Gillu
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अपने परिवेश से, मनुष्य का रिश्ता केवल लोभ-लाभ का नहीं हो सकता। यह संसार के साथ मनुष्य के अंतर्लोक के लिए भी घातक है। नन्ही गिलहरी 'गिल्लू' से महादेवी जी का जुड़ाव, पूरे परिवेश से उनकी आत्मीयता में बदल जाता है। गिल्लू संग धीरे-धीरे हमारे भीतर एक भावलोक निर्मित होता है, जो उसके साथ ही डूब जाता है- जैसे वीणा के तारों से उठी सरगम । इसे पढ़ने के बाद, अपने आसपास के पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं को देखने का हमारा तरीक़ा वही नहीं रह जाता। कलात्मक चित्रांकन, इस रेखाचित्र में शब्दों की निहित संवेदना को मूर्त कर देता है।
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अपने परिवेश से, मनुष्य का रिश्ता केवल लोभ-लाभ का नहीं हो सकता। यह संसार के साथ मनुष्य के अंतर्लोक के लिए भी घातक है। नन्ही गिलहरी 'गिल्लू' से महादेवी जी का जुड़ाव, पूरे परिवेश से उनकी आत्मीयता में बदल जाता है। गिल्लू संग धीरे-धीरे हमारे भीतर एक भावलोक निर्मित होता है, जो उसके साथ ही डूब जाता है- जैसे वीणा के तारों से उठी सरगम । इसे पढ़ने के बाद, अपने आसपास के पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं को देखने का हमारा तरीक़ा वही नहीं रह जाता। कलात्मक चित्रांकन, इस रेखाचित्र में शब्दों की निहित संवेदना को मूर्त कर देता है।
Book Details
-
ISBN9789347125546
-
Pages22
-
Avg Reading Time1 hrs
-
Age0-11 yrs
-
Country of OriginIndia
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