Agnipath Se Nyaypath
(0)
Author:
Deokinandan GautamPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
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यह पुस्तक उस बालक की कहानी है, जिसने जीवन में संघर्ष को उत्सव और उत्कर्ष का सोपान बनाने का प्रयत्न किया। बुंदेलखंड के पिछड़े क्षेत्र में साधारण किसान परिवार में जनमे इस बालक ने अभावों में अपनी भाव-भंगिमा को ईश्वर के सहारे सार्थकता से युक्त रखा। श्रीमद्भगवद्गीता, उसमें दिए गए ध्यान के प्रयोग उसके पाथेय रहे। पढ़-लिखकर पुलिस सेवा को एक मिशन के तौर पर लिया और यथाशक्त निर्वाह किया। थपेड़े खाए, पर न्यायपथ पर डटा रहा। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से पुलिस विभाग के शीर्षस्थ पद से कुछ बड़े परिवर्तनों का वाहक बनने का निमित्त बना। जीवन में अनेक महान् विभूतियों के दर्शनों का सौभाग्य उसे मिला। पुस्तक के आकार की मर्यादा का ध्यान रखते हुए लेखक ने विभिन्न प्रकरण संक्षेप में दिए गए हैं। अनेक को स्थान नहीं मिल पाया है। बहुत से प्रकरण इसलिए भी छोड़ने पड़े कि उनमें आत्मश्लाघा की बू आने लगती अथवा ऐसे गंभीर ऑपरेशनल मैटर्स एवं विभागीय कमियों का ब्योरा आ जाता जिसका लाभ देश-विरोधी ताकतों को मिल जाता। जीवनमूल्यों की स्थापना करते हुए कर्तव्य के अग्निपयध पर सतत चलकर न्यायपथ की विस्तीर्ण यात्रा है यह पुस्तक
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यह पुस्तक उस बालक की कहानी है, जिसने जीवन में संघर्ष को उत्सव और उत्कर्ष का सोपान बनाने का प्रयत्न किया। बुंदेलखंड के पिछड़े क्षेत्र में साधारण किसान परिवार में जनमे इस बालक ने अभावों में अपनी भाव-भंगिमा को ईश्वर के सहारे सार्थकता से युक्त रखा।
श्रीमद्भगवद्गीता, उसमें दिए गए ध्यान के प्रयोग उसके पाथेय रहे। पढ़-लिखकर पुलिस सेवा को एक मिशन के तौर पर लिया और यथाशक्त निर्वाह किया। थपेड़े खाए, पर न्यायपथ पर डटा रहा। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से पुलिस विभाग के शीर्षस्थ पद से कुछ बड़े परिवर्तनों का वाहक बनने का निमित्त बना। जीवन में अनेक महान् विभूतियों के दर्शनों का सौभाग्य उसे मिला।
पुस्तक के आकार की मर्यादा का ध्यान रखते हुए लेखक ने विभिन्न प्रकरण संक्षेप में दिए गए हैं। अनेक को स्थान नहीं मिल पाया है। बहुत से प्रकरण इसलिए भी छोड़ने पड़े कि उनमें आत्मश्लाघा की बू आने लगती अथवा ऐसे गंभीर ऑपरेशनल मैटर्स एवं विभागीय कमियों का ब्योरा आ जाता जिसका लाभ देश-विरोधी ताकतों को मिल जाता। जीवनमूल्यों की स्थापना करते हुए कर्तव्य के अग्निपयध पर सतत चलकर न्यायपथ की विस्तीर्ण यात्रा है यह पुस्तक
Book Details
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ISBN9789355212887
-
Pages368
