Shaheed E Azam Bhagat Singh
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बहुत से लोगों को यह जानकार आश्चर्य होगा कि मशहूर स्टैंडअप कॉमेडियन रवि गुप्ता चित्रकार भी हैं । रवि का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ । चित्रकला में इनकी रुचि बचपन से रही है । वह चित्रकार की तरह ही पहचाना जाना चाहते थे इसलिए विजुअल आर्ट में ग्रेजुएशन करने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी आ गये । भगत सिंह पर एक किताब पढ़कर वर्षों तक उनके ऐसे प्रभाव में रहे कि उन्हें जानने के लिए जो कुछ मिला, पढ़ गये। बतौर चित्रकार रवि ने तय किया क्यों न भगत सिंह की जीवनी को एक चित्रकथा के रूप पे प्रस्तुत किया जाये। यह किताब उसी प्रयास का नतीजा है । आज तो आप जानते ही हैं कि खुद को चित्रकार की तरह देखने वाले रवि गुप्ता स्टैंडअप कॉमेडियन के रूप में लोगों को हँसा रहे हैं । इसलिए यह किताब भगत सिंह के बारे में तो है ही, रवि गुप्ता के एक अचर्चित पहलू के बारे में भी है । उन्हें यहाँ फॉलो कर सकते हैं: shudhdesicomic
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बहुत से लोगों को यह जानकार आश्चर्य होगा कि मशहूर स्टैंडअप कॉमेडियन रवि गुप्ता चित्रकार भी हैं । रवि का जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में हुआ । चित्रकला में इनकी रुचि बचपन से रही है । वह चित्रकार की तरह ही पहचाना जाना चाहते थे इसलिए विजुअल आर्ट में ग्रेजुएशन करने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी आ गये । भगत सिंह पर एक किताब पढ़कर वर्षों तक उनके ऐसे प्रभाव में रहे कि उन्हें जानने के लिए जो कुछ मिला, पढ़ गये। बतौर चित्रकार रवि ने तय किया क्यों न भगत सिंह की जीवनी को एक चित्रकथा के रूप पे प्रस्तुत किया जाये। यह किताब उसी प्रयास का नतीजा है । आज तो आप जानते ही हैं कि खुद को चित्रकार की तरह देखने वाले रवि गुप्ता स्टैंडअप कॉमेडियन के रूप में लोगों को हँसा रहे हैं । इसलिए यह किताब भगत सिंह के बारे में तो है ही, रवि गुप्ता के एक अचर्चित पहलू के बारे में भी है । उन्हें यहाँ फॉलो कर सकते हैं: shudhdesicomic
Book Details
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ISBN9789348497697
-
Pages32
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Avg Reading Time1 hrs
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Age0-11 yrs
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Country of OriginIndia
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“स्वार्थावर लाथ मारून गळ्यात झोळी अडकवून संस्थेकरता - अर्थात आमच्या लोकांकरिता - संस्थेचे जे चालक भिक्षांदेही करीत दारोदार फिरतात व त्यांना त्यात कितीही अल्प यश आले तरी ते पर्वा न करता चंदनासारखे स्वत: झिजू दुसर्यांना- आम्हांला - सुख देण्याकरिता, आमची स्थिती सुधारण्याकरिता आपला प्रयत्न चालू ठेवतात, त्या संतांची किंमत आजपर्यंत झालेल्या कोणत्याही संतापेक्षा आम्हांला यत्किं चितही कमी वाटत नाही. कित्येकांना ती जास्त वाटेल.’’ श्री. गणेश आकाजी गवई डी. सी. मिशनच्या महाराष्ट्र परिषदेत केलेले भाषण, पुणे, 1912 “इतिहास असे सांगतो की, ज्यापासून राष्ट्राचा विकास होतो, अशा सर्व प्रकारच्या चळवळींचा उगम थोड्याशा व्यक्तींच्या कार्यात सापडतो. प्रस्तुतच्या बाबतीत त्या व्यक्ती म्हणजे, ज्यांची प्रथम प्रथम हेटाळणी झाली ते डिप्रेस्ड क्लासेस मिशनचे गृहस्थ होत. त्यांच्या कार्याने प्रचंड अशा हिंदू समाजाची सदसद्विवेकबुद्धी जागृत झाली.’’ न्यायमूर्ती सर नारायणराव चंदावरकर डी. सी. मिशनची अस्पृश्यतानिवारक परिषद , मुंबई, 1918 “मराठ्यांतील कार्यशक्ती काय करू शकते, असा जर कोणी आपल्याला प्रश्न विचारला, तर अण्णासाहेब शिंद्यांच्या कार्याकडे बोट करा. मराठ्यांतील स्वार्थत्यागाचे उदाहरण दाखविण्याचा प्रसंग आला, तर आपण अण्णासाहेब शिंद्यांचे नाव घ्या. परकीय सत्तेचा विध्वंस शिवाजीमहाराजांनी केला; वर्णवर्चस्वाचा विध्वंस शाहूमहाराजांनी केला व अस्पृश्यतेच्या विध्वंसनाचे कार्य करण्याकरिता तितक्याच धडाडीने अण्णासाहेबांनी आपले आयुष्य वेचले.’’ श्री. बाबुराव जेधे मुंबई इलाखा शेतकरी परिषद, पुणे, 1928 “शिंद्यांचा जिला भरीव हातभार लागला नाही, अशी लोकसेवेची व समाजोन्नतीची चळवळ दाखवून देणे कठीण आहे. राजकारण, समाजकारण, धर्मकार्य, शिक्षणकार्य; इतकेच नव्हे, तर वाङ्मयसेवा आणि इतिहास संशोधन या सर्वांत शिंद्यांचा भाग आहे; आणि फार महत्त्वाचा भाग आहे. ज्या काळी विधवाविवाहासारखे साधे प्रश्न सुटणे दुरापास्त होते, अशा त्या घनदाट धर्मवेडाच्या काळात अस्पृश्योद्धाराची चळवळ सुरू करणे, त्यासाठी डिप्रेस्ड क्लासेस मिशन ही संस्था काढणे; इतकेच नव्हे, तर अस्पृश्यांत जाऊन त्यांच्यापैकी एक झाल्याप्रमाणे त्यांच्यात वागणे, या गोष्टींसाठी अतुल स्वमतधैर्याची; एवढेच नव्हे, तर मूलमार्गी बुद्धीची व समाजाविषयी खर्या कळकळीचीही गरज होती. इतक्या व्यापक व सूक्ष्म दृष्टीच्या कार्यकर्त्याची दृष्टी सबंध देशाइतकी विशाल विस्तृत असावी लागते. म्हणूनच श्री. शिंदे सामाजिक चळवळींप्रमाणेच अनेक राजकीय चळवळींतही भाग घेताना दिसत.’’ न्यायमूर्ती भवानीशंकर नियोगी महाराष्ट्र साहित्य संमेलन नागपूर, 1933 Maharshi Vitthal Ramaji Shinde : Jeevan Va Karya / G. M. Pawar महर्षी विठ्ठल रामजी शिंदे : जीवन व कार्य । गो. मा. पवार
Jambudweepe Bharatkhande
- Author Name:
Dr. Mayank Murari
- Book Type:

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भारतीय चिंतन में कल्प की अवधारणा का समय के साथ-साथ व्योम, यानी देश के हिसाब से भी विचार किया गया है। पृथ्वी के द्वारा सूर्य का परिभ्रमण करने से संवत्सर काल बनता है। इसी प्रकार जब सूर्य अपनी आकाशगंगा का चक्कर लगाता है तो उसका एक चक्र पूरा होने के समयखंड को मन्वंतर कहा जाता है। इस प्रकार आकाशगंगा भी इस ब्रह्मांड में किसी ध्रुवतारे या सप्तर्षि या अन्य तारे का चक्कर लगाती है, उसके एक चक्कर की गणना को ही कल्प कहा गया। हमारा सौरमंडल आकाशगंगा के बाहरी इलाके में स्थित है और उसके केंद्र की परिक्रमा कर रहा है। इसे एक परिक्रमा पूरी करने में लगभग 22.5 से 25 करोड़ वर्ष लग जाते हैं। —इसी पुस्तक से भारतीय जीवन में देश और काल है। काल के साथ गति है और गति के संग जीवनदर्शन जुड़ा है। यह बात ही भारत को विशिष्ट बनाती है। कालचक्र, युगचक्र, ऋतुचक्र, धर्मचक्र, भाग्यचक्र और कर्मचक्र के विधान भारतीय सांस्कृतिक चेतना में समाए हुए हैं। सनातन के माहात्म्य, भारतीय चिंतन की वैज्ञानिकता और भारतीय जीवन-मूल्यों की पुनर्स्थापना करती विचारोत्तेजक पठनीय कृति।
My Joys & Sorrows
- Author Name:
Dr. Krishna Saksena
- Book Type:

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DAMN HISTORY
- Author Name:
Govind Mishra
- Book Type:

- Description:
What attracted me to Govind’s stories was a strange kind of innocence reflected there. The injured in the story – be it a person, a character or his/her feelings – about whom we don’t know much nor the author tells much, just the feeling of being injured... it comes out with such passion that is seldom seen in other story-writers.” So said Nirmal Verma about Govind Mishra’s short stories. Another prominent short story writer of Hindi, Shailesh Matiyani, opined – ‘Even though writing on both the worlds – the inner and the outer – Govind Mishra saved himself from the dangers of both realism and romanticism. That way, he comes to belong to the tradition of not so much Jainendra, Ajneya or Nirmal Verma but that of Premchand.’ Having created more than a thousand characters in his fiction, Govind Mishra’s portrayal extends from villages to towns, to cities, to metros, and even to foreign milieus. ‘Few writers have such a big range, ' said Srilal Shukla of Rag Darbari fame. ‘Damn History’ attempts to present in English for the first time, representative stories of the author, selected from more than fifteen collections of his short stories in Hindi, 1965 onwards.
Shiksha Ka Adhikar
- Author Name:
Mamta Mehrotra +1
- Book Type:

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"शिक्षा का अधिकार—ममता मल्होत्रा/महेश शर्मा भारत में अब ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ संसद् में पारित होकर कानून का रूप ले चुका है। इसके अंतर्गत छह से चौदह की आयु के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था की गई है। इस अधिनियम में बच्चों की शिक्षा के प्रति अध्यापकों, स्कूलों और सरकार—सभी के कर्तव्य निश्चित कर दिए गए हैं। अब नि:शुल्क शिक्षा प्राप्त करना सभी बच्चों का अधिकार है। सरल शब्दों में इसका अर्थ यह है कि सरकार छह से चौदह वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों की नि:शुल्क पढ़ाई के लिए जिम्मेदार होगी। इस प्रकार इस कानून ने देश के बच्चों को मजबूत, साक्षर और अधिकार-संपन्न बनाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। लेखकद्वय ने पुस्तक में ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम’ के बारे में विस्तार से पूरी जानकारी प्रस्तुत की है। साथ ही इस अधिनियम से जुड़े अनेक सवालों के जवाब समझाकर दिए गए हैं। इस दृष्टि से यह पुस्तक न केवल आमजन के लिए, बल्कि जिज्ञासु पाठकों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी। "
Guntavnuk Darala Mahit Asayalacha Havya Ashya Sharebajarachya Yuktichya Goshti
- Author Name:
Swaminathan Annamalai +1
- Book Type:

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शेअर बाजारात नवोदित आणि अनुभवी असलेल्यांसाठीही हे पुस्तक आहे. भारतीय शेअर बाजाराबद्दल फारशा माहीत नसलेल्या गोष्टी लेखकाने अत्यंत सोप्या, तरीही रोचक पद्धतीने सांगितलेल्या आहेत.’ - फिरोज व्ही. आर. वैश्विक सेवाप्रमुख, उपाध्यक्ष ‘एस.ए.पी.’ आणि इंडिया इन्क्ल्यूजन फाउंडेशनचे संस्थापक हे पुस्तक तुम्ही का वाचायला हवे? हे पुस्तक वाचून झाल्यानंतर तुम्हाला खालील गोष्टींबद्दल समजेल : 1. शेअर बाजार जितका वेळ चालू असतो तितका वेळ संगणकासमोर बसला नाहीत, तरीही पैसे कमावता येतात. 2. भरपूर नफा मिळवून देणारे शेअर्स पटकन ओळखून आपला फायदा करून घेता येतो. 3. शेअर बाजारात ज्या शेअर्सचे व्यवहार आता होत नाहीत अशा अ-सूचीबद्ध शेअर्सची हाताळणी. 4. भीडभाड न बाळगता ऑप्शन्स विकून टाकणे आणि नफ्याची टक्केवारी वाढवणे. 5. आयपीओबद्दल आणि आयपीओकरिता पैसे कसे उभे करावेत याबद्दल माहिती. 6. कागदी शेअर्सचे रूपांतरण इलेक्ट्रॉनिक शेअर्समध्ये (डिमटेरिअलायझेशन) कसे करावे. 7. बीईईएस (इशएड) म्हणजे काय, तो गुंतवणुकीचा जोखीममुक्त पर्याय आहे का? 8. स्टॉक स्क्रीनर्सशी ओळख. 9. शेअर बाजाराला कोणत्या प्रकारच्या घोटाळ्यांमुळे फटका बसू शकतो. 10. हिंदू अविभक्त कुटुंबाची (कणऋ) स्थापना करून आयकर वाचवता येऊ शकतो. Guntavnuk Darala Mahit Asayalacha Havya Ashya Sharebajarachya Yuktichya Goshti - Swaminathan Annamalai गुंतवणूकदाराला माहित असायलाच हव्या अश्या शेअरबाजारच्या युक्तीच्या गोष्टी - स्वामिनाथन अन्नामलाई
Gandhi evam Pandit Nehru ka Vaicharik Drashtikon
- Author Name:
Dr. Siyaram Shukla
- Book Type:

- Description:
Description Awaited
Dr. Lohia Ka Samajwad
- Author Name:
Ramgopal Yadav
- Book Type:

- Description:
भारतीय समाजवाद के आकाश में डॉ. राममनोहर लोहिया का उदय एक ऐतिहासिक घटना थी। उनका सम्पूर्ण जीवन सदियों से उपेक्षित रहे लोगों के प्रति समर्पित था—फिर चाहे वह किसी भी धर्म, जाति या वर्ग का हो। यही कारण है कि समाजवाद के पुरोधा के रूप में उनका नाम हमेशा अग्रणी रहा है।
समाजवादी चिन्तक प्रो. रामगोपाल यादव द्वारा प्रणीत यह पुस्तक डॉ. लोहिया के अक्षय व्यक्तित्व एवं कृतित्व का बहुआयामी मूल्यांकन प्रस्तुत करती है। डॉ. लोहिया की वैश्विक दृष्टि की व्यापकता का संज्ञान कराती एवं सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र में परिवर्तन के अग्रदूत के रूप में उन्हें प्रतिष्ठित करती हुई यह कृति एक नया चिन्तन प्रस्तुत करती है। डॉ. लोहिया का जीवन-संघर्ष निरन्तर सामाजिक या उत्थानवादी चेतना के द्वन्द्व को रूपायित करता है। आर्थिक ग़ैर-बराबरी दूर करने और समतामूलक समाज बनाने में उनका चिन्तन मार्क्सवादियों से भिन्न था।
भारतीय समाजवाद के प्रवर्तक डॉ. लोहिया की 105वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में प्रो. यादव द्वारा रचित इस किताब की उपादेयता समाजवाद के विकास की दिशा में एक अमूल्य योगदान है। पुस्तक की उपादेयता इस अर्थ में भी बढ़ जाती है कि यह लोहिया जी के व्यक्तित्व और उनकी निज परिमार्जित की हुई विचारधारा और उनके योगदान सब पर समुचित प्रकाश डालती है।
Satta Badal
- Author Name:
Datta Desai
