Teri Hi Tasveer
Author:
Harsh RanjanPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 167.45
₹
197
Available
महाभारत और गीता के कृष्ण भूले-भटके, थके-थके से सूरदास और मीराबाई के भजन सुन रहे थे... वो हाथ के सुदर्शन औरकुरुक्षेत्र के रण से अलग अपनी एक नयी पहचान बुन रहे थे...फिर मैंने उनकी गैया नहीं देखी... मैया भी नहीं देखी... सिर्फपरकटे मोर-मोरनी और कभी की रंग-बिरंगी चिडि़यां देखी। ...फिर सारे मोरपंख मैंने स्याही में डाले और हजार पन्नों का सफर सिर्फकृष्ण-कृष्ण लिखकर निकाल डाले। हरेक सौवां पन्ना मील का एक पत्थर था जिसे कृष्ण का अभय और वर था...और खुद ये उनके लिएआश्वासन था कि उनकी पहचान लिखने का साधन आखिरी हर नये युग के नये कृष्ण का आह्वाहन था।
ISBN: 9788193650141
Pages: 140
Avg Reading Time: 2 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: रश्मि शर्मा का दूसरा कहानी-संग्रह 'सपनों के ढाई घर' इस बात का प्रमाण है कि कथा-लेखन उनके लिए एक गम्भीर एवं जिम्मेदारी भरा सतत कर्म है। जाहिरन, इसका निर्वाह वह अपनी निरन्तर रचनात्मकता और सार्थक हस्तक्षेप से कर रही हैं। इस संग्रह की तमाम कहानियाँ अपने परिवेश के प्रति उनकी सजग संवेदनशीलता और उनमें निहित अदीठ जीवन-सत्यों को खोज निकालने की उनकी दृष्टि एवं कौशल से सम्भव हुई हैं। ये कहानियाँ विषय वैविध्य के कारण जितना पाठकों को समृद्ध करती हैं, उतना ही मनुष्य मन की जटिलताओं में उतरकर उनके अवगुंठनों को खोलते हुए चकित भी करती हैं। ये कहानियाँ स्त्री जीवन की विडम्बनाओं के उन बन्द कपाटों को खोलने की कोशिश करती हैं, जिनके पीछे उनकी नियति छुपी बैठी है। 'सपनों के ढाई घर' जिस तरह प्रतिरोध रचती है, वह न सिर्फ चकित करता है, बल्कि पाठकीय चेतना पर उसका असर भी देर तक बना रहता है। रश्मि प्रेम, संवेदना और संचेतना के संयोग से कथा-परिदृश्य निर्मित करती हैं, जिसके भीतर स्त्री-जीवन की अनेक छवियाँ मिलती हैं। इनमें अपनी स्मृतियों में जीती कोई नानी है, तो अपनी परम्परागत कला के बूते अपनी पहचान पर गर्व करती आदिवासी समाज की रुदनी भी है। अपने अकेलेपन के बीच अपने जीवन में आए पुरुषों को याद करती श्रेया है, अपने पति के लिए चिन्तित कृतिका है, अपनी पूर्व मालकिन से होड़ लेती सोनी है, अपने जीवन में अप्रत्याशित फैसले लेती पूर्णिमा है। जाहिर तौर पर ये अनेक स्त्रियाँ हैं, लेकिन इन सभी से मिलकर स्त्री-जीवन का वृत्त बनता है। रश्मि शर्मा ने इसे बड़ी संलग्नता, कौशल और धैर्य से रचा है। इस रचाव में उनका सूक्ष्म ऑब्जर्वेशन और मनुष्य मनोविज्ञान की गहन समझ शामिल है। इन कहानियों का सौन्दर्य किसी कलाबाजी में नहीं, अपने कहन के सौष्ठव में निहित है। ये अपने कथ्य के अनुकूल अपना शिल्प लेकर आती हैं, लिहाजा, इन्हें पढ़ने का आस्वाद भी भिन्न है और इनका प्रभाव भी अभिन्न। यह संग्रह रश्मि शर्मा के कथा-कौशल की एक और बानगी है। —अवधेश प्रीत
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