China Aur Japan Ka Itihas
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Author:
Prashant GauravPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
995
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चीन और जापान की गिनती आज एशिया ही नहीं, विश्व-स्तर के शक्तिशाली देशों में होती है। आधुनिक समय में अपनी तकनीकी और आर्थिक क्षमता के चलते इन दोनों ही देशों ने दुनिया-भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। चीन को जहाँ विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक माना जाता है, वहीं जापान का इतिहास भी समय में बहुत पीछे तक जाता है, हालाँकि यूरोपवासियों को उसकी जानकारी तेरहवीं सदी में मिली। दोनों ही देशों ने अनेक राजनीतिक, धार्मिक और आर्थिक पड़ावों को पार करते हुए अपनी यात्रा जारी रखी है जिसकी उपलब्धि आज सामने है। ‘चीन और जापान का इतिहास’ पुस्तक में, चीन और जापान के लम्बे इतिहास और उसके उतार-चढ़ाव को अत्यन्त सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है जिससे इतिहास के अध्येताओं के साथ-साथ सामान्य पाठक भी अपना ज्ञान-वर्धन कर सकते हैं। विषय की ग्राह्यता को बढ़ाने के लिए यह पुस्तक उन घटनाओं का परिचय देते हुए आगे बढ़ती है जो इन देशों के राजनीतिक-आर्थिक, सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में निर्णायक रही हैं। चीन का अफ़ीम युद्ध, ताइपिंग विद्रोह, 1911 की चीनी क्रान्ति और साम्यवादी आन्दोलन जिस तरह चीन की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डालते हैं, उसी तरह मेईजी पुनर्स्थापन, चीन-जापान युद्ध, रूस-जापान युद्ध के साथ जापानी साम्राज्यवाद का उत्थान एवं पतन आदि अध्याय जापान के इतिहास को बोधगम्य ढंग से प्रस्तुत करते हैं। इतिहास के छात्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी।
Read moreAbout the Book
चीन और जापान की गिनती आज एशिया ही नहीं, विश्व-स्तर के शक्तिशाली देशों में होती है। आधुनिक समय में अपनी तकनीकी और आर्थिक क्षमता के चलते इन दोनों ही देशों ने दुनिया-भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
चीन को जहाँ विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में से एक माना जाता है, वहीं जापान का इतिहास भी समय में बहुत पीछे तक जाता है, हालाँकि यूरोपवासियों को उसकी जानकारी तेरहवीं सदी में मिली। दोनों ही देशों ने अनेक राजनीतिक, धार्मिक और आर्थिक पड़ावों को पार करते हुए अपनी यात्रा जारी रखी है जिसकी उपलब्धि आज सामने है।
‘चीन और जापान का इतिहास’ पुस्तक में, चीन और जापान के लम्बे इतिहास और उसके उतार-चढ़ाव को अत्यन्त सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया है जिससे इतिहास के अध्येताओं के साथ-साथ सामान्य पाठक भी अपना ज्ञान-वर्धन कर सकते हैं।
विषय की ग्राह्यता को बढ़ाने के लिए यह पुस्तक उन घटनाओं का परिचय देते हुए आगे बढ़ती है जो इन देशों के राजनीतिक-आर्थिक, सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में निर्णायक रही हैं। चीन का अफ़ीम युद्ध, ताइपिंग विद्रोह, 1911 की चीनी क्रान्ति और साम्यवादी आन्दोलन जिस तरह चीन की ऐतिहासिक यात्रा पर प्रकाश डालते हैं, उसी तरह मेईजी पुनर्स्थापन, चीन-जापान युद्ध, रूस-जापान युद्ध के साथ जापानी साम्राज्यवाद का उत्थान एवं पतन आदि अध्याय जापान के इतिहास को बोधगम्य ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
इतिहास के छात्रों के लिए विशेष रूप से उपयोगी।
Book Details
-
ISBN9789360867256
-
Pages296
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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स्वस्थ हिन्दू-मुस्लिम सम्बन्धों और भारतीय जनगण के बीच सहिष्णुता के लिए यह ज़रूरी है कि मुसलमान हिन्दुओं के और हिन्दू मुसलमानों के मानस को समझें। यह पुस्तक इसी भावना को लेकर भारत और पाकिस्तान के आठ प्रसिद्ध मुस्लिम नेताओं के जीवन को रेखांकित करती है, और उनके कहे-अनकहे पहलुओं को हमारे सामने लाती है। जिन लोगों के जीवनेतिहास के माध्यम से इस पुस्तक में लेखक ने भारतीय उपमहाद्वीप के मुसलमानों में झाँकने का प्रयास किया है, उनमें ये नाम शामिल हैं : सैयद अहमद ख़ाँ, मुहम्मद इक़बाल, मुहम्मद अली, मुहम्मद अली जिन्ना, फ़ज़लुल हक़, अबुल कलाम आज़ाद, लियाक़त अली ख़ाँ, ज़ाकिर हुसैन।