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Avg Reading Time12 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: "वास्तव में पाकिस्तान न कोई देश है और न राष्ट्र; यह केवल हिंदू विरोधी उग्र इस्लामी मानसिकता का गढ़ है। सन् 1947 में हुआ बँटवारा कोई दो भाइयों के बीच हुआ जमीन का बँटवारा नहीं था, यह हिंदुओं के प्रति इस्लाम के अनुयायी कट्टरपंथी मुल्लाओं की तीव्र घृणा का परिणाम था। आज समय की आवश्यकता तो यह है कि स्वयं मुस्लिम भी इस्लाम की गिरफ्त से बाहर निकलें, लेकिन यह मुस्लिम समुदाय में बहुत बड़ी क्रांति से ही संभव है, पर जब तक यह नहीं होता, तब तक हिंदुओं को समझ लेना चाहिए कि इस्लाम के सीधे निशाने पर केवल हिंदू हैं। आज यह बात ठीक से समझ लेने की जरूरत है कि इस्लाम का जन्म ही मूर्तिपूजा और बहुदेववाद को नष्ट करने के लिए हुआ है। उसके धर्मांध अनुयायियों ने भी मूर्तिपूजकों को जड़ से समाप्त करने का बीड़ा उठा रखा है। दुनिया में ईसाई और मुसलिम एक ही परंपरा की उपज हैं, इसलिए लाख शत्रुता के बाद भी एक-दूसरे के लिए उनके दिल में स्थान है। इसीलिए हिंदू दोनों के ही निशाने पर है। प्रस्तुत पुस्तक ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में इस्लाम का परिचय कराने के साथ-साथ हिंदुओं के संघर्ष को इस तरह पेश करती है कि सामान्य पाठक भी उसे सहज ही समझ ले। इस्लाम का यथातथ्य पूरी बेबाकी के साथ परिचय करानेवाली हिंदी की यह शायद पहली पुस्तक है। इसमें काफी साहसपूर्ण ढंग से अनेक ऐसे सत्य उद्घाटित किए गए हैं, जिनको जानना किसी भी जागरूक भारतीय के लिए आवश्यक है।"
Pashchatya Itihas Darshan Evam Itihas Lekhan
- Author Name:
Heramb Chaturvedi
- Book Type:

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Description:
"अराजक का अव्यवस्थित असंख्य तथ्यों के मध्य एक क्रम स्थापित करके मानव के विकास-क्रम को अनुरेखित करना ही इतिहास का विवरण प्रस्तुत करना होता है। वैसे इस अर्थ को दोनों रूपों में देखा-समझा जा सकता है-प्रथम तो संरचना के स्तर पर और दूसरे, उसके लेखन अथवा चित्रण के उद्देश्य के माध्यम से!""
"द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् शीत-युद्ध से लेकर भू- मंडलीकरण एवं उदारवाद से होते हुए सोवियत संघ के विघटन और 'वैश्विक ग्राम' की परिकल्पना के बाद के क्रम में जिस प्रकार, उत्तर-संरचनावाद, उत्तर- धुनिकतावाद, उपाक्रमी इतिहास लेखन से लेकर उत्तर-सत्य ('पोस्ट-टुथ') का दौर चल रहा है उसमें भाषाई बाजीगरी (सिमेटिक जग्लरी) में एक अजब दुविधापूर्ण स्थिति उत्पन्न कर दी है। यह दो विरोधाभासी विशेषताओं से युक्त काल प्रतीत हो रहा है, जिसमें एक ओर, मानव विश्व एकीकृत लगता है किन्तु दूसरी तरफ एक निश्चित ही भीषण अराजकता का काल है।"
"...एक ओर वह तकनीकी परिवर्तनों की स्वीकृति सेजूझता है और दूसरी तरफ तकनीकी एकता से संगठितहोने का लाभार्थी भी है। वैसे तो विश्व संक्रमणशीलहोने के नाते सदैव ही अनिर्णायक एवं अराजक-साप्रतीत होता है... पहली बार इस अराजकता को'तकनीकी उत्प्रेरक' ने उसे एक निश्चित ही अलग दशाऔर दिशा प्रदान की है। इसी अराजकता के कारण हम 'टुथ' या ऐतिहासिक तथ्यों की खोज में 'पोस्ट टुथ' तक पहुंच गए हैं।"
Kautilya Ka Arthashastra
- Author Name:
Om Prakash Prasad
- Book Type:

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Description:
अर्थशास्त्र मात्र राजनीतिशास्त्र की पुस्तक नहीं, इसमें राजतंत्रात्मक शासन–पद्धतियों का ऐतिहासिक अध्ययन भी होता है। कौटिल्य ने अर्थशास्त्र के तमाम पहलुओं पर विचार करते हुए इसे राजनीतिविज्ञान भी माना है। इसीलिए कौटिल्य का सारा ज़ोर राजा, राजकोष, प्रजा और शासन के केन्द्रीकरण पर था।
