Gangadeen
(0)
Author:
Gen. Yashwant MandePublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Short-story-collections₹
400
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इस पुस्तक से पहले लेखक की कहानियों के दो संग्रह छप चुके हैं। हमें खुशी है कि पाठकों को उनकी कहानियाँ पसंद आईं। ‘श्रेष्ठ सैनिक कहानियाँ’ हिंदी साहित्य में एकमात्र ऐसी पुस्तक है, जिसमें सारी कहानियाँ सैनिकों की वीरता और उनकी उपलब्धियों पर लिखी गई हैं। स्वतंत्रता के बाद अपने देश ने पाकिस्तान और चीन के विरुद्ध चार लड़ाइयाँ लड़ी हैं। इस पुस्तक में सबका उल्लेख है। कहानियाँ सेना के तीनों अंगों—थलसेना, वायुसेना और नौसेना—के ऊपर हैं। ‘अनुपम कहानियाँ’ असैनिक विषयों पर हैं और देश में घटी विभिन्न घटनाओं पर प्रकाश डालती हैं। इस संग्रह की सारी कहानियाँ आधुनिक हैं। इनकी विविधता इन्हें रोचक बनाती है। इनमें से तीन कहानियाँ वास्तविक चरित्रों पर हैं, शेष काल्पनिक हैं। पिछले वर्षों में महिलाओं ने बहुत प्रगति की है; वे हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं और उच्चतम पदों पर सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। इस संग्रह में आधी कहानियाँ उन्हीं के ऊपर लिखी गई हैं। लेखन-शैली विषय के अनुसार है। कहानियों में गति है, वह कहीं रुकती नहीं। कहानियाँ पाठक को अंत तक पढ़ने के लिए विवश कर देती हैं और सतत उत्सुकता बनाए रखती हैं। इनके विषय रोमांचक हैं और आज के हालात से जुड़े हैं। इन कहानियों में किसी प्रकार की अश्लीलता नहीं है और इन्हें सभी—वृद्ध, युवा और बच्चे—पढ़ सकते हैं। नारी समाज के लिए यह संग्रह विशेष महत्त्व रखता है।
Read moreAbout the Book
इस पुस्तक से पहले लेखक की कहानियों के दो संग्रह छप चुके हैं। हमें खुशी है कि पाठकों को उनकी कहानियाँ पसंद आईं। ‘श्रेष्ठ सैनिक कहानियाँ’ हिंदी साहित्य में एकमात्र ऐसी पुस्तक है, जिसमें सारी कहानियाँ सैनिकों की वीरता और उनकी उपलब्धियों पर लिखी गई हैं। स्वतंत्रता के बाद अपने देश ने पाकिस्तान और चीन के विरुद्ध चार लड़ाइयाँ लड़ी हैं। इस पुस्तक में सबका उल्लेख है। कहानियाँ सेना के तीनों अंगों—थलसेना, वायुसेना और नौसेना—के ऊपर हैं। ‘अनुपम कहानियाँ’ असैनिक विषयों पर हैं और देश में घटी विभिन्न घटनाओं पर प्रकाश डालती हैं।
इस संग्रह की सारी कहानियाँ आधुनिक हैं। इनकी विविधता इन्हें रोचक बनाती है। इनमें से तीन कहानियाँ वास्तविक चरित्रों पर हैं, शेष काल्पनिक हैं। पिछले वर्षों में महिलाओं ने बहुत प्रगति की है; वे हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं और उच्चतम पदों पर सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। इस संग्रह में आधी कहानियाँ उन्हीं के ऊपर लिखी गई हैं।
लेखन-शैली विषय के अनुसार है। कहानियों में गति है, वह कहीं रुकती नहीं। कहानियाँ पाठक को अंत तक पढ़ने के लिए विवश कर देती हैं और सतत उत्सुकता बनाए रखती हैं। इनके विषय रोमांचक हैं और आज के हालात से जुड़े हैं। इन कहानियों में किसी प्रकार की अश्लीलता नहीं है और इन्हें सभी—वृद्ध, युवा और बच्चे—पढ़ सकते हैं। नारी समाज के लिए यह संग्रह विशेष महत्त्व रखता है।
Book Details
-
ISBN9789350482308
-
Pages168
