Sakshatkaron Ke Aaine Me
(0)
Author:
Dr. Renu YadavPublisher:
Shivna PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
250
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Available
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Book Details
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ISBN9788194426646
-
Pages120
-
Avg Reading Time4 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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घर के झरोखे से बैठे-बैठे देखते रहिए, जाने कितने दृश्य आँखों के आगे चलचित्र की तरह गुज़रते जाते हैं, तरह-तरह के लोग, तरह-तरह की घटनाएँ। शिवानी जी के इस ‘वातायन’ से भी बहुत विस्तृत और रंग-बिरंगे दृश्य-पट दिखाई देते हैं। बिना पैसा-कौड़ी लिए हड्डी बिठानेवाला, चमचमाती मोटरों पर पोश होटलों में महँगे डिनर खाते लोग, और बाहर एक-एक दाने को तरसते भिखारी। न जाने कितनी पुरानी यादें, कितने कड़वे-तीते अनुभव, जो हमें रोज़ होते हैं, और इनके पीछे हैं लेखिका की गहरी संवेदना और अप्रतिम वर्णन शैली।
ऊँचे अधिकारी अपने इन्द्रासन से हटते ही किस प्रकार नगण्य हो जाते हैं, छोटे-छोटे दफ़्तरों के छोटे-छोटे अधिकारियों के हाथों किस प्रकार प्रताड़ना सहते हैं, मृत पति की पेंशन लेने किस प्रकार एक महिला को क़दम-क़दम पर हृदयहीन लालफ़ीताशाही का सामना करना पड़ता है, ये सब अनुभव मार्मिकता के साथ शिवानी के ‘वातायन’ में मिलते हैं। इनको निबन्ध की संज्ञा देने से इनका ठीक परिचय नहीं मिलता। ये झाँकियाँ हैं—केवल बाहरी नहीं, अन्तर की भी। लखनऊ के दैनिक ‘स्वतंत्र भारत’ में प्रति सप्ताह ‘वातायन’ को पढ़ने के लिए लोग कितने लालायित रहते हैं, इनको पढ़ने के बाद कितने फ़ोन और पत्र आते हैं लेखिका और सम्पादक दोनों के पास, यह इनकी लोकप्रियता का प्रमाण है।
शिवानी की प्रतिभा का यह नया आयाम है। इनमें गहरी पकड़ है जो उनकी कहानियों व उपन्यासों में मिलती है। साथ ही इनमें लेखिका के प्राचीन संस्कृत साहित्य के ज्ञान और सुसंस्कृत व्यक्तित्व का भी पुट है। इनसे हिन्दी पत्रकारिता में स्तम्भ-लेखन का स्तर ऊँचा हुआ है। अंग्रेज़ी में चार्ल्स डिकेंस, मार्क ट्वेन, रडयार्ड किपलिंग, चेस्टर्टन आदि के उत्कृष्ट निबन्ध और कथाएँ समाचार-पत्रों के माध्यम से ही पहली बार प्रस्तुत हुई थीं। हिन्दी की पत्र-पत्रिकाएँ विविध और विशाल पाठक वर्ग तक पहुँचती हैं और लेखक को नियमित और रेडीमेड श्रोता-मंडल देती हैं, परन्तु पत्र-पत्रिकाएँ एक बार पढ़कर फेंक दी जाती हैं, जबकि पुस्तकें साथ रहती हैं। ‘वातायन’ में शिवानी ने साहित्य-निधि दी है।
—अशोक जी
Aur Babasaheb Ambedkar Ne Kaha : Vols. 1-6
- Author Name:
DR. B.R. Ambedkar
- Book Type:

- Description: वह अम्बेडकर ही थे जिनके सिद्धान्तों ने दलित वर्ग को नई चेतना प्रदान की। और बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा...उन्हीं के 1920 से लेकर 1956 तक के लेखों, अभिलेखों और अभिभाषणों का संकलन है। पाँच खंडों में विभाजित इस रचनावली में डॉ. अम्बेडकर की उसी सामग्री को लिया गया है जो अभी तक केवल मराठी में उपलब्ध थी। हमें खुशी है कि हम इस सामग्री को पहली बार सीधे हिन्दी में उपलब्ध करा रहे हैं। पहले खंड में बाबासाहेब के 1920 से 1928 तक के लेख व अभिभाषण प्रस्तुत हैं। अपने भाषणों में डॉ. अम्बेडकर ने जहाँ ब्राह्मणवाद पर कड़ा प्रहार किया, वहीं उन्होंने दलितों को भी नया दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। प्रथम खंड में प्रस्तुत सामग्री बताती है कि किस तरह से हजारों सालों से दलितों पर हो रही जुल्म-ज्यादतियों के खिलाफ लडऩे के लिए बाबासाहेब ने दलित वर्ग को मानसिक रूप से सुदृढ़ किया और उन्हें उनके उद्धार का रास्ता भी दिखाया। इसमें कोई सन्देह नहीं कि यह खंड दलित वर्ग ही नहीं बल्कि सामाजिक क्रान्ति में विश्वास रखनेवाले सभी महानुभावों की जिज्ञासाओं को तुष्ट करेगा।
Satrein Aur Satrein
- Author Name:
Anita Rakesh
- Book Type:

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Description:
यह पुस्तक कथाकार मोहन राकेश के बारे में है जिसे लिखा है—अनीता राकेश ने। यह अनीता जी के अपने बारे में भी है; राकेश जी से उनके रिश्ते के बारे में भी। और इसकी विशेषता है, एक ऐसी क़लम से लिखा जाना जिसने लिखा बहुत कम, और जिया बहुत ज़्यादा। यही वजह है कि आप इसे एक ही बैठक में पढ़ने को बाध्य हो जाते हैं।
मोहन राकेश का अपना जीवन अनेक विडम्बनाओं, दु:खों और परेशानियों में बीता, उनका वैवाहिक जीवन कभी उस तरह सन्तोषजनक नहीं रहा, जैसे सामान्यत: लोगों का होता है। अनीता जी ने जब उनके जीवन में क़दम रखा, तब वे उनसे बहुत छोटी थीं, बहुत लम्बे समय उनके साथ रह भी नहीं पाईं। इससे पहले कि उनके रिश्ते एक स्थिर जीवन में बदलते, राकेश दुनिया छोड़ गए।
इस किताब में उन पेचीदगियों का वर्णन है जिससे कुछ समय के साथ के दौरान, ख़ासकर अनीता जी गुज़रीं, और राकेश भी। इसके बाद उस समय की कथा है जब वे अचानक अकेली रह गईं। एक तरफ़ भावनात्मक अकेलापन और दूसरी तरफ़ जीवन की व्यावहारिक चुनौतियाँ। इस किताब के पन्नों पर इस सबको बिना किसी आलंकारिकता के प्रस्तुत कर दिया गया है।
यह इस संस्मरण शृंखला की दूसरी पुस्तक है। इसमें हम मोहन राकेश के बारे में जितना जान पाते हैं, उतनी ही उस दौर के साहित्यिक माहौल के बारे में भी, और उतना ही मनुष्य जीवन की विकट सच्चाइयों के बारे में भी।
Aatmakatha : Dr. Karan Singh
- Author Name:
Karan Singh
- Book Type:

- Description: डॉ. कर्ण सिंह को आधुनिक भारत के चिन्तकों और राजनयिकों में एक महत्त्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। मूलत: अंग्रेज़ी में प्रकाशित यह पुस्तक पहले दो खंडों में थी। बाद में इसे एक ही जिल्द में समेटा गया जिसमें ख़ास तौर से इसी संस्करण के लिए लिखी गई एक महत्त्वपूर्ण प्रस्तावना भी शामिल थी। यह इसी का हिन्दी संस्करण है। डॉ. कर्ण सिंह की यह ‘आत्मकथा’ भारतीय इतिहास के एक महत्त्वपूर्ण दौर का लेखा–जोखा प्रस्तुत करती है जिसमें भारत की स्वतंत्रता–प्राप्ति की घटना के अलावा जम्मू–कश्मीर की राजनीति, चीन और पाकिस्तान के साथ विवाद और पं. जवाहरलाल नेहरू व लालबहादुर शास्त्री के प्रधानमंत्रित्व काल की घटनाएँ शामिल हैं। इस बाह्य घटना–चक्र के अलावा इस पुस्तक में आप डॉ. कर्ण सिंह की पारिवारिक पृष्ठभूमि और उनकी आध्यात्मिक जिज्ञासाओं, आन्तरिक विकास–क्रम और जीवन के आधारभूत सत्यों की खोज का ब्यौरा भी पाएँगे ।
The Life and Times of Sri Aurobindo Ghosh
- Author Name:
Kaushal Kishore
- Book Type:

- Description: Aurobindo's ideology and principles embody divinity, ethics, spontaneity and knowledge. He was an accomplished teacher, a profound scholar, a writer and a spiritual Guru. For him, nationalism was a holy offering to the motherland when viewed from the divine perspective. Aurobindo also played a very prominent role as a revolutionary. His contribution to politics cannot be ignored. Although his writings are philosophical, they also provide valuable social and cultural analysis. He was the one who suggested that "Poorna Swaraj" should be the main aim behind the revolutionary movement against the British. Nationalists were inspired to seize power from foreign masters. Aurobindo was an eminent educationist also. He greatly valued the inherent qualities and talents in each child. He felt that the role of education should be to nurture and enhance these God-given qualities. This book throws light on Sri Aurobindo Ghosh's Life. This is a biographical sketch for readers.
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