Yaad ki Rahguzar
Author:
Shaukat KaifiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
‘याद की रहगुज़र’ शौकत कैफ़ी की वह दास्तान है जिसमें उनके शौहर उर्दू के मशहूर शायर और नग़मानिगार कैफ़ी आज़मी और उनके बच्चों एक्ट्रेस शबाना आज़मी और कैमरामैन बाबा आज़मी के ख़ूबसूरत और दिलचस्प क़िस्से हैं। प्रगतिशील लेखक आन्दोलन से जुड़े हुए कवियों और लेखकों का ज़िक्र है। ऊँचे सामाजिक मूल्यों के लिए संघर्ष करनेवाले किरदार हैं।</p>
<p>शौकत कैफ़ी स्टेज और फ़िल्म की एक बहुत मझी हुई और बेमिसाल अभिनेत्री भी हैं। ‘याद की रहगुज़र’ में उन्होंने इप्टा और पृथ्वी थियेटर से जुड़े हुए अपने दिलों के बारे में कई अनोखी बातें लिखी हैं। ‘याद की रहगुज़र’ शौकत कैफ़ी के बहुरंगी अनुभवों का बयान है जिसमें जीवन के ठंडे और गरम मौसमों की तस्वीरें हैं। मानवमन का रोमांस है, हिम्मत और विजय की भावना है। बहुत सादा लेकिन अर्थपूर्ण यह लेखन पाठक के दिल और दिमाग़ में अतीत से प्रेम और भविष्य के प्रति आस्था जगाता है।</p>
<p>—असग़र वजाहत
ISBN: 9789387462571
Pages: 152
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम तो हैं ही, पूर्ण ब्रह्म के अवतार भी हैं। महामानव और आदर्श मानव के रूप में वह सद्प्रेरणा के अजस्र स्रोत हैं। पर श्रीराम के अवतार स्वरूप को, मोक्ष को जीवन का परम पुरुषार्थ माननेवाला आस्तिक बुद्धिसम्पन्न ईश्वरवादी ही ठीक-ठीक जानता-समझता है। श्रीराम भारतीय धर्म-संस्कृति के अनिवार्य और अपरिहार्य अंग हैं!इसीलिए ईश्वर के विभिन्न नामों में साधना की दृष्टि से रामनाम का महत्त्व सर्वोपरि है। आज के पंकिल कुहासे को नष्ट करने के लिए श्रीराम जैसे चन्दन चर्चित चरित्र में अवगाहन की महती आवश्यकता मानवता को है। वह श्रीराम, जो समस्त भारतीय साधना और ज्ञान-परम्परा के वागद्वार हैं, जिनका दृढ़चरित्र लोक-मर्यादा के कठोर अंकुश से अनुशासित है और जो जन-जन के मन को ‘रस विशेष’ से आप्लावित कर सकता है। इस पुस्तक के लेखक डॉ. जयराम मिश्र राम-साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान ही नहीं, राम-स्वरूप के ज्ञाता और उसमें रमे हुए सन्त हैं। हमें विश्वास है कि यह ग्रन्थ वाल्मीकि और तुलसी की रामकथा-परम्परा की एक कड़ी बनेगा।
Jeete Jee Allahabad
- Author Name:
Mamta Kaliya
- Book Type:

- Description: जीते जी इलाहाबाद सिर्फ संस्मरणात्मक कृति नहीं है, एक यात्रा है जिसमें हमें अनेक उन लोगों के शब्दचित्र मिलते हैं जिनके बिना आधुनिक हिंदी साहित्य का इतिहास नहीं लिखा जा सकता और जो उस समय के इलाहाबाद के मन-प्राण होते थे।
Pratibimban : Vyakti, Vichar aur Samaj
- Author Name:
Ramsharan Joshi
- Book Type:

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Description:
रामशरण जोशी का लेखन-संसार एक आयामी नहीं, विविध आयामी है। मूलतः पत्रकार होने के बावजूद लेखक जोशी ने अपनी चिन्तन व लेखन-परिधि को निरन्तर विस्तार दिया है। वे पत्रकार होने के साथ-साथ समाजविज्ञानी, सक्रिय समाजकर्मी, मीडिया शिक्षक और सतत हस्तक्षेपधर्मी हैं। सातवें दशक में आदिवासियों, बन्धक श्रमिकों जैसी उत्पीड़ित व उपेक्षित मानवता पर उनका ज़मीनी लेखन हिन्दी जगत में चर्चित रहा है। रीचा ज़िले की ‘लँगड़े गाँव की कहानी’ जैसे उनके अध्ययन की गूँज संसद तक पहुँची। 2009 में प्रकाशित उनकी पुस्तक ‘अर्जुन सिंह : एक सहयात्री इतिहास का’ राष्ट्रीय स्तर पर विख्यात हो चुकी है।
रामशरण जोशी एक प्रतिबद्ध लेखक हैं। वामपन्थी होने के बावजूद उन्होंने ‘व्यक्ति, विचार और समाज’ को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखा है। प्रस्तुत पुस्तक में उनकी बहुरंगी दृष्टि एवं सरोकारों की छटा उद्घाटित हुई है। जहाँ इसमें बॉलीवुड का अभिनेता है, वहीं समाजशास्त्री, लेखक, पत्रकार, प्रशासक जैसे पात्र भी हैं। इन हैसियतमन्दों के बीच एक अकिंचित्, अजाना पात्र भी मौजूद है—‘छीतर खाँ’। इस पात्र के माध्यम से लेखक ने अल्पसंख्यक वर्ग और भारतीय राज्य के आपसी रिश्तों की सर्जनात्मक रूप में पड़ताल की है। पुस्तक में सम्मिलित विमर्शमूलक समीक्षाओं में प्रसिद्ध समाजशास्त्री
डॉ. पी.सी. जोशी, अंग्रेज़ी के विख्यात पत्रकार शामलाल, मानवशास्त्री व प्रशासक डॉ. कुमार सुरेश सिंह जैसे व्यक्तित्वों के लेखन की थाह भी ली गई है। ‘अपने-अपने नंदीग्राम’, ‘बूधन की मुक्ति का सवाल’, ‘हरसूद की डूब’ जैसे लेखों में विकास की विसंगतियों से साक्षात्कार कराया है।लेखक जोशी ने राजेन्द्र यादव, मनोहर श्याम जोशी, डॉ. श्यामाचरण दुबे, पंकज बिष्ट, इब्बार रब्बी, अरुण प्रकाश, सुदीप बनर्जी जैसे रचनाकारों के साथ अपने सम्बन्धों को आत्मीय लेखन के साथ याद किया है। इस संग्रह में लेखक की 1960 से इस सदी के पहले दशक तक की अनुभव-राशि छितरी हुई है।
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