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‘भाकरी का करपली, पान का सडलं, घोडं का अडलं' याला आपल्या लोकसंस्कृतीत एकच उत्तर आहे : ‘फिरवलं नाही म्हणून!' आपल्या प्रजासत्ताकाचे पंचाहत्तरावे वर्ष आपण पूर्ण करत असताना ‘देशात लोकशाहीची कोंडी का झाली, कल्याणकारी विकास का अडला, सामाजिक न्याय का खुंटला' याचे उत्तर शोधण्याची गरज निर्माण झाली आहे. हे उत्तर ‘सत्ता बदलली नाही म्हणून' असे असू शकेल का? मग प्रश्न येतो की ‘सत्ता' म्हणजे काय आणि ‘बदल' म्हणजे काय? देश स्वतंत्र होताना झालेला सत्ता-बदल हे ‘सत्ता हस्तांतरण' होते, ते क्रांतिकारी परिवर्तन नव्हते असे म्हटले गेले. आपली चौकट बदलली, तरी अनेक बाबतीत ती तशीच राहिली. देशाने अनेक बरीवाईट वळणे घेतली. काही प्रश्न सुटत गेले, अनेक प्रश्न तसेच राहिले, तर बरेच नवे प्रश्न उभे होत गेले. परिणामी आज आपला देश जगाच्या नजरेत भरेल अशी अफाट संपन्नता, विकासाच्या घोषणा, प्रचंड विसंगती, असह्य विषमता व घुसमटवून टाकणारे वातावरण अनुभवतो आहे. ही साधीसुधी कोंडी नाही. हा राष्ट्रीय स्वरूपाचा चक्रव्यूह आहे! हा चक्रव्यूह नेमका काय आहे? तो कसा भेदता येईल? त्यासाठी देशाच्या राजकारणाला कोणती मूलगामी वैचारिक-राजकीय कलाटणी मिळायला हवी? ‘मूलगामी कलाटणी' म्हणजे काय? त्यातून देशातील प्रत्येक व्यक्तीची अर्थपूर्ण जीवनाकडे वाटचाल कशी सुरू होईल? याची चर्चा हे पुस्तक करते. त्यामुळेच हे पुस्तक या देशावर व इथल्या विविधतेवर प्रेम करणाऱ्या प्रत्येकासाठी आहे. विषमता आणि विध्वंस यांनी अस्वस्थ होणाऱ्या भारतीय माणसासाठी हे पुस्तक आहे. विचारांचे स्वातंत्र्य आणि कृतीचे महत्त्व ओळखणाऱ्या प्रत्येकासाठी ते आहे. नवे काही घडवण्यासाठी उत्सुक असलेल्या प्रत्येक युवक-युवतीसाठी हे पुस्तक आहे. Satta Badal | Datta Desai सत्ता बदल | दत्ता देसाई
Mayaram Surjan, Karpoor Chandra Kulish
- Author Name:
Satish Jaiswal, Adarsh Sharma
- Book Type:

- Description:
हमारे पुरखे योद्धा पत्रकारों का जीवन इसी जिजीविषा का दूसरा नाम है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर निश्चय किया गया कि हिंदी पत्रकारिता के ऐसे शीर्षस्थ पुरोधा संपादकों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को मोनोग्राफ के रूप में सामने लाया जाए जिन्होंने अपनी उत्कृष्ट संपादन-दृष्टि से हिंदी-पत्रकारिता के आदर्श एवं उज्ज्वल प्रतिमान गढ़े हैं। इसी श्रृंखला श्रृंखला की एक कड़ी श्री मायाराम सुरजन एवं कर्पूर चंद्र कुलिश पर लिखा गया यह ग्रंथ है। ‘नवभारत’ नागपुर से अपना पत्रकारीय जीवन प्रारंभ करने वाले श्री मायाराम सुरजन को न केवल इसे बहुसंस्करणीय लोकप्रिय अखबार बनाने का श्रेय है वरन् वे इस समूह के ‘मध्य प्रदेश क्रॉनिकल’ पत्र के भी जनक थे, जो मध्य प्रदेश का पहला अंग्रेजी अखबार था। श्रीसुरजन ने अत्यल्प साधनें के साथ ‘नई दुनिया’ इंदौर के साथ द्विपक्षीय समझौता करके इसका रायपुर संस्करण शुरू किया। दैनिक ‘राष्ट्रदूत’ से अपना पत्रकारीय जीवन प्रारंभ करनेवाले श्री कर्पूर चंद्र कुलिश ने कठोर परिश्रम एवं अनथक अध्यवसाय से ‘राजस्थान पत्रिका’ का विशाल साम्राज्य खड़ा करने का अप्रतिम कार्य किया। ‘राजस्थान पत्रिका’ के प्रकाशन में आई कठिनाइयों का सामना उन्होंने जिस साहस और दृढ़ता के साथ किया वह प्रेरणास्पद है।
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