Madam Curie
About the book
"पोलैंड के एक अति सामान्य परिवार में जनमी मैडम क्यूरी, दुनिया के श्रेष्ठतम वैज्ञानिकों में से एक अपने आप में विलक्षण प्रतिभा थीं— • फ्रांस की प्रथम डॉक्टरेट पानेवाली महिला • दुनिया के किसी भी भाग में भौतिकी में डॉक्टरेट पानेवाली प्रथम महिला • सोरबोन विश्वविद्यालय की पहली महिला प्रोफेसर • भौतिकी में नोबल पुरस्कार पानेवाली प्रथम महिला • दूसरा नोबल पुरस्कार पानेवाली प्रथम व्यक्तित्व। उपर्युक्त असाधारण प्रदर्शन करने-वाली मैरी क्यूरी को अत्यंत गरीबी, निरादर, अभावों का सामना करना पड़ा। खुले, खतरनाक व असुविधाजनक शेड में अपर्याप्त उपकरणों के उन्होंने दुनिया का विलक्षण तत्त्व ‘रेडियम’ खोज निकाला। अनुसंधान ही नहीं, सादगी, दान व सेवा में भी वे प्रथम रहीं। वे एक आदर्श पुत्री, आदर्श पत्नी, आदर्श पुत्रवधू, आदर्श माता, आदर्श सास बनीं। वे एक असाधारण शिक्षिका भी थीं। उन्होंने अनेक विद्वान् व वैज्ञानिक तैयार किए। हालाँकि उनके बाद आठ और महिलाओं को नोबल पुरस्कार मिला, पर मैडम की तुलना में अब भी कोई नहीं है। उन्होंने इस बात को भी प्रमाणित किया कि शांति-काल में वैज्ञानिक सारी दुनिया का होता है, पर युद्ध-काल में वह अपने देश का ही होता है। विश्वास है, मैडम क्यूरी के जीवन से प्रेरणा प्राप्त युवा पीढ़ी, विशेषत: युवतियाँ विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान आदि के क्षेत्र में अपूर्व योगदान करेंगी।
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About the Book
"पोलैंड के एक अति सामान्य परिवार में जनमी मैडम क्यूरी, दुनिया के श्रेष्ठतम वैज्ञानिकों में से एक अपने आप में विलक्षण प्रतिभा थीं—
• फ्रांस की प्रथम डॉक्टरेट पानेवाली महिला
• दुनिया के किसी भी भाग में भौतिकी में डॉक्टरेट पानेवाली प्रथम महिला
• सोरबोन विश्वविद्यालय की पहली महिला प्रोफेसर
• भौतिकी में नोबल पुरस्कार पानेवाली प्रथम महिला
• दूसरा नोबल पुरस्कार पानेवाली प्रथम व्यक्तित्व।
उपर्युक्त असाधारण प्रदर्शन करने-वाली मैरी क्यूरी को अत्यंत गरीबी, निरादर, अभावों का सामना करना पड़ा। खुले, खतरनाक व असुविधाजनक शेड में अपर्याप्त उपकरणों के उन्होंने दुनिया का विलक्षण तत्त्व ‘रेडियम’ खोज निकाला।
अनुसंधान ही नहीं, सादगी, दान व सेवा में भी वे प्रथम रहीं। वे एक आदर्श पुत्री, आदर्श पत्नी, आदर्श पुत्रवधू, आदर्श माता, आदर्श सास बनीं।
वे एक असाधारण शिक्षिका भी थीं। उन्होंने अनेक विद्वान् व वैज्ञानिक तैयार किए। हालाँकि उनके बाद आठ और महिलाओं को नोबल पुरस्कार मिला, पर मैडम की तुलना में अब भी कोई नहीं है। उन्होंने इस बात को भी प्रमाणित किया कि शांति-काल में वैज्ञानिक सारी दुनिया का होता है, पर युद्ध-काल में वह अपने देश का ही होता है।
विश्वास है, मैडम क्यूरी के जीवन से प्रेरणा प्राप्त युवा पीढ़ी, विशेषत: युवतियाँ विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान आदि के क्षेत्र में अपूर्व योगदान करेंगी।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Prabhat Prakashan
- Weight
- 400 grams
- ISBN-13
- 9789350483367
- Pages
- 240
- Reading time
- ~8 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 21.5 cm
- Language
- Hindi
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This is not a story of easy genius. Madam Curie chronicles the life of Marie Curie, born in Poland in 1867, who transformed herself from an impoverished tutor into the first woman to win a Nobel Prize—and the only person to win it in two different sciences. The biography details her years of struggle in Paris, working in freezing garrets while attending lectures at the Sorbonne, her groundbreaking research on radioactivity alongside Pierre Curie, and the relentless societal contempt she faced as a woman in science. It captures her lonely final years handling dangerous radium without protection, the bone disease that claimed her, and the intellectual fire that never dimmed. Written with unflinching honesty, this Hindi edition brings Indian readers face-to-face with a woman who redefined what determination and intellect could achieve against every material and social disadvantage.
