Sudhir Tailang Ke Teer
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आज मुझे सुधीर तैलंगके ‘प्रथम हिंदी कार्टून-संग्रह’ को प्रस्तावित करते हुए बेहद खुशी हो रही है! सुधीरजी के कार्टून दस वर्ष की बाल्यावस्था से ही राष्ट्रीय अखबारों में छपने लगे थे। 1983 में नवभारत टाइम्स में कार्य शुरू करने तक 5000 कार्टून छप चुके थे। पाँच वर्ष बाद 1989 में हिंदुस्तान टाइम्स में भी अंग्रेजी में कार्टून छपने के साथ-साथ अनुवादित कार्टून हिंदी हिंदुस्तान में भी रोजाना छपते रहे। दो शब्दों में पुस्तक परिचय दूँ तो यह उनके राजनीतिक व समसामयिक विषयों पर तटस्थ लेकिन मारक क्षमता रखनेवाले कुछ चर्चित कार्टूनों का सफरनामा है, जो आपको सिर्फ मुसकराने के लिए ही नहीं, समाचारों के अतीत में जाकर उस समय के इतिहास को उकेरने के लिए विवश कर देंगे। उनका कहना था—‘कार्टून किसी भी भाषा में बनाइए, यदि वह असरकार है तो उसका असर पड़ेगा ही। हिंदी का बढ़िया कार्टून अंग्रेजी में घटिया नहीं हो जाएगा। सवाल तो स्वयं को रोज सुधारने और माँजने का है। मैं हर रोज सोचता हूँ कि आज से बेहतर कार्टून बनाऊँ, यह मेरी रोज की जिद है। ‘कई बार मुझे लगता है, यह देश कार्टूनिस्टों के लिए ही आविष्कृत किया गया था। आजादी की लड़ाई में हजारों लोगों ने इसलिए कुरबानी दी थी कि एक दिन हमारे देश के सारे नेता मिलकर कार्टूनिस्ट नाम के जीव की सेवा करेंगे, न कि जनता की। मैं मानता हूँ कि सारे नेता आज पूरे वक्त कार्टूनिस्ट के लिए ही काम कर रहे हैं।’ प्रस्तुति—विभा (चौधरी) तैलंग
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आज मुझे सुधीर तैलंगके ‘प्रथम हिंदी कार्टून-संग्रह’ को प्रस्तावित करते हुए बेहद खुशी हो रही है! सुधीरजी के कार्टून दस वर्ष की बाल्यावस्था से ही राष्ट्रीय अखबारों में छपने लगे थे। 1983 में नवभारत टाइम्स में कार्य शुरू करने तक 5000 कार्टून छप चुके थे। पाँच वर्ष बाद 1989 में हिंदुस्तान टाइम्स में भी अंग्रेजी में कार्टून छपने के साथ-साथ अनुवादित कार्टून हिंदी हिंदुस्तान में भी रोजाना छपते रहे। दो शब्दों में पुस्तक परिचय दूँ तो यह उनके राजनीतिक व समसामयिक विषयों पर तटस्थ लेकिन मारक क्षमता रखनेवाले कुछ चर्चित कार्टूनों का सफरनामा है, जो आपको सिर्फ मुसकराने के लिए ही नहीं, समाचारों के अतीत में जाकर उस समय के इतिहास को उकेरने के लिए विवश कर देंगे।
उनका कहना था—‘कार्टून किसी भी भाषा में बनाइए, यदि वह असरकार है तो उसका असर पड़ेगा ही। हिंदी का बढ़िया कार्टून अंग्रेजी में घटिया नहीं हो जाएगा। सवाल तो स्वयं को रोज सुधारने और माँजने का है। मैं हर रोज सोचता हूँ कि आज से बेहतर कार्टून बनाऊँ, यह मेरी रोज की जिद है।
‘कई बार मुझे लगता है, यह देश कार्टूनिस्टों के लिए ही आविष्कृत किया गया था। आजादी की लड़ाई में हजारों लोगों ने इसलिए कुरबानी दी थी कि एक दिन हमारे देश के सारे नेता मिलकर कार्टूनिस्ट नाम के जीव की सेवा करेंगे, न कि जनता की। मैं मानता हूँ कि सारे नेता आज पूरे वक्त कार्टूनिस्ट के लिए ही काम कर रहे हैं।’
प्रस्तुति—विभा (चौधरी) तैलंग
Book Details
-
ISBN9789386001993
-
Pages176
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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