‘कौटिल्य का अर्थशास्त्र : एक ऐतिहासिक अध्ययन’ इस अर्थ में महत्त्वपूर्ण है कि भारत के इस पहले अर्थशास्त्र ग्रन्थ को सदियों के मत–मतान्तरों के परिप्रेक्ष्य में समकालीनता की नई दृष्टि के साथ गहराई और गम्भीरता से देखा–परखा गया है, ताकि अर्थशास्त्र के मूल को मूलत: परिभाषित और आत्मसात् किया जा सके।
यह पुस्तक ऐतिहासिक अध्ययन के साथ–साथ यह विमर्श भी खड़ा करती है कि इतिहास–प्रदत्त किसी भी प्रकार के सामाजिक, राजनीतिक एवं धार्मिक बदलाव में आर्थिक कारण को सर्वाधिक ठोस कारण मानने का सिलसिला अभी भी जारी है। नए शोधकार्यों ने अब यह प्रश्न खड़ा किया है कि सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक बदलाव का अगर प्रधान कारण आर्थिक परिवेश होता है तो आर्थिक बदलाव किस तथ्य पर आधारित है? 21वीं सदी में अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर इस तथ्य को स्वीकृति मिली है कि आर्थिक बदलाव का सबसे ठोस आधार होता है—विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी। पूरा विश्व इस तथ्य को स्वीकारने लगा है कि जिस देश में जिस समय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की जैसी स्थिति रही, वैसी ही उसकी आर्थिक स्थिति रही और जैसी आर्थिक स्थिति रही, वैसी ही सामाजिक और राजनीतिक दशा।
इससे स्पष्ट है कि कौटिल्य की निरंकुश नीतियों के मूल में वैज्ञानिकता अपनी अहम भूमिका में थी कि बग़ैर इसके सशक्त और विशाल साम्राज्य की स्थापना सम्भव नहीं, और इसके लिए राजा प्रजा की सुख–सुविधाओं एवं उसकी भलाई की व्यवस्था करनेवाला एक व्यवस्थापक मात्र है, जिसकी अवहेलना कर सभ्यता की उच्च अवस्था सम्भव नहीं।
यह पुस्तक विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, नगरीकरण, कृषि एवं कृषक, शिल्पकार एवं कर्मकार, प्रशासन तथा स्त्रियों के बारे में विस्तृत एवं महत्त्वपूर्ण प्रकाश डालती है, जो इतिहास और अब तक के अँधेरे से बाहर निकल एक नई दिशा में क़दम बढ़ाने जैसा है।
Papa Restart Na Hue
- Author Name:
Alok Puranik
- Book Type:

- Description: ज़िंदगी जीने की तकनीक भले ही सबको समझ न आई हो, पर तकनीक बहुत गहराई से जिंदगी में घुस गई है। मोबाइल फोन जीवनसाथी से भी बड़ा जीवनसाथी हो गया है—24×7 का साथ है। नई पीढ़ी को फ्रेंडशिप के नाम पर फेसबुक याद आने लगता है। बहुत चीजें बदली हैं, पर बहुत चीजें नहीं भी बदली हैं। यह असंभव है कि जिसके फेसबुक पर पाँच हजार फ्रेंड हों, मौकेजरूरत पर उसे चार फ्रेंड का साथ भी उपलब्ध न हो। नई पीढ़ी नए फेसबुक के संदर्भ में नई फ्रेंडशिप के आशय को बखूबी समझने की कोशिश कर रही है। यह व्यंग्यसंग्रह बदलती तकनीक के संदर्भ में बुनियादी मानवीय रिश्तों को जाननेसमझने की कोशिश करता है। बाजार, तकनीक के बदलावों ने इनसान को किस तरह से बदला है और कहाँ से न बदल पाया है, इसका लेखाजोखा इस संग्रह में है। बदलते समाजशास्त्रअर्थशास्त्र को पकड़ने की कोशिश आलोक पुराणिक ने इस व्यंग्यसंग्रह में की है। वे इस काम को बेहतर तरीके से इसलिए कर पाते हैं कि वे एक तरफ कॉमर्स के एसोसिएट प्रोफेसर हैं, तो दूसरी तरफ समाज, तकनीक के महीन बदलावों पर पैनी नजर रखनेवाले व्यंग्यकार। बदलती तकनीक, बदलते बाजार के आईने में बदलते समाज को समझने के लिए यह व्यंग्यसंग्रह पढ़ना जरूरी है। व्यंग्यसंग्रह पूरा पढ़ने के बाद सिर्फ हँसी ही आपके साथ नहीं होगी, बल्कि अपने वक्त के बारे में ज्यादा समझदारी भी आप पैदा कर चुकेंगे।
