग्रह के कवि के इस रूप को ऐसा ही बना रहने दें, यही प्रार्थना है। इस संग्रह में कविताओं के साथ जो रेखांकन हैं, वे भी इतने बोलते हुए हैं, जितनी कि इस संग्रह में कवि की बोलती हुई अनुभूतियों वाली कविताएँ बोल रही हैं।—डॉ. कुँअर बेचैन
अनुक्रम
भव्यता और दिव्यता का समन्वय है ‘बोलती अनुभूतियाँ’—9
स्वकथ्य—13
काव्य-वीथिका—19-125
1. सूनापन—21
2. इनसान—25
3. ‘यह बता’ : एक प्रश्न—27
4. मैं गिनना चाहता हूँ—29
5. मौत—31
6. खेल साँसों का—35
7. एक चाह—37
8. चलता पहिया—41
9. बीमार—43
10. ग़लती—47
11. नहीं—49
12. परछाईं-सी—51
13. लाचार—53
14. उत्तरार्द्ध—55
15. क़ुदरत—59
16. मैं और मेरा जीवन—61
17. ज़िंदगी के रंग—63
18. अलग-अलग पलों में—67
19. यादें—69
20. जीने का अंदाज़—71
21. आशियाना—73
22. आखिर क्यों—75
23. कशमकश—77
24. एक छोटी-सी हक़ीक़त—79
25. तुम्हारा ज़िक्र—81
26. लिखना—83
27. ग़म—87
28. ग़म कैसा—89
29. चाँदनी की सीढ़ियों मे—91
30. घटना—93
31. ख़याल—95
32. दोस्ती—97
33. समाज—99
34. कलयुग—101
35. गुड़िया—103
36. दादाजी—105
37. अपने—107
38. दूर जाओगे, ये ख़याल न था—111
39. कौन—113
40. दोस्ती के नाम पर?—115
41. जीवन-खेल—119
42. धरती—123
Book Details
-
ISBN9789352665501
-
Pages136
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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भारतीय जीवन में परिवार का वही है, जो किसी भी धर्म या सम्प्रदाय में पूजागृह का होता है। परिवार नामक संस्था ही भारतीय जीवन और समाज-व्यवस्था का मूल है। पिछले सौ सालों में चौतरफ़ा बदलाव के बीच भारतीय समाज में परिवार की संरचना, उसमें अन्तर्निहित तरलता और सम्बन्धों की तीव्रता में क्या और कैसे बदलाव आए हैं, इस संकलन की कहानियों में साफ़-साफ़ दीखता है। संयुक्त परिवार से एकल परिवार और फिर लिव-इन रिलेशनशिप का चलन, इनके भाव-दुष्प्रभाव सबकी पड़ताल इस संकलन की कहानियों में है और अन्त में एक छुपा सन्देश भी कि यहाँ रिश्ते जीवन से बड़े और ज़्यादा मूल्यवान हैं।
X Y Ka Z
- Author Name:
Prabhat Ranjan
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कुछ अलग तरह का गद्य पढ़ने की खोज में लगे पाठकों की तलाश जिन लेखकों पर जाकर समाप्त होती है, उनमें एक नाम प्रभात रंजन है। कहानी और संस्मरण के बीच आवाजाही करता यह लेखक अपने पाठक को अपनी शैली के प्रवाह और भाषा की रवानगी के साथ बहाए ले जाता हैं। "जानकी पुल" यह नाम जैसे प्रभात रंजन का ही अब दुसरा नाम हो चुका है -पंकज सुबीर
Gangadeen
- Author Name:
Gen. Yashwant Mande
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इस पुस्तक से पहले लेखक की कहानियों के दो संग्रह छप चुके हैं। हमें खुशी है कि पाठकों को उनकी कहानियाँ पसंद आईं। ‘श्रेष्ठ सैनिक कहानियाँ’ हिंदी साहित्य में एकमात्र ऐसी पुस्तक है, जिसमें सारी कहानियाँ सैनिकों की वीरता और उनकी उपलब्धियों पर लिखी गई हैं। स्वतंत्रता के बाद अपने देश ने पाकिस्तान और चीन के विरुद्ध चार लड़ाइयाँ लड़ी हैं। इस पुस्तक में सबका उल्लेख