🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Karbala Dar Karbala

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

1980's blindings to 1989's massacre 'कर्बला दर कर्बला' अपने ढंग का एक अलग उपन्यास है। विमर्शों के इस दौर में यह अपना नया विमर्श चाहता है। गौरीनाथ का यह उपन्यास हमें एक भयावह दुनिया में ले जाता है। ऐसी दुनिया में जो अपराध जगत, पुलिस-प्रशासन और कट्टर धार्मिक संगठनों के गँठजोड़ से बनी है और जहाँ युवाओं के मधुर हो सकने वाले पल भी सहसा कटु हो उठते हैं। यह भागलपुर की दास्तान है। उसी भागलपुर की, जहाँ का अँखफोड़वा काण्ड और नब्बे के दशक में महीनों चले साम्प्रदायिक दंगों ने पूरे इतिहास को ही झकझोर दिया था। शिव और ज़रीना के सपनों की कहानी के बहाने लेखक ने ऐसी कथा बुनी है जो सत्ता और पूँजी के बल पर उत्पीड़ित और लांछित मानवता की कहानी बन गई है। 'कर्बला दर कर्बला' में कल्पना और यथार्थ से भी आगे बढ़कर तथ्यात्मकता को जिस तरह पिरोया गया है वह हिन्दी में उपन्यास-लेखन के क्षेत्र में एक साहसिक प्रयोग है। इस उपन्यास को पढऩा एक दु:स्वप्न से गुज़रना है। मगर उस दु:स्वप्न में कोई फ़ैंटेसी नहीं, बल्कि सच्चाइयों के बनते-बिगड़ते चित्र भरे पड़े हैं। रोंगटे खड़े कर देने वाले चित्र। —अब्दुल बिस्मिल्लाह ... और... भागलपुर से डॉ चन्द्रेश कहते हैं-- लेखक-पत्रकार गौरीनाथ ने बिहार के भागलपुर शहर को केन्द्र में रखकर लगभग दस साल के कालखण्ड में हुए उन चर्चित घटनाओं को समेटने की कोशिश की है, जिसने इस अत्यंत प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर के चेहरे को दाग़दार बनाया है, वह चाहे कुख्यात अंधाकरण काण्ड हो या 1989 का भयानक हिन्दू-मुस्लिम दंगा। लेखक ने यथासंभव तटस्थ भाव से इन घटनाओं का सूक्ष्म अन्वेषण कर इसके इर्द-गिर्द गल्प का ताना-बाना बुना गया है, जो उपन्यास के बहाने अपने आप में एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ भी है यानी दस्तावेज़ में उपन्यास की महक और उपन्यास में दस्तावेज़ की झलक।

Read more

₹ 295

₹ 241.9 18% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Karbala Dar Karbala This book ₹242
Nach Ke Bahar Gourinath ₹140
Beej-Bhoji Gourinath ₹250
3 books selected ₹685 ₹632

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

1980's blindings to 1989's massacre 'कर्बला दर कर्बला' अपने ढंग का एक अलग उपन्यास है। विमर्शों के इस दौर में यह अपना नया विमर्श चाहता है। गौरीनाथ का यह उपन्यास हमें एक भयावह दुनिया में ले जाता है। ऐसी दुनिया में जो अपराध जगत, पुलिस-प्रशासन और कट्टर धार्मिक संगठनों के गँठजोड़ से बनी है और जहाँ युवाओं के मधुर हो सकने वाले पल भी सहसा कटु हो उठते हैं। यह भागलपुर की दास्तान है। उसी भागलपुर की, जहाँ का अँखफोड़वा काण्ड और नब्बे के दशक में महीनों चले साम्प्रदायिक दंगों ने पूरे इतिहास को ही झकझोर दिया था। शिव और ज़रीना के सपनों की कहानी के बहाने लेखक ने ऐसी कथा बुनी है जो सत्ता और पूँजी के बल पर उत्पीड़ित और लांछित मानवता की कहानी बन गई है। 'कर्बला दर कर्बला' में कल्पना और यथार्थ से भी आगे बढ़कर तथ्यात्मकता को जिस तरह पिरोया गया है वह हिन्दी में उपन्यास-लेखन के क्षेत्र में एक साहसिक प्रयोग है। इस उपन्यास को पढऩा एक दु:स्वप्न से गुज़रना है। मगर उस दु:स्वप्न में कोई फ़ैंटेसी नहीं, बल्कि सच्चाइयों के बनते-बिगड़ते चित्र भरे पड़े हैं। रोंगटे खड़े कर देने वाले चित्र। —अब्दुल बिस्मिल्लाह ... और... भागलपुर से डॉ चन्द्रेश कहते हैं-- लेखक-पत्रकार गौरीनाथ ने बिहार के भागलपुर शहर को केन्द्र में रखकर लगभग दस साल के कालखण्ड में हुए उन चर्चित घटनाओं को समेटने की कोशिश की है, जिसने इस अत्यंत प्राचीन और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध शहर के चेहरे को दाग़दार बनाया है, वह चाहे कुख्यात अंधाकरण काण्ड हो या 1989 का भयानक हिन्दू-मुस्लिम दंगा। लेखक ने यथासंभव तटस्थ भाव से इन घटनाओं का सूक्ष्म अन्वेषण कर इसके इर्द-गिर्द गल्प का ताना-बाना बुना गया है, जो उपन्यास के बहाने अपने आप में एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ भी है यानी दस्तावेज़ में उपन्यास की महक और उपन्यास में दस्तावेज़ की झलक।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Antika Prakashan Pvt. Ltd.
Format
Paperback
Publisher
Antika Prakashan Pvt. Ltd.
Publication year
2022
Weight
200 grams
ISBN-13
9789391925659
Pages
256
Reading time
~9 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
19 × 21 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp