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Bhakta Dhruva

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किशोर पाठकों के प्रति दायित्वबोध से भरकर महाकवि ‘निराला’ ने काफ़ी कुछ लिखा है। उनके मन में भारतीय पुराकथाओं के अनेक आदर्श चरित्र थे, जिनको वे किशोर पाठकों तक ले जाना चाहते थे। ‘भक्त ध्रुव’ उनकी एक ऐसी ही पुस्तक है। ‘भक्त ध्रुव’ एक पौराणिक आख्यान पर आधारित है, किन्तु निराला ने इसमें ध्रुव की चिन्ता को एक मानवीय अर्थ देने का प्रयास किया है—“गहन अरण्य में एक ओर चिन्ता में डूबा हुआ एक बालक मन–ही–मन अपने भविष्य की चिन्ता कर रहा है। वह मनुष्य है, मनुष्य का हक़ लेकर पैदा हुआ है, मनुष्य से मनुष्योचित व्यवहार की आशा रखता है—तिरस्कार, घृणा, अपमान, अत्याचार, निर्यातन इन पाशविक वृत्तियों के विरोध के लिए आज उसके ख़ून का हर एक बूँद तीव्र गति से उसे कार्य–तत्पर कर रहा है। बालक सोच रहा है इस अत्याचार का उपाय। चिरकाल से मनुष्य जाति, मनुष्य जाति पर जो अत्याचार करती चली आ रही है, इसका कारण और साथ ही इसका प्रतिरोध भी। वह अत्याचार सहने के लिए नहीं आया।” स्पष्ट है कि निराला ने एक पौराणिक आख्यान को नए अर्थ दिए हैं, उसे हमारी आज की चिन्ताओं से जोड़ा है। अत्यन्त प्रांजल भाषा में लिखी गई यह पुस्तक किशोर पाठकों के लिए न केवल रोचक बल्कि प्रेरणाप्रद भी सिद्ध होगी

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किशोर पाठकों के प्रति दायित्वबोध से भरकर महाकवि ‘निराला’ ने काफ़ी कुछ लिखा है। उनके मन में भारतीय पुराकथाओं के अनेक आदर्श चरित्र थे, जिनको वे किशोर पाठकों तक ले जाना चाहते थे। ‘भक्त ध्रुव’ उनकी एक ऐसी ही पुस्तक है।

‘भक्त ध्रुव’ एक पौराणिक आख्यान पर आधारित है, किन्तु निराला ने इसमें ध्रुव की चिन्ता को एक मानवीय अर्थ देने का प्रयास किया है—“गहन अरण्य में एक ओर चिन्ता में डूबा हुआ एक बालक मन–ही–मन अपने भविष्य की चिन्ता कर रहा है। वह मनुष्य है, मनुष्य का हक़ लेकर पैदा हुआ है, मनुष्य से मनुष्योचित व्यवहार की आशा रखता है—तिरस्कार, घृणा, अपमान, अत्याचार, निर्यातन इन पाशविक वृत्तियों के विरोध के लिए आज उसके ख़ून का हर एक बूँद तीव्र गति से उसे कार्य–तत्पर कर रहा है। बालक सोच रहा है इस अत्याचार का उपाय। चिरकाल से मनुष्य जाति, मनुष्य जाति पर जो अत्याचार करती चली आ रही है, इसका कारण और साथ ही इसका प्रतिरोध भी। वह अत्याचार सहने के लिए नहीं आया।”

स्पष्ट है कि निराला ने एक पौराणिक आख्यान को नए अर्थ दिए हैं, उसे हमारी आज की चिन्ताओं से जोड़ा है। अत्यन्त प्रांजल भाषा में लिखी गई यह पुस्तक किशोर पाठकों के लिए न केवल रोचक बल्कि प्रेरणाप्रद भी सिद्ध होगी

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
6th
Publication year
1986
Weight
142 grams
ISBN-13
9788126705511
Pages
79
Reading time
~3 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
12.5 × 18.5 cm
Language
Hindi

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