Agnipath Se Nyaypath
Author:
Deokinandan GautamPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 400
₹
500
Available
यह पुस्तक उस बालक की कहानी है, जिसने जीवन में संघर्ष को उत्सव और उत्कर्ष का सोपान बनाने का प्रयत्न किया। बुंदेलखंड के पिछड़े क्षेत्र में साधारण किसान परिवार में जनमे इस बालक ने अभावों में अपनी भाव-भंगिमा को ईश्वर के सहारे सार्थकता से युक्त रखा।
श्रीमद्भगवद्गीता, उसमें दिए गए ध्यान के प्रयोग उसके पाथेय रहे। पढ़-लिखकर पुलिस सेवा को एक मिशन के तौर पर लिया और यथाशक्त निर्वाह किया। थपेड़े खाए, पर न्यायपथ पर डटा रहा। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से पुलिस विभाग के शीर्षस्थ पद से कुछ बड़े परिवर्तनों का वाहक बनने का निमित्त बना। जीवन में अनेक महान् विभूतियों के दर्शनों का सौभाग्य उसे मिला।
पुस्तक के आकार की मर्यादा का ध्यान रखते हुए लेखक ने विभिन्न प्रकरण संक्षेप में दिए गए हैं। अनेक को स्थान नहीं मिल पाया है। बहुत से प्रकरण इसलिए भी छोड़ने पड़े कि उनमें आत्मश्लाघा की बू आने लगती अथवा ऐसे गंभीर ऑपरेशनल मैटर्स एवं विभागीय कमियों का ब्योरा आ जाता जिसका लाभ देश-विरोधी ताकतों को मिल जाता। जीवनमूल्यों की स्थापना करते हुए कर्तव्य के अग्निपयध पर सतत चलकर न्यायपथ की विस्तीर्ण यात्रा है यह पुस्तक
ISBN: 9789355212887
Pages: 368
Avg Reading Time: 12 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: ऊपरी गंगा के मैदान में नगरीकरण से सम्बन्धित ज्ञान के मुख्य आधार साहित्यिक साक्ष्यों के साथ-साथ पुरातात्त्विक अन्वेषण एवं उत्खनन है। भारत में नगरों के आविर्भाव की प्राचीनता ताम्राश्म काल में हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ो नामक स्थानों पर बने हुए नगरों के सन्निवेश तथा उनके सामाजिक एवं आर्थिक जीवन के दृष्टान्तों से सिद्ध हो जाती है, किन्तु द्वितीय सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व के मध्य में सैन्धव सभ्यता के विनाश के साथ ही सम्पूर्ण भारत पुनः ग्राम्य संस्कृति में लौट आया तथा एक हजार वर्षों के लम्बे अन्तराल के पश्चात् छठी शताब्दी ईसा पूर्व में, गंगा के मैदान में षोडश महाजनपदों का उद्भव राजनीतिक इकाइयों के रूप में उत्तर भारत में हुआ। छठी शताब्दी ईसा पूर्व का काल उत्तर भारत में अनेकानेक नवीन परिवर्तनों का काल था तथा ये परिवर्तन जीवन के लगभग प्रत्येक क्षेत्र में दिखाई देते हैं। इसे द्वितीय नगरीकरण की संज्ञा दी गई है। पुरातात्त्विक भाषा में इसे उत्तरी कृष्ण मार्जित पत्र-परम्परा संस्कृति के प्रारम्भ का काल माना जा सकता है। इस शोध-प्रबन्ध के माध्यम से ऊपरी गंगा के मैदान के पुरातात्त्विक अनुक्रम का तथा द्वितीय नगरीकरण से सम्बन्धित नगरीय साक्ष्यों का क्रमबद्ध एवं सुव्यवस्थित ऐतिहासिक एवं पुरातात्त्विक अध्धयन प्रस्तुत करने का यथासम्भव प्रयास किया गया है।
Naya Bharat Samarth Bharat
- Author Name:
Dr. Vedprakash
- Book Type:

- Description: ‘नया भारत, समर्थ भारत’ संकल्प से सिद्धि की ओर बढ़ता भारत है, जिसमें स्वच्छता, स्वास्थ्य, गरीबी, भ्रष्टाचार, ग्रामोदय, नारी सशक्तीकरण, कुपोषण, कृषि तथा किसान की दशा, विविध आयामी सद्भाव तथा बुनियादी ढाँचा आदि अनेक ऐसे अहम मुद्दे हैं, जिन पर स्वतंत्रता के बाद सत्ता सँभालने वालों को गंभीरता से काम करना चाहिए था, लेकिन राजनीतिक हित तथा निहित स्वार्थों के चलते इन सामाजिक तथा राष्ट्रीय हितों को हाशिए पर रखा गया। ‘संकल्प’ शक्ति के अभाव में उक्त मुद्दे गंभीर चुनौती बनते चले गए। सन् 2014 में त्रस्त जनता ने भारी जनादेश देकर भाजपा को विजयी बनाया। प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई उम्मीदें जगीं। 15 अगस्त, 2014 को लालकिले की प्राचीर से अपने पहले ही संबोधन में उन्होंने प्रधान सेवक बनकर उपर्युक्त मुद्दों को गंभीरता से उठाते हुए उनके समाधान का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने निराशा तथा नकारात्मकता में डूबे जन-जन को झकझोरा, भागीदारी का आह्वान किया तथा संकल्पबद्ध होकर कार्य करने का विश्वास जगाया। जन-जन की भागीदारी से राष्ट्रहित में अनेक बड़े और कड़े फैसले लेते हुए वे आगे बढ़ते रहे। लक्ष्य स्पष्ट था—‘सबका साथ, सबका विकास’। ‘साफ नीयत’ से लिये गए संकल्प अब सिद्धि की ओर बढ़ रहे हैं। ‘नए भारत’ की व्यावहारिक संकल्पना की प्रेरक प्रस्तुति है यह कृति ‘नया भारत, समर्थ भारत’।
Anna Kranti
- Author Name:
Ashutosh
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- Description: "अगस्त 2011 में मजबूत लोकपाल विधेयक की माँग को लेकर अन्ना हजारे का आमरण अनशन स्वतंत्र भारत के इतिहास की ऐतिहासिक घटना थी। कई घोटालों के उजागर होने के तुरंत बाद हुआ यह आंदोलन जिस तेजी से मध्यम वर्ग के बीच फैला उसने भारतीय जनमानस को आंदोलित कर दिया। उसमें एक आशा का संचार किया कि भारत से भ्रष्टाचार का खात्मा हो सकता है। मशहूर पत्रकार आशुतोष ने भारत को बदल देनेवाले इन 13 दिनों की कहानी बुनी है। उन्होंने सारी घटनाओं की सीधी जानकारी इसमें दी है, क्योंकि वे स्वयं भी अनशन स्थल, दिल्ली के रामलीला मैदान में उपस्थित थे और दोनों पक्षों—केंद्र की यू.पी.ए. सरकार तथा टीम अन्ना के साथ सीधे संपर्क में थे। अन्ना हजारे के आंदोलन की मानसिकता को समझाने के लिए आशुतोष ने जयप्रकाश नारायण के आंदोलन और महात्मा गांधी के सत्याग्रह को याद करते हुए स्वतंत्रता पूर्व के भारत की राजनीति की भी पड़ताल की है। भारत से भ्रष्टाचार के खिलाफ आम आदमी के आक्रोश के क्रांतिकारी 13 दिनों की सजीव दास्ताँ है यह पुस्तक। "
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