Refugee Dilemma
(0)
Author:
V. SuryanarayanPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
EnglishCategory:
History-and-politics₹
250
₹ 200 (20% off)
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Nine years have passed since the ethnic conflict ended in Sri Lanka. The hope that Sri Lankan refugees would return to the island has been belied. This book highlights the dilemma faced by Sri Lankan Tamil refugees amid the twists and turns in Indo-Sri Lankan relations. The global refugee phenomenon and the Indian experience, the movement of Sri Lankan refugees to different parts of the world, the rise and fall of the Tamil Tigers and the competitive nature of Sinhala politics, which stands in the way of ethnic reconciliation, are analysed in detail. The peculiar problems faced by refugees of Indian origin are highlighted. The Author pleads for the enactment of a National Refugee Law that should balance the humanitarian concerns of refugees with the security interests of the Indian State.
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Nine years have passed since the ethnic conflict ended in Sri Lanka. The hope that Sri Lankan refugees would return to the island has been belied. This book highlights the dilemma faced by Sri Lankan Tamil refugees amid the twists and turns in Indo-Sri Lankan relations. The global refugee phenomenon and the Indian experience, the movement of Sri Lankan refugees to different parts of the world, the rise and fall of the Tamil Tigers and the competitive nature of Sinhala politics, which stands in the way of ethnic reconciliation, are analysed in detail. The peculiar problems faced by refugees of Indian origin are highlighted. The Author pleads for the enactment of a National Refugee Law that should balance the humanitarian concerns of refugees with the security interests of the Indian State.
Book Details
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ISBN9789353221454
-
Pages136
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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यह किताब कश्मीर के उथल-पुथल भरे इतिहास में कश्मीरी पंडितों के लोकेशन की तलाश करते हुए उन सामाजिक-राजनैतिक प्रक्रियाओं की विवेचना करती है जो कश्मीर में इस्लाम के उदय, धर्मान्तरण और कश्मीरी पंडितों की मानसिक-सामाजिक निर्मिति तथा वहाँ के मुसलमानों और पंडितों के बीच के जटिल रिश्तों में परिणत हुईं। साथ ही, यह किताब आज़ादी की लड़ाई के दौरान विकसित हुए उन अन्तर्विरोधों की भी पहचान करती है जिनसे आज़ाद भारत में कश्मीर, जम्मू और शेष भारत के बीच बने तनावपूर्ण सम्बन्धों और इस रूप से कश्मीर घाटी के भीतर पंडित-मुस्लिम सम्बन्धों ने आकार लिया।
Kashmir Aur Kashmiri Pandit : Basne Aur Bikharne Ke 1500 Saal
Ashok Kumar Pandey
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