Madhyakaleen Europe
- Author Name:
Om Prakash Prasad
- Book Type:

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Description:
विश्व-इतिहास की शुरुआत मेसोपोटामिया, मिस्र, चीन, यूनान और रोम की सभ्यताओं से होती है। इन सभ्यताओं के उदय और विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की भूमिका सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण रही। रोम की सभ्यता की क़ब्र पर सामन्तवाद पनपा। भौगोलिक खोजें, बौद्धिक पुनर्जागरण और धर्मसुधार आन्दोलन की घटनाओं ने सामन्ती व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया।
सामान्य तौर पर सामन्ती काल से लेकर अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम और औद्योगिक क्रान्ति तक के काल को योरोप में मध्यकाल कहते हैं। मध्ययुग का इतिहास प्राचीन विश्व के इतिहास की तुलना में वर्तमान काल के अधिक निकट है।
प्रस्तुत पुस्तक में मध्यकालीन योरोप की तस्वीर दस अध्यायों के माध्यम से प्रस्तुत की गई है। मध्यकालीन कृषकों की ज़िन्दगी, शिक्षा और विज्ञान जैसे विषयों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया है। योरोप और अरब के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए नवीन आविष्कारों, विश्वविद्यालय, काग़ज़, प्रेस एवं बारूद जैसे विषयों को इस पुस्तक में विशेष तौर पर अभिव्यक्त किया गया है।
Yogi Ramrajya
- Author Name:
Chetna Negi
- Book Type:

- Description: रामराज्य की परिकल्पना एक आदर्श व्यवस्था का प्रतीक है। रामराज्य ऐसे क्षेत्र की संपूर्ण परिभाषा है, जहाँ हर क्रियाकलाप एक-दूसरे के सामंजस्य से पूरा होता है। रामराज्य की संकल्पना जनहित और सर्वसमावेशी व्यवस्था पर आधारित है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पदभार सँभालने के बाद पाँच वर्ष की अवधि में महंत योगी आदित्यनाथ ने सांस्कृतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन किए और एक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा को मूर्त रूप दिया। उनके शासन के पाँच वर्षों में उत्तर प्रदेश ने अपने सांस्कृतिक वैभव के विराट् स्वरूप के दर्शन कराए और आधुनिक राज्य की पहचान को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाया। विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की आम जनमानस तक सहज सुलभता और विकास के नए कीर्तिमान उस रामराज्य की अवधारणा को प्रदर्शित करते हैं, जिसमें जनकल्याण ही सर्वोपरि है। पाँच वर्ष के दौरान सत्ता की दृढ़ता, दूरदर्शिता, सजग प्रबंधन, संवेदनशीलता से परिस्थितियाँ ऐसे परिवर्तित हुईं कि उत्तर प्रदेश उद्योगपतियों, पूँजी निवेशकों, कॉरपोरेट सेक्टर का सर्वप्रिय राज्य बन गया है।
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