पुस्तक हमारे मन-मस्तिष्क में बनी मुसलमानों के प्रति उन सभी भ्रान्त धारणाओं को वैचारिक स्तर पर तोड़ती है जिन्हें हम तथाकथित ‘इतिहास’ के रूप में जानते आए हैं। हिन्दू और मुस्लिम समुदाय की मानसिक संरचना में कितनी एकरूपता है और कितनी भिन्नता तथा दोनों ही समुदाय हर पहलू से कितने एक-दूसरे के नज़दीक हैं, पुस्तक हमें विस्तार से बताती है।
‘अंडरस्टैंडिंग दि मुस्लिम माइंड’ अंग्रेज़ी पुस्तक से अनूदित राजमोहन गांधी की यह पुस्तक हमें अत्यन्त विनम्रता से उन ज़िन्दगियों को समझाने का प्रयत्न करती है, जिनके विषय में हम जानते हुए भी बहुत कम जानते हैं।
Gandhi Ka Saintalis
- Author Name:
Pushya Mitra
- Book Type:

- Description: ‘गांधी का सैंतालीस’ यानी आज़ादी के साल में गांधी की कथा। वैसे तो यह कहानी गांधी के जीवन के आख़िरी साल की है, जो अक्टूबर, 1946 में उनकी नोआखाली यात्रा से शुरू होती है और वहाँ से बिहार, दिल्ली, कलकत्ता और फिर दिल्ली आकर जनवरी, 1948 में उनकी शहादत के साथ ख़त्म होती है। मगर यह उनके आख़िरी साल का रोज़नामचा नहीं है, यह उनकी आख़िरी लड़ाई की कहानी है। डायरेक्ट एक्शन के बाद भारत में साम्प्रदायिक दंगे शुरू हुए, जो बँटवारे के फ़ैसले पर मुहर लगने के बाद और बढ़ गए। इन दंगों ने लाखों की जान ली और करोड़ों को विस्थापित होने के लिए मजबूर कर दिया। उस समय एक गांधी ही थे, जो नफ़रत की इस आग को बुझाने में लगे थे। उन्हें बस एक ही चिन्ता थी कि इस देश की आत्मा कैसे बचे; वह देश जो पिछले तीस साल से अहिंसक तरीक़े से आज़ादी की लड़ाई लड़ रहा था, आज़ादी के ठीक पहले हिंसा से भर उठा था। लोग अपने पड़ोसियों के ख़ून के प्यासे हो गए थे। इस लड़ाई में 77 साल के गांधी ने अपना सब कुछ झोंक दिया—नंगे पाँव यात्रा करते, पीड़ितों के ज़ख़्मों पर मरहम लगाते, उनके हृदय में साहस भरते और दंगाइयों को सच्चे हृदय से पश्चात्ताप करने के लिए प्रेरित करते हुए। उन्होंने संवाद, साहस और प्रेम के औज़ारों से यह लड़ाई लड़ी और अपने आख़िरी हथियार शहादत के ज़रिये इस महान लक्ष्य को हासिल किया। यह भी कहना ज़रूरी है कि यह कहानी गांधी के जीवन के इस सर्वश्रेष्ठ दौर की गौरवगाथा भर नहीं है। कोशिश की गई है कि यह कहानी हमारे सामने एक बोधपाठ की तरह खुले ताकि हम देख सकें कि क्या गांधी की इस आख़िरी लड़ाई के तौर-तरीक़ों में कुछ ऐसा भी है जिसे हम आज के भारत में प्रयोग कर सकें!
Rashtra-Sadhak Narendra Modi
- Author Name:
R. Balashankar
- Book Type:

- Description: "नरेंद्र मोदी भारत के अब तक के सबसे परिवर्तनकारी प्रधानमंत्री रहे हैं। लोकप्रियता और पराक्रम में उन्होंने जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी को पीछे छोड़ दिया है। सुधारों में वह पी.वी. नरसिम्हा राव और अटल बिहारी वाजपेयी का रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं। उन्होंने भारतीयों में ऐसी आकांक्षा जगाई, जैसी पहले कभी नहीं देखी गई थी। मोदी के नेतृत्व में, भारत ने सबसे बड़ा सत्ता परिवर्तन देखा, जिसमें बी.जे.पी. का उदय सत्ताधारी दल के रूप में एक नई राजनीतिक कहानी तथा शैली के रूप में हुआ, जिसने कांग्रेस की छह दशकों की श्रेष्ठता को समाप्त कर दिया। सरकार आधुनिक, डिजिटल, भ्रष्टाचार-मुक्त, जवाबदेह और विश्वसनीय बन गई तथा जनता को भी अभूतपूर्व रूप से भागीदार बना दिया है। यह जी.एस.टी., विमुद्रीकरण तथा भारत-केंद्रित कूटनीति लेकर आई, पुरानी प्रणालियों और नियमों को समाप्त किया, स्वच्छ भारत अभियान, कल्याणकारी योजनाओं और सड़कों तथा बंदरगाहों के निर्माण के लक्ष्य निश्चित किए। मोदीकेयर, मुफ्त रसोई गैस, स्मार्ट सिटी और कारोबार में आसानी किस प्रकार जीवन बदल रहे हैं; राफेल, लिंचिंग, पुरस्कार वापसी और असहिष्णुता क्या है; मोदी और अरुण जेटली किस प्रकार एन.पी.ए. के कचरे को साफ कर रहे हैं; किस प्रकार सकारात्मक काररवाई के कारण अल्पसंख्यकों, ओ.बी.सी. तथा एस.सी.-एस.टी. समूहों को नया लाभ मिला; अमित शाह ने किस प्रकार बी.जे.पी. को चुनावों में उलट-पुलट देने वाली ताकत बनाया; कैसे नितिन गडकरी ने चार वर्षों में यू.पी.ए. के 10 वर्षों से भी अधिक सड़कें बनवाईं; मोदी ने किस प्रकार अमीरों की साँठगाँठ को समाप्त किया, जिसका पर्दाफाश राडिया टेप में हुआ था; कैसे मोदी ने प्रणालियों को बदला और एक नए भारत का निर्माण किया; मोदी के नेतृत्व को किस प्रकार नैतिकता, भावना और तर्क के आधार पर परिभाषित किया जा सकता है—यह पुस्तक भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी के प्रभाव के विस्तार और भविष्य में इसकी दिशा का आकलन करती है। "
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