Vama-Bodhini
Author:
Navnita DevsenPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 100
₹
125
Unavailable
‘वामा-बोधिनी’ सिर्फ़ वामाओं में बोधोदय रचती है, ऐसा नहीं है। नवनीता देव सेन की यह उपन्यासिका, उसका व्यतिक्रम है जो आधुनिक बंगला साहित्य में, निस्सन्देह एक साधारण संयोजन है। उपन्यास का केन्द्र-बिन्दु, हालाँकि औरत ही है, लेकिन इसमें पुरुष-विरोधी हुंकार नहीं है, बल्कि उसके प्रति ममत्व-भाव है। सोलहवीं शती के मैमनसिंह की एक बंगाली महिला कवि की जीवनगाथा, बीसवीं शती की तीन अलग-अलग औरतों की कथा में घुल-मिल गई है। एक चिरन्तन मानवी की व्यथा-कथा; जिसमें रचे-बुने गए हैं, अतल मन की गहराइयों के अनगिनत अहसास!</p>
<p>हम सबकी ज़िन्दगी में परत-दर-परत अनगिनत युद्ध छिड़े हुए हैं—राजनीति बनाम नैतिक सच्चाई; प्रेम बनाम दायित्व; पांडित्य बनाम सृजनात्मक प्रतिभा; पुरुष शासित नीतिबोध बनाम जगत के भीतरी मूल्यबोध; सामाजिक सुनीति बनाम मानवीय आवेग—इन तमाम ख़तरनाक विषयों की लेखिका ने जाँच-परख की है। कमाल की बात यह है कि इसके बावजूद कहीं रस-भंग नहीं हुआ है, शिल्प ने कहीं भी जीवन के स्वाभाविक प्रवाह का अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि कथा-शैली में विलक्षण रूप से एक अभिनव तत्त्व का समावेश हुआ है।</p>
<p>अतीत और वर्तमान, अन्तर्जीवन और बाह्य जीवन, वक्तव्य और कथा-बयानी, गद्य और पद्य, यहाँ घुल-मिलकर एकमेक हो गए हैं। रिसर्च के दौरान लिए गए नोट्स, डायरी के पन्ने, प्रेमियों के ख़त, ग्रामीण बालाओं के गीत, नायिका की विचारधारा, सम्पादक का जवाब—इस सबको मिलाकर इस कथा में, बिलकुल नए रूप में, बेहद सख़्त लेकिन बहुमुखी सत्य का सृजन किया गया है, जो कथा के शिल्प में हीरे की तरह जड़ा हुआ है; हीरे ही की तरह शुभ्र-उज्ज्वल कठोर और अखंडित रूप में जगमगाता हुआ।
ISBN: 9788126709694
Pages: 135
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Chalo Kalkatta
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

-
Description:
मैंने पाँच उपन्यासों के द्वारा भारतवर्ष के इतिहास का परिक्रमण शुरू किया था। 1757 ई. में जिस दिन अंग्रेज़ों ने पहले-पहल भारतवर्ष में पाँव रखा था, उसी दिन शुरू हुआ यह परिक्रमण। ‘बेगम मेरी विश्वास’ इस परिक्रमण का सूत्रपात है। उसके पश्चात् ‘साहब बीबी गुलाम’, ‘खरीदी कौड़ियों के मोल’, ‘इकाई दहाई सैकड़ा' के साथ बीसवीं सदी के छठे दशक में जब भारत की पूर्वी सीमा चीनी आक्रमण से आक्रान्त थी, यह परिक्रमण सम्पूर्ण हुआ। उसके बाद स्वाधीनोत्तर युग के अति आधुनिक विक्षुब्ध बंगाल की राजधानी का चित्र हैं—‘चलो कलकत्ता’। बांग्ला में पहली बार जब यह पुस्तक प्रकाशित हुई, यहाँ कांग्रेस सरकार सत्तारूढ़ थी।
पाठक अगर इन पुस्तकों को कालानुक्रमिक भाव से पढ़ें, तो अर्थ के रस-ग्रहण में उन्हें विशेष सुविधा होगी।
—बिमल मित्र
Jadia Bai
- Author Name:
Kusum Khemani
- Book Type:

-
Description:
कुसुम खेमानी के नारी-विमर्श की प्रकृति एकदम भिन्न है। वे अपने स्त्री-चरित्रों का ऐसा उदात्तीकरण करती हैं कि इस धरती की होते हुए भी वे अपने अनोखे व्यक्तित्व के कारण किसी और ही जगत की लगती हैं। जड़ियाबाई उपन्यास भी एक ऐसी ही मारवाड़ी स्त्री के उत्कर्ष की गाथा है, जो धनाढ्य परिवार की होने के बावजूद धुर बचपन से ही प्राणी मात्र के लिए संवेदनशील और करुणामयी हैं एवं खरे जीवन मूल्यों में जीती हुई आश्चर्यजनक ढंग से वह शुरू से ही गांधी जी की ट्रस्टीशिप सिद्धान्त का घोर अनुयायी बन जाती हैं।
जड़ियाबाई कथनी में ही नहीं करनी में भी पंचशील के पाँचों सिद्धान्तों का अनुशीलन करती हैं। वे सर्वे भवन्तु सुखिन: के लिए अपना 'तन-मन-धन' सब कुछ अर्पित कर देती हैं। जड़ियाबाई अपने ज़मीनी सद्कर्मों के स्तूपाकार से वह ऊँचाई हासिल कर लेती हैं, जो उन्हें इस धरती पर ही अलौकिक बना देती हैं।
आश्चर्यजनक ढंग से जड़ियाबाई पूर्णत: गल्प के धरातल पर खड़ी होकर ऐसी काव्यात्मक गुणों की ऊँचाइयों पर परचम फहराती नज़र आती हैं, जो कल्पनातीत है। वे संवेदनशीलता से इतनी सराबोर हैं कि छोटे-से-छोटे कीड़े की कर्मठता और अवदान के प्रति भी कृतज्ञता ज्ञापित करती हैं।
जड़ियाबाई का आचार-व्यवहार समग्र प्रकृति के अणु-अणु के प्रति श्रद्धापूर्ण है। वे पृथ्वी की प्रकृति और इसके वासियों में ही उस अलौकिक दिव्य सत्ता को अनुभूत करती रहती हैं और उन्हीं के समक्ष श्रद्धावनत रहती हैं। वे उस असमी को मन्दिर, मस्जिद और शिवालों में नहीं ढूँढ़तीं, बल्कि यहाँ की माटी के कण-कण में उन्हें उसकी उपस्थिति महसूस होती रहती है।
Nacohus
- Author Name:
Purushottam Agarwal
- Book Type:

-
Description:
एक दशक पहले, आहत भावनाओं की हिंसक राजनीति के बढ़ते संकट पर टिप्पणी करते हुए, पुरुषोत्तम अग्रवाल ने एक व्यंग्य-लेख में, प्रस्ताव किया था, ‘आहट भावना आयोग का गठन’ कर ही दिया जाए...
अब यह उपन्यास...ज़बान पर लगते जा रहे नित नए तालों की डरावनी ख़बर की पड़ताल करने के साथ ही, सूचना और मनोरंजन के सब तरफ़ पसरते जंजाल में, तकनीकी आतंक तले चेतना के हाशिए पर धकेले जा रहे विवेक की चीत्कार को स्वर देता है यह उपन्यास...
पुरुषोत्तम अग्रवाल का पहला उपन्यास ‘नाकोहस’ नई-नई गढ़ी जा रही वास्तविकता की पड़ताल के लिए गढ़े गए ‘बौनैसर’ और ऐसे अनेक विचारोत्तेजक शब्दों के कारण भी ध्यान खींचता है...
स्वयं ‘नाकोहस’ भी ऐसा ही एक शब्द है...
Raat Chor Aur Chand
- Author Name:
Balwant Singh
- Book Type:

-
Description:
पालीसिंह बहुत सालों बाद अपने गाँव लौटा है। लारी से उतरकर पाँच कोस चलकर गाँव पहुँचता है। जहाँ बचपन की उसकी सारी यादें—रास्ते, पेड़ों, पगडंडियों, हर कोने-कोने में छाई हुई है। बचपन की यादें एक छोटे बच्चे की उत्सुकता-भरी निगाहों की तरह उसके अन्दर उन लोगों के बारे में जानने की इच्छा पैदा कर देती हैं जिन्हें वो सालों पहले छोड़कर महानगर कलकत्ता भाग गया था। जैसे-जैसे वह गाँव की तरफ़ बढ़ता, वैसे ही हवाओं की मस्ती उसे पुरानी यादों से मदमस्त करती जाती और फिर उसे याद आती है अपनी सरनो की जिसे बचपन में वह बहुत तंग किया करता था।
बलवन्त सिंह का यह उपन्यास अतीत की ललक को बख़ूबी उभारता हुआ आहिस्ते से इस बात का भी अहसास कराता चलता है कि वर्तमान अक्सर वैसा नहीं होता, जैसा हम सोचते हैं। समय अक्सर अपने दाँवपेच बदलता रहता है और इसी दाँवपेच के बीच कैसा है पालीसिंह, जो अपने अतीत को पूरी तरह छोड़ नहीं पाता। पालीसिंह सरनो से प्यार करता है और उसे पाने के लिए वह अपने आप को हर पल बदलने की कोशिश भी करता है। पालीसिंह ने पहली बार अपने जीवन में प्रेम को महसूस किया है पर इनसानी फ़ितरत और नियत को कभी-कभी ख़ुद इनसान भी समझ नहीं पाता है। लेकिन बलवन्त सिंह ने अपने सरल और सीधे अन्दाज़ में इस जटिलता को पाठकों के सामने पेश किया है।
Gita
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
‘गीता’ शीर्षक यह उपन्यास पहले ‘पार्टी कामरेड’ नाम से प्रकाशित हुआ था। इसके केन्द्र में गीता नामक एक कम्युनिस्ट युवती है जो पार्टी के प्रचार के लिए उसका अख़बार बम्बई की सड़कों पर बेचती है और पार्टी के लिए फंड इकट्ठा करती है। पार्टी के प्रति समर्पित निष्ठावान गीता पार्टी के काम के सिलसिले में अनेक लोगों के सम्पर्क में आती है। इन्हीं में से एक पदमलाल भावरिया भी है जो पैसे के बल पर युवतियों को फँसाता है। उसके साथी एक दिन उसे अख़बार बेचती गीता को दिखाकर फँसाने की चुनौती देते हैं। गीता और भावरिया का लम्बा सम्पर्क अन्ततः भावरिया को ही बदल देता है।
अपने अन्य उपन्यासों की तरह इस उपन्यास में भी यशपाल देश की राजनीति और उसके नेताओं के चारित्रिक अन्तर्विरोधों को व्यंग्यात्मक शैली में उद्घाटित करते हैं। उपन्यास में कम्यून जीवन का बड़ा विश्वसनीय अंकन हुआ है जिसके कारण इस उपन्यास का ऐतिहासिक महत्त्व है। इसके लिए काफ़ी समय तक यशपाल मुम्बई में स्वयं कम्यून में रहे थे। अपने ऊपर लगाए गए प्रचार के आरोप का उत्तर देते हुए यशपाल उपन्यास की भूमिका में संकेत करते हैं कि वास्तविकता को दर्पण दिखाना भी प्रचार के अन्तर्गत आ सकता है या नहीं, यह विचारणीय है।
Kit Aayun Kit Jaayun
- Author Name:
Shaligram
- Book Type:

-
Description:
‘कित आऊँ कित जाऊँ’ उपन्यास का लम्बा-चौड़ा फलक उत्तर बिहार की नदियों से घिरे गाँव का दृश्य उपस्थित करता...दक्षिण गंगा के कछार को छूता...उत्तर नेपाल के तराई भाग वाली मधेसी संस्कृति को एकीकृत करता हुआ समाज के भिन्न-भिन्न पात्रों की सहजता को बटोरता आगे बढ़ता है। इसमें हमें सुरपत और निरपत जैसे निम्नवर्गीय चरित्रों के संघर्षरत जीवन में अकिंचनता का बोध होते हुए भी; उनके अन्दर छिपे धैर्य, साहस एवं आत्मविश्वास की जिजीविषा का परिचय मिलता है। उपन्यास के सभी पात्र भिन्न-भिन्न रंग में रँगे हुए भी अपनी अस्मिता को बचाते हुए वे उस सादे एवं शाश्वत रंग में अपने को रँगाए रखते हैं जो ‘सब रंग मिटै; मिटे नहीं वह जो अमिट-अविनाशी’।
सुरपत, निरपत से लेकर भुजंगीचा जैसे माँझी-मल्लाह या टम्मन साहू, अनूप लाल, घोटल झा, तीरो सिंह जैसे मध्यवर्गीय चरित्र या कुमार साहब, रानीदाय, टापसी, लॉलीडीन, ठाकुर गरजू सिंह एवं पी.के. मलिक जैसे उच्चवर्गीय चरित्रों का यहाँ शुमार मिलता है जिससे उपन्यास की सार्थकता बनी रहती है। यह उपन्यास लघुता में छिपे अपने उस विराट को हमारे सम्मुख प्रस्तुत करता है जो अदृश्य होते हुए भी दृश्य है।
Khali Naam Gulab Ka
- Author Name:
Umberto Eco
- Book Type:

