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अलाव’ युवा संपादक हिमांशु द्विवेदी के लेखों, साक्षात्कारों का संग्रह मात्र नहीं है, बल्कि एक निरंतर जागरूक और जलती हुई संवेदनाओं की समसामयिक प्रतिक्रियाओं का संगम भी है। हालाँकि संपादकीयों की भाषा एवं शैली सामान्यत: संतुलित, तार्किक तथा भावुकता से बचती हुई ठंडे चिंतन की भाषा होती है, लेकिन हिमांशु द्विवेदी के इन लेखों, संपादकीयों में तार्किकता एवं गहरे सरोकारों के साथ तीखी अभिव्यक्ति भी है। अभिव्यक्ति के इस तीखे, दो-टूकपन को तरुणाई की विशेषता कहा जा सकता है। प्रस्तुत संग्रह के लेखों में लेखक का प्रिय औजार है समसामयिक घटनाओं और व्यक्तित्वों को पौराणिक संदर्भों में देखने और प्रस्तुत करने की उनकी विशेषता। ‘अलाव’ में संकलित टिप्पणियाँ, जीवन-वृत्त, आलेख एवं साक्षात्कार सुधी पाठक के अंतस को गहरे तक स्पर्श कर पाएँगे, हमारा विश्वास है।
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अलाव’ युवा संपादक हिमांशु द्विवेदी के लेखों, साक्षात्कारों का संग्रह मात्र नहीं है, बल्कि एक निरंतर जागरूक और जलती हुई संवेदनाओं की समसामयिक प्रतिक्रियाओं का संगम भी है। हालाँकि संपादकीयों की भाषा एवं शैली सामान्यत: संतुलित, तार्किक तथा भावुकता से बचती हुई ठंडे चिंतन की भाषा होती है, लेकिन हिमांशु द्विवेदी के इन लेखों, संपादकीयों में तार्किकता एवं गहरे सरोकारों के साथ तीखी अभिव्यक्ति भी है। अभिव्यक्ति के इस तीखे, दो-टूकपन को तरुणाई की विशेषता कहा जा सकता है। प्रस्तुत संग्रह के लेखों में लेखक का प्रिय औजार है समसामयिक घटनाओं और व्यक्तित्वों को पौराणिक संदर्भों में देखने और प्रस्तुत करने की उनकी विशेषता।
‘अलाव’ में संकलित टिप्पणियाँ, जीवन-वृत्त, आलेख एवं साक्षात्कार सुधी पाठक के अंतस को गहरे तक स्पर्श कर पाएँगे, हमारा विश्वास है।
Book Details
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ISBN9789353220136
-
Pages180
-
Avg Reading Time6 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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