Jadia Bai
Author:
Kusum KhemaniPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 120
₹
150
Available
कुसुम खेमानी के नारी-विमर्श की प्रकृति एकदम भिन्न है। वे अपने स्त्री-चरित्रों का ऐसा उदात्तीकरण करती हैं कि इस धरती की होते हुए भी वे अपने अनोखे व्यक्तित्व के कारण किसी और ही जगत की लगती हैं। जड़ियाबाई उपन्यास भी एक ऐसी ही मारवाड़ी स्त्री के उत्कर्ष की गाथा है, जो धनाढ्य परिवार की होने के बावजूद धुर बचपन से ही प्राणी मात्र के लिए संवेदनशील और करुणामयी हैं एवं खरे जीवन मूल्यों में जीती हुई आश्चर्यजनक ढंग से वह शुरू से ही गांधी जी की ट्रस्टीशिप सिद्धान्त का घोर अनुयायी बन जाती हैं।</p>
<p>जड़ियाबाई कथनी में ही नहीं करनी में भी पंचशील के पाँचों सिद्धान्तों का अनुशीलन करती हैं। वे सर्वे भवन्तु सुखिन: के लिए अपना 'तन-मन-धन' सब कुछ अर्पित कर देती हैं। जड़ियाबाई अपने ज़मीनी सद्कर्मों के स्तूपाकार से वह ऊँचाई हासिल कर लेती हैं, जो उन्हें इस धरती पर ही अलौकिक बना देती हैं।</p>
<p>आश्चर्यजनक ढंग से जड़ियाबाई पूर्णत: गल्प के धरातल पर खड़ी होकर ऐसी काव्यात्मक गुणों की ऊँचाइयों पर परचम फहराती नज़र आती हैं, जो कल्पनातीत है। वे संवेदनशीलता से इतनी सराबोर हैं कि छोटे-से-छोटे कीड़े की कर्मठता और अवदान के प्रति भी कृतज्ञता ज्ञापित करती हैं।</p>
<p>जड़ियाबाई का आचार-व्यवहार समग्र प्रकृति के अणु-अणु के प्रति श्रद्धापूर्ण है। वे पृथ्वी की प्रकृति और इसके वासियों में ही उस अलौकिक दिव्य सत्ता को अनुभूत करती रहती हैं और उन्हीं के समक्ष श्रद्धावनत रहती हैं। वे उस असमी को मन्दिर, मस्जिद और शिवालों में नहीं ढूँढ़तीं, बल्कि यहाँ की माटी के कण-कण में उन्हें उसकी उपस्थिति महसूस होती रहती है।
ISBN: 9788126729371
Pages: 168
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Carlo Collodi
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- Description: पिनोकियो के कारनामेद एडवेंचर्स ऑफ पिनोकियो (इतालवी : ले एडवेंचर डि पिनोकियो; जिसे अक्सर अंग्रेजी में पिनोकियो के रूप में संदर्भित किया जाता है) इतालवी लेखक कार्लो कोलोडी द्वारा छत्तीस अध्यायों का एक बच्चों का कॉमेडी फंतासी उपन्यास है। पहले पंद्रह अध्याय मूल रूप से बच्चों की साप्ताहिक पत्रिका जिओर्नेल प्रति बम्बिनी में 7 जुलाई, 1881 और 18 फरवरी, 1882 के बीच स्टोरिया डि उन बुराटिनो (‘एक कठपुतली की कहानी’) शीर्षक के तहत क्रमबद्ध किए गए थे। उन अध्यायों को 1883 में, इक्कीस अतिरिक्त अध्यायों के साथ, पुस्तक के रूप में फिर से प्रकाशित किया गया। उपन्यास का शीर्षक चरित्र और नायक एक जीवित लकड़ी की कठपुतली है, जिसे गेपेटो नामक एक खिलौना निर्माता ने बनाया है जो उसे अपने दत्तक पुत्र के रूप में लेता है। पिनोकियो प्रारंभ में अवज्ञाकारी और शरारती है। वह अपने पिता को त्याग देता है और रोमांच की तलाश में निकल जाता है। पिनोकियो को उसके कई दुष्कर्मों के लिए फाँसी दिए जाने के साथ ही मूल समाचार पत्र क्रमांकन समाप्त हो गया। विस्तारित उपन्यास संस्करण में, पिनोकियो को सोलहवें अध्याय में एक परी द्वारा बचाया जाता है। परी पिनोकियो को शिक्षित करती है और उसे अपने तरीके बदलने के लिए प्रेरित करती है। अपने अच्छे व्यवहार के पुरस्कार के रूप में, पिनोकियो अंततः एक वास्तविक लड़के में बदल जाता है। उपन्यास का लगभग दो सौ पचास विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया गया है। द एडवेंचर्स ऑफ पिनोकियो के विभिन्न संगीत, मंच, टेलीविजन और फिल्म रूपांतरण हुए हैं, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध वॉल्ट डिज़्नी की 1940 की एनिमेटेड फिल्म पिनोकियो है। झूठ बोलने पर किसी की नाक बढ़ने का विचार, जिसे द एडवेंचर्स ऑफ पिनोकियो में पेश किया गया था, लोकप्रिय पौराणिक कथाओं में शामिल हो गया है।
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