Kason Kahon Main Dardiya

(0)

Author:

Rita Shukla

Language:

Hindi

₹ 400

320 (20% off)

Available

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


"संगोष्‍ठी में भाग लेने के लिए आई विद्वन्मंडली उनके परंपराभंजक रूप को देखकर चमत्कृत थी । ताजा हवा के झोंकों- से स्कूर्त वे विचार उनकी अंतरात्मा की प्रतिध्वनि बनकर फूटे थे ।-दहेज समाज की रगों में प्रवाहित होनेवाला सबसे बड़ा प्रदूषण है... .विवाह के पारंपरिक स्वरूप में विकृतियाँ उत्पन्न करनेवाले. ऐसे अभिशप्‍त संदर्भों से मुक्‍त‌ि पानी ही होगी... .दहेज देनेवाला भी समान पातक का भागी होता है.... वापसी की यात्रा तय करते समय उनके विचार विरु बनकर उनका मुँह चिढ़ाने लगे थे.... । कीचड़ में जन्म लेकर उससे निर्लिप्‍तता कि स्थिति पंकज की हो सकती है-जिंदगी पुरइन का पात नहीं... .जिसकी चिकनाहट जल की एक बूँद की भी अवधारणा नहीं कर सके । सामाजिकता में सराबोर जलकुंभी-सा परंपरा-ग्रथित मन अपनी निस्पृहता सिद्ध करना चाहे भी तो उसे लोकधर्म की परिभाषाओं से मुक्‍त‌ि पानी होगी- संसार में रहकर संसार से ऊपर उठने की महती आकांक्षा यतिभाव को जन्म देती है-संन्यास लोकाचार से पलायन का दूसरा नाम हो सकता है; लेकिन लोकाचार पूर्वजों के द्वारा पोषित होती चली आ रही परंपराओं का एक ऐसा विवश स्वीकार है, जिसके बगैर जीवन की गति नहीं.... । विस्‍मय तो उन्हें तब हुआ था जब उनकी दूसरी पुत्री ने स्वयं उनके सामने प्रस्ताव रखा था-बाबूजी, इनके कार्यालय में सबके पास स्कूटर, मोटर साइकल हैं -सिर्फ ये ही... .हमारी सासजी कहती हैं -इतने बड़े प्राध्यापक हैं, क्या अपने दामाद को एक स्कूटर भी नहीं दे सकते... .हमने तो मोटरगाड़ी की आस लगाई थी । - इसी संकलन से बहुचर्चित कथाकार ऋता शुक्ल की कहानियों में समाज का संत्रास आँखोंदेखी घटना के रूप में उभरता है । तभी तो उनकी कहानियाँ संस्मरण, रेखाचित्र और कहानी का मिला-जुला अनूठा आनंद प्रदान करती हैं । उनकी हृदयस्पर्शी कहानियों का संकलन है- कासों कहों मैं दरदिया । "

Read more

ISBN
N/A
Pages
N/A
Avg Reading Time
5 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Don’t Miss Out

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format:

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

"संगोष्‍ठी में भाग लेने के लिए आई विद्वन्मंडली उनके परंपराभंजक रूप को देखकर चमत्कृत थी । ताजा हवा के झोंकों- से स्कूर्त वे विचार उनकी अंतरात्मा की प्रतिध्वनि बनकर फूटे थे ।-दहेज समाज की रगों में प्रवाहित होनेवाला सबसे बड़ा प्रदूषण है... .विवाह के पारंपरिक स्वरूप में विकृतियाँ उत्पन्न करनेवाले. ऐसे अभिशप्‍त संदर्भों से मुक्‍त‌ि पानी ही होगी... .दहेज देनेवाला भी समान पातक का भागी होता है....
वापसी की यात्रा तय करते समय उनके विचार विरु बनकर उनका मुँह चिढ़ाने लगे थे.... । कीचड़ में जन्म लेकर उससे निर्लिप्‍तता कि स्थिति पंकज की हो सकती है-जिंदगी पुरइन का पात नहीं... .जिसकी चिकनाहट जल की एक बूँद की भी अवधारणा नहीं कर सके । सामाजिकता में सराबोर जलकुंभी-सा परंपरा-ग्रथित मन अपनी निस्पृहता सिद्ध करना चाहे भी तो उसे लोकधर्म की परिभाषाओं से मुक्‍त‌ि पानी होगी- संसार में रहकर संसार से ऊपर उठने की महती आकांक्षा यतिभाव को जन्म देती है-संन्यास लोकाचार से पलायन का दूसरा नाम हो सकता है; लेकिन लोकाचार पूर्वजों के द्वारा पोषित होती चली आ रही परंपराओं का एक ऐसा विवश स्वीकार है, जिसके बगैर जीवन की गति नहीं.... ।
विस्‍मय तो उन्हें तब हुआ था जब उनकी दूसरी पुत्री ने स्वयं उनके सामने प्रस्ताव रखा था-बाबूजी, इनके कार्यालय में सबके पास स्कूटर, मोटर साइकल हैं -सिर्फ ये ही... .हमारी सासजी कहती हैं -इतने बड़े प्राध्यापक हैं, क्या अपने दामाद को एक स्कूटर भी नहीं दे सकते... .हमने तो मोटरगाड़ी की आस लगाई थी ।
- इसी संकलन से बहुचर्चित कथाकार ऋता शुक्ल की कहानियों में समाज का संत्रास आँखोंदेखी घटना के रूप में उभरता है । तभी तो उनकी कहानियाँ संस्मरण, रेखाचित्र और कहानी का मिला-जुला अनूठा आनंद प्रदान करती हैं । उनकी हृदयस्पर्शी कहानियों का संकलन है- कासों कहों मैं दरदिया ।
"

