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Harishankar Parsai : Desh Ke Is Daur Mein

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देश के इस दौर में हरिशंकर परसाई के व्यंग्य-निबन्धों की विवेचना है। यह वरिष्ठ आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी ने अपनी गहरी अन्तर्दृ​ष्टि के साथ विवेचना की है। परसाई पर केन्द्रित पुस्तकों में इस पुस्तक का अपना अलग स्थान है। बकौल ज्ञानरंजन ‘यह अभी तक की एक अनुपम और अद्वितीय पुस्तक है जिसमें परसाई के रचना-संसार को समझने और उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है।’ त्रिपाठी जी का मानना है कि ‘परसाई का रचनाकार एक इतिहास-पुरुष है जो अपने समय का सबकुछ देख रहा है, अपने युग का चित्र बना रहा है। विवेक के साथ।’ वे कहते हैं कि ‘परसाई का व्यंग्य असहज-असुन्दर का उद्घाटन करके सहज-सुन्दर को गढ़ने का प्रयास करता है।’ लगभग चालीस वर्षों में फैली परसाई की रचनात्मकता को इस पुस्तक में विश्वनाथ त्रिपाठी ने जितने आत्मीय ढंग से जान-समझकर हम तक पहुँचाया है, उससे परसाई हमें एक नए सिरे से समझ आते हैं। वर्तमान की उनकी समझ, अपने पात्रों को लेकर उनकी संवेदना की व्यापकता, मनोविकारों का चित्रण, उनके व्यंग्य-निबन्धों के विषयों का असीम संसार, मानवीय करुणा, चरित्र-चित्रण और उनके सौन्दर्यबोध को उद्धरणों के साथ जिस तरह यहाँ विश्लेषित किया गया है, वह अपूर्व है। यह इस पुस्तक का परिवर्द्धित संस्करण है जिसमें परसाई के जीवन-वृत्त के साथ भूमिका के रूप में उनके व्यंग्य पर केन्द्रित एक लम्बा आलेख भी शामिल किया गया है।

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About the Book

देश के इस दौर में हरिशंकर परसाई के व्यंग्य-निबन्धों की विवेचना है। यह वरिष्ठ आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी ने अपनी गहरी अन्तर्दृ​ष्टि के साथ विवेचना की है। परसाई पर केन्द्रित पुस्तकों में इस पुस्तक का अपना अलग स्थान है। बकौल ज्ञानरंजन ‘यह अभी तक की एक अनुपम और अद्वितीय पुस्तक है जिसमें परसाई के रचना-संसार को समझने और उद्घाटित करने का प्रयास किया गया है।’

त्रिपाठी जी का मानना है कि ‘परसाई का रचनाकार एक इतिहास-पुरुष है जो अपने समय का सबकुछ देख रहा है, अपने युग का चित्र बना रहा है। विवेक के साथ।’ वे कहते हैं कि ‘परसाई का व्यंग्य असहज-असुन्दर का उद्घाटन करके सहज-सुन्दर को गढ़ने का प्रयास करता है।’

लगभग चालीस वर्षों में फैली परसाई की रचनात्मकता को इस पुस्तक में विश्वनाथ त्रिपाठी ने जितने आत्मीय ढंग से जान-समझकर हम तक पहुँचाया है, उससे परसाई हमें एक नए सिरे से समझ आते हैं। वर्तमान की उनकी समझ, अपने पात्रों को लेकर उनकी संवेदना की व्यापकता, मनोविकारों का चित्रण, उनके व्यंग्य-निबन्धों के विषयों का असीम संसार, मानवीय करुणा, चरित्र-चित्रण और उनके सौन्दर्यबोध को उद्धरणों के साथ जिस तरह यहाँ विश्लेषित किया गया है, वह अपूर्व है।

यह इस पुस्तक का परिवर्द्धित संस्करण है जिसमें परसाई के जीवन-वृत्त के साथ भूमिका के रूप में उनके व्यंग्य पर केन्द्रित एक लम्बा आलेख भी शामिल किया गया है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2024
Weight
180 grams
ISBN-13
9789360860134
Pages
200
Reading time
~7 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

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