-
Description:
प्रख्यात इतालवी कथाकार, सौन्दर्यशास्त्री और साहित्य-चिन्तक अम्बर्तो इको की यह क्लासिक औपन्यासिक कृति चौदहवीं सदी के एक ईसाई मद में घटित रोमांचकारी घटनाओं का वृत्तान्त है। मठ में एक के बाद एक होती आधा दर्जन से ज़्यादा संन्यासियों की रहस्यमय हत्याएँ और उपन्यास के मुख्य चरित्र, फ़्रांसिस्कन संन्यासी और पंडित ब्रदर विलिमय द्वारा इस रहस्य को भेदने की कोशिशें, एक दूसरे गहरे स्तर पर, ज्ञान की क़िलेबन्दी तथा उसको तोड़ने के विलक्षण रूपक में फलित होती हैं जिसमें पुस्तकें और बौद्धिक प्रत्यय, पठन, ज्ञान और जिज्ञासा के संवेग, धार्मिक आस्था और श्रद्धा के उत्कट, हिंसक आवेग जैसी अनेक चीज़ें अपनी साधारण ऐन्द्रियता के साथ हमारे अनुभव का हिस्सा बनती हैं। एक ओर चौदहवीं सदी के ईसाई जगत के धर्मपरीक्षणों और धर्मयुद्धों की पृष्ठभूमि में घटित होती रहस्य और रोमांच से भरी रक्तरंजित घटनाएँ, और दूसरी ओर, मानो, योरोपीय रेनेसां और एनलाइटमेंट की अगुवाई करते, बेहद सघन किन्तु उतने ही प्रांजल और अन्तर्दृष्टिपूर्ण बौद्धिक विमर्श, एक-दूसरे से अन्तर्गुम्फित होकर, एक-दूसरे में रूपान्तरित होकर जिस महान त्रासद रूपक की रचना करते हैं, वह इस उपन्यास का चमत्कृत कर देनेवाला अनुभव है।
Nashtar
- Author Name:
Hasan Shah
- Book Type:

-
Description:
‘नश्तर’ को पहला भारतीय उपन्यास कहा जा सकता है। सन् 1790 में जब हसन शाह ने इसे लिखा था तब तक हमारे यहाँ अंग्रेज़ी तर्ज़ के ‘नॉवेल’ का प्रादुर्भाव नहीं हुआ था।
यह वो ज़माना था जब भारत में नवाबी शानो-शौक़त अपने उतार पर थी और अंग्रेज़ों ने जगह-जगह अपनी जड़ें जमाना शुरू कर दिया था। अब वे ही स्वयं को नवाब समझने लगे थे और यहाँ की नाचने-गाने वाली स्त्रियों से अपना मनोरंजन करना उनका शौक़ बन गया था। इसके चलते इस व्यवसाय से जुड़ी स्त्रियों के समूह भी रोज़ी-रोज़गार के सिलसिले में अंग्रेज़ी दरबारों से जुड़ने लगे थे।
‘नश्तर’ का कथानायक ऐसे ही एक समूह की एक लड़की के प्रेम में पड़ जाता है जिसका अंजाम किसी ग्रीक ट्रेजेडी से कम नहीं होता। खानम जान के मोहक लेकिन सशक्त व्यक्तित्व ने उस ट्रेजेडी को जो गरिमा प्रदान की है, वह अद्भुत है।
‘नश्तर’ एक आत्मकथात्मक उपन्यास है। एक प्रेमकथा। एक त्रासदी...किन्तु यह केवल प्रेम की नहीं, बल्कि नृत्य-संगीत और कला-संस्कृति से जुड़ी एक पूरी ज़िन्दगी, पूरी परम्परा की भी त्रासदी है।
मूलत: फ़ारसी भाषा में रची गई अठारहवीं शताब्दी की इस कृति में शिल्प के स्तर पर आधुनिकता के अनेक लक्षणों को भी देखा जा सकता है।
Bhojan, Poshan Aur Swachchhata
- Author Name:
Dr. Virendra Singh Yadav +1
- Book Type:

- Description: किसी भी व्यक्ति को स्वस्थ, स्फूर्तिमय और रोगमुक्त रहने के लिए स्वास्थ्यवर्धक भोजन, उत्तम पोषण और स्वच्छता का ध्यान सदैव रखना आवश्यक है। व्यक्ति प्रतिदिन संतुलित और पौष्टिक आहार लेकर, पर्याप्त जल एवं तरल पदार्थों का सेवन करके व्यक्ति कुपोषित होने से बच सकता है और रोगमुक्त होकर स्वस्थ जीवन जी सकता है। समाज में प्रचलित सामान्य गैर-संचारी बीमारियों, जैसे— डायबिटीज, उच्च रक्तचाप या अति तनाव, मोटापा या मेदुरता, कब्ज, अतिसार या डायरिया, टाइफायड या आंत्रज्वार के होने के कारण, बचाव और उपचार का ध्यान रखकर हम स्वयं तथा अपने परिवार और आसपास के इष्ट मित्रों को इन घातक बीमारियों से बचा सकते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्वीकृत राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों हेतु पुनर्गठित-एकीकृत सह-पाठ्यक्रम के सभी संकायों के स्नातक अर्थात् बी.ए., बी.एस-सी., बी.कॉम., बी.एस-सी. कृषि आदि के प्रथम सेमेस्टर या अन्य सेमेस्टर हेतु निर्धारित इस पाठ्यपुस्तक में भोजन, पोषण एवं स्वच्छता से संबंधित और पाठ्यक्रम में निर्धारित उपर्युक्त सभी क्षेत्रों के विषय में सरल, सहज व सुबोध भाषा में विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला गया है, ताकि प्रदेश सरकार द्वारा निर्धारित इस सह-पाठ्यक्रम के समस्त बिंदुओं को विद्यार्थी आसानी से समझ सकें।
Aaina Saaz
- Author Name:
Anamika
- Book Type:

-
Description:
हमारे दौर की राजनीति, समाज, आदमी–सब अपने भीतर से लेकर बाहर तक जाने कैसे तो जंजाल में उलझे हुए हैं, और जब उसे सुलझाने चलते हैं, उस जाल से निकलकर खुली, साफ़ जगह में आने के लिए हाथ-पाँव पटकते हैं तो सुलझते-निकलते नहीं, और उलझ जाते हैं।
क्या नहीं है हमारे पास? जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, अब वह भी है, और भरोसा है कि अब जिसकी कल्पना करेंगे, वह भी कल हो उठेगा।
लेकिन ताला अगर कहीं लग गया है तो वह कल्पना ही पर है; और उसके संगी-साथी दूसरे कई मनोभाव-मनोशक्तियाँ और इनका सरदार एक सूफ़ी मन, उजली कामनाओं, और धरती-आकाश को एक करते धवल सपनों की छतरी; यह सब उस ताले के भीतर कहीं छटपटा-सिसक रहे हैं।
खुसरो एक पैदा हुआ, मध्यकालीन कहे जानेवाले उस साँवले हिन्दुस्तान में जिसकी छतें इतनी ऊँची होती थीं, कि हम बौनों की तिमंज़िला बाँबियाँ उनमें खड़ी हो जाएँ। यह उस ख़ुसरो की आत्मकथा से रचा हुआ उपन्यास है जिसमें ख़ुसरो की चेतना को जीनेवाले आज के कुछ सूफ़ी मनवालों की कहानी भी साथ में पिरो दी गई है।
ख़ुसरो इस कथा में अपना वह सब बताते हैं जिस तक हम उनकी नातों, क़व्वालियों और पहेलियों की ओट में नहीं पहुँच पाते–कि उनका एक परिवार था, एक बेटी थी, बेटे थे, पत्नी थी, और थे निज़ाम पिया जिनकी निगाहों के साए तले उन्होंने वह सब सहा जो एक साफ़, हस्सास दिल अपने ख़ून-सने वक़्तों और बेलगाम सनकों से हासिल कर सकता था।
और इसमें कहानी है सपना की, नफ़ीस की, ललिता दी और सरोज की भी, जो आज के हत्यारे समय के सामने अपने दिल के आईने लिए खड़े हैं, लहूलुहान हो रहे हैं, पर हट नहीं रहे, जा नहीं रहे, क्योंकि वे उकताकर या हारकर अगर चले गए तो न पद्मिनियों के जौहर पर मौन रुदन करनेवाला कोई होगा, न इंसानियत को उसके क्षुद्रतर होते वजूद के लिए एक वृहत्तर विकल्प देनेवाला।
Kind of Freedom
- Author Name:
Sakshi Charu Srivastava
- Book Type:

- Description: There is nothing more artistic than loving rude people. This may sound strange but these are the people who pose different challenges for us in countering them we sometimes discover some untold joys. Everyone we meet in life leaves behind a trace of their presence. For better or worse, they change us. And the moments witnessing aroma of these hours are the most sublime ones. Sometimes just being with someone without sharing any look or word makes us feel some unknown joys not experienced in routine meetings. This debut book, kind of freedom, is one such collection which consists of many such unheard joys and a freedom of expressions. It will fill your heart with emotional outburst in discovering your own unique joys.
Elan Gali Zinda Hai
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

-
Description:
कहा गया है कि अगर पृथ्वी पर कहीं स्वर्ग है तो वह काश्मीर ही है और ‘ऐलान गली ज़िन्दा है’ उपन्यास इसी स्वर्ग के हाशिये पर दरिद्रता, अज्ञान और अभावों में पल रहे लोगों की संस्कृति और जीवन-संघर्षों को बहुत अन्तरंग विवरणों के साथ उजागर करता है। जहाँ आज धर्म, जाति और भाषा के नाम पर आदमी-आदमी के बीच दीवारें खड़ी की जा रही हों, वहाँ ऐलान गली के अनवर मियाँ, दयाराम मास्टर, संसारचन्द आदि लोग हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिक सौहार्द के प्रतीक बनकर उभरते हैं। दूसरी ओर बेरोज़गारी के अन्धकार में पल रही युवा पीढ़ी है, जो रोज़गार की तलाश में बड़े शहरों की ओर दौड़ रही है। अवतारा ऐसी ही युवा पीढ़ी का प्रतिनिधि चरित्र है, जिसे आजीविका के लिए मुम्बई जैसे महानगर में जाना पड़ता है। महानगरीय सुविधाओं और चकाचौंध के बीच वह ख़ुद को अजनबी और अस्तित्वहीन महसूस करता है, उसके ज़ेहन में ऐलान गली प्यार के समुद्र की तरह पछाड़ें मारती है।
ऐलान गली के निवासियों के आपसी सम्बन्धों के विविध आयामों को इस उपन्यास में इतने विस्तार और सूक्ष्मता से चित्रित किया गया है कि एक समूचे समाज का रूप उभरकर सामने आता है। वस्तुतः अपने तमाम पिछड़ेपन के बावजूद ऐलान गली वहाँ के प्रवासियों और निवासियों के दिल-दिमाग़ में उसी तरह ज़िन्दा है, जिस तरह फूलों में सुगन्ध।
Shreeman Yogi
- Author Name:
Ranjeet Desai
- Book Type:

