Darwin Justice
Author:
Praveen KumarPublisher:
FlyDreams PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Historical-fiction0 Ratings
Price: ₹ 319.2
₹
399
Available
"किसी को उम्र के 16वें मोड़ पर चाहना, इस सृष्टि का सबसे खूबसूरत एहसास है।" हमारे पूर्वजों के साथ ज़मीन के बंटवारे में अन्याय हुआ है। एक आदमी के पास मरने के बाद शव दफनाने तक की जगह नहीं है और एक आदमी के पास इतनी जमीनें हैं कि उसे पता ही नहीं है कि उसके पास कितनी जमीनें है। हमें ज़मीन चाहिए। सबको जीने का हक़ है... भूखे मरने से अच्छा है... संघर्ष करो। उनकी जमीनें छीनो! जहाँ लड़ाई अस्तित्व बचाने की हो, वहाँ युद्ध का कोई नियम नहीं होता। कल जब इतिहास के पन्ने सवाल करेंगे तो जवाब होगा कि हाँ, हमने बच्चों को मारा। इसलिए मारा कि कल ये बच्चे बड़े होकर नक्सल बनते। हाँ, हमने औरतों को मारा क्योंकि वे औरतें नक्सल पैदा करती थीं और जवान तो नक्सल थे ही। इन्हें तो हर हाल में मारना ही था हमें। बिहार के इतिहास को बुद्ध, महावीर के शांति सन्देशों के अलावा सामाजिक संरचना में ' डार्विन जस्टिस की थ्योरी को समझाना था। सामाजिक संरचना में सदियों से चला आ रहा असंतुलन, संतुलित होने के नाम पर रक्त रंजित होने जा रहा था। तैयारियाँ शुरू हो गईं। लोग दूर दराज़ से आने लगे। जिन्हें अपने खेतों से लाल झंडे हटवाने थे, वे मनचाहा योगदान देने को तैयार थे। अनय और चश्मिश की कहानी काल के किसी कार्यक्रम का हिस्सा है। किसी इंसान के बहाने इंसानियत को कलंकित करना है। उसे 'कार्ल मार्क्स' के अंदर 'डार्विन के सिद्धान्त' को समझाना है। उसे समझाना है कि 'न्यूटन का सिद्धान्त' सिर्फ़ भौतिकी विज्ञान की किताबों में ही नहीं बल्कि सामाजिक संरचना के अंदर भी घुसा है। उसे समझाना है कि 'लिंकन' के जिस प्रजातंत्र का हम दम्भ भरते हैं, वहाँ भी 'डार्विन की थ्योरी' चुपचाप अपना काम करती रहती है।
ISBN: 9788195315857
Pages: 496
Avg Reading Time: 17 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Edwina Aur Nehru
- Author Name:
Catherine Clement
- Rating:
- Book Type:

- Description: ‘नेहरू और एडविना’ के चरित्रों को केन्द्र में रखकर लिखा गया यह ऐतिहासिक उपन्यास तथ्य और कल्पना के अद्भुत मेल से रचा गया है। जो घटित हुआ वह तो सत्य है ही, लेकिन जो घटित नहीं हुआ, वह भी इसलिए एक हद तक सच्चा है क्योंकि उसका घटित होना काफ़ी हद तक सम्भव था। फ़्रांसीसी पाठकों को ध्यान में रखकर लिखी गई यह प्रेम कहानी भारतीय जनमानस को भी उसी रूप में उद्वेलित करेगी, इसमें सन्देह नहीं। भारत के इतिहास में बीसवीं शताब्दी की सबसे महत्त्वपूर्ण घटना 1947 का राजनीतिक विभाजन है। यह उपन्यास, इस घटना के अभिकर्ता तमाम महत्त्वपूर्ण पात्रों के भीतर झाँककर इसके कारणों और प्रभावों की दास्तान कहने का प्रयास करता है, और इस तरह दृश्य के अदृश्य सूत्रों का उद्घाटन करता है। सार्वजनिक के भीतर जो कुछ निजी है, वही उसका अन्त:सूत्र भी है, और अपनी मर्मस्पर्शिता में कहीं अधिक प्रभावी भी। इन्हीं अन्त:सूत्रों को उनकी मार्मिक संवेदनीयता के साथ ग्रहण कर इस उपन्यास का कथात्मक ताना-बाना बुना गया है। घटनाएँ प्राय: जानी-सुनी हैं—एक अर्थ में पूर्व परिचित। यही स्थिति पात्रों की है—जाने-माने, साहसी, प्रतापी, योद्धाओं का एक पूरा संसार। पर इन सबने मिलकर जो इतिहास रचा उसमें कौन, कहाँ, कितना टूटा-जुड़ा, बना-बिगड़ा, वह घटनाओं का नहीं संवेदनाओं का इतिहास है । एक बिन्दु ऐसा होता है जो बाहर और भीतर के तनाव का सन्धि-स्थल रचता है, जहाँ अक्सर जो बहुत अन्तरंग है, निजी है उसके अतिक्रमण की अनन्त साधना से बहिरंग की रचना होती है । इसी बिन्दु को पकड़ने की कोशिश है इस उपन्यास में। समय के दो महत्त्वपूर्ण पात्रों की केन्द्रीयता से उठकर समय को फिर से रचने की उसकी घटनात्मकता में नहीं, मार्मिकता में।
Kanaila Ki Katha
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: ‘कनैला की कथा’ ग्राम केन्द्रित जनपदीय इतिहास को सँजोने का अन्यतम उदाहरण है। सभ्यता–संस्कृति की प्राचीनता ने भारत को इतिहास की विशिष्ट विरासत सौंपी है। अतीत के प्रसिद्ध स्थान और स्मारक ही इस विरासत के अकेले वाहक नहीं हैं। गाँव-गाँव में यह विरासत बिखरी पड़ी है। हाँ, यह अवश्य हुआ है कि प्रायः अज्ञानता और उदासीनता के कारण यह विरासत उपेक्षित पड़ी रही और समय गुजरने के साथ ओझल होती चली गई। यह पुस्तक लिखकर राहुल सांकृत्यायन ने उस विरासत के एक हिस्से को अन्धकार से बाहर निकाला और वह रास्ता दिखाया जिस पर चलकर अन्य ग्रामों–कस्बों की कथाएँ भी सँजोई जा सकती हैं, जिससे हमारा इतिहास समृद्ध हो सकता है। इस पुस्तक में राहुल ने अपने पितृग्राम कनैला का ऐतिहासिक-भौगोलिक चित्र प्रस्तुत किया है, जिसका एक सिरा ईसा से तेरह सौ वर्ष पूर्व से जुड़ता है तो दूसरा सिरा बीसवीं सदी के उत्तरार्ध से। इतनी लम्बी कालावधि को कथा के रूप में समेटते हुए स्थानीय सभ्यता-संस्कृति की ऐतिहासिकता का पूरा ध्यान रखा गया है। इस तरह जो चित्र उभरता है वह पाठक को सामाजिक-सांस्कृतिक रूपान्तरों की एक दिलचस्प शृंखला से रू-ब-रू कराता है। वस्तुतः अपनी दूसरी कृतियों की तरह राहुल ने ‘कनैला की कथा’ में भी लेखन का एक अलग ही प्रतिमान रचा है। इतिहास और कथा का जैसा रोचक संयोग इस पुस्तक में घटित हुआ है वैसा किसी और कृति में देख पाना दुर्लभ है।
Jara Yaad Unhen Bhi Kar Lo
- Author Name:
Chiranjeev Sinha
- Book Type:

- Description: साधारणतया भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का कालखंड 1857 से 1947 तक माना जाता है, लेकिन विदेशी शासन का सबल प्रतिरोध इससे 332 वर्ष पहले सन् 1525 में ही प्रारंभ हो गया था, जब कर्नाटक के उलल्लाल नगर की रानी अब्बका चौटा, जो अग्निबाण चलानेवाली भारतवर्ष की अंतिम योद्धा थी, ने बढ़ते पुर्तगाली आधिपत्य को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। इस संग्रह में 1525 से 1947 अर्थात् लगभग सवा चार सौ वर्षों तक अनवरत प्रवहमान रहे विश्व के सर्वाधिक लंबे समय तक चले स्वतंत्रता संग्राम का वर्णन किया गया है। सबसे कम आयु में माँ भारती के लिए बलिदान होनेवाले ओडिशा के 12 वर्षीय बाजीराव राठउत के अमर बलिदान को पढ़कर भला कौन किशोर और युवा रोमांचित नहीं होगा! दुर्गा भाभी तमाम बंदिशों को धता बताते हुए किस चतुराई से भगत सिंह को अंग्रेजों की नाक के नीचे से लाहौर से कलकत्ता निकाल ले गईं, यह आज भी मिशन शक्ति की प्रेरणा है। तात्या टोपे की बिटिया मैना देवी ने जनरल आउट्रम के सामने झुकने की जगह जिंदा आग में जलना स्वीकार किया और अजीजन बाई ने यह दिखाया कि समाज का हर तबका चाहे वह तवायफ ही क्यों न हो, देश की आजादी के लिए मर-मिटने को तैयार रहता है। भारतवर्ष के ऐसे ही 75 वीरों और वीरांगनाओं का दाँतों तले उँगली दबाने सदृश अनछुआ वर्णन जो इन अनजाने क्रांतिवीरों के प्रति स्वाभाविक श्रद्धा और सम्मान सृजित करेगा ।
Sultan Razia : Raziyyat-Ud-Duniya Va-Ud-Din
- Author Name:
Heramb Chaturvedi
- Book Type:

- Description: रज़िया ने चन्द्रप्रभा से आखिर में बस यही कहा, “न जाने समय और तारीख हमें कैसे मूल्यांकित करेगी क्रूर, ख़ुदगर्ज़ अमीरों या दकियानूसी उलेमा के नज़रिए से...या आम आदमी की हिफाज़त, ख़ुशी और ख़ुशहाली के लिए काम करने वाली सुलतान के रूप में...” अभी वह इतना कह ही पाई थी कि एक ज़बरदस्त वार तलवार का हुआ और ख़ून का ऊँचा फव्वारा फूट गया...देखते ही देखते रज़िया का सर धड़ से अलग हो गया...जैसे ही चन्द्रप्रभा के मुँह से हाय राम निकला हिन्दू भीड़ एकदम से सकते में आ गई और जब उन्हें ज्ञात हुआ कि मरने वाली रज़िया सुल्तान थी तब वे अफ़सोस में डूब गए...मगर अफ़सोस के अलावा अब कर भी क्या सकते थे? राजसत्ता शायद किसी की भी सगी नहीं होती और न जाने क्यों जाने-अनजाने ही कैसे-कैसे लोगों की शत्रुता आमंत्रित कर लेती है?
Hardaul
- Author Name:
Vandana Awasthi Dubey
- Book Type:

- Description: This book has no description
Paanchali : Nari Ki Ek Shaswat Gatha
- Author Name:
Shachi Mishra
- Book Type:

- Description: पांचाली उपन्यास द्रौपदी के मन को समझने का प्रयास है। द्रौपदी आजीवन सहधर्मिणी बनी रही किन्तु इसके कारण पाँच पाण्डवों की पत्नी बनी। पांचाली का कथन है कि मेरे जीवन में एक भी क्षण ऐसा नहीं आया जहाँ मुझे अनुभव हुआ हो कि मैं इन सब की पत्नी हूँ। मैं तो सदैव इनकी दासी और भोग्या ही रही। आज सोचती हूँ कि मैंने स्वयं को पाँच हिस्सों में क्यों बाँटा? जब बाँट ही रही थी तो छह हिस्से क्यों नहीं किए? एक हिस्सा अपने लिये क्यों नहीं रखा जहाँ मेरी इच्छा के विपरीत किसी का भी प्रवेश वर्जित हो, साथ ही बाँटते समय थोड़ी-सी बेईमानी क्यों नहीं कर ली? थोड़ी नहीं अधिक बेईमानी करनी चाहिये थी मुझे, आधा से भी अधिक, किन्तु अब तो बाँट चुकी, सब हिस्सों में से कतर-ब्योंत करूँगी तो भी कुछ पूरा तो होगा नहीं बस टुकड़े-टुकड़े ही रहेंगे। अब तो मैं अभ्यस्त हो चुकी हूँ वे हिस्से मेरे जीवन में ढल चुके हैं, उस समय क्यों नहीं सोचा?
Mandavi
- Author Name:
Asha Prabhat
- Book Type:

- Description: ‘मांडवी’ रामकथा की स्त्री-चरित्रों को लेकर संवेदनशील रही आशा प्रभात की लेखनी का नया पड़ाव है। इससे पहले वह ‘मैं जनकनन्दिनी’ और ‘उर्मिला’ लिख चुकी हैं। ‘मांडवी’ भरत की पत्नी थीं जिनके विषय में न तो रामकथा में बहुत विस्तार से कुछ आता है, न ही बाद के विद्वानों-साहित्यकारों ने उन पर कुछ ख़ास ध्यान दिया, जबकि राम-वनवास के दौरान उन्होंने सम्भवतः लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला से भी ज़्यादा पीड़ा का वहन किया होगा। आशा प्रभात एक सजग लेखिका के रूप में यह ठीक ही प्रश्न उठाती हैं कि रामायण के पुरुष-पात्र जहाँ इतने पराक्रमी, प्रज्ञावान और गुणवान थे, तो फिर स्त्री-पात्र क्या इतने संवेदनहीन और प्रज्ञाशून्य थे कि उनकी मनस्थिति का विस्तृत चित्रण करना कवियों की अनिवार्य नहीं लगा। इसी से प्रेरित होकर उन्होंने सीता और उर्मिला के बाद अब मांडवी को अपना विषय बनाया जो दुर्भाग्य से उस कैकेयी की बहू भी थी जिसके चलते राम को वनवास हुआ और उनसे जुड़े तमाम पात्रों, ख़ासकर स्त्रियों को इतना कुछ झेलना पड़ा। यह उपन्यास एक पौराणिक चरित्र की भावभूमि का अन्वेषण करते हुए स्त्री-मात्र की व्यथा को समझने का प्रयत्न करता है, और रामकथा के महत्त्वपूर्ण लेकिन उपेक्षित चरित्र को, उसके पूरे व्यक्तित्व के साथ रेखांकित करता है।
Jab Jyoti Jagi
- Author Name:
Sukhdev Raj
- Book Type:

- Description: भारतीय स्वाधीनता-आन्दोलन में बिना किसी प्रकार की सुयश-प्राप्ति की कामना किए हँसते-हँसते फाँसी के तख़्ते पर झूल जानेवाले मृत्युंजयी वीरों के बलिदान का सर्वाधिक महत्त्व रहा है। उन वीरों को जितनी प्रतिष्ठा और सम्मान प्राप्त होना चाहिए था, उसकी उपेक्षा एवं अवहेलना सत्ता-लोलुप स्वार्थियों ने सदैव ही की है। यदि उन वीरों की नि:स्वार्थ मातृ-भूमि-सेवा का अनुकरण किया गया होता तो भारतीय जनता आज स्वर्ग-सुख का उपभोग निस्सन्देह करती होती। पराधीनता के समय जो भी क्रान्तिकारी साहित्य उपलब्ध था उसे भारतीय युवक बड़े उत्साह से पढ़ते थे; इसीलिए तत्कालीन युवकों में देश के प्रति नि:स्वार्थ सेवा की सच्ची लगन थी। आज भारतीय जनता, विशेषतः युवकों में सुषुप्त त्याग और सेवा की भावना को जाग्रत करने के लिए उन क्रान्तिकारी वीरों के इतिहास के पठन-पाठन की अत्यधिक आवश्यकता है। भारतीय क्रान्तिकारियों के सम्बन्ध में अभी तक बहुत कम लिखा गया है। इन क्रान्तिकारियों के सम्बन्ध में पुस्तक लिखने का कार्य अत्यन्त कठिन है क्योंकि सभी क्रान्तिकारी अपने कार्य-कलापों को एकदम गुप्त रखते थे, उनके निकटतम सहयोगी भी उनकी बहुत सी बातों से अपरिचित रहते थे। प्रस्तुत पुस्तक अमर शहीद स्व. चन्द्रशेखर आज़ाद और भगवतीचरण बोहरा के अत्यन्त विश्वासपात्र, क्रान्तिकारी आन्दोलन में निरन्तर कार्य करनेवाले भाई सुखदेव राज जी ने लिखी है। अस्तु, पुस्तक की उपादेयता निर्विवाद है।
Aalhkatha : Veergatha Ka Aatmahanta Adhyay
- Author Name:
Mahesh Katare
- Rating:
- Book Type:

- Description: आल्हकथा : वीरगाथा का आत्महन्ता अध्याय लोक में प्रचलित महाकाव्य आल्हखंड की कथा है। कवि जगनिक भट्ट के ‘परमाल रासो’ से निसृत इस गाथा में श्रोता-समुदाय की असाधारण रुचि, काव्य की मौखिक परम्पराओं और जन-कवियों की स्थानीय रचनाधर्मिता का योग भी रहा, और इस सबके चलते कम-से-कम उत्तर भारत में रामायण और महाभारत के बाद जिस काव्य ने लोक में अपनी जगह बनाई, वह आल्हा-ऊदल की कथा ही है। यह उपन्यास इतिहास और लोक-स्मृतियों को आधार बनाकर महोबा के महान योद्धाओं आल्हा-ऊदल और उनके ऐतिहासिक व सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य को एक रचनात्मक आकार देने का प्रयास करता है। वरिष्ठ कथाकार महेश कटारे ने अपने पूर्व के उपन्यासों में भी कई ऐसे विषयों और चरित्रों को अपने कुशल कथा-वितान के ज़रिये जीवन्त किया है जिनकी ओर अक्सर कथाकारों का ध्यान नहीं गया था। ‘आल्हकथा’ में उन्होंने आल्हा-ऊदल के समय की विसंगतियों को चित्रित करते हुए उन सरोकारों को भी रेखांकित किया है जिनका सम्बन्ध हर युग के सामाजिक-राजनीतिक जीवन-व्यापार से होता है। लीक से हटकर लिखे गए उपन्यासों को पसन्द करने वाले पाठक इस कृति को निश्चय ही संग्रहणीय पाएँगे।
Khanzada
- Author Name:
Bhagwandas Morwal
- Book Type:

- Description: ‘काला पहाड़’ और ‘रेत’ जैसे उपन्यासों द्वारा भगवानदास मोरवाल ने हिंदी में एक ऐसे लेखक की छवि बनाई है जो अपनी कथा-वीथियाँ समाज, देश और संस्कृति के तथ्यात्मक भूगोल के बीच से निकालता है। आम तौर पर वे ऐसे विषयों को चुनते हैं जिन्हें सिर्फ कल्पना के सहारे कहानी नहीं बनाया जा सकता, उनका गारा-माटी श्रमसाध्य शोध और खोजबीन से तैयार होता है। मेवात उनके लेखकीय और नागरिक सरोकारों का केंद्र रहा है. अपनी इस मिट्टी की संस्कृति, इतिहास और उसके समाजार्थिक पक्षों पर उन्होंने बार-बार निगाह डाली है। ‘खानजादा’ उपन्यास इसकी अगली कड़ी है। यह महत्वपूर्ण इसलिए है कि यह उन अदृश्य तथ्यों की निर्ममता से पड़ताल करता है जो हमारी आज की राष्ट्रीय चिंताओं से सीधे जुड़े हुए हैं। भारत में तुगलक, सादात, लोदी और मुगलों द्वारा चौदहवीं सदी के मध्य से मेवातियों पर किए गए अत्याचारों और देहली के निकट मेवात में मची तबाही की दस्तावेजी प्रस्तुति करते हुए यह उपन्यास मेवातियों की उन शौर्य-गाथाओं को भी सामने लाता है जिनका इतिहास में बहुत उल्लेख नहीं हुआ है। प्रसंगवश इसमें हमें कुछ ऐसे उद्घाटनकारी सूत्र भी मिलते हैं जो इतिहास की तोड़-मरोड़ से त्रस्त हमारे वर्तमान को भी कुछ राहत दे सकते हैं। मसलन बाबर और उसका भारत आना। हिन्दू अस्मिता का उस वक्त के मुस्लिम आक्रान्ताओं से क्या रिश्ता बनता था, धर्म-परिवर्तन की प्रकृति और उद्देश्य क्या थे और इस प्रक्रिया से वह भारत कैसे बना जिसे गंगा-जमुनी तहजीब कहा गया, इसके भी कुछ संकेत इस उपन्यास में मिलते हैं।
Treta
- Author Name:
Ashish Prakash
- Rating:
- Book Type:

- Description: त्रेतायुग की अनसुनी कहानियां त्रेता युग द्वापर से पहले क्यों आया, क्या है वाल्मीकि रामायण और तुलसी के मानस में अन्तर, कैसे हैं लक्ष्मण राम से भी अधिक महान योद्धा, कैसे शत्रुघ्न सा भाई मिलना मुश्किल है, क्या है हनुमान जी की अष्टसिद्धियां। इस तरह के अनेक प्रश्नों का उत्तर ले के आ गई है आशीष प्रकाश की किताब "त्रेता"।
Debku ek Prem Katha
- Author Name:
Murari Sharma
- Book Type:

- Description: देबकू-जिंदू की यह प्रेम कहानी आज से महज सौ साल पहले की है। जैसा कि उपन्यासकार मुरारी शर्मा ने उपन्यास की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए लिखा है कि यह अनूठी प्रेम कहानी प्रथम विश्वयुद्ध के आस-पास की कहानी है। मण्डी रियासत के मुख्यालय से महज बीस-बाईस किलोमीटर की दूरी पर स्थित नगरोटा गाँव से शुरू हुई यह प्रेम गाथा मण्डी नगर में सिमट कर रह गई। इस उपन्यास की विशेषता यह है कि इस प्रेमगाथा में वर्णित स्थानों व भवनों के अवशेषों से लेखक रूबरू हुआ है। बहुत से ऐसे व्यक्तियों से सम्पर्क साधने में सफल रहा है जो देबकू-जिंदू की इस प्रेम कहानी के तथ्यों की प्रामाणिकता को तस्दीक करते हैं। मुरारी शर्मा एक स्थापित वरिष्ठ कथाकार हैं, कहानी बुनने की कला में सिद्धहस्त। इन्होंने उपन्यास की पाठकीय रोचकता में कोई कमी नहीं आने दी है। सहज और सरल पात्रानुकूल भाषा-शैली उपन्यास की जीवंतता को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ती। निश्चय ही लोक में प्रचलित एक अनूठी प्रेमकथा पर आधारित यह उपन्यास हिंदी साहित्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। —विजय विशाल
TEESA
- Author Name:
Nandani Agrawal
- Book Type:

- Description: "भारत में किस्से-कहानियों में राजा और उनकी रियासत को आज भी जिंदा रखा गया है। राजाओं के भोग-विलास की कहानियाँ उस दौर में प्रजा के साथ हुई घटनाओं और राजा के कुटिल स्वभाव को भी बयान करती हैं। ‘तीसा’ उपन्यास का तानाबाना भी राजा और मंत्री की चालबाजी से शुरू होता है। जहाँ राजा लालची तो है ही लेकिन एक खौफ के साये में अपनी जिंदगी को जी रहा है। राजा का अपनी ही रानी से मोहभंग सिर्फ इसलिए हो जाता है क्योंकि रानी राजा की कुटिल करतूतों पर खामोश नहीं होती है। कहानी का केंद्र बिंदु तीसा का शांत स्वभाव और चाँद सी शीतलता ओढ़े उसकी खूबसूरती है जो जंगल में चंदन की खूशबू फैलाती हुई सी लगती है। अब जहाँ चंदन हो, वहाँ विषैले साँप तो होंगे ही। ऐसे में राजा के मायाजाल से खुद को बचाना, यह चुनौती का काम तो होगा ही। तीसा कैसे मुश्किल समय में धैर्य और साहस से अपनी जीत को सुनिश्चित करती है, यह हम सबके लिए एक सबक की तरह हो सकता है। आप किसी भी मुश्किल समय में क्यों न हों, बस उम्मीद रखिए कि बुरा समय जरूर बीत जाएगा और अधर्म कितना भी क्यों न पाँव पसारे, जीत अंत में धर्म की ही होती है।"
Ek Kishori Ki Diary
- Author Name:
Anne Frank
- Book Type:

- Description: अने फ़्रांक की लिखी 'एक किशोरी की डायरी' विश्व की श्रेष्ठ कृतियों में गिनी जाती है। जर्मनी में जन्मी अने ने यह ‘डायरी’ 1942 से 1944 के दौरान लिखी। इसमें युद्ध के बाद जर्मन क़ब्ज़े के दौरान डच लोगों की पीड़ा का आँखों-देखा विवरण है। एक 15 वर्षीय किशोरी ने समाज की उथल-पुथल और अपने मन की कशमकश को बहुत ही ईमानदारी से व्यक्त किया है। जन्मदिन के उपहार स्वरूप मिली एक डायरी को जिस समय उन्होंने अपना सच्चा मित्र बनाया था, उस समय ख़ुद उन्होंने भी कल्पना नहीं की होगी कि एक दिन यह डायरी विश्व की महानतम कृतियों में शुमार होगी। डायरी की प्रविष्टियों में जहाँ स्कूल की बातें हैं, तो सहेलियों की ईर्ष्या, मनपसन्द खिलौनों की चाह, छुट्टियों में बिताए समय के साथ देश में तेज़ी से बदलते हालात का भी वर्णन है। कैसे जर्मनी में रहनेवाले यहूदियों की ज़िन्दगी एक सनक-भर से जहन्नुम हो गई थी, लेकिन जीने की उत्कट इच्छा आख़िरी समय तक भी हार मानने को तैयार नहीं हुई। अने का बाल-मन कहीं न कहीं मानता है कि एक दिन सब सही हो जाएगा और वो वापस अपने परिवार के साथ एक सामान्य जीवन जी पाएगी। एक किशोरी की यह मार्मिक डायरी सिर्फ़ उसी की न रहकर सीधे पाठक के दिल में घर कर जाती है।
Chaurasi
- Author Name:
Dr. Ramesh Kumar Dubey
- Book Type:

- Description: बुंदेलखंड में लगभग एक सौ से भी अधिक गाँवों के क्षेत्र को पुराने समय में चौरासी के नाम से जाना जाता था, जिसमें कुछ उत्तर प्रदेश व कुछ मध्य प्रदेश के गाँव शामिल थे। इस कहानी में लेखक ने चौरासी क्षेत्र के ग्रामीण जीवन का चित्रण किया है, जो एक सत्य घटना पर आधारित है। कहानी में बुंदेलखंडी रीति-रिवाजों के बारे में बताया गया है। भैयालाल ने दोनों पुलिस वालों की बंदूकें छीनकर देवी और करण को पकड़ाईं और चिल्लाया, ‘‘बई के बाप सेठ, अब तोय नईं छोड़ हों।’’ किस प्रकार एक सीधा-सादा व्यक्ति पुलिस के बरताव के कारण बागी हो जाता है। इसका वर्णन पुस्तक में किया गया है।
Uttarkatha : Vol. 2
- Author Name:
Shri Naresh Mehta
- Book Type:

- Description: ‘उत्तरकथा’ के प्रथम खंड को पढ़ते हुए महसूस होता है कि जैसे लेखक, लूसिएँ गोल्डमान के उत्पत्तिमूलक संघटनात्मक समाजशास्त्र के सहारे पुराने मालवा के ख़ौफ़नाक अँधेरे को एक विशिष्ट सामाजिक स्थिति में एक निश्चित वरण की अनिवार्यता का सामना करते हुए उभार रहा है और उजाले में समस्याओं की एक शृंखला प्रस्तुत करते हुए आलोचनात्मक चित्र और चरित्र उकेरते हुए सार्थक समाधान की सम्भावना तक आना चाहता है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह कि पूरा उपन्यास आध्यात्मिक सरोकारों से विच्छिन्न नहीं है। उपन्यास का नायक शिवशंकर आचार्य दुःख-भोग और दायित्व वहन के क्रम में करुणा का अकलंक पुरुष है। ...त्रयम्बक और दुर्गा भारतीय दम्पति के शिवपार्वती जैसे आदर्श हैं। शिवशंकर आचार्य, भारतीय मनीषा की चारित्रिक स्थिति का नाम है। यह चरित्र नहीं है। यह बीज-चरित्र को गोद लेकर वृक्षत्व प्रदान करते हैं...लेखक ने केवल कथा नहीं कही है, बल्कि...उनके बीच से चेतना के अनिवार्य नैरन्तर्य को तलाशा है...तभी तो यह केवल कथा नहीं है, उत्तरकालीन कथा नहीं है, बल्कि प्रश्नों के समाधान की, उत्तर की भी कथा है। —श्री श्रीराम वर्मा (जनपक्ष)
Bhagat Singh Ko Fansi : Vol. 1
- Author Name:
Malvender Jit Singh Waraich +1
- Book Type:

- Description: भगत सिंह को फाँसी-1 यह कैसे हुआ कि मामूली हथियारों से लैस कुछ नौजवानों को ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी पाया गया, जिसके चलते उन्हें उम्रकैद और फाँसी की सजा हुई! ‘युद्ध’, जो उन्होंने लड़ा हालाँकि ‘‘यह युद्ध उपनिवेशवादियों व पूँजीपतियों के विरुद्ध लड़ा गया।’’ और जो ‘‘ न ही यह हमारे साथ शुरू हुआ और न ही यह हमारे जीवन के साथ खत्म होगा।’’ और, मात्र 30 महीने की उल्लेखनीय अवधि में 8-9 सितम्बर 1928 को ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन’ की स्थापना के साथ शुरू होकर, यह सम्पन्न हो गया। विश्वास से भरपूर भगत सिंह के शब्द थे, कि ‘‘मैं अपने देश के करोड़ों लोगों की ‘इंकलाब जिंदाबाद’ की हुंकार सुन पा रहा हूँ। काल-कोठरी की मोटी दीवारो के पीछे बैठे हुए भी मुझे कहै कि यह नारा हमारे स्वतंत्राता संघर्ष को प्रेरणा देता रहेगा।’’ इस पुस्तक में प्रस्तुत है इसका प्रथमद्रष्टया विवरण।
732 Miles
- Author Name:
Dr. Keerth
- Rating:
- Book Type:

- Description: In the dead of the night on August 14, 1947, at the cusp of a new era, as a throng of people on the street were celebrating, Bhavna let out a scream, so loud, and pushed her baby out. It was special—both Indya and India were born. A few days later, the boundary line to divide Pakistan and India was laid. The two nations that waited decades for the hard-earned freedom were not prepared for that. Families separated, friends estranged, women raped, and the killings increased with every passing day. Amidst those turmoil, a family with a just born baby, Indya, risked everything, only to reach home. Were they able to survive history’s greatest migration ever?
Varun te Bahirjee
- Author Name:
Ravi Amale
- Book Type:

- Description: हा शोध आहे बहिर्जी नाईक यांचा. छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या हेरप्रमुखाचा आणि त्याच बरोबर शिवरायांच्या हेरसंस्थेचा. शिवरायांची ही हेरव्यवस्था कशी होती? तिचे स्वरूप कसे होते, तिची व्याप्ती किती होती? मुख्य म्हणजे त्यामागील विचार कोणता होता? अनेक प्रश्न. त्यांची उत्तरे शोधताना आपल्याला जावे लागते भारतीय राजनीतिच्या प्राचीन इतिहासात, हेरगिरीच्या प्राचीन परंपरांकडे, ऋग्वेद, रामायण, महाभारत, कौटिल्य, कामंदक, संत तिरुवळ्ळुवर, कृष्णदेवराय आणि अगदी कुराण आणि पैगंबरांकडेही. ‘वरुण ते बहिर्जी’ आख्यायिका, दंतकथा, फेककथा यापलीकडे जाऊन घेतलेला हा हेरगिरीच्या विचारप्रवाहाचा वेध. Varun te Bahirjee | Ravi Amale वरुण ते बहिर्जी । रवि आमले
Murshidabad Ki Mallika
- Author Name:
Rajgopal Singh Verma
- Book Type:

- Description: राजगोपाल सिंह वर्मा इतिहास मर्मज्ञ तो हैं ही, वे इतिहास के अनूठे, लीक से हटकर चले महिला पात्रों को अपने कथा-साहित्य का विषय बनाते रहे हैं। वे महीन से महीन तथ्यों की कीलों पर कथा की बारीक मनोवैज्ञानिक जरदोजी करते हैं। कथा है तो मन और उसके खेल भी होंगे। यह मन और मस्तिष्क अकसर ऐतिहासिक उपन्यासों में अनुपस्थित मिलता है, लेकिन राजगोपाल सिंह वर्मा तथ्यों के घटनाक्रमों के चक्र में भी मुन्नी बेगम के अन्तर्द्वन्द्व और बौद्धिक-राजनैतिक दाँव-पेंच, व्यवहारकुशलता के चलते ईस्ट इंडिया कम्पनी के अफसरों से सौहार्द के दृश्य इस उपन्यास को जीवन्त बनाते हैं। मुन्नी बेगम, मीर जाफर की पत्नी रही है, गद्दारी के इतिहास की सियाही मुन्नी के हिस्से भी आ सकती थी, मगर वह व्यवहारकुशल रही। लेखक स्वीकार करते हैं कि मुन्नी बेगम राष्ट्रभक्त किसी तरह भी नहीं थी। सो, नायिका होने के वे उदात्त तत्व उसमें न हों, मगर एक अनाथ, बंजारा नर्तकी के पहले बेमन से मीर जाफर की पत्नी बनने, फिर अपने वजूद को पहचानने, जाफर की मृत्यु के बाद अपने अस्तित्व को बनाए रखने की कूटनीतिक व्यवहारकुशलता उसे नायिका बनने की सलाहियत जरूर देती है। एक ऐसी स्त्री जिसे लेकर ब्रिटिश संसद में भारत के सर्वशक्तिशाली, सम्पन्न और कार्यकुशल गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स जैसे व्यक्ति पर महाभियोग चला हो, मुन्नी बेगम के नाम की गूँज उठी हो; उसमें कुछ खास तो होगा ही। —मनीषा कुलश्रेष्ठ
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book