The Prophet
Author:
Khalil GibranPublisher:
Mandrake PublicationsLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 119.2
₹
149
Unavailable
मोहब्बत तुम्हारे सिर पर ताज रखती है और तुम्हें सूली पर भी चढ़ा देती है।’’ ‘‘मोहब्बत अपने अलावा तुम्हें कुछ नहीं देती और मोहब्बत अपने अलावा तुमसे कुछ नहीं लेती।’’ ‘‘तुम्हें क़ानून बनाने और उसे लागू करने में कितना मज़ा आता है; लेकिन इससे भी ज़्यादा ख़ुशी तुम्हें उस वक़्त होती है जब तुम उसे तोड़ते हो।’’ ‘‘और अगर कोई ख़ौफ़ है, जिसे तुम मिटाना चाहते हो तो उसकी जगह तुम्हारे अपने ही दिल में है, न कि उस शख़्स के वजूद में, जिससे तुम डर रहे हो।’’ ‘‘हमेशा यही होता आया है कि मोहब्बत अपनी गहराई से बेख़बर रहती है, यहाँ तक कि जुदाई की घड़ी आ जाये।’’
ISBN: 9788194646389
Pages: 100
Avg Reading Time: 3 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी नाम पढ़ते ही स्मरण हो आता है कि वह ओजस्वी वक्ता थे, कविहृदय थे, उदारहृदय थे। आजीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध रहे। भारतीय राजनीति के पुरोधा रहे । जीवन के पाँच दशक सांसद के रूप में बिताए। जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे। जनता पार्टी की सरकार में विदेश मंत्री रहे और तीन बार प्रधानमंत्री रहे । इतना ही नहीं, उनके जीवन से जुड़ी अन्य कई रोचक जानकारियाँ भी हमारी स्मृति में फिर से जीवंत हो उठती हैं। इस आख्यान के केंद्रीय चरितनायक वही अटल बिहारी वाजपेयी हैं, फिर भी वह वही नहीं हैं। यह आख्यान अपने पाठकों को एक ऐसे अटलजी से परिचित होने का अवसर देता है, जो उनके लिए सर्वथा अपरिचित हैं। अटलजी से जुड़ी स्मृतियाँ ही इस आख्यानपरक संस्मरणात्मक पुस्तक में लिपिबद्ध की गई हैं। इस आख्यान के अटलजी पुस्तक की प्रशंसा के लिए अपरिचित लेखक को फोन पर बधाई देने में संकोच नहीं करते। वैचारिक साम्य न रखनेवाले लेखक, संपादक के व्यक्तित्व और कृतित्व की मुक्तकंठ से प्रशंसा करने के लिए श्रोता रूप में समारोह में पहुँचकर बधाई देने में संकोच नहीं करते । कवि के रूप में अपनी सीमाओं को भी पूरे मन से स्वीकारते हैं । जो सार्वजनिक मंच से भी दोष स्वीकारने का साहस रखते हैं। जिन्हें धर्मसंकट उत्पन्न न करनेवाले मित्र अधिक प्रिय हैं। जो औरों की अव्यक्त, अप्रस्तुत अपेक्षाओं की भी पूर्ति करने से नहीं चूकते ।
Hindu, Hindutva, Hindustan
- Author Name:
Sudhir Chandra
- Book Type:

-
Description:
सारे बौद्धिक प्रयत्न के बावजूद, ‘हिन्दू अवचेतन’ अपने को ही भारतीय मानता है। भारत जैसे बहुधर्मी और सांस्कृतिक वैविध्य से भरपूर देश के लिए ऐसी मान्यता अनिवार्यतः अनिष्टकारी है। पिछले कुछ समय से यह मान्यता अवचेतन से निकलकर उत्तरोत्तर आक्रामक होती जा रही है। बौद्धिक प्रयत्न के बावजूद नहीं, बल्कि खुलकर एक विचारधारा के रूप में यह हिन्दू को ही राष्ट्र मान बैठी है। ख़तरा यदि प्रधानतः विचारधारा और उससे जुड़ी किसी राजनीतिक पार्टी का होता तो उससे जूझना मुश्किल न होता। पर आज परेशानी यह है कि ‘हिन्दू अवचेतन’ कहीं न कहीं उन बातों को अपनी अँधेरी गहराइयों में मानता है, जिनको चेतना के स्तर पर वह राष्ट्र के लिए घातक और नैतिक रूप से अवांछनीय समझता है। ज़रूरी है कि उसका सामना इस दुविधा से कराया जाए।
—इसी पुस्तक से
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