- Description: श्रीमान योगी रणजीत देसाई की यह कालजयी रचना अपने मूल मराठी प्रकाशन के कुछ ही समय बाद मराठी भाषियों के बीच जातीय स्मृति ग्रन्थ जैसी प्रतिष्ठा प्राप्त करने में सफल हुई है। जितनी कसावट से इस सुदीर्घ उपन्यास में मुगलकालीन दक्खिन का समय बुना गया है, जिस तरह इसमें सह्यादि क्षेत्र के मनुष्य तो क्या, पत्थर तक बोलते सुनाई देते हैं, उसे देखते हुए महाराष्ट्र में इसका इतना लोकप्रिय हो जाना स्वाभाविक है। लिहाजा इस उपन्यास का हिन्दी में प्रकाशन भी वैसी ही बड़ी घटना है, जैसी मराठी में इसके प्रथम प्रकाशन की घटना। जहाँ-तहाँ भटकने पर मजबूर एक विद्रोही मराठा सामंत की लगभग परित्यक्ता पत्नी अपने बेटे के व्यक्तित्व में अपनी और अपनी समूची जाति की पीड़ाएँ छाप देती है। हीरे-सा कड़ा और पानी सा तरल किशोर शिवाजी हिंदवी स्वराज्य का स्वप्न देखने का दुस्साहस करता है और यही दुस्साहस न सिर्फ उसका बल्कि उसके समूचे समय का भाग्य तय करने लगता है। तलवारों की खनखनाहटों के बीच धीरे-धीरे एक ऐसा चेहरा उभरता है, जिसके लिए जय-पराजय, जीवन-मृत्यु, लाभ-हानि का फर्क मिट चुका है, जो राजा भी है और योगी भी, जिसे समर्थ गुरु रामदास श्रीमान योगी कहते हैं। किसी महानायक को केन्द्र में रखकर उपन्यास-लेखन एक प्रचलित विधा रही है लेकिन कल्पना के हाथ हमेशा बँधे होने के चलते इसे सर्वाधिक कठिन विधाओं में से एक माननेवाले भी कम नहीं रहे हैं। महानायकों के इर्द-गिर्द जैसे मिथकीय घटाटोप बन जाते हैं, उन्हें भेद कर व्यक्ति की दैन्यताओं, दुर्बलताओं और द्वन्द्वों तक पहुँचना, उन्हें चित्रित करना बहुत कठिन हो जाता है। रणजीत देसाई की रचनात्मक शक्ति इसी बात में है कि वे शिवाजी की स्थापित मूर्ति के भीतर, उसकी अनन्त तहों में घुसते हुए सचमुच के शिवाजी और उनके धड़कते हुए समय तक पहुँच जाते हैं। वे महानायक को जैसे का तैसा स्वीकार नहीं करते, बल्कि उसके जीवन-तत्त्वों से उसकी पुनर्रचना करते हैं।
Apsara Ka Shap
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

-
Description:
स्वातंत्र्योत्तर भारत के शिखरस्थ लेखकों में प्रमुख यशपाल ने अपने प्रत्येक उपन्यास को पाठक के मन-रंजन से हटाकर उसकी वैचारिक समृद्धि को लक्षित किया है। विचारधारा से उनकी प्रतिबद्धता ने उनकी रचनात्मकता को हर बार एक नया आयाम दिया, और उनकी हर रचना एक नए तेवर के साथ सामने आई ! 'अप्सरा का शाप' में उन्होंने दुष्यन्त-शकुन्तला के पौराणिक आख्यान को आधुनिक संवेदना और तर्कणा के आधार पर पुनराख्यायित किया है।
यशपाल के शब्दों में : 'शकुन्तला की कथा पतिव्रत धर्म में निष्ठा की पौराणिक कथा है। ‘महाभारत’ के प्रणेता तथा कालिदास ने उस कथा का उपयोग अपने-अपने समय की भावनाओं, मान्यताओं तथा प्रयोजनों के अनुसार किया है। उन्हीं के अनुकरण में 'अप्सरा का शाप' के लेखक ने भी अपने युग की भावना तथा दृष्टि के अनुसार शकुन्तला के अनुभवों की कल्पना की है। उपन्यास की केन्द्रीय वस्तु दुष्यन्त का शकुन्तला से अपने प्रेम सम्बन्ध को भूल जाना है, इसी को अपने नज़रिए से देखते हुए लेखक ने इस उपन्यास में नायक 'दुष्यन्त' की पुनर्स्थापना की है और बताया है कि नायक ने जो किया, उसके आधार पर आज के युग में उसे धीरोदात्त की पदवी नहीं दी जा सकती।
Waiting Based On What Could Have Happened
- Author Name:
Prashant Gupta
- Book Type:

- Description: "It is 2017, and the world is getting crazy about a new security system “, The finger-print security”. It is by far theoretically the best security system to be produced and applied to this mass scale. No one now has ever to remember and care to protect their password anymore. Kaushal shares with his two best friends the hack he has found. A year later, it turns out that the company they are working for has stolen money, using the same hack that Kaushal had discovered and shared only with his friends. Victims have now filed a police complaint against the company. But to everyone's surprise, the firm's CEO, Mr Sanjay keer, has absconded. Without any trace of his existence ever in the city, he vanishes...".
Purnmidam
- Author Name:
Saroj Kaushik
- Book Type:

- Description: , ऋचा थी—अतुलनीय, अनिंद्य, उसका हृदय एक छलछलाता हुआ प्रवाह था—प्रेम और निष्ठा के पारदर्शी जल से लबालब। उसकी आत्मा जैसी सहजता, वैसी पवित्रता को आजीवन बनाए रखना सरल नहीं। न वैसा आवेग, न वैसी अकुंठ तत्परता और न दूसरों के प्रति ऐसा नि:संकोच स्वीकार जीवन जीते हुए अक्षुण्ण रखना सम्भव है। जीवन की यात्रा में अक्सर मन और जीवन के पैर मैले हो ही जाते हैं, लेकिन ऋचा के नहीं। और वीरेश्वर जैसे उसी के लिए बना हुआ, उतना ही दृढ़, उसी अनुपात में स्वाभिमानी और ईमानदार। मन और वचन के संकल्पों को लेकर उतना ही गम्भीर और भरोसेमन्द। ऋचा और वीरेश्वर की यह कहानी स्त्री-जीवन के साथ-साथ स्त्री-पुरुष सम्बन्धों के बारे में एक नई दृष्टि देती है। स्त्री यहाँ पूर्णत: एक जिजीविषा का स्वरूप ग्रहण कर लेती है जो अपने आत्म की खोज-यात्रा में जीवन और मूल्यों के नए-नए सोपान चढ़ती चली जाती है। ब्राह्मण होते हुए वह दलित युवक वीरेश्वर से प्रेम करती है और पूरा जीवन उस प्रेम को अपनी आस्था का अवलम्बन बनाए रखती है और स्वयं भी उसके लिए एक स्तम्भ बनी रहती है। इसी रिश्ते से जन्मी उनकी बेटी प्रज्ञा पुन: समाज की रूढ़ियों और स्वयं उनके लिए एक मानक बनकर सामने आती है। नए मूल्यों की स्थापना करता सहज भाषा और शिल्प में अत्यन्त पठनीय उपन्
PT. RAJENDRA ARUN : RAM KAAJ KARIBE KO AATUR
- Author Name:
Dr. Vinod Bala Arun
- Book Type:

- Description: "मॉरीशस के हिंदू समाज के मन में श्री राजेंद्र अरुण के प्रति अत्यंत स्नेह, सम्मान और आत्मीय भाव है। सन् 1974 में वे प्रधानमंत्री सर शिवसागर रामगुलाम के साप्ताहिक पत्र ‘जनता’ के प्रबंध संपादक बने। सन् 1982 में उनके जीवन में एक नया मोड़ आया। एम.बी.सी. रेडियो पर उन्होंने रामायण की व्याख्या पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम ‘मंथन’ आरंभ किया। लोगों ने इसे खूब सराहा। यह कार्यक्रम अब तक ‘मानस मंथन’ नाम से जारी है। उनके रेडियो कार्यक्रम की लोकप्रियता से ‘रामकथा’ का आरंभ हुआ। सन् 2000 के लगभग से श्री अरुणजी के मन में यह विचार आने लगा कि एक संस्था बनाकर रामकथा का विश्व स्तर पर प्रचार-प्रसार करें। सन् 2001 में उनके इस विचार को ‘रामायण सेंटर’ की स्थापना के साथ ठोस आधार प्राप्त हुआ। जन-मन के हृदय में रामायण गुरु के रूप में प्रतिष्ठित पं. राजेंद्र अरुण के 70वें जन्मदिन पर उन्हें उपहार रूप में भेंट करने के लिए इस पुस्तक के प्रकाशन का विचार हमारे मन में आया। इस पुस्तक में आत्मीय जनों द्वारा अरुणजी पर लिखे गए लेख, अरुणजी द्वारा लिखी गई कविताएँ, उनके चित्र, पत्र-पत्रिकाएँ जिनमें उन पर या उनका कुछ प्रकाशित है, ‘जनता’ समाचार-पत्र की कुछ कतरनें और उनकी कुछ पुस्तकों के अंश तथा एक लंबा साक्षात्कार और अरुणजी को प्राप्त कुछ सम्मान और पुरस्कार आदि संकलित हैं। ‘मॉरीशस के तुलसी’ पं. राजेंद्र अरुण के जीवन, व्यक्तित्व और कृतित्व के सम्यक् रूप का दिग्दर्शन करानेवाला संपूर्ण ग्रंथ। "
Plague
- Author Name:
Albert Camus
- Book Type:

- Description: ‘प्लेग’ में एक जनसमूह पर महामारी के रूप में आई भीषण विपत्ति का और उससे आक्रान्त लोगों की वैयक्तिक और सामूहिक प्रतिक्रियाओं का चरम यथार्थवादी अंकन किया गया है, साथ ही सर्वग्रासी भय, आतंक, मृत्यु और तबाही के बीच अजेय मानवीय साहस की मार्मिक संघर्षगाथा भी प्रस्तुत की गई है।
Parti Parikatha
- Author Name:
Phanishwarnath Renu
- Book Type:

- Description: इस उपन्यास को पढ़ते हुए प्रत्येक संवेदनशील पाठक स्पन्दनीय ज़िन्दगी के सप्राण पन्नों को उलटता हुआ-सा अनुभव करेगा। सहृदयता के सहज-संचित कोष के रस से सराबोर प्रत्येक शब्द, हर गीत की आधी-पूरी कड़ी ने मानव-मन के अन्तरतम को प्रत्यक्ष और सजीव कर दिया है। दो पीढ़ियों के जीवन के विस्तृत चित्रपट पर अनगिनत महीन और लयपूर्ण रेखाओं की सहायता से चतुर कथाशिल्पी ने एक अमित कथाचित्र का प्रणयन किया है। इस महाकाव्यात्मक उपन्यास को पढ़कर समाप्त करने तक पाठक अनेक चरित्रों, घटना-प्रसंगों, संवादों और वर्णन-शैली के चमत्कारों से इतना सामीप्य अनुभव करने लगेंगे कि उनसे बिछुड़ना एक बार उनके हृदय में अवश्य कसक पैदा करके रहेगा।
Sahsra Netradhari Nayak
- Author Name:
Karma Ura
- Book Type:

-
Description:
अंग्रेज़ी के इस पहले भूटानी उपन्यास ‘सहस्र नेत्रधारी नायक’ (द हीरो विद ए थाउजैंड आइज़) की कहानी दूसरे भूटान नरेश के राज्यकाल के समय की है, जिसके केन्द्र में लामा से राजदरबारी बने व्यक्ति का जीवन है। साथ ही साथ लुप्तप्राय होती संस्कृति का चित्रण है, जो अब इतिहास है।
उपन्यास में कई घटनाक्रम हूबहू हैं, कहीं-कहीं लेखक कर्मा ऊरा ने कल्पनाशक्ति का इस्तेमाल किया है, जिससे उपन्यास की रोचकता और पठनीयता बढ़ गई है।
उपन्यास के नायक का जन्म भूटान के एक ग्रामीण शिंखार लामा परिवार में हुआ था किन्तु स्थितियाँ ऐसी बदलीं कि यह लामा द्वितीय भूटान नरेश के राजदरबार में परिचर नियुक्त हो गया। राजपरिवार और शासन-व्यवस्था के साथ यह साधारण नायक भूटान के बहुआयामी जीवन से पाठक का परिचय कराता है।
नायक के चालीस वर्षों के जीवनकाल की अवधि भूटान के इतिहास में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। कर-प्रणाली में सुधार, राष्ट्रीय असेम्बली की स्थापना, भूटान के संयुक्त राष्ट्र में प्रवेश के अलावा आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक जीवन में विकास—इस काल की महत्त्वपूर्ण उपलब्धियाँ हैं। लेखक ने तत्कालीन राजदरबार के एक परिचर की दिनचर्या, दरबारी गतिविधियों, परम्पराओं, मूल्यों, धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ व्यक्तिगत प्रेम-सम्बन्धों और षड्यंत्रों का भी संवेदनशीलता के साथ चित्रण किया है। अत्यन्त महत्त्वपूर्ण ऐतिहासिक उपन्यास।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book