Tripura
(0)
₹
300
240 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
मानव-मन स्वभावतः अपने सच्चिदानंद स्वरूप आत्मा की खोज में भटकता है, जिसे अज्ञान के कई आवरणों को भेदकर ही पाया जा सकता है। यह आवरण कैसे हटे? ज्ञान कैसे उपलब्ध हो? इस नवन्यास का मुख्य प्रतिपाद्य है। त्रिपुरा इस नवन्यास की महानायिका हैं। सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर पूरे ब्रह्मांड में सूक्ष्म व्याप्ति के साथ-साथ स्थूल विग्रह स्वरूप में सुमेरु पर्वत पर लोक-कल्याण हेतु निवास करने तक की कथा में दत्तात्रेय और परशुराम संवाद करते उपस्थित रहते हैं। प्राचीन शास्त्रों, विशेषरूप से तंत्रशास्त्र की भाषा गूढ़ और सांकेतिक होती है। भाषा की उस सांकेतिकता को आज के संदर्भ में डीकोड करने की आवश्यकता है। इसके रहस्य को समझे बिना, संकेत को जाने बिना शक्ति और शक्तिमान के गूढ़ रहस्य को नहीं समझा जा सकता। उसके अभाव में यह नवन्यास मात्र एक आख्यान सा लगेगा। त्रिपुरा आदिशक्ति हैं और उन्हें धारण करनेवाले परम तत्त्व के रूप में शक्तिमान हैं। त्रिपुरा नवन्यास उसी शक्ति और शक्तिमान की पृष्ठभूमि है।
Read moreAbout the Book
मानव-मन स्वभावतः अपने सच्चिदानंद स्वरूप आत्मा की खोज में भटकता है, जिसे अज्ञान के कई आवरणों को भेदकर ही पाया जा सकता है।
यह आवरण कैसे हटे? ज्ञान कैसे उपलब्ध हो? इस नवन्यास का मुख्य प्रतिपाद्य है। त्रिपुरा इस नवन्यास की महानायिका हैं। सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर पूरे ब्रह्मांड में सूक्ष्म व्याप्ति के साथ-साथ स्थूल विग्रह स्वरूप में सुमेरु पर्वत पर लोक-कल्याण हेतु निवास करने तक की कथा में दत्तात्रेय और परशुराम संवाद करते उपस्थित रहते हैं। प्राचीन शास्त्रों, विशेषरूप से तंत्रशास्त्र की भाषा गूढ़ और सांकेतिक होती है। भाषा की उस सांकेतिकता को आज के संदर्भ में डीकोड करने की आवश्यकता है। इसके रहस्य को समझे बिना, संकेत को जाने बिना शक्ति और शक्तिमान के गूढ़ रहस्य को नहीं समझा जा सकता। उसके अभाव में यह नवन्यास मात्र एक आख्यान सा लगेगा। त्रिपुरा आदिशक्ति हैं और उन्हें धारण करनेवाले परम तत्त्व के रूप में शक्तिमान हैं। त्रिपुरा नवन्यास उसी शक्ति और शक्तिमान की पृष्ठभूमि है।
Book Details
-
ISBN9789384343934
-
Pages144
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
The Vedas and Upanishads for Children
- Author Name:
Roopa Pai
- Rating:
- Book Type:

- Description: 3,000 years ago, deep inside the forests of India, a great ‘thought- revolution’ was brewing. In those forest labs, the brightest scientist-philosophers contemplated the universe and reflected upon the already-ancient texts called the Vedas, gaining some startling insights into questions that we still have no watertight answers to, like: * What is the universe made of? * How do I know I’m looking at a tree when I see one? * Who am I? My body, my mind, my intelligence, my emotions, or NOTA? And where did they put those explosive findings? In a sprawling body of goose-bumpy, thought-provoking and fascinating oral literature called the Upanishads! Intimidated? Don’t be! For this joyful, fun guide to some of India’s most enduring and secular wisdoms, reinterpreted for first-time explorers by author Roopa Pai, is guaranteed to keep you turning the pages. Why haven’t you read it yet?
Moh : Maithili Novel
- Author Name:
Dr. Sunita Jha
- Book Type:

- Description: उपनिषदक आदेश अछि- “प्रजातन्तुं मा व्यवच्छेत्सीः” अर्थात् ओहि प्रजा-सूत्र केँ नहि तोड़ी। की थिक ई प्रजासूत्र? पिता, पितामह, प्रपितामह, पुत्र, पौत्र, प्रपौत्र आ एकर बीचक पीढ़ीपर ठाढ़ स्वयं ओ व्यक्ति- इएह सात पीढ़ी एक ईकाई थीक। ओकर बीच सम्बन्ध आ ओकर संसार प्रजातन्तु थीक, जकरा ‘मोह’ जोड़ने रहैत अछि। ई मोह जतेक मजबूत रहत, ओ प्रजा-तन्तु ओतेक निस्सन रहत। एही मोहकेँ अक्षुण्ण रखबाक आदेश देल जाइत अछि। इएह मोह एहि उपन्यासक केन्द्रीय भाव थीक आ उपन्यासक नायकक नाम सेहो। आइ उन्नतिक मोल पर परिवार टुटि रहल अछि। ग्लोबलाइजेशन एकटा सुरसा जकाँ सभटा सम्बन्ध आ मोहकेँ गीड़ि रहल अछि। एक दिस वृद्ध-वृद्धाक लेल बनल आश्रम सभ विकास कए रहल अछि तँ दोसर दिस बाबाक सारा पर लागल आमक गाछ सुखा रहल अछि। एहि ‘कंट्रास्ट’क बीच ई उपन्यास आगाँ बढ़ैत अछि आ एही ‘क्लाइमैक्स’ पर आबि एकर अंत सेहो भए जाइत अछि। बीचमे कतेको मोह अबैत अछि– अपन लोथ भाइक लेल वीणाक मोह, अपन दारूपीबा भाइक जीवन बचएबाक लेल वीणाक मोह, अपन भाउजिकेँ अतीतमे देल गेल वचनक पालन करबाक लेल विवश पंडितजीक मोह, बालाक विवाह नीक जकाँ करएबाक लेल कटिबद्ध मोहक मोह– सभटाक मोहक जालकेँ नीकसँ बिनैत, ओकर तानी-भरनी केँ सक्कत बनबैत मोह आ वीणा एहि उपन्यासक नायक-नायिका बनल अछि। प्रकाश, कनक आ आन कतेको देयाद-बाद एकरा नहिं निमाहि सकल छथि। ई उपन्यास आदर्शवादी अछि। अन्हारमे दीप जरएबाक काज करैत अछि। उपन्यासमे सभठाम आशावाद छैक, ओहि प्रजातन्तुकेँ सक्कत बनएबाक प्रयास छै। वीणा अपन पुस्तैनी डीह पर गाछ लगबैत छथि, एही आशासँ जे विदेशमे रहैत हुनक धियापुता छुट्टीमे किछुओ दिनक लेल गाम आओत आ ओही सूत्रसँ बँधाएल रहत। उपन्यासक क्लाइमैक्समे मोह जखनि ओहि प्रजातन्तुकेँ सक्कत होइत देखैत छथि तँ निश्चिन्त भए जाइत छथि आ बाबाक सारा पर सबा सए वर्ष पूर्वक लागल गाछ केँ तिलांजलि दैत छथि, किएक तँ हुनका छह टा गाछ रोपबाक सार्थकता भेटि जाइत छनि, अपन पौत्र सभक लेल, अपन भविष्यक लेल। आइ टुटैत समाज, टुटैत परिवारक बीच सभकेँ मोहक बंधनमे जोड़बाक लेल संघर्ष करैत मोहक प्रति वीणाक शब्दमे लेखिकाक उक्ति सार्थक छनि- “बड़ सोचि कए अहाँक नाम पूर्वजलोकनि रखलन्हि। गाम-घर, सर-समाज, बन्धु-बांधव, पूर्वज, संतति, गाछ-वृक्ष, पशु-पक्षी सभमे अहाँक नाम अछि।” इएह मोह उपन्यासकेँ सार्वजनिक बनबैत अछि, व्यापक बनबैत अछि आ साहित्य बनबैत अछि।
Sita Banam Ram
- Author Name:
Narayan Singh
- Book Type:

- Description: सीता बनाम राम(वाल्मीकि रामायण पर आधारित रामकथा का वैकल्पिक पाठ) वनगमन के समय सीता को अयोध्या में रहकर भरत को 'विशेष यत्नपूर्वक' प्रसन्न रखने के राम के सुझाव की निंदा करते हुए सीता द्वारा राम को स्त्री की कमाई खाने वाले नट की संज्ञा देना (शैलूष इव मां राम परेभ्यो दातुमिच्छसि), अरण्यकांड में 'अकारण' हिंसा के विरुद्ध सीता का राम के साथ वाद-विवाद करना, अग्नि-परीक्षा के समय देह को ही सर्वोपरि मानने वाले राम के आरोपों का उत्तर देते हुए सीता का हृदय और आत्मा में बसे प्रेम को देह से परे बताना (मदधीनं तु यत् तन्मे हृदयं त्वयि वर्तते। पराधीनेषु गात्रेषु किं करिष्याम्यनीश्वरी॥); ये कुछ ऐसे तथ्य हैं, जिनसे दोनों के सोच और व्यवहार में जमीन-आसमान का अंतर दिखाई देता है। और आखिर में अश्वमेध यज्ञ के समय जनसमुदाय के समक्ष राम जिस प्रकार सीता के सामने शुद्धता की शपथ लेने के बाद ही उन्हें अपनाने की शर्त रखते हैं; और उत्तर में राम की ओर देखे बिना वे खामोशी के साथ जिस प्रकार भूमि-प्रवेश कर जाती हैं (जो प्रेम के समाप्त होने का संकेत माना जा सकता है), वह उन दोनों के वैचारिक अंतर को स्पष्ट कर देता है।सीता और राम अपने सोच और आचरण में ही नहीं, जन्म और मृत्यु में भी एक-दूसरे के प्रतिकूल हैं। सीता का जन्म राम की तरह किसी माँ के गर्भ से नहीं, धरती से होता है और वे अंत में धरती में समा जाती हैं। वह न तो जन्म लेती हैं और न (राम की भाँति) मरती हैं। राम आकाश में स्थित विष्णुलोक से अवतार लेकर आते हैं और वापस आकाश में चले जाते हैं। दोनों के इस संसार में आने और लौटने के स्थान विपरीत दिशा में हैं। बिछड़ने के बाद राम के साथ वे कभी नहीं मिलतीं। ('सीता बनाम राम' पुस्तक से...)
Savitrichi Shabari
- Author Name:
Sangeeta Mulay +1
- Book Type:

- Description: खेड्यातील, सर्वहारा वर्गातील, दलित, काळ्या वर्णाची एक मुलगी. शिक्षणासाठी शहरात येते. पण वर्ग, वर्ण, भाषा, गबाळा पोशाख यामुळे तिला पदोपदी भेदभावाचा सामना करावा लागतो. परक्या शहरात कुणी मार्गदर्शक नसतो ना जिवाभावाचा आधार असतो. तरीही ती नेटानं शहरात राहते, शिक्षण घेते आणि एके दिवशी ‘सावित्रीची शबरी' म्हणून नवी ओळख निर्माण करते. कोण आहे ही मुलगी? तिला बेदखल करणाऱ्या शहरी वातावरणात ती तगून कशी राहते? खेडवळपणाच्या मागासलेल्या कोषातून बाहेर पडत फुलपाखराप्रमाणे स्वच्छंदपणे बागडण्यासाठी लागणारं बळ तिला कुठून मिळतं? याचा उत्कट मागोवा घेणारी ही कहाणी आपल्यातल्या माणसाला जागवणारी आहे.
Durga
- Author Name:
Wonder House
- Rating:
- Book Type:

- Description: This delightful collection of stories from Indian mythology introduces young readers to our enriching and ancient culture and wisdom.
Adventures of Rama
- Author Name:
Wonder House
- Rating:
- Book Type:

- Description: This delightful collection of stories from Indian mythology introduces young readers to our enriching and ancient culture and wisdom.
Turungrang
- Author Name:
Adv. Ravindranath Patil
- Book Type:

- Description: मला ‘अंडरट्रायल` अर्थात कच्चा कैदी म्हणून येरवडा जेलमध्ये काही काळासाठी स्थानबद्ध केलं गेलं होतं. तत्पूर्वी आयपीएस अधिकारी म्हणून आणि कायद्याचा विद्यार्थी म्हणून मी जेलला भेट दिली होती. परंतु त्यावेळी न दिसलेले तुरुंगाचे अंतरंग मला कच्चा कैदी म्हणून वावरताना दिसले. त्याचबरोबर तुरुंगातल्या इतर बंद्यांच्या एका वेगळ्या भावविश्वाचं दर्शन घडलं. त्यातून कैदी जेलच्या कोंडवाड्यामध्ये जगतात कसे, वागतात कसे नि रमतात कसे याचं वास्तव चित्रण शब्दबद्ध करण्याचा प्रयत्न मी या ‘तुरुंगरंग`मध्ये केला आहे. अर्थात माणूस गुन्हेगार का होतो आणि समाज म्हणून आपण त्याला गुन्हेगारीपासून कसं परावृत्त करू शकतो हेही मला इथं सांगायचं आहे. इतकंच नाही, तर तुरुंगात कैद्यांचं आयुष्य जसं पणाला लागतं तसंच फौजदारी न्यायप्रक्रियाही कशी कैद होते याची स्पष्ट जाणीव करून देण्याचाही माझा प्रयत्न आहे. वाचक म्हणून आपण माझ्या या पहिल्याच पुस्तकाचं स्वागत कराल अशी आशा. जेल आणि कैदी सुधारणा हा विषय तसा दुर्लक्षित राहिला आहे. जेल सुधारणांसाठी कैद्यांची दुसरी बाजू ऐकणे आणि त्यांच्या मानसिक स्थितीचा उलगडा करणे, हे अत्यावश्यक आहे. मला खात्री आहे की, ‘तुरुंगरंग` हे पुस्तक समाजात जागृती निर्माण करेल. किंबहुना प्रशासन जेलकडे केवळ दंड देण्याची जागा म्हणून न पाहता कैद्यांची वर्तणूक सुधारण्यासाठीचे एक साधन म्हणून बघेल आणि त्या अनुषंगाने नीती आखेल. ज्ञानेश्वर पाटील आयएएस (मध्य प्रदेश कॅडर) रवींद्रनाथ पाटील यांच्यातील उत्कृष्ट मार्गदर्शक, अधिकारी आणि प्रशासकही आम्ही यापूर्वी बघितला आहे. आता या पुस्तकाच्या निमित्तानं त्यांच्यातल्या उत्कृष्ट लेखकाचं दर्शन घडतंय. त्यांचं हे अत्यंत वेगळ्या विषयावरचं पुस्तक प्रत्येकानं वाचावं असंच आहे. डॉ. शिवानंद बिडवे तहसीलदार, महाराष्ट्र राज्य
Sarasvati's Gift
- Author Name:
Kavita Kane
- Book Type:

- Description: Sarasvati, the feminine force worshipped as the goddess of learning, is a household name, yet we barely know much about the goddess. She is known as a lost river and seen as a singular goddess, never as part of a couple, such as Shiva-Parvati or Lakshmi-Narayan. In Sarasvati's Gift, Kavita Kane brings to light Sarasvati's story-the goddess of art, music and knowledge-told in the voices of nameless celestials, powerful gods and lesser mortals. The book explores her relationship with her Creator, Brahma, and their unusual marriage-a union of fiercely independent minds and the most non-conforming, unconventional of the Triumvirate couples. As these peripheral figures and silent catalysts take centre stage, we get a glimpse of an extraordinary woman and her remarkable story, obscured and buried under myths and legends.
Good to Great
- Author Name:
Jim Collins +1
- Book Type:

- Description: पुस्तकात काय आहे? © सर्वोत्तमाचा शत्रू म्हणजे उत्तम असणं. © पाचव्या पातळीवरचं नेतृत्व : नम्र तरीही आक्रमक नेता असणं आवश्यक. © आधी कोण... मग काय? : योग्य लोकांची निवड करणं म्हणजे उत्तमतेच्या प्रवासाची सुरुवात. © दाहक वास्तवाला सामोरे जा... (तरीही विशास कायम ठेवा) या विरोधाभासातला तोल जपला तर उत्तमतेचा प्रवास वेगाने होतो. © साळू कल्पना (तीन वर्तुळातला साधेपणा) ‘कशावर लक्ष केंद्रित करायचं' ती तुमच्या कंपनीसाठीची कल्पना सापडणं फार गरजेचं असतं. © शिस्तीची संस्कृती : उत्तम कंपन्यांमधलं जादूई रसायन. © तांत्रिक वेगवर्धक - योग्य वापर करणं जमलं नाही तर तंत्रज्ञानाच्या सापळ्यात अडकाल. © प्रगतीचक्र आणि विनाशगती चक्र : सातत्याने टिकणारी आणि वाढणारी गती प्रगतीचक्राला कशामुळे मिळते. © उत्तम ते सर्वोत्तम पासून दीर्घकाळ टिकणारं होणं - चांगल्या कंपनीपासून सुरुवात करून दीर्घकाळ उत्तम राहणारी यशस्वी कंपनी कशी बनवायची. ‘एक उत्तम असणारी कंपनी सर्वोत्तम बनवता येते का? आणि येत असेल तर कशी?' या महत्त्वाच्या प्रश्नांची उत्तरं ‘गुड टू ग्रेट' या पुस्तकात आपल्याला मिळतात. पाच वर्षांच्या संशोधनानंतर कोलिन्स असं सांगतो, ‘उत्तम कंपनीची सर्वोत्तम कंपनी बनवणं अगदीच शक्य आहे.' उत्तम ते सर्वोत्तम प्रवास केलेल्या आणि हा प्रवास करू न शकलेल्या कंपन्यांच्या उदाहरणांमधून सर्वोत्तम होण्याच्या प्रक्रियेच्या अनेक पदरांची चर्चा त्याने या पुस्तकात केली आहे. ती करताना काय केल्याने हा प्रवास यशस्वी होतो आणि काय केल्याने चुका घडतात हेही त्याने सांगितलं आहे. अनेक उदाहरणं आणि आकडेवारी यांचा आधार घेत केलेल्या शास्त्रीय अभ्यासातून पुढे आलेले निकर्ष हे आजच्या आधुनिक युगातही आश्चर्यचकित आणि धक्कादायक वाटू शकतात. म्हणूनच कोलिन्सने सांगितलेला उत्तमापासून सर्वोत्तमापर्यंत हा प्रवास प्रत्येकानेच समजून घेण्यासारखा आहे. Good to Great : Jim Collins Translation : Dr. Pradyana Kulkarni गुड टू ग्रेट | जिम कोलिन्स अनुवाद : डॉ. प्रज्ञा कुलकर्णी
Sabhyata Aur Sanskriti Ki Rochak Kahaniyan "सभ्यता और संस्कृति की रोचक कहानियाँ" Book | Hindi Translation of The Stories We Tell
- Author Name:
Devdutt Pattanaik
- Book Type:

- Description: वर्तमान काल के प्रसिद्ध पौराणिक विशेषज्ञ देवदत्त पट्टनायक ने इक्कीसवीं सदी में हमारे जीवन को समझाने के लिए भारत के मिथकों और किंवदंतियों के समृद्ध खजाने से शानदार कहानियाँ प्रस्तुत की हैं। कहानियों को विभिन्न विषयों में बाँटा गया है, जैसे अप्सरा, जो प्राचीन ग्रंथों में महिलाओं के निरूपण पर चिंतन है; कर्म, न्याय, और हड़पना या आदान-प्रदान, जो दर्शाती हैं कि कैसे प्राचीन शास्त्रों ने न्याय के हमारे आधुनिक आदर्शों को आकार दिया है; असीम, बिना किसी शर्त का प्रेम, जो उस समानता की खोज करता है, जो दो प्रेमियों के बीच मौजूद होना चाहिए; और देव तथा असुर, जो दर्शाती है कि कैसे सही और गलत का द्विगुण काले और सफेद जितना स्पष्ट नहीं है। लेखक के वेबकास्ट ‘टीटाइम टेल्ज’ से उत्पन्न कहानियों का यह संग्रह उनकी अनूठी शैली में लिखा गया है और पौराणिकता हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करती है, इस पर प्रकाश डालता है।
Noaakhali
- Author Name:
Ramesh Oza +1
- Book Type:

- Description: आधुनिक भारताच्या इतिहासात घडलेल्या भीषण दंग्यांची जेव्हा चर्चा होते तेव्हा नोआखालीचे नाव आवर्जून घेतले जाते. 16 ऑगस्ट 1946 रोजी मुस्लीम लीगने पुकारलेल्या प्रत्यक्ष कृती दिनाच्या निमित्ताने कोलकाता येथे भीषण सांप्रदायिक दंगे भडकले. त्याची धग कोलकातापासून 400 किलोमीटर दूर असलेल्या आजच्या बांग्लादेशमधील नोआखाली जिल्ह्यापर्यंत जाऊन पोहोचली. तेव्हा नोआखालीतील अल्पसंख्य हिंदूंचे अश्रू पुसण्यासाठी, त्यांच्यात आत्मविश्वास निर्माण करण्यासाठी शहात्तर वर्षांचे वयोवृद्ध गांधीजी तेथे चार महिने जाऊन राहिले. हा त्यांच्या आयुष्यातील सर्वात कठीण काळ होता. मानवाच्या इतिहासात सत आणि असत शक्तींमधे अखंड चाललेल्या संघर्षात चिरंतन सत मूल्यांच्या रक्षणासाठी गांधीजींचे नोआखालीत जाऊन राहणे यास फार मोठे महत्त्व आहे. किंबहुना आज आपला समाज स्वातंत्रोत्तर काळातील सर्वात कठीण आव्हानाला सामोरा जात असताना हे महत्त्व आणखी वाढते. कारण सांप्रदायिकतेच्या समस्येने आज अत्यंत उग्र रुप धारण केले असून पुन्हा एकदा मानवतेच्या अस्तित्वापुढे प्रश्नचिन्ह निर्माण झाले आहे. अशा पार्श्वभूमीवर हिमालयाएवढ्या आव्हानाचा सामना करत गांधीजींनी मानवाच्या असीम आत्मबलाचा अत्युच्च मानबिंदू नोआखालीतून कसा प्रस्थापित केला, याची ही कहाणी रमेश ओझा आणि श्याम पाखरे या लेखक द्वयींनी आपल्यासमोर मांडली आहे. आजच्या अत्यंत निराशाजनक परिस्थितीत नोआखाली पर्वाचे स्मरण करून देणारी ही कादंबरी वाचकांना मानवतेच्या रक्षणासाठी नवी प्रेरणा देईल अशी आशा आहे. नोआखाली | रमेश ओझा, श्याम पाखरे Noaakhali| Ramesh Oza And Shyam Pakhare
Gidhadanchi Mejwani
- Author Name:
Dr. Nitin Hande +1
- Book Type:

- Description: रितसर कामांसह गैरकृत्यांसाठी मध्यस्थांची, दलालांची यंत्रणा कशी काम करते आणि त्यातून भारतीय लोकशाहीतील काळे कारनामे कसे आकाराला येतात यांचा शोध या पुस्तकातून घेण्यात आलेला आहे. शोधपत्रकारिता करणाऱ्या जोसी जोसेफ यांनी मागील दोन दशकांत या समस्येची व्यापकता कशी वाढली आहे हे उघडकीस आणले आहे. त्यातून समोर आलेले चित्र स्फोटक आणि भयावह आहे. आधुनिक भारताचा याआधी कधी घेण्यात न आलेला अनेक पातळ्यांवरचा शोध म्हणजे गिधाडांची मेजवानी हे पुस्तक आहे. ते वाचकांना अस्वस्थ करते, कृतिप्रवण करते, परिवर्तनासाठी आक्रोश करायला भाग पाडते. लोकशाहीबद्दल काळजी असणाऱ्या तसेच देशात घडलेल्या घडामोडींमागे दडलेले सत्य समजून घेण्यास इच्छुक असलेल्या प्रत्येकाने हे पुस्तक वाचले पाहिजे. Gidhadanchi Mejwani | Josy JosephTranslation by : Dr. Nitin Hande गिधाडांची मेजवानी | जोसी जोसेफअनुवाद : डॉ. नितीन हांडे
Pachola
- Author Name:
Pramod Namdevrao Borsare
- Book Type:

- Description: ‘पाचोळा' हा प्रमोद बोरसरे यांचा कथासंग्रह वाचताना मला ग्रेसांच्या ओळी आठवल्यारानातला झरातहानेची बोलीकात टाकलेला सर्पपाचोळ्याच्या खालीग्रेसांच्या ओळींचा श्लेषार्थ वेगळा असला तरीही रानावनातलं दुर्गम, दुर्लक्षित जिणं बाहेरच्या जगाला पाचोळ्यासारखंच वाटतं. मात्र बोरसरेंच्या ‘पाचोळ्या'खाली जो कथात्म ऐवज आहे तो अस्सल कात टाकलेल्या सापासारखा आहे. प्रत्येक कथा दंश करते. प्रत्येक कथेत रानातल्या सावलीत वाहणाऱ्या तहानलेल्या झऱ्यासारख्याच हळव्या ओल्या भावनाही आहेत. आपण आपल्या अक्षर जाणिवांच्या सोवळेपणात जाणिवेच्या पातळीवर वाळीत टाकलेलं एक जगणं जगतो ते बोरसरे विलक्षण ताकदीने मांडतात. झाडीबोलीतल्या अहेव शब्दांनी प्रमाण मराठी भाषाही या कथा समृद्ध करतीलच. त्यांच्या लेखनाला सुगीत असलेला रानातला गर्भार गंध आहे. सुशिक्षित, उच्चभ्रू, अभिजन मध्यमवर्गीयांच्या तालेवार दु:खांनाच गोंजारणाऱ्या साहित्याच्या परिघाबाहेरचे लेखन उजागर होत आता आशयाचेही बहुजनीकरण झाले आहे. बोरसरे अशा लेखकांच्या पिढीतल्या आशा पल्लवित करणारे लेखक आहेत; हे या कथा वाचल्यावर मर्मज्ञांचे मत असेल. अतिलघुकथांची ही शैली सआदत हसन मंटोची आठवण करून देणारी अन् परिणामकारकतेत त्याच्या जवळ पोहचणारी...- श्याम पेठकर Pachola - nakshalgrastanchya ashadayi jaganyacha kolaj | Pramod Borsare पाचोळा - नक्षलग्रस्तांच्या आशादायी जगण्याचा कोलाज | प्रमोद बोरसरे
Topi Shukla
- Author Name:
Rahi Masoom Raza +2
- Book Type:

- Description: ‘मी लेखकांच्या अशा जमातीचा आहे ज्यांच्या मते लेखकाचं काम विश्वभरात शांती पसरवण्याचं आहे. त्याचं काम आहे अशा प्रेमकथा लिहिणं की ज्या वाचल्यावर माणसं आपापसातल्या भिंती विसरून जातील. सीमारेषा पुसून टाकणं हेच तर लेखकाचं काम आहे.' राही मासूम रझा राही मासूम रझा यांच्या ‘टोपी शुक्ला' या कादंबरीचा माझ्या मनावर मोठाच प्रभाव पडला. एकीकडे तिने अंतर्मुख केलं, तर दुसरीकडे लढ्याची नवी दृष्टी दिली. या कादंबरीची भाषा लढ्याची प्रेरणा देणारी तसेच मानवी करुणेचीही आहे. यातील भाषाशैलीने मनाची पकड घेतली आणि युवकांशी संवाद साधण्याची नवी दृष्टी दिली. तिने धर्म, जाती, प्रांतीयता, भाषा, लिपी, संस्कृती, राष्ट्र्रीयता, देशप्रेम या संकल्पना सर्वसामान्य माणसांच्या जीवनात कशा उतरतात ते दाखवून दिलं. धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक भारतीयतेशी त्यांचा असलेला अतूट धागा समोर आणला. त्याबरोबरच या भारतीयतेचा एकेक चिरा कसा ढासळत चालला आहे, यावरील भाष्यही या कादंबरीत येतं. टोपीला त्या काळात पडलेले प्रश्न आजचे आपलेच प्रश्न आहेत. भारतात, भारतीय समाजात तरुणांना सांप्रदायिकतेचं आणि केवळ सत्ताप्राप्तीचं साधन मानलं गेलं, तर भारताला, भारतीयतेला काय भवितव्य उरतं? यापेक्षा वेगळं भवितव्य घडवायला आपण उभं राहायला नको का? ही संपूर्ण कादंबरी इशारा देते की धर्मवादी लोकशाहीविरोधी शक्तींशी तडजोड केली तर ती भारताची, भारतीयतेची आत्महत्या ठरेल, त्यामुळे पडेल ती किंमत देऊन धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक मूल्यांसाठी लढणं, ती जगणं अटळ आहे. रझिया पटेल
Bhakta Prahlad Stories Book
- Author Name:
M.I. Rajasvi
- Book Type:

- Description: पौराणिक कथाओं में विष्णुभक्त प्रह्लाद की कथा अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यह कथा अन्याय, अत्याचार एवं अभिमान पर न्याय, सदाचार और स्वाभिमान की जीत की शिक्षा देती है। यह कथा उस समय की है, जब संपूर्ण सृष्टि हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु जैसे असुरों के आतंक से त्रस्त थी। चारों ओर आसुरी शक्तियों की प्रबलता थी। धर्म-कर्म और वेद-यज्ञ आदि की प्रतिष्ठा लगभग निष्प्राण हो चुकी थी। ऐसे विपरीत और गहन धार्मिक संकटकाल में भी प्रह्लाद जैसे भक्त की पावन भक्ति ने श्रीहरि को नरसिंह अवतार धारण करने हेतु प्रेरित किया। अंततः जब हिरण्यकशिपु के अत्याचारों एवं पापों का घड़ा भर गया तो भगवान् विष्णु ने नरसिंह का अवतार लेकर अत्याचारी हिरण्यकशिपु का अंत कर दिया। प्रस्तत पुस्तक 'भक्त प्रह्लाद' में विष्णुभक्त प्रह्लाद की कथा को बहुत ही सरल, सहज एवं रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। भगवद्भक्ति, सत्य व सदाचार, निष्ठा, समर्पण, संकल्प जैसे जीवनमूल्यों का संचार करने वाली प्रेरक पुस्तक ।
Jahiram Pad Neh
- Author Name:
Narottam Pandey
- Book Type:

- Description: रामकथा भारतीय जन-मानस की प्राण है। यह हिंदु मन में गहरे तक पैठी हुई है। रामायण में अनेक पात्रों का सजीव चित्रण हुआ है। इनमें कुछ पात्र ऐसे हैं जो कथा में एक-दो बार आए हैं और फिर विलुप्त हो गए। कुछ पुरुष पात्र ऐसे हैं, जो मुख्य भूमिका में तो नहीं रहे पर हैं अत्यधिक महत्त्वपूर्ण और इनकी उपस्थिति कथा के अंत तक रही है। प्रसिद्ध विद्वान् लेखक नरोत्तम पांडेय ने रामायण कथा का बड़ी गहराई से अनुशीलन किया है। प्रस्तुत पुस्तक में लेखक ने अपनी तर्क-बुद्धि से रामकथा में से चार रामपद नेहियों—हनुमान, अंगद, लक्ष्मण और भरत—की आस्था, निष्ठा, सेवा-समर्पण एवं शौर्य का विवेचन किया है। इसमें जहाँ-तहाँ साधी रूप में वाल्मीकीय रामायण के आख्यानों की सहायता ली गई है। ‘जाहिराम पद नेह’ में युवराज अंगद का चरित्र एवं व्यक्तित्व शेष चरित्रों की तुलना में अधिक सकर्मक और निष्काम है। सुग्रीव कुशल प्रशासक हैं। विभीषण की क्रियाएँ भेदमूलक हैं। धर्म-अध्यात्म में रुचि रखनेवाले एवं रामायण-प्रेमी पाठकों के लिए एक पठनीय पुस्तक।
Tunga
- Author Name:
V. Gayathri
- Rating:
- Book Type:

- Description: ತುಂಗಾ ಒಂದು ಪುಟ್ಟ ಹುಡುಗಿ ತುಂಗಾಳ ಕಥೆ. ಕರ್ನಾಟಕದ ಶಿವಮೊಗ್ಗ ಜಿಲ್ಲೆಯ ಒಂದು ದೂರದ ಹಳ್ಳಿಯಲ್ಲಿ ಕಥೆ ನಡೆಯುತ್ತದೆ. ಕಥೆಯು ಅವಳ ಹಳ್ಳಿಯ ಶಾಲೆಯಲ್ಲಿ ಅವಳ ಅನುಭವಗಳು ಮತ್ತು ಸರಿಯಾದ ಶಾಲೆಯನ್ನು ಕಂಡುಕೊಂಡಾಗ ಅವಳ ಜೀವನವು ಹೇಗೆ ಧನಾತ್ಮಕವಾಗಿ ತಿರುಗಿತು ಎಂಬುದರ ಬಗ್ಗೆ. Tunga is a story of a little girl Tunga. The story is set in a remote village in Shivmogga district in Karnataka. The story is about her experiences in her village school and how life turned around positively for her when she finds the right school.
Fukatchech Salle
- Author Name:
Dr. Ravindra Laxmikant Tamboli
- Book Type:

- Description: वाचाल तर वाचाल, असे आम्हाला शिकवले गेले होते. म्हणून आम्ही वाचत गेलो आणि वाचलेले जे काही होते त्यामुळेच संपन्नपणे वाढलो. अलीकडेही ‘वॉचाल' तर बिघडाल असे पोटतिडकीने सांगूनही वाचनावर बहिष्कार का टाकला जात आहे, याचा उलगडा होऊ शकत नाही. अनुत्तरित प्रश्नांवर खूप चिंतन करून उत्तर शोधायचे असते म्हणून आम्ही त्या शोधात वेळोवेळी जे काही लिहीत गेलो त्यातील काही लिखाण ‘फुकटचे सल्ले' म्हणून या पुस्तकात एकत्रितपणे दिले आहे.हे सल्ले फुकटचे असले तरी त्यांना अनुभवांचा आधार आहे. म्हणून ते महत्त्वाचे ठरतात. तेव्हा सदरचे पुस्तक विकत घेऊन आमचे हे फुकटचे सल्ले आपल्या जीवनात उपयोगात आणाल अशी आशा आहे. Fukatchech Salle | Dr.Ravindra Laxmikant Tamboli फुकटचेच सल्ले | डॉ.रवींद्र लक्ष्मीकांत तांबोळी
Dron Ki Atmakatha
- Author Name:
Manu Sharma
- Book Type:

- Description: क्या तुम्हें मालूम नहीं कि मैं तुम्हारा मित्र हूँ?'' '' मित्र! हा-हा-हा!'' वह जोर से हँसा, '' मित्रता! कैसी मित्रता? हमारी-तुम्हारी, राजा और रंक की मित्रता ही कैसी?'' '' क्या बात करते हो, द्रुपद!'' '' ठीक कहता हूँ द्रोण! तुम रह गए मूढ़-के- मूढ़! जानते नहीं हो, वय के साथ-साथ मित्रता भी पुरानी पड़ती है, धूमिल होती है और मिट जाती है । हो सकता है, कभी तुम हमारे मित्र रहे हो; पर अब समय की झंझा में तुम्हारी मित्रता उड़ चुकी है । '' '' हमारी मित्रता नहीं वरन् तुम्हारा विवेक उड़ चुका है । और वह भी समय की झंझा में नहीं वरन् तुम्हारे राजमद की झंझा में । पांडु रोगी को जैसे समस्त सृष्टि ही पीतवर्णी दिखाई देती है वैसे ही तुम्हारी मूढ़ता भी दूसरों को मूढ़ ही देखती है । '' '' देखती होगी । '' वह बीच में ही बोल उठा और मुसकराया, '' कहीं कोई दरिद्र किसी राजा को अपना सखा समझे, कोई कायर शूरवीर को अपना मित्र समझे तो मूढ़ नहीं तो और क्या समझा जाएगा?'' ''.. .किंतु मूढ़ समझने की धृष्टता करनेवाले, द्रुपद! राजमद ने तेरी बुद्धि भ्रष्ट कर दी है । तू यह भी नहीं सोच पा रहा है कि तू किससे और कैसी बातें कर रहा है! तुझे अपनी कही हुई बातें भी शायद याद नहीं हैं । तू मेरे पिताजी के शिष्यत्व को तो भुला ही बैठा, अग्निवेश्य के आश्रम में मेरी सेवा भी तूने भुला दी । '' -इसी पुस्तक से
Aparoopada Purana Katheglu
- Author Name:
Asha Raghu
- Rating:
- Book Type:

- Description: A collection of mythological stories retold. ಅಜ್ಜಿ ಅಜ್ಜಂದಿರು ಮೊಮ್ಮಕ್ಕಳನ್ನು ಕೂರಿಸಿಕೊಂಡು ಕಥೆ ಹೇಳುತ್ತಿದ್ದ ಕಾಲವೊಂದಿತ್ತು. ಒಂದೂರಲ್ಲಿ ಒಬ್ಬ ರಾಜಕುಮಾರಿ ಇದ್ದಳು ಎನ್ನುತ್ತಾ ಆರಂಭವಾಗುತ್ತಿದ್ದ ಕಾಲ್ಪನಿಕ ಕಥೆಯಲ್ಲಿ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನಕ್ಕೂ ಮೀರಿದ ಕಥಾವಸ್ತುಗಳು ಬಂದೊಗುತ್ತಿದ್ದವು. ಇಂತಹ ಕಾಲ್ಪನಿಕ, ಪೌರಾಣಿಕ, ಜಾನಪದ ಕಥೆಗಳಲ್ಲಿ ನೀತಿ ಪಾಠವೂ ಇರುತ್ತಿತ್ತು. ಆದರೆ ಇಂದಿನ ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಇವೆಲ್ಲಾ ದಕ್ಕುತ್ತಿರುವುದು ಸಂದೇಹವೇ ಸರಿ. ಗ್ಯಾಜೆಟ್ ಲೋಕದಲ್ಲಿ ಮುಳುಗಿರುವ ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಕಥೆ ಹೇಳುವ ಪುರುಸೊತ್ತು ಮನೆಯ ಸದಸ್ಯರಿಗೆ ಇರುವುದಿಲ್ಲ. ಮಕ್ಕಳೂ ಕೂಡ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನದ ತ್ವರಿತ ಬೆಳವಣಿಗೆಗೆ ತಕ್ಕಂತೆ ಇಂತಹ ನೀತಿ ಪಾಠಗಳನ್ನು ಯೂಟ್ಯೂಬ್, ಗೂಗಲ್ನಲ್ಲಿ ನೋಡಲು ಶುರುವಿಟ್ಟುಕೊಂಡಿರುತ್ತಾರೆ. ಲೇಖಕಿ ಆಶಾ ರಘು ಅವರು ಇಂದಿನ ಸಿದ್ಧ ಮಾದರಿಯನ್ನು ಒಡೆಯಲು ಅಪರೂಪದ ಪುರಾಣದ ಕಥೆಗಳನ್ನು ಹೆಣೆದಿದ್ದಾರೆ. ಇವು ಪೌರಾಣಿಕ ಕಥೆಗಳೆ ಆಗಿದ್ದರೂ ಕಥಾ ವಸ್ತು ಹಾಗೂ ಹೆಣೆದಿರುವ ರೀತಿ ವಿಭಿನ್ನವಾಗಿದೆ. ರಾಮ-ಸೀತೆಯ ರಾಮಾಯಣದಲ್ಲಿ ಚೂಡಾಮಣಿಯ ಮೂಲಕ ಅವರಿಬ್ಬರ ಪ್ರೀತಿ ಕಟ್ಟಿಕೊಟ್ಟಿರುವುದು, ಅರ್ಧನಾರೀಶ್ವರ ಪರಿಕಲ್ಪನೆ ಇವೆಲ್ಲವೂ ಓದುಗರಿಗೆ ಹೊಸತನವನ್ನು ಮೂಡಿಸುತ್ತವೆ.
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book