Videshon Ke Mahakavya
Author:
Gopikrishna GopeshPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Language-linguistics0 Ratings
Price: ₹ 600
₹
750
Available
इस पुस्तक में अंग्रेज़ी लेखिका एच.ए. गुएरकर की ‘द बुक ऑ़फ एपिक’ से चुनकर विभिन्न भाषाओं के महाकाव्यों में से आठ कथाओं का हिन्दी अनुवाद संकलित है।</p>
<p>किसी भी भाषा की रचनात्मक समृद्धि का पता सिर्फ़ इतने से नहीं चलता कि उसमें मौलिक रचनाएँ कितनी हुर्इं। देश-विदेश की अन्यान्य भाषाओं की कृतियों के अनुवाद से भी भाषा-विशेष समृद्ध होती है। अनुवाद से हमारी भाषा की ग्रहणशीलता का प्रमाण भी मिलता है और उसकी अभिव्यक्ति क्षमता की व्यापकता का भी।</p>
<p>इस दृष्टि से हिन्दी के सामर्थ्य को उजागर करने में अनुवादक के रूप में जो महत्त्वपूर्ण भूमिका गोपीकृष्ण गोपेश ने निभाई, वह अविस्मरणीय है। उन्होंने कई भाषाओं की क्लासिक कृतियों का हिन्दी में अनुवाद करके हिन्दी के प्रबुद्ध पाठकों और साहित्यानुरागियों को यह अवसर उपलब्ध कराया कि जिन भाषाओं में उनकी गति नहीं है, उन भाषाओं की भी कालजयी कृतियों का आस्वादन वे कर सके।
ISBN: 9789352211883
Pages: 291
Avg Reading Time: 10 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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मध्यकालीन भक्ति आन्दोलन का स्वरूप अखिल भारतीय था। देश के अलग-अलग प्रान्तों और क्षेत्रों में सगुण भक्ति के साथ-साथ निर्गुणी संतों ने अपनी वाणियों के माध्यम से ईश्वर का गुणगान किया। वहीं दूसरी ओर तत्कालीन समाज और धर्म में विद्यमान रूढ़ियों, कुरीतियों और बुराइयों पर करारी चोट की। इन संतों ने एक ओर मानवीय मूल्यों की प्रतिष्ठा का व्यापक प्रयास किया तो वहीं दूसरी ओर ऊँच-नीच, जाति-पाँति, छुआछूत और आडम्बरों के खिलाफ सशक्त आवाज उठाई।
उत्तर भारत में एक ओर जहाँ कबीर, रैदास, दादूदयाल और सुन्दरदास आदि संतों ने ईश्वर भक्ति का भाव जगाकर तत्कालीन समाज को दिशा दी, देश के विभिन्न प्रान्तों में अन्य संतों ने भी अपना अहम योगदान दिया। महाराष्ट्र के वारकरी और महानुभाव सम्प्रदाय के संतों ने भी भक्ति और सुधार की अलख जगाई, असम में शंकरदेव ने ज्ञान और भक्ति की अलख जगाई। राजस्थान में दादूदयाल और दादूपन्थ के संतों ने महनीय कार्य किया। राजस्थान की महिला संतों—दयाबाई और सहजो बाई ने भी ईश्वर भक्ति का गुणगान किया।
संत साहित्य मानव धर्म का साहित्य है। यह संसार के सभी मनुष्यों को ईश्वर की सृष्टि मानता है। अतः जाति आधारित भेदभावों का यहाँ कोई स्थान नहीं है। ...संत साहित्य सरलता एवं सहजता का साहित्य है। सभी संतों ने धर्म और अध्यात्म के क्षेत्र में व्याप्त रूढ़ियों एवं आडम्बरों का विरोध किया।
‘मध्यकालीन संत कवि’ पुस्तक में संत मत पर विचार होने के साथ-साथ मध्यकालीन संतों का स्मरण है। पुस्तक में संकलित आलेख संतों के जीवन पर प्रकाश डालने के साथ-साथ उनकी रचनाओं के वैशिष्ट्य का भी वर्णन करते हैं। विविध संतों पर केन्द्रित आलेख मध्यकालीन निर्गुण भक्ति साधना की परम्परा को समझाने में अपनी महती भूमिका रखते हैं।
Vikas Ke Path
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Nitin Gadkari
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- Description: Awating description for this book
Viveki Rai : Anchlikta Aur Lok Jivan
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Vinamra Sen Singh
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विवेकी राय हिन्दी साहित्य के पांक्तेय साहित्यकार हैं। उनके लेखन का समग्र रूप गाँव, किसान और उनकी दशा-दुर्दशा पर केन्द्रित है। वैसे तो गाँव को केन्द्र में रखकर लिखनेवाले साहित्यकार और भी हैं पर विवेकी राय ऐसे रचनाकार हैं जिनका सम्पूर्ण उर्वर और लेखकीय ऊर्जा का कालखंड गाँव में बीता।
कोई भी लेखक तभी सफल होता है जब वह जो लिखता है, वही जीता है अर्थात् जो गाँव में रहा नहीं, गाँव की प्रकृति, उसके सौन्दर्य और खुलेपन को अपनी आँखों से निहारा नहीं, गाँववालों के सीधे-सरल व्यवहार के साथ समरस नहीं हुआ, खेती, किसानी गाय-बैल से जुदा नहीं, वह गाँव का आत्मीय चित्र प्रस्तुत करने में उतना समर्थ नहीं हो सकता, जितना स्वयं गाँव को भोगनेवाला या गाँव को ही जीनेवाला लेखक समर्थ हो सकता है।
विवेकी राय ऐसे ही विरल रचनाकारों में से एक हैं जिन्होंने गाँव को जिया है।
यह पुस्तक विशेष रूप से विवेकी राय के साहित्य पर आंचलिकता और लोकजीवन के प्रभाव को दर्शाती है। उनके साहित्य के साथ ही उनके व्यक्तित्व दर्शन की दृष्टि से भी महत्त्व रखती है।
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