Kya Karen?
Author:
Nikolai ChernyshevskyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 360
₹
450
Available
कोई एक कथाकृति किसी समाज को किस हद तक प्रभावित कर सकती है और इतिहास-निर्माताओं की एक पूरी पीढ़ी को शिक्षित–दीक्षित करने में कितनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, इसे जानने के लिए उन्नीसवीं शताब्दी के आख़िरी चार दशकों (और बीसवीं शताब्दी के पहले दशक) के दौरान रूसी समाज, और विशेषकर युवा समुदाय पर, ‘क्या करें?’ के प्रभाव का अध्ययन किया जा सकता है।</p>
<p>यह उपन्यास अपने समय के प्रगतिशील युवाओं के सामने व्यावहारिक कार्रवाई की एक ठोस योजना प्रस्तुत करता है। ‘क्या करें?’ उपन्यास में एकदम नए क़िस्म के लोगों के जीवन की कहानी प्रस्तुत की गई है, जिनके सर्वथा नई क़िस्म की नैतिक और सामाजिक विचार थे, नए क़िस्म का पारिवारिक जीवन था। वे अपने श्रम के सहारे जीवनयापन करनेवाले लोग थे जो अपने व्यावहारिक जीवन के उदाहरण से लोगों को समाजवाद के विचारों का क़ायल करते थे। 1860 के दशक के रूस में प्रस्तुत चरित्र निस्सन्देह भविष्य के नागरिक थे।
ISBN: 9788126713806
Pages: 440
Avg Reading Time: 15 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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Dominique Lapierre
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- Description: स्वाधीनता-आन्दोलन की चरम परिणति थी आज़ादी लेकिन उससे जुड़ा सदी का कुरूपतम सच—विभाजन। बारह बजे रात के उसी का वृत्तान्त है। यह बड़ी–बड़ी परिघटनाओं वाला इतिहास नहीं बल्कि छोटी-छोटी घटनाओं, मामूली विवरणों, हज़ारों दस्तावेजों और साक्षात्कारों से सजा सूक्ष्म इतिहास है। हालाँकि लैरी कॉलिन्स और डोमीनिक लापियर दोनों विदेशी लेखक हैं, फिर भी जिस आत्मीयता और निष्पक्षता से उन्होंने विभाजन के गोपन रहस्यों, षड्यंत्रों, साम्प्रदायिक नंगई और ओछेपन को उजागर किया है, उसकी चतुर्दिक सराहना हुई है। दिलचस्प है कि इसमें कहीं भी ब्रिटिश साम्राज्यवाद का पक्ष नहीं लिया गया है। विरले ही कोई ग़ैर-साहित्यिक कृति क्लासिक बनती है लेकिन सच्चाई, पठनीयता और निष्पक्षता की बदौलत यह क्लासिक बन गई है। भारतीय उपमहाद्वीप की कई पीढ़ियाँ इसे पढ़ेंगी।
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