Book Details

  • ISBN
    9789352664146
  • Pages
    164
  • Avg Reading Time
    5 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

(0)

0 out of 5

Book

Kason Kahon Main Dardiya opens with a scholar electrifying a seminar audience with her rejection of dahej (dowry) as "the greatest pollution flowing through society's veins." Her words resonate as fresh air breaking through convention. Yet the narrative pivots sharply: on her return journey, those same convictions begin to mock her, transforming into virū — thorns that prick conscience. The description evokes the lotus metaphor: born in mud yet striving for purity, incomplete. This Hindi literary work from Prabhat Prakashan does not offer easy resolutions. Instead, it stages the internal collision between public declaration and private compromise, exposing how deeply distortions in dowry and marriage rituals are embedded even in the minds of the enlightened. The book's power lies in its refusal to let the reader—or its protagonist—off the hook.

Kason Kahon Main Dardiya किताब पढ़ने से मुझे कैसा अनुभव मिलेगा?

Kason Kahon Main Dardiya किताब आपको आत्मचिंतन में डुबो देगी। यह किसी नायिका की विजय-गाथा नहीं है, बल्कि एक विचारशील व्यक्ति के अंतर्द्वंद्व की कथा है। संगोष्ठी में बोले गए निर्भीक विचार और घर लौटते समय उन्हीं विचारों का मुँह चिढ़ाना — यह विरोधाभास आपको अपने भीतर झाँकने पर मजबूर करेगा। भाषा सीधी और मर्मभेदी है, जो आपकी सोच को झकझोर देती है।

Kason Kahon Main Dardiya किताब किन पाठकों के लिए सबसे उपयुक्त है और इससे क्या अपेक्षा रखनी चाहिए?

  • जो पाठक सामाजिक पाखंड और दहेज प्रथा पर गंभीर चर्चा चाहते हैं
  • जो साहित्य में सहज समाधान नहीं, बल्कि नैतिक संघर्ष की परतें खोजते हैं
  • जो हिंदी साहित्य की उस धारा को सराहते हैं जो प्रगतिशील विचार और व्यक्तिगत यथार्थ के बीच की खाई दिखाती है
  • जो अपने खुद के मूल्यों और व्यवहार के बीच के अंतर को स्वीकारने का साहस रखते हैं

Kason Kahon Main Dardiya किताब का विषय आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक या ऐतिहासिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?

दहेज आज भी भारतीय समाज की रगों में बह रहा है — कानून बने, जागरूकता अभियान चले, फिर भी विवाह के समय यह प्रथा अलग-अलग रूपों में जीवित रहती है। यह किताब उस दोहरेपन को उजागर करती है जो शिक्षित, प्रगतिशील लोगों में भी मौजूद है। यह सवाल उठाती है कि हम विचार और व्यवहार में कितने ईमानदार हैं। समकालीन भारत में यह प्रासंगिकता बरकरार है।

Kason Kahon Main Dardiya लेखक का इस विषय पर नज़रिया क्या विशिष्ट बनाता है?

लेखक ने नायिका को न तो आदर्श बनाया है, न खलनायक। संगोष्ठी में बोले गए उसके तेज़तर्रार विचार और फिर यात्रा में उन्हीं विचारों का काँटे बनकर चुभना — यह द्वंद्व ही कथा की जान है। लेखक ने कीचड़ में जन्मे कमल की अधूरी छवि का उपयोग किया है, जो दिखाता है कि मुक्ति का दावा करना और उसे जीना — दोनों अलग हैं। यह ईमानदारी इस कृति को अलग खड़ा करती है।

Kason Kahon Main Dardiya किताब पढ़ने के बाद पाठक के मन में क्या अनुभव होता है — भावनात्मक, बौद्धिक या सांस्कृतिक स्तर पर?

यह किताब आपके भीतर एक असहज सवाल छोड़ जाती है: क्या मैं खुद अपने विश्वासों के अनुसार जीता हूँ? यह आपको यह समझने पर मजबूर करती है कि सामाजिक बुराइयों की जड़ें कितनी गहरी हैं — यहाँ तक कि उन लोगों में भी जो उनका विरोध करते हैं। भावनात्मक रूप से यह बेचैनी देती है, बौद्धिक रूप से आत्मनिरीक्षण की माँग करती है, और सांस्कृतिक रूप से यह याद दिलाती है कि बदलाव केवल भाषण से नहीं, आचरण से आता है।

View on Rachnaye →

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp