Jadia Bai
(0)
Author:
Kusum KhemaniPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
150
₹ 120 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
कुसुम खेमानी के नारी-विमर्श की प्रकृति एकदम भिन्न है। वे अपने स्त्री-चरित्रों का ऐसा उदात्तीकरण करती हैं कि इस धरती की होते हुए भी वे अपने अनोखे व्यक्तित्व के कारण किसी और ही जगत की लगती हैं। जड़ियाबाई उपन्यास भी एक ऐसी ही मारवाड़ी स्त्री के उत्कर्ष की गाथा है, जो धनाढ्य परिवार की होने के बावजूद धुर बचपन से ही प्राणी मात्र के लिए संवेदनशील और करुणामयी हैं एवं खरे जीवन मूल्यों में जीती हुई आश्चर्यजनक ढंग से वह शुरू से ही गांधी जी की ट्रस्टीशिप सिद्धान्त का घोर अनुयायी बन जाती हैं।</p> <p>जड़ियाबाई कथनी में ही नहीं करनी में भी पंचशील के पाँचों सिद्धान्तों का अनुशीलन करती हैं। वे सर्वे भवन्तु सुखिन: के लिए अपना 'तन-मन-धन' सब कुछ अर्पित कर देती हैं। जड़ियाबाई अपने ज़मीनी सद्कर्मों के स्तूपाकार से वह ऊँचाई हासिल कर लेती हैं, जो उन्हें इस धरती पर ही अलौकिक बना देती हैं।</p> <p>आश्चर्यजनक ढंग से जड़ियाबाई पूर्णत: गल्प के धरातल पर खड़ी होकर ऐसी काव्यात्मक गुणों की ऊँचाइयों पर परचम फहराती नज़र आती हैं, जो कल्पनातीत है। वे संवेदनशीलता से इतनी सराबोर हैं कि छोटे-से-छोटे कीड़े की कर्मठता और अवदान के प्रति भी कृतज्ञता ज्ञापित करती हैं।</p> <p>जड़ियाबाई का आचार-व्यवहार समग्र प्रकृति के अणु-अणु के प्रति श्रद्धापूर्ण है। वे पृथ्वी की प्रकृति और इसके वासियों में ही उस अलौकिक दिव्य सत्ता को अनुभूत करती रहती हैं और उन्हीं के समक्ष श्रद्धावनत रहती हैं। वे उस असमी को मन्दिर, मस्जिद और शिवालों में नहीं ढूँढ़तीं, बल्कि यहाँ की माटी के कण-कण में उन्हें उसकी उपस्थिति महसूस होती रहती है।
Read moreAbout the Book
कुसुम खेमानी के नारी-विमर्श की प्रकृति एकदम भिन्न है। वे अपने स्त्री-चरित्रों का ऐसा उदात्तीकरण करती हैं कि इस धरती की होते हुए भी वे अपने अनोखे व्यक्तित्व के कारण किसी और ही जगत की लगती हैं। जड़ियाबाई उपन्यास भी एक ऐसी ही मारवाड़ी स्त्री के उत्कर्ष की गाथा है, जो धनाढ्य परिवार की होने के बावजूद धुर बचपन से ही प्राणी मात्र के लिए संवेदनशील और करुणामयी हैं एवं खरे जीवन मूल्यों में जीती हुई आश्चर्यजनक ढंग से वह शुरू से ही गांधी जी की ट्रस्टीशिप सिद्धान्त का घोर अनुयायी बन जाती हैं।</p>
<p>जड़ियाबाई कथनी में ही नहीं करनी में भी पंचशील के पाँचों सिद्धान्तों का अनुशीलन करती हैं। वे सर्वे भवन्तु सुखिन: के लिए अपना 'तन-मन-धन' सब कुछ अर्पित कर देती हैं। जड़ियाबाई अपने ज़मीनी सद्कर्मों के स्तूपाकार से वह ऊँचाई हासिल कर लेती हैं, जो उन्हें इस धरती पर ही अलौकिक बना देती हैं।</p>
<p>आश्चर्यजनक ढंग से जड़ियाबाई पूर्णत: गल्प के धरातल पर खड़ी होकर ऐसी काव्यात्मक गुणों की ऊँचाइयों पर परचम फहराती नज़र आती हैं, जो कल्पनातीत है। वे संवेदनशीलता से इतनी सराबोर हैं कि छोटे-से-छोटे कीड़े की कर्मठता और अवदान के प्रति भी कृतज्ञता ज्ञापित करती हैं।</p>
<p>जड़ियाबाई का आचार-व्यवहार समग्र प्रकृति के अणु-अणु के प्रति श्रद्धापूर्ण है। वे पृथ्वी की प्रकृति और इसके वासियों में ही उस अलौकिक दिव्य सत्ता को अनुभूत करती रहती हैं और उन्हीं के समक्ष श्रद्धावनत रहती हैं। वे उस असमी को मन्दिर, मस्जिद और शिवालों में नहीं ढूँढ़तीं, बल्कि यहाँ की माटी के कण-कण में उन्हें उसकी उपस्थिति महसूस होती रहती है।
Book Details
-
ISBN9788126729371
-
Pages168
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Shubh Sanyog
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

- Description: ...आज बीस साल बाद कहाँ है वह जयसुन्दर बोस और कहाँ है वह वरुणा चौधरी? कहाँ है वह कमला बोस और कहाँ वह राधेश्याम अग्रवाल? अजय बोस और विजय बोस दो भाई भी आज न जाने कहाँ हैं? सुनने में आता है कि एक भाई अमेरिका में है और दूसरा जर्मनी में। एक-एक मेमसाहब से शादी कर दोनों इंडिया को भूल चुके हैं। शायद वे वहाँ सुख-शान्ति से घर-गृहस्थी कर रहे हैं। उनमें से किसी का पता भी याद नहीं है। लेकिन उस सारे इतिहास का साक्षी बना वह मकान आज भी खड़ा है। उस बारह मंज़िले मकान में न जाने कितने दफ़्तर हैं और उन दफ़्तरों में सैकड़ों कर्मचारी काम करते हैं। मकान मालिक को उस मकान से हर महीने लगभग छह लाख रुपए किराए मिलते हैं। —छह लाख रुपए? और वह भी हर महीने? —हाँ। हर महीने नहीं तो क्या हर साल? पूछा—उसका मालिक कौन है? मेरे मित्र ने कहा—वही बताने के लिए तो वह कहानी सुनाई। शायद इसी को संयोग कहते हैं। यह संयोग कभी शुभ होता है तो कभी अशुभ। लेकिन इस मामले में कहना पड़ेगा कि संयोग शुभ ही था। नहीं तो उतना बड़ा मकान और उससे उतनी आमदनी किसके भाग्य में होती है?
Hariya Harquelize Ki Hairani
- Author Name:
Manohar Shyam Joshi
- Book Type:

-
Description:
पहले बिरादरी को हैरानी हुआ करती थी कि हरिया को किसी बात से हैरानी क्यों नहीं होती, लेकिन अचानक हरिया के सामने हैरानी का दरवाज़ा जो खुला तो वह हैरानी के तिलिस्म में उतरता ही चला गया। यहाँ तक कि बिरादरी की हैरानियों पर भारी पड़ने लगा। हैरानी को लेकर जितनी व्याख्याएँ लोगों के पास थीं, वे कहानियों की शक्ल में बहने लगीं। और तब सवाल उठा इन कहानियों को सुरक्षित रखने, बिरादरी के विरसे में शामिल करने का। बुज़़ुर्गों को चिन्ता हुई कि कहीं ये कहानियाँ आपस ही में टकराकर ख़त्म न हो जाएँ। लेकिन बिरादरी के एक मेधावी युवक ने उन्हें भरोसा दिलाया कि हरिया की हैरानी हमेशा रहेगी क्योंकि हैरानी के बिना कहानी नहीं होती और कहानी के बिना बिरादरी नहीं होती।
जोशी जी के अद्भुत शिल्प और कथा-कौशल की नुमाइंदगी करता हुआ एक अलग ढंग का उपन्यास।
Vaidehi Ke Ram
- Author Name:
Chitra Chaturvedi 'Kartika'
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
It's You Always And Forever
- Author Name:
Kolgani Babu RP
- Book Type:


- Description: Love is not merely a word but an experience which cannot be described to others. It is a feeling one has for another. How often have we realised that there is an inner voice that speaks to us? Even if we realise that our inner voice is speaking to us, how often do we listen to it? The question often arises whether our inner voice is in conflict with what our mind desires or whether it is but an extension of what we truly are? Contained herein are stories of individuals placed in different situations who gave great importance to their inner voice and unknowingly revealed their hidden selves. In the author’s opinion, our behaviour is inevitably governed by what we believe.
Doobte Mastool
- Author Name:
Shri Naresh Mehta
- Book Type:

-
Description:
परिस्थितियों के संघात से टूटती-बनती एक अप्रतिम सुन्दर नारी की विवश-गाथा का प्रतीक नाम है—‘डूबते मस्तूल’। वस्तुत: नारी की यह विवशता किसी भी युग में कम नहीं हुई है। उसका विन्यास परिवेश के बदलने के साथ कुछ परिवर्तित भले ही लगे, पर पुरुष कभी उसे वही स्थान और मान्यता नहीं देता जो वह किसी अन्य पुरुष को देता है। स्वयं नारी को अपने इस भोग्या स्वरूप से कितना विद्रोह है पर प्रकृति के विधान का उल्लंघन कर पाना एक सनातन समस्या है। अपने इस प्रथम उपन्यास ‘डूबते मस्तूल’ में नरेश जी ने नारी के एक प्रखर स्वरूप को भावनाओं और घटनाओं, के माध्यम से जब प्रस्तुत किया था सन् 1954 में, तभी से इसकी नायिका रंजना हिन्दी-उपन्यास के पाठकों की स्मृति बन गई।
McCluskieganj
- Author Name:
Vikas Kumar Jha
- Book Type:

-
Description:
“बचे खुचे एंग्लो-इंडियन लोगों की मौत के साथ यह गाँव भी पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
मि. मैकलुस्की के सपनों का कब्रिस्तान...। एंग्लो-इंडियंस के दर्दनाक इतिहास की कहानी कहता एक बेपनाह सन्नाटा भर रह जाएगा यहाँ...। उस दर्द को आनेवाले समय में कौन महसूस करेगा?” मि. मिलर की आवाज़ अँधेरे में डूब रही है।रॉबिन को लगा, इस गाँव की चौहद्दी के भीतर की धरती ज़ोरों से धड़क रही है। महसूस कर रहा है वह, इसकी तेज़ धड़कन को। मनुष्य मूर्च्छित हो सकता है, संज्ञाशून्य हो सकता है, उसके विचार विक्षिप्त हो सकते हैं, पर धरती...मातृभूमि कभी मूर्च्छित...संज्ञाशून्य और विक्षिप्त नहीं हो सकती। इसका अनुराग...प्यार-भरी गुनगुनी-सी मीठी उष्मा, धड़कती रहेगी अनन्त काल तक।
Gorakhgatha
- Author Name:
Ram Shankar Mishra
- Book Type:

-
Description:
महायोगी गोरक्षनाथ एक महान समाज-दृष्टा थे। भारतीय इतिहास में मध्यकाल को संक्रान्ति काल भी कहा जाता है। इस युग में भोगवाद की प्रतिष्ठा थी। उच्च वर्ग भोगवादी था और निम्न वर्ग भोग्य था। महायोगी गोरक्षनाथ ने सामाजिक पुनरुत्थान तथा सामाजिक नवादर्शों की प्रस्थापना के लिए उस भोगात्मक साधना का प्रबल विरोध किया। वे निम्न वर्ग और समाज के लिए आराध्य देवता के रूप में प्रतिष्ठित हो गए थे। योग और कर्म की सम्यक् साधना उन्होंने की थी।
गोरक्षनाथ योगमार्गी होते हुए भी एक महान रचनाधर्मी साधक थे। उन्होंने हिन्दी और संस्कृत भाषाओं में अनेक ग्रन्थों की रचना की थी। गोरक्षनाथ के शब्दों में अनुशासन भी है और बेलाग फक्कड़पन भी। उनकी काव्याभिव्यक्तियों में कबीर की काव्य-वस्तु के स्रोत मिलते हैं। गोरक्षनाथ अन्याय तथा शोषण के प्रति तेजस्वी हस्तक्षेप थे। पीड़ितों एवं शोषितों को दुख तथा शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए उन्होंने जनन्दोलनों का भी प्रवर्तन किया था। वे यायावर थे। दक्षिणात्य और आर्यावर्त में भ्रमण करते रहे और जनभाषा तथा जनसंस्कृति का साक्षात्कार करते रहे। अनेक जनश्रुतियाँ उनके व्यक्तित्व को महिमामंडित करने के लिए प्रचलित हैं। लेकिन इस औपन्यासिक कृति में मिथकों को तद् रूपों में स्वीकार न करते हुए वैज्ञानिक दृष्टि से उनका विश्लेषण किया गया है। यात्रा-वृत्तान्त और जीवनी के आस्वाद से भरपूर यह उपन्यास भारतीय आध्यात्मिक इतिहास के एक महत्त्वपूर्ण दौर से परिचित कराता है।
Vijeta
- Author Name:
Sharaf Rashidov
- Book Type:

-
Description:
‘विजेता’ और इसकी अगली कड़ी ‘तूफ़ान झुका सकता नहीं’ नामक उपन्यासों में उज्बेकिस्तान के एक ग्राम-सोवियत की जनता को एकजुट सामूहिक श्रम और सामूहिक मेधा एवं कौशल से, ख़ाली पड़ी धरती को खेती योग्य बनाते हुए, क्रान्तिविरोधी बसमाचियों द्वारा बन्द कर दिए गए कोकबुलाक चश्मे के उद्गम को खोजकर उसे फिर से चालू करते हुए और सामूहिक फ़ार्मों के उत्पादन को तरह-तरह से आगे बढ़ाते हुए विस्तार से चित्रित किया गया है।
आर्थिक सम्बन्धों के रूपान्तरण के साथ ही जो नई सामाजिक-सांस्कृतिक-नैतिक-सौन्दर्यशास्त्रीय मूल्य-मान्यताएँ, सम्बन्ध और संस्थाएँ अस्तित्व में आ रही थीं तथा नए-पुराने के बीच जो संघर्ष अविराम जारी था, उसका लेखक ने विश्वसनीय और जीवन्त चित्र उपस्थित किया है। कथा के फलक पर पार्टी और प्रशासकीय मशीनरी की वह नौकरशाही भी मौजूद है। क्रान्ति-पूर्व समाज के अवशेष कुछ षड्यंत्रकारी विध्वंसक तत्त्व भी मौजूद हैं जो पुरानी पीढ़ी के कुछ लोगों की रूढ़िवादिता और नौकरशाही की हठधर्मिता का लाभ उठाकर सार्वजनिक सम्पत्ति और समाजवाद को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करते हैं।
पुराने मूल्यों और रूढ़ियों से चिपके कुछ पुराने लोग भी हैं जो धीरे-धीरे बदलते हैं। लेकिन नए और पुराने के बीच का संघर्ष लगातार चलता रहता है। इन सभी प्रवृत्तियों की पारस्परिक अन्तर्क्रिया और संघात के रूप में आगे बढ़ते घटना-क्रम के बीच से नई दुनिया के उन नए नायकों के उदात्त, मानवीय चरित्र उभरते हैं जो पूँजी की संस्कृति के बरअक्स श्रम की संस्कृति की नुमाइंदगी करते हैं।
Penalty Corner Evam Anya Kahaniyan
- Author Name:
Ashwani Kumar 'Pankaj'
- Book Type:

- Description: "‘पेनाल्टी कॉर्नर’ की कहानियाँ झारखंड के औपनिवेशिक शोषण-दमन और उससे उपजी सामाजिक-सांस्कृतिक विसंगतियों-विकृतियों को बेहद बारीकी से रेखांकित करती हैं। झारखंड के जनजीवन को संदर्भित करनेवाली ऐसी रचनाएँ और रचनाकार बहुत विरले हैं—हिंदी में तो और भी कम। दरअसल बहुत से रचनाकार यहाँ की जमीनी हकीकत से जुड़ ही नहीं पाते। संभवतः औपनिवेशिक मानसिकता के अवशेष उन्हें ऐसा करने नहीं देते। ‘पेनाल्टी कॉर्नर’ की कहानियाँ अश्विनी कुमार पंकज को उन रचनाकारों से भिन्न पाँत में खड़ा करती हैं—एक शिखर की तरह, नैदिन गार्डीमर की तरह। ‘पेनाल्टी कॉर्नर’ की कहानियों का फलक बहुत विस्तृत है। इसमें एक ओर गिरिडीह-धनबाद की परित्यक्त कोयला-खदान हैं तो दूसरी ओर जादूगोड़ा का विकलांग-बाँझ कर देनेवाला प्रदूषित परिवेश। एक तरफ सिमडेगा, जलडेगा, बानो, मनोहरपुर के घाट-पहाड़, बाजार-हाट हैं तो दूसरी तरफ राँची-टाटा के चमचमाते फाइव-स्टार होटल। गरीबी और अमीरी का असह्य कंट्रास्ट। भाषा का रेंज भी उतना ही विस्तृत है, जितना इसका फलक। ठेठ गाँव-घर की हिंदी-नागपुरी से लेकर लेटेस्ट अंग्रेजी तक—‘चेंज योर माइंड इन राइट डायरेक्शन।’ अतिरिक्त प्रयास के बिना कथ्य के साथ सादा-सा शिल्प सहज रूप से कहानियों में आया है। एक नैसर्गिक आदिवासी परिवेश का प्रस्तुतिकरण सादगी-मौलिकता- सहजता के साथ। —विसेश्वर प्रसाद केशरी "
Journey of Love
- Author Name:
Aditi Srivastava
- Rating:
- Book Type:

- Description: Not everyone in this world gets love at first chance. Ritika and Divakar, a couple made in heaven. Perfect understanding, perfect for each other but then nothing remains perfect for too long. Things changed and Ritika had only stars to preach and love. But life doesn�t stop it goes on. In this pace, will Ritika be able to get someone who will love her? Will she be able to get someone whom her conscience would allow or will she be forced to live with remorse?
And Tomorrow Comes Another Day
- Author Name:
Thashneem Sunil
- Book Type:

- Description: How does a lady feel when her wedded life breaks into pieces and she gets raped by her mother-in-law in-law. What does she look like the future starting there? Won't life go blank and turn into a question mark? This lady was dhiani, a rape victim. Same way what happens when a man comes to realize that his wife is a call girl? This was phani who adored his life partner to the core. Dhiani over looked everything. She turned out to be more grounded after all this and particularly when her parents never trusted her and deserted her. Starting there she saw how to live without contingent upon somebody. Later at a point, phani and dhiani fell in love with each other. It was phani, who was a consistent backing for her. Life is simple, it has numerous today's and every today has a tomorrow and each tomorrow we have an issue sitting tight for us to handle it. Same way, This story spins around dhiani and phani who face different difficulties in their day - to-day lives to withhold a relationship. They change their difficulties into circumstances which made them feel more certain. They gathered all the lessons what life gave them and that helped them to bolster Shruthi, their closest companion and sheetal's dhiani's sister.
Sabrang
- Author Name:
S. D. Ojha
- Book Type:

- Description: यह नाम है उस अद्वितीय प्रयास का, जो भारतीय संस्कृति, कला, इतिहास, दर्शन, और जीवन शैली की अथाह गहराइयों को शब्दों की माला में पिरोता है। बालपन की मासूमियत से लेकर यौवन के जोश तक, साप्ताहिक पत्रिकाओं के मधुर स्वाद से लेकर साहित्य की गहराइयों में खुद की खोज तक - श्री एस. डी. ओझा जी की सेवानिवृत्ति के बाद की लेखनी से उपजे इन लेखों में वह सब मौजूद है जो आपकी आत्मा को स्पर्श कर सकता है। इस पुस्तक में उन्होंने ऐसी रचना की है जो पाठकों को ज्ञान की गहराइयों में ले जाने के साथ-साथ उन्हें अनुप्रेरित भी करती है। जीवन के अनेक रंगों को समेटे ‘सबरंग’ आपको उस यात्रा पर ले चलेगा जहाँ प्रत्येक पृष्ठ एक नवीन रंग, एक नवीन सोच, और एक नवीन दर्शन की प्रतीक्षा में है। आइए, ‘सबरंग’ के पन्नों को उलटें और अपने जीवन को इन विचारों के रंगों से संवारें। यह पुस्तक आपके पुस्तकालय का एक अमूल्य निधि बन जाएगी।
Aawazen Aur Deeware
- Author Name:
Vaikukam Mohammad Bashir
- Book Type:

- Description: ''क्या तुमने अपने आप कोई काम करके उसके सुख का अनुभव नहीं किया है? खेती करना...कम-से-कम एक पौधा रोपकर उसका फूल और फल देखना, कोई नई चीज़ तैयार करना, प्यासे भटकते कुत्ते को पानी पिलाना, भूखे आदमी को खाना खिलाना, ऐसा कोई काम...।'' ''आप तो जानते हैं, मैंने सिर्फ़ आदमियों को गोली मारी है। आदमियों का ख़ून पिया है और एक बार आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी।'' ''फिर?'' ''अच्छा, अब वह भी बता दूँ! मैं इसी रात यहीं से चला जाऊँगा।'' ''कहाँ?'' ''यह मेरा जन्म-स्थान है न! मैं माँ-बाप को ढूँढने की कोशिश करूँगा। हर घर में जाकर, हर औरत से पूछूँगा—'क्या तुम मेरी माँ हो? क्या तुम्हीं ने मुझे मेरे पैदा होते ही चिथड़ों में लपेटकर चौराहे के अँधेरे में डाल दिया था?' मरने के बाद भी मैं भयंकर प्रेत बनकर रात में हर घर में जाकर, आँखें फाड़कर दरवाजा खटखटाऊँगा।'' —इसी पुस्तक से
Dehari Par Thithaki Dhoop
- Author Name:
Amit Gupta
- Book Type:

-
Description:
समलिंगी प्रेम की स्वाभाविकता और उसके इर्द-गिर्द उपस्थित सामाजिक-नैतिक जड़ताओं को उजागर करता यह उपन्यास अपने छोटे-से कलेवर में कुछ बड़े सवालों और पेचीदा जीवन-स्थितियों का धैर्यपूर्वक सामना करता है। परिवार की मौजूदा संरचना के बीचोबीच जाकर वह सम्बन्धों, भावनाओं और कामनाओं के संजाल में आपसी समझ का ऐसा रास्ता निकालता है जो पीड़ाजनक तो है, लेकिन आधुनिक वयस्क मन को फिर भी स्वीकार्य है।
समाज लेकिन उतना वयस्क अभी नहीं हो सका है, न ही तमाम तकनीकी कौशल के बावजूद उतना आधुनिक, उदार और मानवीय कि किसी नई शुरुआत को स्वीकार कर सके। अस्तित्व के यौन-पक्ष को लेकर आज भी भारतीय समाज उत्कंठा और वितृष्णा के विपरीत बिन्दुओं के बीच डोलता रहता है। जिसे वह प्राकृतिक कहता है, वह सेक्स भी उसे सहज नहीं रहने देता; जिसे वह कहता ही अप्राकृतिक है, उसकी तो बात ही क्या!
श्लोक सिंह को अपने यौन रुझान के चलते नौकरी से निकाल दिया जाता है, और अनुराग जो उसका प्रेमी है, और संयोग से श्लोक की पत्नी का भाई, हर उस लांछना का सामना करता है जो किसी सफल-सुखी व्यक्ति के लिए यूँ भी लोगों की जेबों में हर समय तैयार रहती हैं। गालियाँ, फटकार, हत्या की धमकी आदि।
लेकिन मीरा, श्लोक की पत्नी, जिसे उन दोनों के प्रेम की सबसे ज़्यादा क़ीमत चुकानी पड़ी, इतनी वयस्क है कि मनुष्य-मन की सूक्ष्मतर आत्मोप्लब्धियों को स्वीकार कर सके, अपनी स्वयं की क्षति को लाँघकर जीवन की नई दिशाओं के लिए द्वार खुला रख सके।
सरल और संक्षिप्त कथानक के माध्यम से यह उपन्यास धारा 377 के हटाए जाने के कुछ ही समय पहले शुरू होता है, और कोर्ट के इस वक्तव्य के कुछ बाद तक चलता है, कि ‘इतिहास को LGBTQ समुदाय से, उन्हें दी गई यातना के लिए माफ़ी माँगनी चाहिए।’
वस्तुत: यह उपन्यास समाज की खोखली मान्यताओं और संकीर्ण घेरेबन्दियों के विरुद्ध ज़्यादा खुली दुनिया के निर्माण की एक मार्मिक पुकार है।
Khuda Ki Basti
- Author Name:
Shaukat Siddeeqi
- Book Type:

- Description: ‘ख़ुदा की बस्ती’ शौक़त सिद्दीक़ी का बहुचर्चित-बहुप्रशंसित उपन्यास है। इसे पाकिस्तान के सर्वोच्च पुरस्कार ‘आदमजी प्राइज़’ से सम्मानित किया गया है। इसके उर्दू में पाकिस्तान में तीस संस्करण छप चुके हैं और संसार की सभी भाषाओं में यह उपन्यास अनूदित होकर प्रसिद्धि पा चुका है। इस उपन्यास पर आधारित सिन्ध प्रान्त और कराची के बीच ‘ख़ुदा की बस्ती’ बसाई गई है। इस उपन्यास के सारे चरित्र वही हैं, जो ख़ुदा की जीती-जागती बस्तियों में भी मिल जाते हैं—अच्छे-बुरे, गुंडे, मवाली, शिद्दत से प्रेम वाले और उसी शिद्दत से नफ़रत करनेवाले भी। छोटे-मोटे, चोर-उचक्के, जेबकतरे, राजनीति का एक हिस्सा बन जानेवाले भी। इस उपन्यास के प्रकाशित होते ही उर्दू की साहित्यिक दुनिया में हंगामा मच गया, क्योंकि इससे पहले इस विषय पर और इतने अनोखे अन्दाज़ में उर्दू में कुछ भी नहीं लिखा गया था।
Where Has My Gulla Gone
- Author Name:
Padma Sachdev
- Book Type:

- Description: No Description Available for this Book
Amritfal
- Author Name:
Manoj Das
- Book Type:

- Description: ‘अमृतफल’ आदिम काल से निरन्तर पीढ़ी-दर-पीढ़ी व्याप्त मानव चक्र की कभी प्रकट, कभी अप्रकट आशा और आकांक्षा का प्रतीक है। यशस्वी ओड़िया उपन्यासकार मनोज दास की यह कालजयी कृति हिन्दी पाठकों के लिए एक उपहार की तरह ही है। राजा भर्तृहरि के विषय में प्रचलित किंवदन्ती से शायद हिन्दी का कोई पाठक अनजान होगा लेकिन यह उपन्यास उस कथा को नए ढंग से न केवल विश्लेषित करता है, बल्कि समकालीन जीवन के पात्र अमरकान्त और उसकी बेटी मनीषा की कहानी को साथ-साथ लिए चलता है; क्योंकि वर्तमान की आँख के बिना अतीत को देखने की शक्ति आयत करना लगभग असम्भव है। यह उपन्यास वर्तमान की नज़र से अतीत को देखने का एक सफल प्रयास है। अतीत से लेखक ने प्रेरणा प्राप्त की है और वर्तमान को उसके साथ अन्तर्सम्बन्धित कर पाठकों को एक बेहद पठनीय कृति प्रदान की है। यह ऐतिहासिक कृति नहीं, बल्कि ऐतिहासिकता से प्रेरित एक सर्जनात्मक प्रयास है। सर्जनात्मक अनुवाद का आस्वाद कैसा विरल होता है, यह इस उपन्यास के पाठ से पता चलता है जो अपने प्रवाह में यूँ बहा ले जाता है कि आप पूरा उपन्यास पढ़े बिना चैन नहीं पाते।
Shakkar
- Author Name:
K. Chinnappa Bharti
- Book Type:

-
Description:
सुप्रसिद्ध समाजवादी चिन्तक और अप्रतिम नेता ई.एम.एस. नम्बूदिरिपाद के शब्दों में, चिन्नप्प भारती ने अपने पूर्ववर्ती उपन्यास ‘संगम’ और ‘दाहम’ में किसानों के हृदय में पनप रही वर्ग-चेतना और संगठन-बोध की जिस बेल को पल्लवित होते दिखाया था, ‘शक्कर’ में आकर वह परवान चढ़ जाती है। इस रचना में वर्ग-संघर्ष और क्रान्ति के सिद्धान्त को परिभाषित करते हुए एक सुलझी हुई रणनीति प्रस्तुत की गई है।
दो भागों में विभक्त इस उपन्यास का कथानक रोचक और सुगठित है। मिल-मालिक और मज़दूरों के संघर्ष और टकराव में मेहनतकश किसानों की भूमिका को रेखांकित करना कृषि-प्रधान देश भारत की यथार्थ परिस्थितियों के नितान्त अनुरूप है। अंग्रेज़ सरकार की फूट डालकर राज करने की नीति को अपनाते हुए चीनी मिल-मालिक मज़दूर यूनियन के प्रयासों को नाकाम करने के लिए पुत्र के नेतृत्व में समान्तर यूनियन बनाकर किसानों को मज़दूरों के ख़िलाफ़ बरगलाता है। हड़ताल के पहले चरण में किसानों का संघ मज़दूरों के ख़िलाफ़ लड़ता है। इस टकराव में यूनियन नेता कन्दसामी घायल होकर अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं। उन्हें अस्थायी रूप से निलम्बित किया जाता है। नेता-विहीन मज़दूर-यूनियन की बागडोर सँभालने के लिए युवा नेता वीरन आगे आता है। कन्दसामी द्वारा यूनियन गतिविधियों में प्रशिक्षित वीरन मज़दूरों और किसानों को संगठित करके उन्हें वर्ग-संघर्ष की ओर प्रेरित करता है। इस बीच यूनियन का चुनाव आता है जिसमें उम्मीदवार के रूप में खड़े नेता को मज़दूरों और प्रबन्ध के सहयोग की आवश्यकता होती है। इस प्रयास के चलते एक समझौता होता है जिसमें मज़दूरों की ज़्यादातर माँगे मंजूर कर ली जाती हैं और कन्दसामी को नौकरी पर बहाल किया जाता है।
इस प्रधान कथा के अन्दर एक रोमांटिक उपकथा भी है। कन्दसामी की बहन और युवा मज़दूर नेता वीरन के बीच अंकुरित प्रेम अन्त में विवाह में परिणत होता है।
‘शक्कर’ उपन्यास में चिन्नप्प भारती ने मालिक-मज़दूर के बीच हो रहे टकराव का तर्कपूर्ण विश्लेषण किया है। यही नहीं, इस उपन्यास में मज़दूरों की क्रान्ति के सिद्धान्त को वास्तविकता के धरातल पर परिभाषित करके एक सुलझी हुई रणनीति को रूप देने में भारती को पूरी कामयाबी मिली है।
Bambai Dinank
- Author Name:
Arun Sadhu
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jheel Ka Naam Sagar Hai
- Author Name:
Prabhat Kumar Bhattacharya
- Book Type:

-
Description:
‘झील का नाम सागर है’ एक कस्बे के जनजीवन के आरोहों-अवरोहों की कथा है जिसका नाम है हरिपुर। हरि अनन्त हरिकथा अनन्ता की तरह हरिपुर और वहाँ रहने वाले लोगों की कथा भी सच कहें तो कभी खत्म होने वाली नहीं है। हरिपुर के सामाजिक जीवन में इतनी पेंच-परतें हैं कि जहाँ एक सिरा बन्द होता है वहीं दूसरा खुलने लगता है। पाठक देखेंगे कि यह उपन्यास जितना कुछ व्यक्त करता है उससे कहीं अधिक का संकेत करता चलता है और इस तरह हरिपुर और उसके रहवासियों की यह कथा उत्तर भारत के किसी भी कस्बे और वहाँ के लोगों की प्रतिनिधि कथा बन जाती है। पाठक सहज ही इसमें अपने आस-पास के लोगों को पहचानने लगता है और इस कथा से स्वयं को भी अभिन्न रूप से जुड़ा पाता है।
उपन्यास में एक विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रसंग आता है जिसके जरिये हरिपुर की सियासत अपनी पूरी रंगत के साथ प्रत्यक्ष हो उठती है। यह पूरा प्रकरण जितना रोचक है उतना ही करुण भी है। इससे पता चलता है कि हमारे बड़े स्वप्नों की जड़ में भी कितनी क्षुद्रताएँ मौजूद रहती है जिन्हें प्राय: हम राजनीति कहकर नजरअंदाज कर देते हैं।
कस्बाई जीवन के विस्तृत विवरण इस उपन्यास को अतिरिक्त पठनीयता प्रदान करते हैं।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book