Tapas
(0)
Author:
Varun Kumar PandeyPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Contemporary-fiction₹
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तापस' केवल एक उपन्यास नहीं है; यह व्यक्ति के अंतःकरण के समूल परिवर्तन की एक यात्रा है। यह सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास के गहरे संगम की खोज करता है, यह दरशाते हुए कि कैसे ये तत्त्व आपस में मिलकर युवाओं के बीच एक गहरे उद्देश्य और जुड़ाव की भावना को बढ़ावा दे सकते हैं। यह उपन्यास वर्तमान समय की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहाँ परंपरा नवाचार से मिलती है और प्राचीन ज्ञान समकालीन चुनौतियों का सामना करता है। कहानी रवि और सीमा पर केंद्रित है, जो युवा और अत्यधिक सफल व्यवसायी हैं। उनकी यात्रा के माध्यम से पाठकों को यह देखने का अवसर मिलता है कि कैसे सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक खोज और सामाजिक सहभागिता व्यक्तियों को अपने जीवन और समुदायों को बदलने की शक्ति दे सकती हैं। रवि के अनुभव एक सार्वभौमिक पहचान और संतोष की खोज को दरशाते हैं, जो इस विश्वास पर आधारित हैं कि सच्ची वृद्धि तब होती है, जब किसी की व्यक्तिगत आकांक्षाएँ बड़े हितों के साथ मेल खाती हैं। यह उपन्यास आपस में जुड़े उत्थान के सार को पकड़ने का प्रयास करता है, यह दिखाते हुए कि व्यक्तिगत विकास को उन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयामों से अलग नहीं किया जा सकता, जो हमारे जीवन को आकार देते हैं।
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तापस' केवल एक उपन्यास नहीं है; यह व्यक्ति के अंतःकरण के समूल परिवर्तन की एक यात्रा है। यह सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास के गहरे संगम की खोज करता है, यह दरशाते हुए कि कैसे ये तत्त्व आपस में मिलकर युवाओं के बीच एक गहरे उद्देश्य और जुड़ाव की भावना को बढ़ावा दे सकते हैं। यह उपन्यास वर्तमान समय की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहाँ परंपरा नवाचार से मिलती है और प्राचीन ज्ञान समकालीन चुनौतियों का सामना करता है।
कहानी रवि और सीमा पर केंद्रित है, जो युवा और अत्यधिक सफल व्यवसायी हैं। उनकी यात्रा के माध्यम से पाठकों को यह देखने का अवसर मिलता है कि कैसे सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक खोज और सामाजिक सहभागिता व्यक्तियों को अपने जीवन और समुदायों को बदलने की शक्ति दे सकती हैं। रवि के अनुभव एक सार्वभौमिक पहचान और संतोष की खोज को दरशाते हैं, जो इस विश्वास पर आधारित हैं कि सच्ची वृद्धि तब होती है, जब किसी की व्यक्तिगत आकांक्षाएँ बड़े हितों के साथ मेल खाती हैं। यह उपन्यास आपस में जुड़े उत्थान के सार को पकड़ने का प्रयास करता है, यह दिखाते हुए कि व्यक्तिगत विकास को उन सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयामों से अलग नहीं किया जा सकता, जो हमारे जीवन को आकार देते हैं।
Book Details
-
ISBN9789355625687
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Vinayak, a Sahitya Akademi-award winning Hindi Novel, as a sequel to the author;s first novel 'Gobar Ganesh', according to the novelist, is the "pratismriti" (remembrance of our national-cultural memories) and the katha or narrative of India as a civilizational state. Its multi-perspectiveal, multi-centric kathana (plot), involving characters representing a cross section of Indian Society, is marked by engaging and interesting debates on such issues as gender-politics, culturalimperialism, casteism, communalism, the Kashmir-question and the condition of Kashmiri Pundits, sustainable development, ecological consciouness, swaraj or decolonization of mind, role of "Breaking India" forces comouflaged as NGO-activism, and the all0embracing nature of the spiritual that subsumes the secular, the significance of purusharthas or cardinal principles of life, etc. A sahridaya or cultivaed reader whould also relish how deftly the narrative echoes the voices of such great masters as Valmiki, Vyas, Krishna, Keats, Rike, Yeats, Eliot, Naipaul, Proust, Prasad and others.
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