Sakshatkaron Ke Aaine Me
Author:
Dr. Renu YadavPublisher:
Shivna PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
Book
ISBN: 9788194426646
Pages: 120
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: SD, or Sachin Dev Burman, is arguably the most mysterious figure in Indian film history, credited with shaping the grammar of Hindi film music. As a young heir of the Tripura royal family, he ventured into cinema and popular music amidst challenging times. His unconventional career choices and marriage to a 'commoner' led to family ostracism, and despite formal training, he faced rejection. This detailed biography honors his artistry and investigates what made his music exceptional. It goes beyond listing hits, revealing little-known stories behind classics like 'Mera sundar sapna beet gaya' (Do Bhai, 1948), 'Thandi hawaein' (Naujawan, 1951), and others. The book offers insights into SD's life, work, and understanding of Hindi cinema. Though he was an outsider with limited Hindi and Urdu, he introduced Sahir Ludhianvi to the world and recognized Kishore Kumar's talent. His adaptability to modern sounds, belief in Lata Mangeshkar's virtuosity, close ties with Dev Anand, and controversies over nepotism and plagiarism highlight his complex persona. S.D. Burman: The Prince-Musician provides unique insights into one of India's greatest composers and a vital chapter in cinematic history, making it essential for every film music enthusiast.
Asahmati Mein Utha Ek Hath : Raghuvir Sahay Ki Jeewani
- Author Name:
Vishnu Nagar
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- Description: रघुवीर सहाय का जीवन-भर का काम प्रभूत और बहुमुखी है, जैसा कि इस जीवनी से एक बार और स्पष्ट होगा। इतना बहुमुखी और इतना मौलिक है कि सब कुछ पर यहाँ लिखा भी नहीं जा सका लेकिन उनके सोच के दायरे में आनेवाली कुछ चीज़ों का संकेत और सार यहाँ है, जिन पर अभी तक दुर्भाग्य से हमारा ध्यान नहीं गया है। मेरे ख़याल से उन बातों को भी जीवनी का अंग बनाना चाहिए, जो किसी लेखक के यहाँ अलग से दिखाई देती हैं और साहसिक ढंग से दिखाई देती हैं। उनकी कविताओं-कहानियों का कोई मूल्यांकन यहाँ करने से यथासम्भव बचा गया है, क्योंकि मेरे मत में यह जीवनी का काम नहीं है और रघुवीर जी के मूल्यांकन की बहुत-सी अच्छी कोशिशें हुई भी हैं। यहाँ प्रयत्न यह है कि उन्होंने ख़ुद अपने काम के बारे में क्या कहा है, क्या बताया है, यह अधिकाधिक सामने लाया जाए। एक आपत्ति यह हो सकती है कि किताब रघुवीर जी के बारे में कुछ अधिक प्रशंसात्मक हो गई है। अगर यह सही है तो इसका 'दोष' कुछ हद तक रघुवीर जी के व्यक्तित्व में है, कुछ उनके बारे में अच्छी-अच्छी बातें करनेवालों में और अन्त में सबसे अधिक मेरा है। —विष्णु नागर (प्रस्तावना से)
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