है। कहानियाँ सेना के तीनों अंगों—थलसेना, वायुसेना और नौसेना—के ऊपर हैं। ‘अनुपम कहानियाँ’ असैनिक विषयों पर हैं और देश में घटी विभिन्न घटनाओं पर प्रकाश डालती हैं। इस संग्रह की सारी कहानियाँ आधुनिक हैं। इनकी विविधता इन्हें रोचक बनाती है। इनमें से तीन कहानियाँ वास्तविक चरित्रों पर हैं, शेष काल्पनिक हैं। पिछले वर्षों में महिलाओं ने बहुत प्रगति की है; वे हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं और उच्चतम पदों पर सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। इस संग्रह में आधी कहानियाँ उन्हीं के ऊपर लिखी गई हैं। लेखन-शैली विषय के अनुसार है। कहानियों में गति है, वह कहीं रुकती नहीं। कहानियाँ पाठक को अंत तक पढ़ने के लिए विवश कर देती हैं और सतत उत्सुकता बनाए रखती हैं। इनके विषय रोमांचक हैं और आज के हालात से जुड़े हैं। इन कहानियों में किसी प्रकार की अश्लीलता नहीं है और इन्हें सभी—वृद्ध, युवा और बच्चे—पढ़ सकते हैं। नारी समाज के लिए यह संग्रह विशेष महत्त्व रखता है।
Aasha ki nanhi kirane
- Author Name:
Bruno Pilorget
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मलाला, केसज, सांड्रा, ओम, मायरा, बरुआनी, मेमरी, क्रेग ने जीवन की मुश्किलों से लड़ने के लिए कभी स्वयं को अकेला या कमज़ोर नहीं माना। अपनी इच्छा शक्ति से इन्होंने अपनी किस्मत बदली और अपने जैसे दूसरों बच्चों को राह दिखाई। दुनिया के अलग अलग कोनों से आए इन लड़के-लड़कियों की कठोर संघर्ष का उल्लेख है, एक बेहतर दुनिया की उम्मीद में।
Akhiri Daon
- Author Name:
Nilamber Kaushik
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नीलांबरजी में वह सृजनात्मक ऊर्जा है, जो किसी भी रचनाकार के लिए आवश्यक होती है। वस्तुतः यह ऊर्जा ही पाठकों को अपनी ओर खींचती है। घटनाओं, पात्रों, उनके चरित्रों और लेखक के विचारों से उनका तादात्म्य कराती है। नीलांबरजी की कहानियाँ विषय-वस्तु और रूप-विधान के स्तर पर विशुद्ध कहानियों की श्रेणी में आती हैं। वे परंपरावादी होकर भी विषय-वस्तु की दृष्टि से यथार्थवादी हैं। उनकी कहानियों में समकालीन सामाजिक यथार्थ के सभी पक्ष, तथ्य, जीवन के अनुभव और मनःस्थितियाँ हैं। उन्होंने अपनी रचना को जीवन से जोड़ने की भरपूर कोशिश की है। ये कहानियाँ बोझिल या ऊबाऊ नहीं हैं। सहज, सरस, किस्सागोई से भरपूर और अनुभूति प्रधान हैं। संग्रह की कहानियाँ अलग-अलग कालखंडों में लिखी गईं, जो अलग-अलग विषय-वस्तु की हैं। बावजूद इसके वे डेटेड नहीं लगतीं, क्योंकि उनमें निहित मानवीय संवदेना और सांस्कृतिक चेतना के स्वर सार्वकालिक हैं। नीलांबरजी की अधिकांश कहानियाँ अपनी कहन शक्ति, रोचकता, कुतूहल और कथातत्त्व से भरपूर हैं। भाषा सहज और संप्रेष्य है। सामाजिक समस्याओं और जीवंत चरित्रों के कारण ये कहानियाँ पाठकों के दिल में अपनी जगह बनाएगी, ऐसी आशा है।
Vishwa Ki Charchit Kahaniyan
- Author Name:
Sushant Supriy
- Book Type:

- Description:
Collection of Best Stories in the World
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