Beema Prabandhan Evam Prashashan
Author:
M. N. MishraPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Management0 Ratings
Price: ₹ 156
₹
195
Unavailable
<strong>‘</strong>बीमा प्रबन्ध एवं प्रशासन’ बीमा व्यवसाय के सफल संचालन की एकमात्र पुस्तक है। इसे गहन शोध और विस्तृत अध्ययन के बाद लिखा गया है। बीमा व्यवसाय का प्रबन्धन एवं निर्देशन कैसे किया जाए, इस पुस्तक के अध्ययन से पता लग सकता है।</p>
<p>इस पुस्तक में सात खंड हैं जो विभिन्न कार्यक्षेत्रों के संचालन में सहायक हैं। बीमा परिचय, प्रबन्ध एवं प्रशासन को प्रथम खंड में दिया गया है, जिसमें बीमा की परिभाषा एवं स्वभाव, बीमा का विकास एवं संगठन, बीमा प्रसंविदा, प्रबन्ध, प्रशासन एवं संगठन, जीवन बीमा निगम संगठन का रूप, सामान्य बीमा निगम, जीवन बीमा प्रसंविदा, सामुद्रिक बीमा प्रसंविदा और अग्नि बीमा परिचय एवं प्रसंविदा का वर्णन है। द्वितीय खंड में कार्यालय संगठन और प्रबन्ध की विवेचना है, जिसमें कार्यालय अभिन्यास एवं कार्य-दशाएँ, कार्यालय फर्नीचर, उपकरण एवं मशीनें, कार्यालय पद्धति, कार्यालय संगठन और कार्यालय प्रबन्ध का वर्णन है। कायिक प्रबन्ध का विश्लेषण तृतीय खंड में है जिसमें कार्यालय कार्यकर्त्ता प्रबन्धन, विक्रय संगठन एवं प्रबन्ध, अभिकर्त्ता की नियुक्ति, अभिकर्त्ता का प्रशिक्षण, पर्यवेक्षण एवं प्रेरणा और अभिकर्त्ता का नियंत्रण बताया गया है। चतुर्थ खंड विपणन का है जिसमें विक्रय-कार्यकर्त्ताओं का संगठन, कार्यक्षेत्रीय कार्यकर्त्ताओं के गुण, बीमा विक्रय विधि, प्रचार एवं तर्क, आक्षेपों का उत्तर, बीमा जब्ती नए व्यापार का अभिगोपन, बीमा कराने की विधि एवं चुनाव, बीमापत्र की शर्तें, नवकरण विधियों के प्रबन्ध का वर्णन है। पंचम खंड बीमापत्रधारियों की सेवा का है जिसमें बीमापत्रधारियों की सेवा, अध्यर्थन का भुगतान का वर्णन है। वित्तीय प्रबन्ध का वर्णन षष्ठम खंड में है जिसमें प्रव्याजि निर्धारण, कोष का प्रबन्ध, मूल्यांकन, संचय, कोष का विनियोग, लागत नियंत्रण, अंकेक्षण एवं परीक्षण का विवरण है। सप्तम खंड में बीमा अधिनियम एवं प्रसंविदा, जैसे—बीमा अधिनियम, 1938, जीवन बीमा अधिनियम, 1956, सामुद्रिक बीमा अधिनियम, 1963, सामान्य बीमा व्यवसाय (राष्ट्रीयकरण) अधिनियम, 1972, बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण, 2000 का विशद विश्लेषण है।</p>
<p>यह पुस्तक वर्तमान अर्थव्यवस्था के विकास और विस्तृतीकरण में मील का पत्थर है। यह पुस्तक आनेवाले समय में बीमा की विभिन्न समस्याओं के समाधान की गीता है जिसके विभिन्न सिद्धान्तों का उपयोग करके कठिन-से-कठिन समस्याओं का समाधान किया जा सकता है।</p>
<p>
ISBN: 9788180310898
Pages: 632
Avg Reading Time: 21 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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‘प्रबन्ध की पाठशाला’ शीर्षक यह पुस्तक हमें कुछ ऐसे ही पाठ पढ़ाती है, जो देखने में ऐसे लगते हैं कि उनका न व्यवसाय से कोई सम्बन्ध है और न उद्यम-उद्योग से, लेकिन वास्तव में उनके बिना आप एक छोटी-सी दुकान भी सफलतापूर्वक नहीं चला सकते।
पुस्तक के लेखक को स्वयं प्रबन्धन के क्षेत्र का लम्बा अनुभव रहा है, उन्होंने स्वयं यह देखा है कि वे मानवीय मूल्य, जो परिवार से लेकर समाज तक हर संस्था की आधारशिला साबित होते हैं, व्यावसायिक सफलता भी उन पर बहुत दूर तक निर्भर करती है।
जीवन के दु:ख, कष्ट, तकलीफ़ें यहाँ अपनी कार्यकुशलता को वैसे ही बढ़ाती हैं, जैसे जीवन के किसी अन्य क्षेत्र में। इसी तरह नई चीज़ों के प्रति जिज्ञासा, मन को ताक़त देनेवाली आस्था, परिवर्तनशीलता, अनासक्ति, ईर्ष्या और वैमनस्य से सायास परहेज़, जीवन की अनिश्चितता के प्रति सजगता, उपकार के प्रति ग्रहणशीलता और परोपकार के प्रति तत्परता आदि ये सभी बीज-मंत्र हैं, जिनसे हम न सिर्फ़ अपने प्रबन्धन-कौशल को नई आभा दे सकते हैं, बल्कि अपने आसपास सभी को सकारात्मक माहौल भी मुहैया करा सकते हैं।
If They Can Do Why Not You?
- Author Name:
Major J. Kishore
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
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