Bundelkhand Ke Agradoot
(0)
Author:
Rakesh Kumar AgrawalPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
350
₹ 280 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
"आज हर क्षेत्र में इज्जत, शोहरत और पैसा है, लेकिन अतीत में ऐसा नहीं था। फिर भी ऐसे समय में भी कुछ लोगों ने साहित्य, कला और खेल के क्षेत्र में पूर्ण निष्ठा से जी-जान लगाकर काम किया। यह उनका जुनून समझ लें या उनकी लगन, जिसकी वजह से उन्होंने अपनी आखिरी साँस तक मिट्टी के लगाव को वृद्ध नहीं होने दिया। आजकल सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जमाने में कोई भी बात या खबर बिजली की रफ्तार से फैलती है। लेकिन हम कल्पना कर सकते हैं कि उस दौर में कैसे बुंदेलखंड के अग्रदूतों—मुंशी प्रेमचंद, मैथिलीशरण गुप्त, बाबू केदारनाथ अग्रवाल, वृंदावनलाल वर्मा, हॉकी के जादूगर दद्दा ध्यानचंद, बाबू श्यामलाल ‘इंदीवर’, महारानी लक्ष्मीबाई, मिर्जा गालिब, रायप्रवीण और मस्तानी ने अपनी यशकीर्ति की पताका पूरी दुनिया में फहराई होगी? हर क्षेत्र का अपना एक एवरेस्ट होता है। स्टार और सुपरस्टार केवल सिनेमा में ही नहीं होते। वर्तमान समय में हर क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के पास अकूत संपत्तियाँ हैं। लेकिन उन लोगों के कला प्रेम का कोई मूल्य नहीं लगाया जा सकता जिन्होंने जिंदगी के उतार-चढ़ाव और फाकाकशी के चलते भी अपने कर्म से समझौता नहीं किया। इसलिए लेखक को अपनी जन्मभूमि बुंदेलखंड के ये अग्रदूत मिथकीय पात्रों से बिल्कुल भी कम नहीं लगते। बुंदेलखंड की प्रमुख महान विभूतियों को एक पुस्तक में सहेजने का यह पहला अभिनव प्रयास है। निश्चित तौर पर छात्रों, शोधार्थियों एवं अन्य पाठकों को यह पुस्तक लाभान्वित करेगी। "
Read moreAbout the Book
"आज हर क्षेत्र में इज्जत, शोहरत और पैसा है, लेकिन अतीत में ऐसा नहीं था। फिर भी ऐसे समय में भी कुछ लोगों ने साहित्य, कला और खेल के क्षेत्र में पूर्ण निष्ठा से जी-जान लगाकर काम किया। यह उनका जुनून समझ लें या उनकी लगन, जिसकी वजह से उन्होंने अपनी आखिरी साँस तक मिट्टी के लगाव को वृद्ध नहीं होने दिया।
आजकल सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जमाने में कोई भी बात या खबर बिजली की रफ्तार से फैलती है। लेकिन हम कल्पना कर सकते हैं कि उस दौर में कैसे बुंदेलखंड के अग्रदूतों—मुंशी प्रेमचंद, मैथिलीशरण गुप्त, बाबू केदारनाथ अग्रवाल, वृंदावनलाल वर्मा, हॉकी के जादूगर दद्दा ध्यानचंद, बाबू श्यामलाल ‘इंदीवर’, महारानी लक्ष्मीबाई, मिर्जा गालिब, रायप्रवीण और मस्तानी ने अपनी यशकीर्ति की पताका पूरी दुनिया में फहराई होगी?
हर क्षेत्र का अपना एक एवरेस्ट होता है। स्टार और सुपरस्टार केवल सिनेमा में ही नहीं होते। वर्तमान समय में हर क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के पास अकूत संपत्तियाँ हैं। लेकिन उन लोगों के कला प्रेम का कोई मूल्य नहीं लगाया जा सकता जिन्होंने जिंदगी के उतार-चढ़ाव और फाकाकशी के चलते भी अपने कर्म से समझौता नहीं किया। इसलिए लेखक को अपनी जन्मभूमि बुंदेलखंड के ये अग्रदूत मिथकीय पात्रों से बिल्कुल भी कम नहीं लगते।
बुंदेलखंड की प्रमुख महान विभूतियों को एक पुस्तक में सहेजने का यह पहला अभिनव प्रयास है। निश्चित तौर पर छात्रों, शोधार्थियों एवं अन्य पाठकों को यह पुस्तक लाभान्वित करेगी।
"
Book Details
-
ISBN9789390825721
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Lahooluhan Afganistan
- Author Name:
Shridhar Rao +1
- Book Type:

- Description: अफ़ग़ानिस्तान की भौगोलिक संरचना उसकी स्थिति को अनूठा बनाती है। सभ्यता की शुरुआत से ही ये विभिन्न क़ाफ़िलों के आने-जाने का मार्ग रहा है। जो भी सुदूर पूर्व या भारत के जंगलों तथा नदियों की तरफ़ जाना चाहता, उसे अफ़ग़ानिस्तान की घाटियों तथा पहाड़ियों को ज़रूर पार करना पड़ता। एशिया और यूरोप, अरब दुनिया और दक्षिण एशिया और मध्य एशिया एवं पश्चिम एशिया के बीच स्थित होने की वजह से ये हर किसी को लुभाता है। क्या तालिबान के हटने तथा नई सत्ता के आने से ये लोभ-लालच ख़त्म होगा? पाँच साल के तालिबान शासन ने अफ़ग़ानिस्तान को सदियों पीछे ढकेल दिया है। शासकों ने बामियान की बौद्ध मूर्तियों के रूप में अपनी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर खो दी। ये एक तरह से द्वेष में आकर अपनी ही नाक काट लेने जैसा था, क्योंकि दुनिया ने तालिबान के तौर-तरीक़ों तथा विश्व आतंकवाद के निर्माता के रूप में उसे नामंज़ूर कर दिया था। काबुल के संग्रहालय को प्रसिद्ध गांधार चित्रों तथा प्रतिमाओं से वंचित कर दिया गया। कम्युनिस्ट शासन के दौरान महिलाओं को काम करने की पूरी आज़ादी थी, मगर अफ़ग़ानिस्तान इस स्थिति से उस स्थिति में ले जाया गया जहाँ तालिबान का राज था और जिसमें महिलाएँ दरवाज़ों के पीछे क़ैद कर दी गईं। स्कूल-कॉलेज तथा कामकाज की जगहों से हटाकर उन्हें बलात्कार के लिए छोड़ दिया गया। अपने समूचे ख़ूनी इतिहास में सम्भवतः एक बरबाद समाज ने सबसे ज़्यादा विधवाएँ और अनाथ देखे। इससे भी बुरा ये हुआ कि जो भी पढ़ा-लिखा था और मुल्क से जा सकता था, वो अपनी ज़िन्दगी की हिफ़ाज़त के लिए चला गया। क्या उनमें से कुछ लोग वापस लौटेंगे? उम्मीद करनी चाहिए कि लौटेंगे, मगर कुछ समय के बाद ही क्योंकि आज की हालत डरावनी है। अब इतिहास ने अफ़ग़ानिस्तान को एक और मौक़ा प्रदान किया है। विश्व बिरादरी के लिए भी ये एक अवसर है जब वो अफ़ग़ानिस्तान में एक सामूहिक भूमिका अदा कर सकती है। अफ़ग़ानिस्तान के अतीत और वर्तमान पर एक अनिवार्यतः पठनीय पुस्तक।
Kakori Train Dakaiti Ki Ansuni Kahani | Hindi Translation of Destination of Kakori 9 August 1925 | Freedom Fighter of India
- Author Name:
Smita Dhruv
- Book Type:

- Description: क्या आपको दस वीरों द्वारा रचित 'काकोरी ट्रेन लूट' याद है? यह घटना 9 अगस्त, 1925 की है। भारत के बलिदानियों द्वारा रचित एक वास्तविक जीवन का नाटक, जिसके इर्द-गिर्द यह कथा लिखी गई है। ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध भारत का असहयोग आंदोलन एक साल के भीतर भारत को स्वतंत्र कराने के वादे के साथ शुरू किया गया था। जब 1922 में इसे अचानक वापस ले लिया गया, तो हजारों युवा स्वतंत्रता सेनानी निराश हो गए। इस धोखे ने बड़ी संख्या में क्रांतिकारियों को जन्म दिया, जिन्होंने भारत में सत्तारूढ़ अंग्रेजों के विरुद्ध अकेले ही अपनी पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी। इस दिन दस युवा लड़कों की एक टीम ने लखनऊ की बगल में काकोरी रेलवे स्टेशन के पास भारतीय रेल के खजाने को लूट लिया। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के स्वर्णिम इतिहास की एक घटना और इसके इर्द-गिर्द बुनी गई एक काल्पनिक कहानी। यह पुस्तक युवा, साहसी हुतात्माओं व बलिदानियों की वीरता के उन चमकदार क्षणों को जीवंत करती है, जो आज तक हमारे लिए अज्ञात हैं। हमारे देश के नायकों और उनके परिवारों के जीवन में मानसिक पीड़ा, दुविधा और अस्तित्व के मुद्दों का एक शानदार चित्रण काकोरी के वीरों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
Samarth Bharat
- Author Name:
Ed. Prabhat Jha
- Book Type:

- Description: सुविदित है कि भारत सोने की चिड़िया कहलाता था । जब विश्व के अधिकांश देश पिछड़े हुए थे तब भारत समृद्ध राष्ट्र था । अंग्रेजों के शासन से पूर्व यह विश्व के धनी राष्ट्रों में से एक था । विडंबना है कि आज भारत अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है । गरीबी, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, जातिवाद, क्षेत्रवाद, वंशवाद, बालश्रम, भुखमरी, कुपोषण, किसानों की। आत्महत्या, धर्मांतरण, घुसपैठ, अशिक्षा, शिक्षा का व्यवसायीकरण, नक्सलवाद, आतंकवाद, बेलगाम महँगाई से देश की स्थिति भयावह हो रही है । इनका मूल कारण रहा कि हम पाश्चात्य देशों की अंधी नकल करने में लगे रहे, जबकि हमें अपने देश की समस्याओं का समाधान अपनी माटी में ही तलाशना चाहिए था । पर इतिहास साक्षी है कि अनेक झंझावातों को झेलने के बाद भी भारत समर्थ सिद्ध हुआ है । मंदी के दौर में जहाँ दुनिया के विकसित राष्ट्र भी लड़खड़ा गए वहीं हा चट्टान की भांति अडिग रहे । सन् 2020 में समृद्धशाली भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब हम पाश्चात्य देशों की नकल छोड़कर अपनी ही प्रकृति के अनुसार विकास प्रक्रिया को आगे बढ़ाएँ व भारत को पश्चिम की कार्बन कॉपी बनाने की बजाय भारत ही रहने दें । समर्थ भारत में संकलित हैं- शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, चिकित्सा, राजनीति विधि तथा अन्य सामाजिक क्षेत्रों के विशिष्ट महानुभावों के व्यापक अनुभव से भारत की सामर्थ्य और शक्ति को रेखांकित करते मार्गदर्शक एवं प्रेरणाप्रद लेख ।
Akbar Aur Tatkalin Bharat
- Author Name:
S. Irfan Habib
- Book Type:

-
Description:
प्रसिद्ध इतिहासकार इरफ़ान हबीब द्वारा सम्पादित यह पुस्तक ऐसे कई महत्त्वपूर्ण अध्ययनों को हमारे सामने रखती है, जिनमें अकबर, उसके साम्राज्य और तत्कालीन सामाजिक-राजनीतिक व आर्थिक वातावरण पर प्रकाश पड़ता है। मध्यकालीन भारतीय इतिहास के अधिकारी विद्वानों द्वारा लिखित इन गवेषणात्मक आलेखों से पाठक चार सदी पूर्व के भारत की राजनीति और सांस्कृतिक स्थिति की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।
अकबरकालीन प्रशासनिक व्यवस्था, राजनीतिक इतिहास, धार्मिक रीति तथा विचार, विज्ञान और तकनीकी की स्थिति, समाजार्थिक स्थितियाँ आदि कुछ विषय हैं जिनके बारे में ये निबन्ध हमें प्रामाणिक तथ्य उपलब्ध कराते हैं तथा मौजूदा अवधारणाओं का परिष्कार करते हुए तत्कालीन इतिहास के क्षेत्र में नई चुनौतियों और क्षेत्रों को चिह्नित करते हैं।
आज भारतीय जन-गण के लिए यह जानना भी बहुत ज़रूरी हो गया है कि एक राष्ट्र के रूप में हम एक संगठित राजनीतिक और सांस्कृतिक परम्परा के वारिस हैं। इस अर्थ में भी अकबर का राजनीतिक और सांस्कृतिक विज़न फ़ौरी तौर पर हमारे लिए अत्यन्त उपयोगी साबित हो सकता है।
Dastan Mughal Mahilaon Ki
- Author Name:
Heramb Chaturvedi
- Book Type:

- Description: मध्यकालीन इतिहास के अध्ययन, अध्यापन, शोध से 33 वर्षों के अधिक के जुड़ाव के कारण, इस काल के इतिहास से भली-भाँति वाक़िफ़ हैं अतः, ऐतिहासिक शोध के साथ लिखी गई कुछ कहानियों के माध्यम से चयनित महिला पात्रों की भूमिका के साथ उन्होंने न्याय करने के प्रयास में, इस संकलन की आवश्यकता महसूस की। इसमें प्रसिद्ध मंगोल शासक चंगेज़ ख़ाँ की पुत्र-वधू से प्रारम्भ करके, बाबर की नानी से होते हुए, हमीदा बानो बेगम की दास्ताँ बयाँ करते हुए, हर्रम बेगम की भूमिका को रेखांकित किया गया है जिसके फलस्वरूप हुमायूँ अन्ततोगत्वा भारत में प्रवेश कर पाता है। अन्त में अनारकली की गुत्थी को भी सुलझाने का प्रयास किया गया है।
The Hero of Kargil & Other Stories
- Author Name:
Lt. Gen. Yashwant Mande
- Book Type:

- Description: The stories in this book pertain to the wars, which India has fought since its Independence in 1962, 65, 71 and 99. The war stories have always aroused the curiosity of the readers. Although many books have been written on conflicts between India and its neighbours, no author has attempted to write stories. This book is therefore unique, the only one of its kind, a book of fiction on events and characters, in the background of war. The wars have topical interest and as time passes, one forgets them and gets engrossed in current issues. This is natural. However, certain events such as missile attack on Karachi, shattering of enemy offensive by Hunter aircraft at Longewala, the role played by the aircraft carrier INS VIKRANT and the heroics of men in uniform have a lasting value, an element of permanence. These stories provide insight into ethos, culture and lifestyle of the armed forces, their values, hardships and character. The stories narrate the account of war and unfold its conduct in easy and interesting manner. The stories have been written in simple and endearing style. It is a book, which ought to be read by all, the old and young.
Hitopadesh Ki Kahaniyan
- Author Name:
Shyamji Verma
- Book Type:

- Description: "मानवजाति के विकास का मूल अधिकार ही मानवाधिकार है। मानवाधिकारों के विश्वव्यापी घोषणा-पत्र में नागरिक, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक अधिकारों पर 30 अनुच्छेद हैं। भारत के संविधान के अंतर्गत मानवीय मूल्यों का विकास और मानव के सम्मान की रक्षा हो सके, यह मानवाधिकार आयोग के कार्यक्षेत्र में है। विश्व समुदाय में शांति, सद्भाव, भाईचारा बना रहे और वह अपनी निजता के साथ अपने नैसर्गिक अधिकारों का उपयोग कर सके, इस बात को ध्यान में रखकर संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 10 दिसंबर, 1948 को मानवाधिकारों के विश्वव्यापी घोषणा-पत्र को स्वीकार किया गया। ऐसे सभी अधिकार, जो व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता एवं प्रतिष्ठा से जुड़े हैं, भारतीय संविधान के भाग-3 में मूलभूत अधिकारों के रूप में वर्णित हैं। इसके अतिरिक्त ऐसे अधिकार, जिन्हें संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा मान्यता प्राप्त है, मानवाधिकार कहा गया है। मानवाधिकारों का सही ढंग से संरक्षण हो और उसका उल्लंघन करनेवालों को दंडित किया जाए, इस उद्देश्य से मानवाधिकार आयोग का गठन किया गया है। आयोग को मुख्यत: मानवाधिकारों के संरक्षण, प्रशासन व्यवस्था में सुधार आदि की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पीड़ित व्यक्ति आयोग के माध्यम से अपने अधिकारों का संरक्षण कर सकता है। मानवाधिकार आयोग समाज में मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता और संवेदनशीलता जाग्रत् करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रस्तुत पुस्तक आम जन को इस विषय में विस्तृत जानकारी देने का विनम्र प्रयास है। "
Kosambi : Kalpana Se Yatharth Tak
- Author Name:
Bhagwan Singh
- Book Type:

-
Description:
भारतीय इतिहास के सन्दर्भ में दामोदर धर्मानन्द कोसंबी को मार्क्सवादी इतिहास का जनक माना जाता है, लेकिन यह विडम्बना ही है कि मार्क्सवादी इतिहासकारों तक ने उन पर ऐसा ठोस काम अभी तक नहीं किया है, जिससे कोसंबी को समझना आसान हो सके, और जो उनके अध्ययन की दिशाओं में आगे कुछ जोड़ सके। कोसंबी के अन्तर्विरोधों को रेखांकित करने और उनके पीछे निहित कारणों को जानने की कोशिश लगभग नहीं ही हुई है।
प्रसिद्ध इतिहासकार और लेखक भगवान सिंह की यह पुस्तक इस अर्थ में एक महत्त्वपूर्ण आरम्भ है। इसमें उन्होंने न सिर्फ़ कोसंबी की मौलिक उद्भावनाओं और स्थापनाओं पर विस्तार से विचार किया है, बल्कि उनकी प्रतिपादन-पद्धति का भी विश्लेषण किया है। साथ ही व्यक्ति कोसंबी और एक विलक्षण प्रतिभा के रूप में बनी उनकी 'मूरत' को भी समझने की कोशिश की है। कोसंबी के नाम-जाप से ही अपनी उपलब्धियों का आकाश छूनेवाले इतिहासकारों के विपरीत भगवान सिंह ने इस सुचिन्तित अध्ययन में उनके अन्तर्विरोधों को भी रेखांकित किया है। आमुख में वे लिखते हैं, ‘हमारा अपना प्रयत्न कोसंबी को समझने का रहा है, परन्तु जहाँ वे अपने ही सिद्धान्त के विपरीत आचरण करते दिखाई देते हैं या अपनी सैद्धान्तिकी के विपरीत दावे करते हैं...वहाँ उनकी निन्दा के लिए भी बाध्य हुए हैं।’
कहना न होगा कि यह पुस्तक इतिहासवेत्ता कोसंबी को समझने में इतिहास के विद्वानों और अध्येताओं के लिए बहस के नए बिन्दु प्रस्तावित करेगी।
Vikalp Ka Rasta
- Author Name:
Surendra Mohan
- Book Type:

-
Description:
1991 में उदारीकरण की शुरुआत के साथ देश के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में जो बदलाव आए हैं, इस पुस्तक में उन्हीं का लेखा-जोखा है।
वरिष्ठ समाजवादी विचारक और राजनीतिज्ञ सुरेन्द्र मोहन ने इन लेखों में आर्थिक सुधारों की जारी प्रक्रिया के हर पहलू पर दृष्टिपात करते हुए अपनी अनुभवी नज़र से इस प्रक्रिया के अन्तर्विरोधों को उजागर किया है और एक समग्र विकल्प की तलाश पर बल दिया है ताकि हर तबक़े, हर व्यक्ति के लिए उपादेय हो।
पुस्तक में केन्द्र सरकारों की आर्थिक नीतियों के विकल्प का उल्लेख करने के साथ ही वायुमंडल की तपन से प्रभावित हो रहे पर्यावरण और मानव सभ्यता पर घिर रहे संकटों के निवारण की तरफ़ भी संकेत किया गया है।
विश्व आर्थिक मन्दी के भयानक दौर से देश कैसे बचा है, और भविष्य में भी इससे अर्थव्यवस्था को कैसे बचाया जा सकता है, इस विषय में वरिष्ठ समाजवादी विचारक हमें अपने विचारों से अवगत कराते हैं।
लेकिन पूरी पुस्तक का ज़ोर है एक वैकल्पिक समान राजनीतिक व्यवस्था की तलाश पर, जिसकी आवश्यकता इधर हर स्तर पर महसूस की जा रही है।
Rohtasgarh Fort
- Author Name:
Wopendranath Ghosh
- Book Type:

- Description: The republication of the book, Rohtas Garh, by Wopendranath Ghosh, a member of the Bengal Provincial Civil Service in the early decades of the twentieth century, is an important step in this direction. The book was first published in 1908 and derives from the author’s sincere and keen interest in the history of the notable places with which he came into contact during the course of his service. This deeply researched book is about Rohtas Garh Fort, an important historical and cultural site in Bihar, located in the present-day Rohtas district. It has a history connected with the ancient, medieval and modern history of Bihar. The place in ancient India is associated with the exploits of Satyavadi Raja Harishchandra, who is famous for his love of truth and charity. A must-read classic book for people who have an interest in history.
SAKSHI BHAV
- Author Name:
Narendra Modi
- Book Type:

- Description: "उज्ज्वल भविष्य का प्रकाश-पुंज दिखाई देता है। यहाँ तप-तपस्या जैसे शब्दों का उपयोग नहीं है। यहाँ किसी देवात्मा का अधिष्ठान खड़ा नहीं किया गया है यहाँ तो उसके हृदय में विवेकानंद के कथनानुसार दरिद्रनारायणों की कामना ही झंकृत की गई है यह सत् शक्ति का मिलन है। मेरे नए उत्तरदायित्व के विषय में बाह्य वातावरण में तूफान लगभम थम गया है। सबका आश्चर्य, प्रश्न आदि अब पूर्णता की ओर है अब अपेक्षाओं का प्रारंभ होगा। अपेक्षाओं की व्यापकता और तीव्रता खूब होगी तब मेरे नवजीवन की रचना ही अभी तो शेष है। मुझे किसी को मापना नहीं है मुझे अपनी श्रेष्ठता सिद्ध नहीं करनी है। मुझे तो नीर-क्षीर के विवेक को ही पाना है। मेरी समर्पण-यात्रा के लिए यह सब जरूरी है। इसीलिए इस शक्ति की उपासना का केंद्र स्व का सुख नहीं बनाना है। माँ...तू ही मुझे शक्ति दे—जिससे मैं किसी के भी साथ अन्याय न कर बैठूँ, परंतु मुझे अन्याय सहन करने की शक्ति प्रदान कर। —इसी पुस्तक से श्री नरेंद्र मोदी केवल एक राजनीतिक कार्यकर्ता ही नहीं बल्कि एक कविहृदय साहित्यकार भी हैं। यह ग्रंथ डायरी रूप में जगज्जननी माँ से संवाद रूप में व्यक्त उनके मनोभावों का संकलन है, जिसमें उनकी अंतर्दृष्टि, संवेदना, कर्मठता, राष्ट्रदर्शन व सामाजिक सरोकार स्पष्ट झलकते हैं। हृदय को स्पंदित करनेवाले मर्मस्पर्शी विचारों का अनंत सोपान है यह संकलन।"
Vishwa ki Mahan Krantiyan
- Author Name:
Sadanand Rai
- Book Type:

- Description: "क्रांति का अर्थ उस अवस्था को समाप्त करके, जिसमें रहना ही असहनीय होता जा रहा हो, नई व्यवस्था की स्थापना करना था। अतः जहाँ-जहाँ भी विश्व में क्रांतियाँ हुईं, वहाँ देशकाल और स्थितियों के अनुसार ही इनका सूत्रपात हुआ। दिन-प्रतिदिन बढ़ते साधनों ने क्रांति को नया रूप दे दिया था। हिंसक और अहिंसक दोनों ही रूपों ने इस क्रांति विचारधारा को प्रश्रय दिया और 17वीं शताब्दी के अंत में विश्व ने इस क्रांति से परिचय किया, जो आज 21वीं शताब्दी के घोर आधुनिक युग में भी अपनी आवश्यकता एवं प्रासंगिकता बनाए हुए हैं। विश्व का यह आधुनिक और विहंगम स्वरूप इन्हीं क्रांतियों की देन है। तानाशाहों, साम्राज्यवादियों, निरंकुश और अयोग्य शासकों के चंगुल से निकलकर जनता ने आधुनिकता की ओर कदम रखे तो इन्हीं क्रांतियों के कारण, जिनमें प्राणों की आहुति दी गई और शत्रुओं को सबक भी सिखाया गया। इस पुस्तक में विश्व की उन महान् क्रांतियों का वर्णन किया गया है, जिन्होंने विश्व का भविष्य तय कर दिया; जैसे— औद्योगिक क्रांति : क्रांतियों का आधार, वैज्ञानिक क्रांति, इंग्लैंड की महान् क्रांति, फ्रांस की गौरवपूर्ण क्रांति, इटली की संघर्ष-क्रांति, भारत छोड़ो आंदोलन, जर्मनी की एकीकरण क्रांति, तिब्बत की धार्मिक क्रांति, जापान की तकनीकी क्रांति।"
Nishane Par : Samay, Samaj Aur Rajniti
- Author Name:
Santosh Bhartiya
- Book Type:

- Description: जिस ज़माने में हमने पत्रकारिता शुरू की उसके पहले या उस दौर में भी पत्रकारिता के जो विषय होते थे, उनका अन्दाज़े-बयाँ साहित्यिक होता था। हमें बड़ी घुटन होती थी कि सच्चाई कहाँ है, देश कहाँ है और आप शब्दों में घूम रहे हैं, कविता में घूम रहे हैं और दुनिया कहाँ है? संतोष भारतीय, एस.पी. सिंह और उदयन शर्मा ने उस दौर में हिन्दी पत्रकारिता को उस साहित्यिक दरिया से निकाला और ‘रविवार’ के ज़रिए एक ऐसी जगह ले गए कि उसमें एक मैच्योरिटी जल्दी आ गई। उस ज़माने में हमने ज़मीन की पत्रकारिता की जिसका एक ख़ास रिवोल्यूशनरी प्रभाव हुआ और जिसका असर बहुत दूर तक गया। हमारा जो शुरुआती दौर था, वो समय विरोधाभासों का भी था। हमारी पत्रकारिता पर आपातकाल का जो प्रभाव पड़ा, उसकी भी बड़ी भूमिका थी क्योंकि हम भी एक लिबरेशन के साथ निकले थे। हम सब इतने पॉलिटिकल थे कि राजनीति में फँस गए, पर ख़ुशक़िस्मती है कि निकल भी गए। पत्रकारिता ने हमें दोस्त बनाया और राजनीति ने अलग किया। अब चूँकि हम वापस पत्रकारिता में आ गए हैं, इसलिए पुरानी दोस्ती का मौक़ा मिला है। हम लोग चार थे : मैं, एस.पी., संतोष और उदयन—जिनमें से दो अब हमारे बीच नहीं हैं। सचमुच लगता है कि अगर चारों रहते तो हिन्दी पत्रकारिता में उसका एक गहरा प्रभाव होता। आज मुझे इस बात की बेहद ख़ुशी है कि संतोष की पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। —एम.जे. अकबर
Kashmir : Itihas Aur Parampara
- Author Name:
Kumar Nirmalendu
- Book Type:

-
Description:
'नीलमत पुराण' में कहा गया है कि कश्मीर स्वाध्याय एवं ध्यान में मग्न रहनेवाले और निरन्तर यज्ञ करनेवालों की भूमि रही है। यह हिमालय-पर्वतमाला की गोद में बसा एक सुरम्य प्रदेश है। लेकिन अपनी दुर्गम भौगोलिकता के कारण यह बाह्य-जगत् की पहुँच से दूर रहा है।
प्राचीन काल में कश्मीर प्रदेश गन्धार जनपद के अन्तर्गत आता था। सातवीं शताब्दी ई. के प्रारम्भ में यहाँ नाग जाति के कर्कोटक राजवंश का उदय हुआ; जिसके संस्थापक दुर्लभवर्द्धन के समय से कश्मीर का व्यवस्थित इतिहास मिलता है। उनके पौत्र ललितादित्य ने गुप्तोत्तर काल में एक साम्राज्य खड़ा किया; और प्रसिद्ध मार्तण्ड-मन्दिर का निर्माण भी कराया।
1339 ई. तक कश्मीर एक स्वशासित हिन्दू राज्य था। परन्तु मध्यकालीन हिन्दू राजाओं की दुर्बलता और उनके सामन्तों के षड्यन्त्रों के कारण वहाँ का वातावरण अराजक हो गया, जिसका लाभ उठाते हुए 1339 ई. में शाहमीर नामक एक मुसलमान ने कश्मीर के सिंहासन पर कब्जा कर लिया।
कल्हण ने 'राजतरंगिणी' में ललितादित्य से कहलवाया है कि ''इस देश को सुशासित तथा प्रगतिशील बनाये रखने के लिए अन्तर्कलह से बचना आवश्यक है।'' इसके कारण कश्मीर ने भारी कीमत चुकाई है। 'नीलमत पुराण' साक्षी है कि महर्षि कश्यप के समय से ही कश्मीर के स्थानीय लोगों ने विस्थापन की गहरी पीड़ा को महसूस किया है और आधुनिक काल में कश्मीरी हिन्दुओं को विस्थापन ने जितने दर्द दिये हैं, वह तो अकथनीय है।
British Samrajyavad ke Sanskritik Paksha Aur 1857
- Author Name:
Vandita Verma
- Book Type:

-
Description:
1857 के डेढ़ सौ से ज़्यादा वर्ष बीत जाने के बाद आज इतिहास के इस पड़ाव को सही सन्दर्भों में स्थापित किया जाना नितान्त आवश्यक है।
गम्भीरता से जाँचा-परखा जाए तो यह पड़ाव मात्र एक रोमांचकारी अनुभूति देनेवाला न होकर हिन्दुस्तान के इतिहास की तमाम ऐसी प्रवृत्तियों का संवर्द्धन करनेवाला और उनका उद्गम स्रोत भी दिखाई देता है जिनका नाता उस उत्तर-औपनिवेशिकता से भी बनता दिखता है जिसकी कल्पना बीसवीं शताब्दी के मध्य में आकर ही विश्व के विचारकों द्वारा की जा सकी।
सांस्कृतिक साम्राज्यवाद यदि उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ से ही पश्चिमी विश्व की एक सुविचारित विचारधारा का स्वरूप ग्रहण कर चुका था तो उपनिवेशवाद के प्रारम्भिक स्वरूप का गवाह रहा हिन्दुस्तान, और वहाँ सांस्कृतिक दिशा में प्रवृत्त साम्राज्यवादी नीतियों की प्रतिक्रियाएँ भी उसी स्तर के प्रतिरोध पैदा करने में पूर्ण सक्षम थीं।
भारत में आनेवाले आधुनिक प्रभाव यहाँ की ज़मीन के लिए सहज तो थे ही नहीं, बल्कि कई अर्थों में बिलकुल भिन्न भी थे। फिर ये विचार पश्चिमी आधुनिकता का डंका पीटनेवालों और हर अन्य सभ्यता व संस्कृति को हेय दृष्टि से देखनेवाले पश्चिम के ईसाई विश्व द्वारा लाए जा रहे थे। किन्तु इन सबके साथ सबसे महत्त्वपूर्ण यह था कि ये उन औपनिवेशिक हुक्मरानों द्वारा लाए जा रहे थे जो इसे ज़बर्दस्ती लागू करने की मंशा और क्षमता दोनों ही रखते थे। यह परिदृश्य भारत में आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को एक तरफ़ अन्तर्द्वन्द्वों में जकड़ता गया, साथ-साथ उसके इन दंभी हुक्मरानों को अनायास एक अदृश्य, अप्रत्याशित संकट की ओर भी खींचता चला गया।
गहराइयों तक पहुँचकर ही हम वे सारी सम्भावनाएँ तलाश सकते हैं जिन्होंने 1857 के इस पड़ाव को निर्मित किया। एक ऐसा पड़ाव जो युद्ध के रूप में सामने आया, और जिसका नायक एक सिपाही बना। वह सिपाही जो हिन्दुस्तान के आम आदमी, किसान और उच्च जाति, सबका प्रतिनिधि था और अंग्रेज़ सरकार के कार्यकलापों का साक्षी भी। इस सिपाही के द्वारा किए गए विद्रोह के अर्थ निश्चित रूप से गम्भीर थे।
अपने तमाम ऐतिहासिक पड़ावों से गुज़रती एक ज़रूरी और महत्त्वपूर्ण पुस्तक है ‘ब्रिटिश साम्राज्यवाद के सांस्कृतिक पक्ष और 1857’।
Vartman Bharat
- Author Name:
Vedpratap Vaidik
- Book Type:

- Description: वर्तमान भारत हमारे समय का दर्पण है। समसामयिक भारत की ज्वलन्त समस्याओं पर प्रखर एवं निर्भीक प्रतिक्रियाओं का यह दस्तावेज़ हिन्दी की विशिष्ट उपलब्धि है। वर्तमान भारत के निबन्ध वर्णनात्मक नहीं, विश्लेषणात्मक हैं। प्रत्येक निबन्ध विचाराधीन विषय के कार्य-कारण में गहरे उतरता है, इतिहास को खँगालता है और अनागत के आयामों को अनावृत्त करता है। इसीलिए यह ग्रन्थ पत्रकारिता का पाथेय तो है ही, इसमें दर्शन, राजनीतिशास्त्र और इतिहास का भी प्रांजल परिपाक हुआ है। इस ग्रन्थ के निबन्ध हिन्दी में मौलिक चिन्तन और उसकी सशक्त अभिव्यक्ति के नए प्रतिमान क़ायम करते हैं। भारत के भवितव्य से वेलेंटाइन डे तक, सोनिया गांधी के ग़ुस्से से फूलन के बहाने तक, परमाणु विस्फोट से तहलका तक, धर्म की मोमबत्ती से भगवाकरण तक और कश्मीर से ट्रिनिडाड तक फैले विषयों की विविधता इन निबन्धों को मौलिक विचारों के इन्द्रधनुष में ढाल देती है। मौलिक विचार ही नहीं, मौलिक विचार-भाषा के लिए भी हिन्दी जगत इन निबन्धों का स्वागत करेगा। हिन्दी को कविता, कहानी और उपन्यास के दायरे से ऊपर उठाकर शुद्ध विचार और विश्लेषण का माध्यम बनानेवालों में वेदप्रताप वैदिक का नाम अग्रणी है। समसामयिक इतिहास पर लिखना इतिहास का निर्माण करना ही है, ख़ास तौर से तब जबकि लिखे हुए को सर्वोच्च नीति-निर्माताओं से लेकर जनसाधारण तक लाखों लोग एक साथ पढ़ते हों। इतिहास की लकीरें क़लम की नोक से गहरी खिंचती हैं या तलवार की नोक से, यह कहना कठिन है लेकिन इन निबन्धों में क़लम तलवार की तरह चली है, इसमें ज़रा भी शक नहीं है। मूर्धन्य पत्रकार और शीर्ष चिन्तक डॉ. वैदिक की क़लम से निसृत ये निबन्ध चिन्तनशील पत्रकारों, विद्वानों, राजनीतिज्ञों और प्रबुद्ध पाठकों के लिए सद्यः सन्दर्भ की भाँति उपयोगी सिद्ध होंगे।
Mera Lahuluan Punjab
- Author Name:
Khushwant Singh
- Book Type:

-
Description:
बैसाख की पहली तिथि पंजाबी पंचांग के अनुसार नववर्ष दिवस के रूप में मनाई जाती है। इसी दिन 13 अप्रैल, 1978 को जरनैल सिंह भिंडरावाले ने धूम-धड़ाके से पंजाब के रंगमंच पर पदार्पण किया। इस घटना से न केवल पंजाब के जन-जीवन में तूफ़ान आया बल्कि पूरे देश के लिए इसके दूरगामी परिणाम हुए। पूरा पंजाब अशान्त और आतंकवाद के हाथों क्षत-विक्षत हो गया और धीरे-धीरे यह समस्या इतनी पेचीदा बन गई कि देश की अखंडता के लिए यह सचमुच का ख़तरा बनती दिखाई दी। सुप्रसिद्ध लेखक और पत्रकार खुशवंत सिंह की प्रस्तुत पुस्तक सुस्पष्ट रूप से इस समस्या का इतिहास दर्शाती है, स्वतंत्रता-प्राप्ति के बाद पंजाबियों के गिले-शिकवों और असन्तोष का विवरण देती है, और सभी प्रमुख घटनाओं पर रोशनी डालती है।
लेखक का व्यक्तिगत जुड़ाव पुस्तक को विशेष प्रामाणिकता प्रदान करता है, जो लगभग इसके प्रत्येक पृष्ठ पर प्रकट है। इसमें लेखक ने एक तरफ़ पंजाब की राजनीति तथा दूसरी ओर केन्द्र सरकार द्वारा जानबूझकर खेले जानेवाले शरारतपूर्ण राजनीतिक खेलों पर अपने विचार प्रकट किए हैं। इसका परिणाम यह हुआ कि भारत के सबसे उन्नतिशील राज्य की प्रगति के मार्ग में गत्यवरोध आ गया, यहाँ की कृषि और औद्योगिक अर्थव्यवस्था तहस-नहस होने लगी, इसका प्रशासन और न्यायपालिका पंगु बनकर रह गए। जो लोग इस गत्यवरोध को अधिक गहराई से समझना चाहते हैं, उनके लिए यह पुस्तक अवश्य पठनीय है।
Yashpal Ka Viplav Vol. 1-4
- Author Name:
Yashpal
- Book Type:

- Description: संकलित लेख स्वातंत्र्योत्तर भारत के लगभग सभी पहलुओं पर मंत्रणा करते दिखते है। फिर चाहे मुद्दा साहित्य, संस्कृति और भाषा का हो, कांग्रेसवाद बनाम मार्क्सवाद का हो, या एक नयी वैश्विक व्यवस्था में भारत की छवि और कर्तव्यों का हो। यहाँ एक ऐसी विस्तृत और समावेशी तस्वीर उभरती है जिसे किसी एक उपन्यास या कई कहानियों में भी समेटना नामुमकिन है। इस लिहाज़ से 'विप्लव' का चौथा भाग भारत के बौद्धिक इतिहास की प्रस्तावना उकेरता है—एक ऐसी पृष्ठभूमि जो आजादी से लेकर अबतक हमारे सामाजिक जीवन को प्रभावित-पोषित करता आई है। इन लेखों में यशपाल एक दुस्साहसी संपादक के रूप में निखरते हैं जो अपनी लेखनी में तटस्थ पत्रकारिता, तथ्यपरक विवेचना और साहित्यिक स्वायत्तता की एक अनूठी मिसाल प्रस्तुत करता है। शैली और भाषा का एक ऐसा नमूना जो आज के दौर में बेहद प्रासंगिक है। यह कहना उचित होगा कि यशपाल का साहित्य और उनकी पत्रकारिता, दोनों क्रांतिकारी संघर्ष की बौद्धिक उपज हैं। और एक दूसरे के पूरक भी हैं। इसलिए यह किताब हिंदी साहित्य और भारतीय इतिहास में रुचि रखने वालों के लिए अनिवार्य है।
Mughal Kaleen Bharat (Babar)
- Author Name:
Saiyad Athar Abbas Rizvi
- Book Type:

-
Description:
यह ग्रन्थ बाबर के हिन्दुस्तान के इतिहास से सम्बन्धित है। इस कारण कि काबुल की विजय के उपरान्त उसका हिन्दुस्तान से सम्पर्क प्रारम्भ हो गया था। 910 हि. से अन्त तक के पूरे ‘बाबरनामा’ का अनुवाद भाग ‘अ’ में प्रस्तुत किया जा रहा है, किन्तु बाबर के व्यक्तित्व को समझने के लिए उसकी प्रारम्भिक आत्मकथा का भी ज्ञान परमावश्यक है; अत: भाग ‘द’ में इसका भी अनुवाद कर दिया गया है। केवल कुछ थोड़े से ऐसे पृष्ठों का जो पूर्ण रूप से उज्बेगों के इतिहास से सम्बन्धित थे, अनुवाद नहीं किया गया है। ऐसे अंशों के विषय में उचित स्थान पर उल्लेख कर दिया गया है। भाग ‘ब’ में ‘नफ़ायसुल मआसिर’, गुलबदन बेगम के ‘हुमायूँनामा’, ‘अकबरनामा’ तथा ‘तबक़ाते अकबरी’ के बाबर से सम्बन्धित सभी पृष्ठों का अनुवाद प्रस्तुत किया गया है। बाबर को समझने के लिए अफ़ग़ानों के दृष्टिकोण का ज्ञान भी परमावश्यक है; अत: भाग ‘स’ में अफ़ग़ानों के इतिहास से सम्बन्धित ‘वाक़ेआते मुश्ताक़ी’, ‘तारीख़े दाऊदी’ तथा ‘तारीख़े शाही’ का अनुवाद प्रस्तुत किया गया है। परिशिष्ट में ‘हबीबुस् सियर’, ‘तारीख़े रशीदी’, ‘तारीख़े अलफ़ी’ तथा ‘तारीख़े सिन्ध’ के आवश्यक उद्धरणों का अनुवाद प्रस्तुत किया गया है। प्रोफ़ेसर रश ब्रुक विलियम्स द्वारा प्रसिद्धि-प्राप्त ‘एहसनुस् सियर’ नामक ग्रन्थ का मिथ्या-खंडन भी परिशिष्ट ही में किया गया है।
बाबर के इतिहास के लिए उसकी आत्मकथा हमारी जानकारी का बड़ा ही महत्त्वपूर्ण साधन है। प्रस्तुत अनुवाद अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना द्वारा किए गए फ़ारसी भाषान्तर से किया गया है, किन्तु मूल तुर्की तथा मिसेज़ बेवरिज एवं ल्युकस किंग के अनुवादों से भी सहायता ली गई है। नाम तो सब के सब तुर्की ग्रन्थ से लिए गए हैं और उनके हिज्जे में तुर्की उच्चारण का ध्यान रखा गया है।
उम्मीद है कि यह ग्रन्थ शोधार्थियों और जिज्ञासु पाठकों के लिए उपयोगी साबित होगा।
Chakravarty Samrat Ashok
- Author Name:
Rachna Bhola Yamini
- Book Type:

- Description: इतिहास में सम्राट् अशोक को दो चीजों के लिए याद किया जाता है—एक, कलिंग के युद्ध के लिए और दूसरा, भारत के बाहर की दुनिया में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए। अपने आरंभिक दिनों में अशोक बहुत क्रूर राजा था। अपने निष्कंटक राज्य के लिए उसने अपने सौतेले भाइयों को मरवा दिया था। उसके इन क्रूर कारनामों के कारण उसे ‘चंड अशोक’ कहा जाने लगा था। उसने एक के बाद एक राज्य जीता और साम्राज्यवाद की अपनी महत्त्वाकांक्षा को सींचता रहा। उसका राज्य भारत के पार दक्षिण एशिया और पर्शिया तक को छूने लगा। आखिर कलिंग का युद्ध हुआ। इसमें भी अशोक को जीत मिली। लेकिन इस युद्ध में दोनों पक्षों के एक-एक लाख लोग मारे गए और इससे भी ज्यादा बेघर हो गए। कलिंग युद्ध में हुए महाविनाश से विचलित हो गया। उसने बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया। उसने जनकल्याण के कार्य आरंभ कर दिए और राजसी भोग-विलास का परित्याग कर दिया। उसने अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। सम्राट् अशोक के शौर्य, युद्धकौशल विजय अभियानों और दानव से मानव बनने की मार्मिक कथा प्रस्तुत करनेवाली एक पठनीय पुस्तक।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book