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘कितने शहरों में कितनी बार’ में दिल्ली को जाना। इसमें रवि सचमुच नायक हैं और आपके लिखने का ढंग इतना नायाब कि उदासी और वियोग की बात आते ही दिल्ली में पीली, मैली धूल उड़ना शुरू हो जाती है—हर चीज़ को किसकिसा बनाती हुई। इतने शेड्स हैं और जीवन की इतनी तस्वीरें कि यह आपका वृत्तान्त-भर नहीं, हमारे समय की कथा, गल्प और कहानी होने लगती है। मेरे लिए आपकी यह सृजनात्मकता बहुत प्रिय और मूल्यवान सिद्ध हुई है।
—कुमार अम्बुज
आपके संस्मरण ‘कितने शहरों में कितनी बार’—दिल्ली से पता चला कि रवीन्द्र जी कितने साहसी हैं। ट्रेन के नीचे से अँगूठी उठा लाए। यह पूरी लेखमाला आपकी आत्मकथा बन जाएगी जैसे ‘ग़ालिब छुटी शराब’ है। इन लेखों की रोचकता इनकी सच्चाई में निहित है। इनमें आपका संघर्ष भी भरा हुआ है। बधाई लें।
—सरजूप्रसाद मिश्र
अभी-अभी ‘तद्भव’ में ‘कितने शहरों में कितनी बार’ पढ़कर ख़त्म किया। आपकी बेबाकी और वह अनायास फक्कड़पन, न केवल ज़िन्दगी की खानाबदोशी बल्कि उसको उकेरने का ढंग—आपके इस सृजनात्मक रिपोर्ताज़ ने मेरा मन मोह लिया।
—सुदर्शन प्रियदर्शिनी
‘तद्भव’ के नए अंक में आपका संस्मरणात्मक लेख पढ़ा। आपका लेख अद्भुत है। आपकी शैली और भाषा पूरे समय बाँधे रहती है।
—अनन्त विजय
Dharohar Kahaniyaan : Rangeya Raghav
- Author Name:
Rangeya Raghav
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- Book Type:

- Description: रांगेय राघव ने हिन्दी कहानी का हाथ पकड़कर उसे भारतीय समाज के उन धूल-काँटों भरे रास्तों, घुटती-सड़ती स्वप्निल चिथड़ों से ढँकी शहरी-कस्बाई बस्तियों, आवारे-लफंडरों-परजीवियों की फक्कड़ जिन्दगी, भारतीय गाँवों की कच्ची, कीचड़भरी पगडंडियों की गश्त करवाई जिससे वह भले ही अब तक पूर्ण अपरिचित न रही हो पर इस तरह हिली-मिली भी नहीं थी। इससे भी बड़ी बात यह कि उन्होंने इन्हीं दुनियाओं में से जिन्दगी से धड़कते हुए ऐसे-ऐसे कद्दावर चरित्र प्रकट किये जिन्हें हम विस्मृत नहीं कर सकेंगे। —अशोक शास्त्री
Tufan
- Author Name:
Sarita Kumari
- Book Type:

- Description: सभ्यता की यात्रा पहियों से अधिक कहानियों के दम पर हुई है। यही बात मनुष्य के जीवन पर भी लागू है। जीवन कहानियों के सुनने, सुनाने और रचने की अटूट यात्रा है। खाली से खाली प्रतीत होता दिन भी एक कहानी होता है। हम कहानियों के बगैर जी नहीं सकते और जब मरते हैं तो एक नयी कहानी का श्रीगणेश कर जाते हैं। सरिता कुमारी की कहानियों से गुज़रते हुए इस निरंतरता और घटनाओं के पूर्वापर सम्बन्ध पर बारहां ध्यान जाता है। इन कहानियों में वही जीवन है जो हम अपने जीवन में देखते हैं। रचनाकार का कौशल घटनाओं और प्रसंगों के चयन में दिखता है। यहाँ वे हर कहानी में एक $खास बात कहती नज़र आती हैं, ऐसी बात जो या तो कुछ बताए या चेताए। यह एक नेक काम है जो किसी दर्शन या सैद्धान्तिकी या विमर्श के पचड़े में पड़े बगैर हो सकता है। सरिता कुमारी का यह संग्रह ऐसी ही नेकियों का गुलदस्ता है। उदाहरण के तौर पर मैं तीन कहानियों का जि़क्र करना चाहूँगा। पहली कहानी है—साइलेंट किलर। यह कहानी बड़ी सादगी से प्रसवोत्तर अवसाद की घातकता और उसके समाधान का मार्ग बताती है। चूँकि मैं एक मनोचिकित्सक भी हूँ इसलिए मुझे यह कहानी बड़ी उपयोगी लगी। दूसरी कहानी है—तूफान। यह तूफान के बहाने आकस्मिक क्षति और उससे होने वाले चिंता रोग की दास्तान है। मनोचिकित्सकीय भाषा में कहूँ तो यह पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसॉर्डर की कथा है जिसमें कथाकार ने तूफान की आशंका और उसके घटित होने के बाद की यातना को बखूबी चित्रित किया है, मगर एक संयोग-निर्मित समाधान की छतरी के नीचे। तीसरी कहानी है—पहचान। यह एक रोचक कहानी है जो बुजुर्गों के लिए काउन्सलिंग की तरह है। कुल मिलाकर 'तूफान एक परिवार के भीतर पढ़े जाने योग्य कहानी-संग्रह है। —विनय कुमार
Ghuspaithiye
- Author Name:
Omprakash Valmiki
- Book Type:

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Description:
ओमप्रकाश वाल्मीकि के इस संग्रह की तमाम कहानियाँ दलित सन्दर्भों से जुड़ी हुई हैं। यह दलित जीवन का यथार्थ है जिसे कहानीकार ने इन कहानियों में निहायत ही संजीदगी से, यथार्थ के प्रति वस्तुनिष्ठ रहते हुए, कहानी के रचना-विधान की संगति में दृष्टिकोण के समूचे खुलेपन के साथ चित्रित किया है। ये बेधक और मार्मिक कहानियाँ हैं।
व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश, कथा-विन्यास के अनुरूप तर्क और विचार, अनुभवजन्य ये कहानियाँ दलितों के सुख-दुःख, उनकी मुखरता और संघर्ष की कहानियाँ हैं।
वस्तुगत यथार्थ की संगति में जिस रचनात्मक कौशल के साथ इन कहानियों को ओमप्रकाश वाल्मीकि इस बिन्दु तक लाए हैं, वह उनके कहानीकार की ताक़त का साक्ष्य है। इन कहानियों में दलित और स्त्री की पीड़ाएँ मिलकर एक हो गई हैं। ओमप्रकाश वाल्मीकि में विवश, आन्तरिक घृणा का यह विस्फोट सृजनात्मक ऊर्जा का स्रोत है।
ये कहानियाँ सिर्फ़ दलित लेखन के दायरे की ही कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि उनमें उनकी रचना-सामर्थ्य और उनकी सोच के जो पहलू उभरे हैं, वे उन्हें हिन्दी की यथार्थवादी कहानी की परम्परा का कहानीकार सिद्ध करते हैं।
ओमप्रकाश वाल्मीकि कहानी के शिल्प, अन्तर्वस्तु, सौन्दर्य तथा पाठक पर उसके समग्र प्रभाव का ध्यान रखनेवाले रचनाकार हैं।
Pratidin
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description: हिन्दी की सुपरिचित लेखिका ममता कालिया की कहानियों के इस संग्रह में शिक्षित मध्यवर्गीय नारी की आशाओं, आकांक्षाओं, संघर्षों और स्वप्नों का यथार्थपरक अंकन हुआ है। ममता कालिया हिन्दी के उन कथाकारों में उल्लेखनीय हैं, जिन्होंने मध्यवर्गीय भाव-बोध को अपनी कहानियों का विषय बनाते हुए भी उसकी सीमाओं का अतिक्रमण किया है। मध्यवर्गीय भाव-बोध के प्रति तीखी व्यंग्य-दृष्टि का सहज और तार्किक विकास उनकी जीवन-दृष्टि की गतिशीलता का प्रमाण है। नारी के प्रति परम्परागत भारतीय दृष्टिकोण को नकारते हुए वे किन्हीं पतनशील जीवन-मूल्यों को स्वीकार नहीं करतीं, बल्कि समाज के स्वस्थ जीवन-मूल्यों को आत्मसात् करती हुई, उन्हें नई सामाजिक अर्थवत्ता प्रदान करती हैं। घर की चारदीवारी में क़ैद नारी की मुक्ति-आकांक्षा और उसका संघर्ष ममता कालिया को अधिकांश कहानियों का प्रस्थान बिन्दु है, जिसके आसपास वे समूचे कथानक को बुनती हैं। इन कहानियों के पात्रों से लेखिका का सम्बन्ध इतना सीधा और आत्मीय है कि वे हमारी आँखों के सामने गतिशील होने लगते हैं। कहना न होगा कि इस संग्रह की कहानियाँ भारतीय नारी के संघर्ष और उसकी छटपटाहट को मार्मिक प्रसंगों के माध्यम से उद्घाटित करती हैं।
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