यह किताब पढ़ने से मुझे कैसा अनुभव होगा?
यह किताब आपको संघर्ष की कठोर सच्चाई और असीम दृढ़ता का अनुभव कराएगी। मैरी क्यूरी की यात्रा भावुक नहीं, बल्कि तीव्र और यथार्थवादी है—गरीबी, अपमान, और वैज्ञानिक जोखिमों के बीच एक मानवीय इच्छाशक्ति का दस्तावेज। यह उन पाठकों के लिए है जो प्रेरणा की सतही कहानियों से परे, जीवन की जटिलताओं और बौद्धिक साहस को समझना चाहते हैं।
यह पुस्तक किसके लिए सबसे उपयुक्त है, और इसके पाठक से क्या अपेक्षा की जाती है?
- विज्ञान और इतिहास में रुचि रखने वाले पाठक जो महिलाओं के योगदान को समझना चाहते हैं
- युवा छात्र जो करियर में बाधाओं का सामना कर रहे हैं और वास्तविक रोल मॉडल खोज रहे हैं
- वे पाठक जो सामाजिक पूर्वाग्रहों के विरुद्ध संघर्ष की गहराई में जाना चाहते हैं
- जीवनी साहित्य के प्रति गंभीर दृष्टिकोण रखने वाले
भारतीय पाठकों के लिए इस पुस्तक की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक प्रासंगिकता क्या है?
आज भी भारत में विज्ञान क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और मान्यता सीमित है। मैरी क्यूरी की कहानी उन सामाजिक बाधाओं को उजागर करती है जो एक सदी बाद भी प्रासंगिक हैं—लैंगिक भेदभाव, आर्थिक संघर्ष, और बौद्धिक श्रम की उपेक्षा। यह भारतीय महिला वैज्ञानिकों और छात्राओं के लिए एक दर्पण है कि वैश्विक स्तर पर यह संघर्ष कैसे लड़ा गया।
इस विषय पर लेखक का दृष्टिकोण विशिष्ट किस प्रकार बनाता है?
यह जीवनी मैरी क्यूरी को आदर्शवादी नायिका के बजाय एक जटिल, दोषपूर्ण मानवीय व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है। उनके वैज्ञानिक कार्य के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत संघर्ष, विवादों, और स्वास्थ्य की कीमत को ईमानदारी से दर्शाया गया है। यह दृष्टिकोण पाठकों को प्रेरणा के साथ-साथ यथार्थ की समझ भी देता है।
यह पुस्तक समाप्त होने के बाद पाठक के पास क्या बचता है?
पाठक के पास एक गहरी समझ बचती है कि वास्तविक उपलब्धि कभी आसान या रोमांटिक नहीं होती। मैरी क्यूरी का जीवन यह सिखाता है कि बौद्धिक ईमानदारी और दृढ़ता सामाजिक अस्वीकृति और भौतिक कष्टों से भी बड़ी शक्ति है। यह पुस्तक स्त्री शिक्षा, वैज्ञानिक जिज्ञासा, और आत्मनिर्भरता के प्रति एक नई दृष्टि जगाती है।
