Hajoor Aaman

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Author:

Shabbir Ahmad

Language:

Hindi

699

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हजूर आमा भादी समाज के अफ़राद की सूरत-ए-हाल को पेश करता है। इस नॉवेल में सियासी, समाजी, तारीख़ी और तहज़ीबी हवालों से भी वाक़ियात क़लमबन्द किए गए हैं, जिसमें देबलीना की दास्तान-ए-इश्क़, भादी समाज की तवह्हुम-परस्ती, शुमाली बंगाल में गोरखा लैंड तहरीक के हालात को बुनियाद बनाया गया है। नॉवेल का उस्लूब-ए-बयान रवाँ है जिसमें myth और इज्तिमाई लाशऊर कारफ़रमा हैं। अपनी ज़बान-ओ-बयान के ऐतबार से नॉवेल में readability की सिफ़त मौजूद है।

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ISBN
9789394494909
Pages
496
Avg Reading Time
17 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Format:

Piracy Free

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About the Book

हजूर आमा भादी समाज के अफ़राद की सूरत-ए-हाल को पेश करता है। इस नॉवेल में सियासी, समाजी, तारीख़ी और तहज़ीबी हवालों से भी वाक़ियात क़लमबन्द किए गए हैं, जिसमें देबलीना की दास्तान-ए-इश्क़, भादी समाज की तवह्हुम-परस्ती, शुमाली बंगाल में गोरखा लैंड तहरीक के हालात को बुनियाद बनाया गया है। नॉवेल का उस्लूब-ए-बयान रवाँ है जिसमें myth और इज्तिमाई लाशऊर कारफ़रमा हैं। अपनी ज़बान-ओ-बयान के ऐतबार से नॉवेल में readability की सिफ़त मौजूद है।

Book Details

  • ISBN
    9789394494909
  • Pages
    496
  • Avg Reading Time
    17 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

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Hajoor Aaman situates a woman's love story inside the political upheaval and mythic thinking of the Bhadi community in North Bengal. The novel centres on Debalina, whose personal narrative is inseparable from the superstitions, customs, and tensions that define her society. Against the backdrop of the Gorkhaland movement, the book weaves together political, social, historical, and cultural strands with a readability rooted in its flowing prose. What distinguishes this work is its treatment of myth not as decoration but as lived social consciousness—belief systems that shape choices, marriages, and migrations. The narrative does not romanticise tradition; it examines how collective memory and fear operate in a community caught between ethnic assertion and inherited ritual. Written with attention to the textures of everyday life in North Bengal, the novel offers a window into a world rarely centred in Hindi literary fiction.

हजूर आमा पढ़ने से मुझे किस तरह का अनुभव मिलेगा?

यह उपन्यास आपको एक ऐसी दुनिया में ले जाता है जहाँ प्रेम, राजनीति और अंधविश्वास एक साथ चलते हैं। देबलीना की कहानी भावनात्मक रूप से गहरी है, लेकिन इसे पढ़ना सरल और प्रवाहपूर्ण है। यह उपन्यास आपको सोचने पर मजबूर करता है कि समाज में मिथक और सामाजिक चेतना कैसे व्यक्तिगत जीवन को आकार देते हैं, और आपको उत्तरी बंगाल की एक अनोखी सांस्कृतिक दुनिया का अनुभव देता है।

यह किताब किस तरह के पाठकों के लिए उपयुक्त है?

यह उपन्यास उन पाठकों के लिए है जो राजनीतिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि वाली कहानियों में रुचि रखते हैं। यदि आप भारत के कम चर्चित समुदायों, जैसे भादी समाज, और उनके जीवन को समझना चाहते हैं, तो यह किताब आपके लिए है। यह उन लोगों को भी आकर्षित करेगी जो गोरखालैंड आंदोलन और उत्तरी बंगाल के इतिहास में रुचि रखते हैं, और जो साहित्य में प्रेम और परंपरा के बीच तनाव को देखना पसंद करते हैं।

इस उपन्यास का विषय आज के भारतीय पाठकों के लिए सांस्कृतिक या ऐतिहासिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है?

गोरखालैंड आंदोलन आज भी उत्तर पूर्व भारत में पहचान और स्वायत्तता का सवाल है। यह उपन्यास दिखाता है कि राजनीतिक संघर्ष व्यक्तिगत जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं। भादी समाज जैसे छोटे समुदायों की आवाज़ें हिंदी साहित्य में कम सुनी जाती हैं, और यह पुस्तक उन्हें केंद्र में लाती है। यह पाठकों को याद दिलाती है कि भारत की विविधता केवल भाषा या धर्म में नहीं, बल्कि जातीय और सांस्कृतिक परतों में भी है।

इस लेखक का दृष्टिकोण इस विषय को कैसे अलग बनाता है?

लेखक मिथक को केवल कहानी के तत्व के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के रूप में प्रस्तुत करते हैं। वे दिखाते हैं कि अंधविश्वास और परंपराएँ समाज में कैसे जीवित रहती हैं और निर्णयों को प्रभावित करती हैं। उनकी भाषा रवाँ और सुलभ है, जो पाठकों को जटिल राजनीतिक और सांस्कृतिक विषयों को समझने में मदद करती है। वे परंपरा को न तो महिमामंडित करते हैं और न ही खारिज करते हैं, बल्कि उसे ईमानदारी से देखते हैं।

यह उपन्यास पाठक के मन में लंबे समय तक क्या छोड़ जाता है?

यह उपन्यास आपको यह सोचने पर मजबूर करता है कि व्यक्तिगत प्रेम और सामूहिक विश्वास एक दूसरे से कैसे टकराते हैं। आप देबलीना की यात्रा को याद रखेंगे, और यह भी कि कैसे राजनीतिक आंदोलन सामान्य जीवन को बदल देते हैं। यह किताब आपको भारत के उन हिस्सों की समझ देती है जो अक्सर मुख्यधारा की चर्चा से बाहर रहते हैं, और यह भी कि परंपरा और आधुनिकता के बीच तनाव हर समाज में कैसे मौजूद है।

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