Thoda Sa Khula Asman
(0)
Author:
Ram Kathin SinghPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
695
556 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
उपन्यास की कहानी पूर्वी जर्मनी की पृष्ठभूमि पर रची गयी है, जिसकी आर्थिक-सामाजिक व्यवस्था मार्क्सवादी सिद्धान्तों पर आधारित थी। साम्यवादी व्यवस्था की स्थापना के प्रयास में दमनकारी नीतियों का पालन हुआ जिससे भय का एक ऐसा वातावरण पैदा हुआ कि लोग डरे-सहमें रहते। गुलामों की तरह जिन्दगी जीते। किन्तु एक दिन जब जन-जन के मन में व्याप्त असन्तोष की आग भभक उठी, तब पूरी व्यवस्था जलकर राख हो गयी। कम्युनिस्ट शासन का अन्त हो गया। लोग स्वतन्त्र हो गये...।</p> <p>बर्लिन की दीवाल ढहने के बाद मची भगदड़ में हजारों परिवार बिखर गये। आल्फ्रेड की पत्नी का मनोरोग-चिकित्सा-संस्थान पहुँच जाना तथा आजादी की मशाल जलाने वाले जुर्गेन का जहर देकर मार दिया जाना, उस त्रासदी के बस उदाहरण मात्र थे...।
Read moreAbout the Book
उपन्यास की कहानी पूर्वी जर्मनी की पृष्ठभूमि पर रची गयी है, जिसकी आर्थिक-सामाजिक व्यवस्था मार्क्सवादी सिद्धान्तों पर आधारित थी। साम्यवादी व्यवस्था की स्थापना के प्रयास में दमनकारी नीतियों का पालन हुआ जिससे भय का एक ऐसा वातावरण पैदा हुआ कि लोग डरे-सहमें रहते। गुलामों की तरह जिन्दगी जीते। किन्तु एक दिन जब जन-जन के मन में व्याप्त असन्तोष की आग भभक उठी, तब पूरी व्यवस्था जलकर राख हो गयी। कम्युनिस्ट शासन का अन्त हो गया। लोग स्वतन्त्र हो गये...।</p>
<p>बर्लिन की दीवाल ढहने के बाद मची भगदड़ में हजारों परिवार बिखर गये। आल्फ्रेड की पत्नी का मनोरोग-चिकित्सा-संस्थान पहुँच जाना तथा आजादी की मशाल जलाने वाले जुर्गेन का जहर देकर मार दिया जाना, उस त्रासदी के बस उदाहरण मात्र थे...।
Book Details
-
ISBN9789390625123
-
Pages190
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Worlds First Book On Haiku Poetry
- Author Name:
Carlos Luis
- Rating:
- Book Type:

- Description: Haiku is a very short form of Japanese poetry consisting of 17 syllables arranged in three lines of 5, 7, and 5 syllables respectively. But against all odds, this is a collection of feelings written in three lines. An economical masterpiece that Trades you through realities of life; speaking of love, relationships, paradoxes in life, you name it you have it in here.
Umraojan Adaa
- Author Name:
Mirza Haadi 'Ruswa'
- Book Type:

-
Description:
उमराव जान ‘अदा’ उर्दू के आरम्भिक उपन्यासों में अहम स्थान रखता है। वस्तुतः यह आत्मकथात्मक उपन्यास है जिसे मिर्ज़ा हादी ‘रुस्वा’ ने क़लमबन्द किया है। शायर होने के नाते लेखक तवायफ़-शायर उमराव जान ‘अदा’ को काफ़ी क़रीब से जनता था। उमराव ने अपने संस्मरण स्वयं मिर्ज़ा को सुनाए थे।
फ़ैज़ाबाद की बच्ची ‘अमीरन’ के लखनऊ में तवायफ़ उमराव जान से शायरा ‘अदा’ बनने तक के सफ़र को समेटती हुई यह कथा उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध की विडम्बनाओं, विसंगतियों तथा अंग्रेज़ी दौर की तबाहियों का भी ख़ाक़ा खींचती है। अपने रूप-सौन्दर्य, मधुर कंठ, नृत्य-कला, नफ़ासत तथा अदबी तौर-तरीक़ों के कारण उमराव जान अमीरों-रईसों में ससम्मान लोकप्रिय रही। बचपन में ही बेघर हो जाने की वजह से ताउम्र वह मोहब्बत की तलाश में भटकती रही। उसने वे सारी त्रासदियाँ भोगीं जो एक संवेदनशील व्यक्ति के दरपेश होती हैं।
उपन्यास में भाषा का इस्तेमाल पत्र और परिस्थिति के अनुकूल है जो मार्मिक है और प्रभावशाली भी। उर्दू के अवधी लहजे की मिठास इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत है। अनुवादक गिरीश माथुर ने मूल भाषा की सजीवता बरकरार रखी है।
Saat Paheliyaan
- Author Name:
Rajeev Pundir
- Book Type:

- Description: हमारे जीवन में कुछ ऐसी घटनाएं घटती हैं जो हमें समझ नहीं आतीं और हमेशा के लिए एक पहेली बनकर हमारे दिल और दिमाग़ के किसी कोने में सुप्तावस्था में पड़ी रहती हैं । मौका मिलते ही वो फिर से हमारे सामने अपनी बिसात बिछाकर हमें चुनौती देती हैं हल करने के लिए । लेकिन हल फिर भी नहीं निकलता । ऐसी ही कुछ सोती-जागती, हंसती-खेलती, कुछ उदास और कुछ गुमसुम बैठी कहानियों का ये संग्रह आपके सामने प्रस्तुत है – सात पहेलियाँ ।.
Aakash Pakshi
- Author Name:
Amarkant
- Book Type:

-
Description:
वरिष्ठ कथाकार अमरकान्त का यह उपन्यास एक निर्दोष और संवेदनशील लड़की की कथा है, जिसके इर्द-गिर्द भारतीय सामन्तवाद के अवशेषों की नागफनियाँ फैली हुई हैं। उनका कुंठाजनित अहंकार, हठधर्मिता और सर्वोच्चता का मिथ्या भाव उसकी सहज मानवीय इच्छाओं और आकांक्षाओं को बाधित करता है।
भारतीय समाज से सामन्तवाद के समाप्त होने के बावजूद अपने स्वर्णिम युगों का खुमार एक वर्ग विशेष में लम्बे समय तक बचा रहा, और आज भी जहाँ-तहाँ यह दिखाई पड़ जाता है। गुज़रे ज़मानों की स्मृतियों के सहारे जीते हुए ये लोग नए समय के मूल्यों-मान्यताओं को जहाँ तक सम्भव हो, नकारते हैं, और उनकी शिकार होती हैं वे नई नस्लें जो जिन्दगी और समाज को नए नज़रिए से देखना, जानना और जीना चाहती हैं।
इस उपन्यास की पंक्तियों में बिंधी व्यथा उन लोगों के लिए एक चेतावनी की तरह है जो आज भी उन बीते युगों को जीने की कोशिश करते हैं।
Pakistan Mail
- Author Name:
Khushwant Singh
- Book Type:

-
Description:
भारत-विभाजन की त्रासदी पर केन्द्रित ‘पाकिस्तान मेल’ सुप्रसिद्ध अंग्रेज़ी उपन्यासकार खुशवंत सिंह का अत्यन्त मूल्यवान उपन्यास है। सन् 1956 में अमेरिका के ‘ग्रोव प्रेस एवार्ड’ से पुरस्कृत यह उपन्यास मूलतः उस अटूट लेखकीय विश्वास का नतीजा है, जिसके अनुसार अन्ततः मनुष्यता ही अपने बलिदानों में जीवित रहती है।
घटनाक्रम की दृष्टि से देखें तो 1947 का भयावह पंजाब! चारों ओर हज़ारों-हज़ार बेघर-बार भटकते लोगों का चीत्कार! तन-मन पर होनेवाले बेहिसाब बलात्कार और सामूहिक हत्याएँ! लेकिन मज़हबी वहशत का वह तूफ़ान मनो-माजरा नामक एक गाँव को देर तक नहीं छू पाया; और जब छुआ भी तो उसके विनाशकारी परिणाम को इमामबख़्श की बेटी के प्रति जग्गा के बलिदानी प्रेम ने उलट दिया।
उपन्यास के कथाक्रम को एक मानवीय उत्स तक लाने में लेखक ने जिस सजगता का परिचय दिया है, उससे न सिर्फ़ उस विभीषिका के पीछे क्रियाशील राजनीतिक और प्रशासनिक विरूपताओं का उद्घाटन होता है, बल्कि मानव-चरित्र से जुड़ी अच्छाई-बुराई की परम्परागत अवधारणाएँ भी खंडित हो जाती हैं। इसके साथ ही उसने धर्म के मानव-विरोधी फ़लसफ़े और सामाजिक बदलाव से प्रतिबद्ध बौद्धिक छद्म को भी उघाड़ा है।
संक्षेप में कहें तो अंग्रेज़ी में लिखा गया खुशवंत सिंह का यह उपन्यास भारत-विभाजन को एक गहरे मानवीय संकट के रूप में चित्रित करता है; और अनुवाद के बावजूद उषा महाजन की रचनात्मक क्षमता के कारण मूल-जैसा रसास्वादन भी कराता है।
Muhar
- Author Name:
Chandan Pandey
- Book Type:

- Description: रोली घमंडी है, रोली अकडू है, रोली ज़िद्दी है... ऐसी तमाम तोहमतों के बीच रोली है कि नौकरी पाने, नौकरी की जगह तक पहुँच पाने और वहाँ से घर लौटने की जद्दोजेहद से रोज़ गुज़र रही है। यक़ीन कीजिए कि ये साधारण सी दिखने वाली बातें एक वर्किंग वूमन के लिये रोज़ लड़ी जाने वाली लड़ाइयाँ हैं। जेंडर, आयु और शहरी/ग्रामीण पृष्ठभूमि को केंद्र में रखकर किये जाने वाले कई सूक्ष्म और स्थूल भेदभाव हैं जिनका सामना रोली और उस जैसी तमाम कामकाजी स्त्रियों को रोज़ करना होता है। परिवार, समाज और रोज़गार के मुश्किल कुरुक्षेत्र में जूझती रोली को केंद्र में रखकर लिखी गई ये कहानियाँ हर कामकाजी स्त्री के जीवन, स्वप्न और संघर्ष का सूक्ष्म और मार्मिक दस्तावेज़ बन पड़ी हैं।
Bawalistan
- Author Name:
Tasneem Khan
- Book Type:

- Description: तसनीम ख़ान की ये कहानियाँ परिवार, समाज और राजनीति के अलग-अलग आयामों की गहरी पड़ताल और उनमें अंतर्निहित आख्यान को दर्ज करने की मुसलसल कोशिशों से उपजी हैं। कहानियों के परिवेश और भाषा में वर्णित संस्कृति को स्पष्ट रूप से पहचाना जा सकता है; अर्थात यह संसार कथाओं में बड़े विश्वसनीय ढंग से आया है। धर्म, स्त्री और पारिवारिक जीवन के जटिल अंतरसंबंधों को गहरी सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ कहती यह कहानियाँ अपने आप स्त्री के दुख और सांप्रदायिकता की बढ़ती विषबेल की पहचान करती चलती हैं। शीर्षक कहानी 'बावलिस्तान' मौजूदा भारतीय राजनीति और मीडिया के खोखले चरित्र को एक दिलचस्प स्थिति के सहारे नुमायाँ करती है तो वहीं ' अब्दुल की मौत' भी मौत के बाद की काल्पनिक परिस्थिति में सांप्रदायिकता की समस्या का परीक्षण करती है। कहानियों में गहरी रागात्मकता है, बोली का सुंदर रचाव है और स्पष्ट राजनैतिक समझ है ।
Nacohus
- Author Name:
Purushottam Agarwal
- Book Type:

-
Description:
एक दशक पहले, आहत भावनाओं की हिंसक राजनीति के बढ़ते संकट पर टिप्पणी करते हुए, पुरुषोत्तम अग्रवाल ने एक व्यंग्य-लेख में, प्रस्ताव किया था, ‘आहट भावना आयोग का गठन’ कर ही दिया जाए...
अब यह उपन्यास...ज़बान पर लगते जा रहे नित नए तालों की डरावनी ख़बर की पड़ताल करने के साथ ही, सूचना और मनोरंजन के सब तरफ़ पसरते जंजाल में, तकनीकी आतंक तले चेतना के हाशिए पर धकेले जा रहे विवेक की चीत्कार को स्वर देता है यह उपन्यास...
पुरुषोत्तम अग्रवाल का पहला उपन्यास ‘नाकोहस’ नई-नई गढ़ी जा रही वास्तविकता की पड़ताल के लिए गढ़े गए ‘बौनैसर’ और ऐसे अनेक विचारोत्तेजक शब्दों के कारण भी ध्यान खींचता है...
स्वयं ‘नाकोहस’ भी ऐसा ही एक शब्द है...
Sanskar
- Author Name:
U.R. Ananthamurthy +1
- Book Type:

- Description: यू.आर. अनन्तमूर्ति के इस कन्नड़ उपन्यास को युगान्तरकारी उपन्यास माना गया है। ब्राह्मणवाद, अन्धविश्वासों और रूढ़िगत संस्कारों पर अप्रत्यक्ष लेकिन इतनी पैनी चोट की गई है कि उसे सहना सनातन मान्यताओं के समर्थकों के लिए कहीं–कहीं दूभर होने लगता है। ‘संस्कार’ शब्द से अभिप्राय केवल ब्राह्मणवाद की रूढ़ियों से विद्रोह करनेवाले नारणप्पा के दाह–संस्कार से ही नहीं है। अपने लिए सुरक्षित निवास–स्थान, अग्रहार आदि के ब्राह्मणों के विभिन्न संस्कारों पर भी रोशनी डाली गई है—स्वर्णाभूषणों और सम्पत्ति–लोलुपता जैसे संस्कारों पर भी! ब्राह्मण–श्रेष्ठ और गुरु प्राणेशाचार्य तथा चन्द्री, बेल्ली और पद्मावती जैसे अलग और विपरीत दिखाई देनेवाले पात्रों की आभ्यन्तरिक उथल–पुथल के सारे संस्कार अपने असली और खरे–खोटेपन समेत हमारे सामने उघड़ आते हैं। धर्म क्या है? धर्मशास्त्र क्या है? क्या इनमें निहित आदेशों में मनुष्य की स्वतंत्र सत्ता के हरण की सामर्थ्य है, या होनी चाहिए? ऐसे अनेक सवालों पर यू.आर. अनन्तमूर्ति जैसे सामर्थ्यशील लेखक ने अत्यन्त साहसिकता से विचार किया है, और यही वैचारिक निष्ठा इस उपन्यास को विशिष्ट बनाती है।
Kissa Besir-pair
- Author Name:
Prabhat Tripathi
- Book Type:

-
Description:
यह उपन्यास स्मृतियों की क़िस्सागोई है जिसके केन्द्र में इतिहास प्रवर्तक घटनाएँ और व्यक्तित्व नहीं हैं। हो भी नहीं सकते; क्योंकि वे हमारे दैनिक जीवन से दूर कहीं, वाक़ई इतिहास नाम की उस जगह में रहते होंगे, जहाँ तनखैये इतिहासकार बग़ल में काग़ज़-क़लम-कूची लेकर बैठते होंगे। हमारे इस जीवन में जिनकी मौजूदगी, बस कुछ डरावनी छायाओं की तरह दर्ज होती चलती है। हम यानी लोग, जिनके ऊपर जीवन को बदलने की नहीं, सिर्फ़ उसे जीने की ज़िम्मेदारी होती है।
यह उन्हीं हममें से एक के मानसिक भूगोल की यात्रा है, जिसमें हम दिन-दिन बनते इतिहास को जैसे एक सूक्ष्मदर्शी की मदद से, उसकी सबसे पतली शिराओं में गति करते देखते हैं। जो नंगी आँखों दिखाई नहीं देती। वह गति, जिसका दायित्व एक व्यक्ति के ऊपर है, वही जिसका भोक्ता है, वही द्रष्टा। वह गति जो उसकी भौतिक-सामाजिक-राजनीतिक उपस्थिति के इहलोक से उधर एक इतने ही विराट संसार की उपस्थिति के प्रति हमें सचेत करती है।
लेखक यहाँ हमारे इहलोक के अन्तिम सिरे पर एक चहारदीवारी के दरवाज़े-सा खड़ा मिलता है, जो इस वृत्तान्त में खुलता है; और हमें उस चहारदीवारी के भीतर बसी अत्यन्त जटिल और समानान्तर जारी दुनिया में ले जाता है, जो हम सबकी दुनिया है, अलग-अलग जगहों पर खड़े हम उसके अलग-अलग दरवाज़े हैं।
उन्हीं में से एक दरवाज़ा यहाँ इन पन्नों में खुल रहा है।
अद्भुत है यहाँ से समय को बहते देखना।
यह उपन्यास सोदाहरण बताता है कि न तो जीना ही, केवल शारीरिक प्रक्रिया है, और न लिखना ही।
Doctor On a Warfront
- Author Name:
Dr. Bharat Kelkar
- Book Type:

- Description: युद्ध! कोणतंच युद्ध माणसाला शहाणं करत नाही की कोणत्याही प्रश्नांची उत्तरं देत नाही. उलट ते नवे प्रश्न निर्माण करतं. बदल्याच्या भावनेनं माणसाला वेडं बनवतं. तरीही माणसं युद्ध करत राहतात, नवनवी शस्त्रं हाती घेऊन परस्परांना मारत राहतात. पण त्यात भरडले जातात ते निरपराध सामान्य नागरिक. विशेषतः युद्धाशी संबंध नसणाऱ्या महिला, मुलं आणि वयोवृद्ध माणसं हकनाक बळी ठरतात युद्धाचे... हीच बाब अनेकांना खेचून नेते युद्धभूमीकडे माणुसकीवरचा विश्वास दृढ करण्यासाठी... अशी माणसं मग युद्धाच्या जखमांवर उपाय करण्यासाठी धडपडत राहतात... त्यातूनच जन्माला येते ‘डॉक्टर विदाऊट बॉर्डर्स'सारखी संस्था, जी निसर्गनिर्मित अथवा मानवनिर्मित आपत्तींमध्ये अडकलेल्यांना जीवदान देण्याचं काम अव्याहतपणे करते. हीच संस्था काही सेवाव्रत्तींना संधी देते अडचणीत सापडलेल्या माणसांना वाचवण्याची. स्वतःचा जीव धोक्यात घालून ही सेवाव्रत्ती माणसं सहभागी होतात अशा मिशनमध्ये आणि अनुभवाचं एक वेगळंच विश्व घेऊन परततात. कसा असतो हा जगावेगळा अनुभव? कोणत्या परिस्थितीत ते युद्धग्रस्तांवर उपचार करतात? युद्धाकडे ते कसे बघतात? उपचारासाठी येणारे युद्धग्रस्त त्यांच्याकडे कसे बघतात? डोळ्यांसमोर अनेकांचा मृत्यू दिसत असताना जखमींना वाचवण्याची कसरत कशी चालते? अशा एक ना अनेक प्रसंगांचं, युद्धभूमीवरच्या नाट्याचं थरारक तितकंच अस्वस्थ करणारं अनुभवकथन... सीरिया, येमेन आणि इराक या तीन युद्धग्रस्त भागात रुग्णसेवा देण्यासाठी गेलेल्या एका भारतीय ऑर्थोपेडिक सर्जनने घेतलेले विलक्षण अनुभव मांडणारे मराठीतले पहिलेच पुस्तक... ‘डॉक्टर ऑन अ वॉरफ्रंट'! डॉक्टर ऑन अ वॉरफ्रंट | डॉ. भरत केळकर Doctor On A Warfront | Dr. Bharat Kelkar
Juloos Wala Adami
- Author Name:
Ramakant
- Book Type:

- Description: ‘जुलूस वाला आदमी’ कथाकार रमाकान्त का महत्त्वाकांक्षी उपन्यास है। उनके मन में इसे लिखने की रूपरेखा सन् 60 के दशक में बन चुकी थी, लेकिन इसका लिखा जाना उनके जीवन के अन्तिम दिनों तक जारी रहा। यह एक राजनीतिक उपन्यास है लेकिन उससे कहीं अधिक है आजादी से ठीक पहले और बाद के सामाजिक बदलाव की अकथ कथा। इस उपन्यास के सन्दर्भ में स्वयं कथाकार ने अपनी डायरी में यत्र-तत्र जो दर्ज किया है, परिचय के लिए वही अपने में पर्याप्त है। रमाकान्त जी के शब्दों में : “हमारे देश के स्वातंत्र्योत्तर काल में व्यक्ति और समाज के जीवन की कथा कही है मैंने इस उपन्यास में। उपन्यास इतिहास का दस्तावेज नहीं होता। यह किसी कालखंड में जीवन की मूलधारा और व्यक्ति की चेतना के विकास का अंकन होता है। यही कहने का प्रयास है मेरा ...यह उपन्यास कम्युनिस्ट पार्टी की राजनीतिक तिकड़मबाजी की नीति और संघर्षशील जनपक्ष के अंतर्विरोधों और उनके टकराव को उभारता है। मेरा नायक नेता नहीं बनना चाहता। ...जुलूस आगे बढ़ता रहता है और जुलूस वाला आदमी सब पीछे छोड़ता चलता है। जुलूस को कहाँ पहुँचना है, यह जानता है, पर कैसे, किन रास्तों से होकर गुजरेगा, यह नहीं जानता।” यह उपन्यास पाठकों को इस जुलूस में सहर्ष आमंत्रित करता है। इस उम्मीद के साथ कि ‘जुलूस वाला आदमी’ का पाठक अन्तिम सफे तक रचनाकार का साथ देते हुए, जीवन में इस जुलूस से बहुत कुछ पाएगा भी।
Yeh Kothewaliya
- Author Name:
Amritlal Nagar
- Rating:
- Book Type:

- Description: आज के भारतीय समाज में वेश्याओं के जीवन का हिन्दी या किसी भी अन्य भारतीय भाषा में, यह पहला विश्लेषणात्मक अध्ययन है। श्री अमृतलाल नागर ने बहुत समीप से और बहुत ही सहानुभूति से इस जीवन को देखा है, जिसे आम तौर पर रंगीन और ऐयाशी से पूर्ण समझा जाता है, लेकिन जो संघर्ष और निराशाओं से वैसे ही भरा है, जैसे कि अन्य सामान्य जीवन। इस अध्ययन में किसी उपन्यास से भी अधिक रोचकता है और सत्य पर आधारित होने के करण इसकी प्रमाणिकता अद्धितीय है। भारतीय समाज के अध्येताओं के लिए एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण पुस्तक।
Miss You Bruzo
- Author Name:
Tanishi Sharma
- Book Type:

- Description: Yes..., Bruzzo is a pet. The book revolves around it. The company of Bruzzo in the beautiful city of Dharamshala in Himachal Pradesh fulfills the long-cherished dream of a small girl. She would frequently ask her mother for a pet while she was living in Delhi. Her mother had always declined the girl's requests. When Covid 19 pandemic was at its peak in the first phase, the girl's family shifted to Dharamshala in a rented house. The owner of the house had a pet named Bruzzo. The ten years old girl spends plenty of time playing with him but the happiness lasts for a short while only...
Jo Bhula Diye Gaye
- Author Name:
Shriprakash Mishra
- Book Type:

-
Description:
चौरी चौरा कांड को कांग्रेसियों ने इतिहास के बाहर कर दिया कि उसके कारण गांधी जी ने अपना आन्दोलन वापस ले लिया था। क्रान्तिकारियों ने उसे बाहर कर दिया, क्योंकि उसमें किसी नामी-गिरामी क्रान्तिकारी ने हिस्सा नहीं लिया था। अंग्रेज़ों ने बाहर कर दिया, क्योंकि वह उनकी सत्ता को सीधे ललकार गया। दु:खद यह कि उसे जन ने भी बाहर कर दिया, जबकि वह सबाल्टर्न की दृष्टि से हुआ आज़ादी की लड़ाई में एक महत्त्वपूर्ण हस्तक्षेप था। फिर उसकी स्मृति कुछ लोगों के मन में हमेशा गूँजती रही है और नई पीढ़ी के लोग उससे जुड़े लोगों के बारे इधर काफ़ी जिज्ञासु दिखते हैं।
इस उपन्यास में उनकी कथा के साथ-साथ गोरखपुर के इलाक़े में प्रान्त और राष्ट्र से जुड़कर यह आज़ादी की लड़ाई 1920 से लेकर 1942 तक कैसे चली थी, उसकी एक झलक यहाँ मिलेगी, वहाँ के सामाजिक जीवन की तमाम छवियों के साथ।
उत्तर-पूर्व को लेकर लिखनेवाले श्रीप्रकाश मिश्र के लेखन में यह उपन्यास एक नया मोड़ इंगित करता है, जो पाठकों को कई तरह से पसन्द आएगा।
Aawazen Aur Deeware
- Author Name:
Vaikukam Mohammad Bashir
- Book Type:

- Description: ''क्या तुमने अपने आप कोई काम करके उसके सुख का अनुभव नहीं किया है? खेती करना...कम-से-कम एक पौधा रोपकर उसका फूल और फल देखना, कोई नई चीज़ तैयार करना, प्यासे भटकते कुत्ते को पानी पिलाना, भूखे आदमी को खाना खिलाना, ऐसा कोई काम...।'' ''आप तो जानते हैं, मैंने सिर्फ़ आदमियों को गोली मारी है। आदमियों का ख़ून पिया है और एक बार आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी।'' ''फिर?'' ''अच्छा, अब वह भी बता दूँ! मैं इसी रात यहीं से चला जाऊँगा।'' ''कहाँ?'' ''यह मेरा जन्म-स्थान है न! मैं माँ-बाप को ढूँढने की कोशिश करूँगा। हर घर में जाकर, हर औरत से पूछूँगा—'क्या तुम मेरी माँ हो? क्या तुम्हीं ने मुझे मेरे पैदा होते ही चिथड़ों में लपेटकर चौराहे के अँधेरे में डाल दिया था?' मरने के बाद भी मैं भयंकर प्रेत बनकर रात में हर घर में जाकर, आँखें फाड़कर दरवाजा खटखटाऊँगा।'' —इसी पुस्तक से
Tamas
- Author Name:
Bhisham Sahni
- Book Type:

-
Description:
मुझे ठीक से याद नहीं कि कब बम्बई के निकट, भिवंडी नगर में हिन्दू-मुस्लिम दंगे हुए। पर मुझे इतना याद है कि उन दंगों के बाद मैंने ‘तमस’ लिखना आरम्भ किया था।
भिवंडी नगर बुनकरों का नगर था, शहर के अन्दर जगह-जगह खड्डियाँ लगी थीं, उनमें से अनेक बिजली से चलनेवाली खड्डियाँ थीं। पर घरों को आग की नज़र करने से खड्डियों का धातु बहुत कुछ पिघल गया था। गलियों में घूमते हुए लगता हम किसी प्राचीन नगर के खंडहरों में घूम रहे हों।
पर गलियाँ लाँघते हुए, अपने क़दमों की आवाज़, अपनी पदचाप सुनते हुए लगने लगा, जैसे मैं यह आवाज़ पहले कहीं सुन चुका हूँ। चारों ओर छाई चुप्पी को भी ‘सुन’ चुका हूँ। अकुलाहट-भरी इस नीरवता का अनुभव भी कर चुका हूँ। सूनी गलियाँ लाँघ चुका हूँ।
पर मैंने यह चुप्पी और इस वीरानी का ही अनुभव नहीं किया था। मैंने पेड़ों पर बैठे गिद्ध और चीलों को भी देखा था। आधे आकाश में फैली आग की लपटों की लौ को भी देखा था, गलियों-सडक़ों पर भागते क़दमों और रोंगटे खड़े कर देनेवाली चिल्लाहटों को भी सुना था, और जगह-जगह से उठनेवाले धर्मान्ध लोगों के नारे भी सुने थे, चीत्कार सुनी थी।
कुछेक दिन तक बम्बई में रहने के बाद मैं दिल्ली लौट आया।
आमतौर पर मैं शाम के वक़्त लिखने बैठता था। मेरा मन शाम के वक़्त लिखने में लगता है। न जाने क्यों। पर उस दिन नाश्ता करने के बाद मैं सुबह-सवेरे ही मेज़ पर जा बैठा था।
यह सचमुच अचानक ही हुआ, पर जब क़लम उठाई और काग़ज़ सामने रखा तो ध्यान रावलपिंडी के दंगों की ओर चला गया। कांग्रेस का दफ़्तर आँखों के सामने आया। कांग्रेस के मेरे साथी एक के बाद एक योगी रामनाथ, बख़्शीजी, बालीजी, हकीमजी, अब्दुल अज़ीज़, मेहरचन्द आहूजा, अज़ीज़, जरनैल...मास्टर अर्जुनदास...उनके चेहरे आँखों के सामने घूमने लगे। मैं उन दिनों की यादों में डूबता चला गया।
–भीष्म साहनी (अपनी आत्मकथा ‘आज के अतीत’ में )
Chiranjeev
- Author Name:
Chandrakishore Jaiswal
- Book Type:

-
Description:
परम्परा और आधुनिकता का समन्वय करते हुए लोक-मन और उसमें प्रवाहित करुणा के सामाजिक भाव को अपनी रचनाओं में समेटकर जीवन की गाथाएँ रचने वाले चन्द्रकिशोर जायसवाल का यह उपन्यास पारिवारिक जीवन के सौन्दर्य को इतने विस्तार और बारीकी से सम्भवत: पहली बार अपने कथानक का विषय बनाता है। कथानक के केन्द्र में शशांक, दिव्या और इस दम्पति का पुत्र टीपू हैं। इन्हीं पात्रों और इनके जीवन के बहाने लेखक ने इस उपन्यास में ग्रामीण और कस्बाई जीवन के छोटे-छोटे ब्योरों से यह कथा बुनी है जो दरअसल भारत के समूचे लोक-परिवेश का महाख्यान है।
यह उपन्यास सम्बन्धों के जटिल संजाल के साथ लोक की उस ऊष्मा को भी पुनर्जीवित करता है, जो हमारे आधुनिक समय के हाशिये पर उपेक्षित जा पड़ी है। विवरण-सघनता इस उपन्यास में एक तरफ अगर लेखक की विशाल अनुभव-सम्पदा का प्रमाण है तो दूसरी तरफ उसकी रचनात्मक ऊर्जा का भी साक्ष्य है। यही वह भूमि है जो इस उपन्यास को अनूठा और दुर्लभ बनाती है, और जिससे गुजरते हुए पाठक इसके संसार का हिस्सा हो जाता है।
जिजीविषा के साथ यह उपन्यास मृत्यु को भी अपने कथ्य की परिधि में समेटता है, लेकिन जीवन की तलाश उसके परे भी जारी रहती है। निस्सन्देह इस उपन्यास में वह सब है जिसकी अपेक्षा एक विधा के तौर पर उपन्यास से की जाती है।
Tantya
- Author Name:
Baba Bhand
- Book Type:

-
Description:
टंट्या भील मध्यभारत में उन्नीसवीं सदी के महान आदिवासी जननायक के रूप में जाना जाता है। बचपन तथा युवावस्था में टंट्या को असहनीय यातनाओं से गुज़रना पड़ा। टंट्या की समझ में नहीं आ रहा था कि उसे, उसके परिवार और समाज को बदहाली, अन्याय और शोषण का शिकार क्यों होना पड़ा। धीरे-धीरे वह सोचने लगा, इसी सोच ने उसे अन्याय और शोषण के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा दी। उसने सामन्ती व्यवस्था तथा उस व्यवस्था की रक्षा करनेवाली ब्रिटिश राजसत्ता को गम्भीर चुनौती दी। दलितों-शोषितों और आम आदमी ख़ासकर सर्वहारा किसानों-मज़दूरों का पक्ष लेकर उन्हें इस महासंग्राम में शामिल करने के लिए टंट्या ने अपनी जान की बाज़ी लगा दी। प्रचलित नीतिमूल्यों को नज़रअन्दाज़ कर गहरे मानवीय मूल्यों पर उसने अपने संघर्ष की नींव रखी। सरकार की नज़र में वह डकैतों का सम्राट था, लेकिन लोकमानस में वह ईश्वरीय अंश धारण करनेवाला जननायक माना गया। वह आज भी लोकमानस में मिथक के रूप में अमर है।
टंट्या जैसे अलौकिक जननायक पर उपन्यास लिखने का प्रयास कठिन कर्म है। टंट्या की जीवनगाथा मिथकों और लोककथाओं में इस क़दर घुल-मिल गई है कि रहस्य तथा चमत्कार को यथार्थ से अलग करना असम्भव-सा था, लेकिन उपन्यासकार ने अपने प्रामाणिक शोध के ज़रिए और रचनात्मकता के सहारे जीवन-चरित्र के यथार्थ को उजागर करने का प्रयास किया है। यह ग़ौरतलब है कि लोकप्रिय या सरलीकृत वर्णन की फिसलन इस उपन्यास में नहीं दिखती। अनावश्यक भावुकता से बचाव, चिन्तनशीलता, संयत भाषिक अभिव्यक्ति, गहन मानवीय अन्तर्दृष्टि, इतिहास और समकालीनता के बीच जटिल अन्तर्सम्बन्धों का अहसास आदि कई विशेषताओं के कारण यह उपन्यास सर्जन के सहारे इतिहास की पुनर्रचना का महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ बन गया है। उपन्यासों के भारतीय परिदृश्य में बाबा भांड की यह कृति निस्सन्देह महत्त्वपूर्ण है तथा प्रो. निशिकान्त ठकार जैसे अनुवादक के हाथों से हुआ इस कृति का अनुवाद पाठकों के लिए मूल्यवान उपलब्धि है।
—प्रो. चन्द्रकान्त पाटील
Banarsibai
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book