H.D. Devegowda
(0)
Author:
C. NagannaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
999
799.2 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
अगर कोई मन-वचन और कर्म से किसी महान और कठिनतम लक्ष्य को हासिल करने की ठान ले, तो संसार में कुछ भी असम्भव नहीं। संकल्प से सिद्धि तक के ऐसे ही सफर के महारथी हैं–हरदनहल्लि दोड्डेगौड़ा देवेगौड़ा, संसार के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री के रूप में कर्नाटक की पहली और दक्षिण भारत की दूसरी देन। उन्होंने घोर अनिश्चितता के दौर में भारत का राजनीतिक, प्रशासनिक, सामरिक और आर्थिक नेतृत्व सँभाला, जब भारत को संसार के सबसे भ्रष्ट राष्ट्रों में चतुर्थ स्थान पर माना गया था। देश की अन्तरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा निरन्तर घटती जा रही थी। आन्तरिक चुनौतियाँ, पड़ोसी राष्ट्रों की असहिष्णुता, अकारण द्वेष और देश की शान्ति तथा स्थिरता को खतरे में डालनेवाली साजिशें भी बहुत बढ़ चुकी थीं। अन्तरदेशीय स्तर पर सभी राज्यों की आवश्यकताओं के अनुरूप उनके विकास का काम इतना अधिक पिछड़ गया था कि कुछ राज्यों में पृथकतावादी विद्रोही कार्यवाहियाँ भी बहुत बढ़ गई थीं। उन परिस्थितियों में नाकाम होने की लगभग सुनिश्चित आशंका के कारण कोई भी राजनेता देश का प्रधानमंत्री बनने का जोखिम उठाने के लिए दावेदारी या प्रयास नहीं कर रहा था। देश की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के पास बहुमत का चमत्कारी आँकड़ा और दावेदारी का हौसला तक नहीं था। तब संयुक्त मोर्चा गठबन्धन के समस्त घटक दलों ने सर्वसम्मति से श्री देवेगौड़ा को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना। अत्यन्त सीमित समय, असीमित चुनौतियों तथा सरकार को गिराने के षड्यंत्रों के उस दौर में श्री देवेगौड़ा ने जिस चमत्कारी ढंग से, उपलब्धियाँ प्राप्त कीं और हर क्षेत्र में परिस्थितियों को सँभाला, इस पुस्तक में उसी लेखे-जोखे का रोचक और प्रामाणिक विवरण है।
Read moreAbout the Book
अगर कोई मन-वचन और कर्म से किसी महान और कठिनतम लक्ष्य को हासिल करने की ठान ले, तो संसार में कुछ भी असम्भव नहीं। संकल्प से सिद्धि तक के ऐसे ही सफर के महारथी हैं–हरदनहल्लि दोड्डेगौड़ा देवेगौड़ा, संसार के सबसे बड़े लोकतंत्र के प्रधानमंत्री के रूप में कर्नाटक की पहली और दक्षिण भारत की दूसरी देन।
उन्होंने घोर अनिश्चितता के दौर में भारत का राजनीतिक, प्रशासनिक, सामरिक और आर्थिक नेतृत्व सँभाला, जब भारत को संसार के सबसे भ्रष्ट राष्ट्रों में चतुर्थ स्थान पर माना गया था। देश की अन्तरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा निरन्तर घटती जा रही थी। आन्तरिक चुनौतियाँ, पड़ोसी राष्ट्रों की असहिष्णुता, अकारण द्वेष और देश की शान्ति तथा स्थिरता को खतरे में डालनेवाली साजिशें भी बहुत बढ़ चुकी थीं। अन्तरदेशीय स्तर पर सभी राज्यों की आवश्यकताओं के अनुरूप उनके विकास का काम इतना अधिक पिछड़ गया था कि कुछ राज्यों में पृथकतावादी विद्रोही कार्यवाहियाँ भी बहुत बढ़ गई थीं।
उन परिस्थितियों में नाकाम होने की लगभग सुनिश्चित आशंका के कारण कोई भी राजनेता देश का प्रधानमंत्री बनने का जोखिम उठाने के लिए दावेदारी या प्रयास नहीं कर रहा था। देश की दो प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के पास बहुमत का चमत्कारी आँकड़ा और दावेदारी का हौसला तक नहीं था। तब संयुक्त मोर्चा गठबन्धन के समस्त घटक दलों ने सर्वसम्मति से श्री देवेगौड़ा को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना।
अत्यन्त सीमित समय, असीमित चुनौतियों तथा सरकार को गिराने के षड्यंत्रों के उस दौर में श्री देवेगौड़ा ने जिस चमत्कारी ढंग से, उपलब्धियाँ प्राप्त कीं और हर क्षेत्र में परिस्थितियों को सँभाला, इस पुस्तक में उसी लेखे-जोखे का रोचक और प्रामाणिक विवरण है।
Book Details
-
ISBN9789390971749
-
Pages357
-
Avg Reading Time12 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Ghumakkad Swami
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: ‘घुमक्कड़ स्वामी’ बाबा हरिशरणानन्द का जीवन-वृत्त है जिसे राहुल सांकृत्यायन ने जीवनी के साथ-साथ यात्रा-वृत्तान्त का रूप देते हुए लिखा है। स्वामी हरिशरणानन्द का जन्म 1889 में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ जो कानपुर में व्यापार करता था। मात्र पन्द्रह वर्ष की उम्र में उन्होंने कुछ साधुओं के साथ गृह-त्याग कर दिया जो एक अथक, खोजी और जिज्ञासु यात्रा का आरम्भ था। योग-साधना से शुरू होकर उनका यह सफ़र स्वतंत्रता-आन्दोलन में भागीदारी से होते हुए आयुर्वेद में शोध तक चलता रहा, फिर 1941 में बावन वर्ष की आयु में वे गृहस्थ हुए। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी स्वामी हरिशरणानन्द ने हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों की यात्राएँ भी कीं। वे एक विज्ञान-प्रेमी और दृष्टिवान सन्त थे। रूढ़िवादी कर्मकांड और पंडों आदि के पाखंड को उजागर करते हुए उन्होंने ज्ञान के मार्ग का अवगाहन किया। इस प्रसिद्ध पुस्तक में राहुल जी उनकी जीवन-यात्रा को उस समय के नगरों, व्यवसायों, आध्यात्मिक परम्पराओं, साधु-सन्तों की जीवनचर्या, आश्रमों-मठों के वातावरण और आयुर्वेद की गहरी जानकारियाँ साझा करते हुए लिखते हैं। 19वीं-20वीं सदी का भारत इसमें अपने सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहलुओं के साथ साक्षात दिखता है।
Ajaatshatru Atalji
- Author Name:
Bharat Bhushan
- Book Type:

- Description: "• शांति के पक्षधर होने के बावजूद प्रधानमंत्री के रूप में अटलजी ने परमाणु परीक्षण कर पूरी दुनिया को अहम संदेश दिया था। • ठंड के मौसम में बस लेकर लाहौर पहुँचकर अटलजी ने भारत-पाक रिश्तों में एक नई ऊर्जा पैदा की थी। • आज भले ही अटलजी भौतिक रूप में हमारे मध्य न हों, लेकिन अपने ओजस्वी, तेजस्वी, यशस्वी विचारों के कारण वे सदैव हम भारतीयों के हृदय में रहेंगे। • अपने राजनीतिक विरोधियों को भी अपना बना लेने में अटलजी माहिर थे। सबको साथ लेकर चलने की अद्भुत कला उनमें थी। • अपने विचारों की वजह से अटलजी देश ही नहीं विदेशों में भी लोकप्रिय थे। • अटलजी अपनी बोलने की कला से गंभीर माहौल को भी खुशनुमा बना देते थे। • संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिंदी में दिए गए भाषण से अटलजी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग ही छवि बनी, जिसकी उनके राजनीतिक विरोधियों ने भी प्रशंसा की। अपनी मर्मस्पर्शी लेखनी, ओजस्वी वक्तृत्वकला, संवेदनशील कविता, राजनीतिक दृढ़ता, अप्रतिम राष्ट्रनिष्ठा और प्रेरणाप्रद पारस्परिकता केकारण ही अटलजी बने अजातशत्रु। "
James Watt
- Author Name:
Gopi Krishna Kunwar
- Book Type:

- Description: This Book Doesn't have a Description
Aseem
- Author Name:
Abhayanand
- Book Type:

- Description: हर अपराध का मूल कारण आमतौर पर आर्थिक होता है, यहाँ तक कि साम्प्रदायिक कहे जानेवाले दंगों का भी; और किसी भी अपराध का निदान केवल बल-प्रयोग से नहीं किया जा सकता, उसके लिए सामाजिक संरचना की पेचीदगियों को, सहानुभूति और न्याय को, अपना उद्देश्य मानकर समझना होगा, पुलिस तो यह कर सकती है। क़ानून की अपनी सीमाओं के बावजूद वह जनता के भीतर वह विश्वास पैदा कर सकती है जो उसके होने को सार्थक बनाए। पुलिस का काम सिर्फ़ उस सम्पत्ति की रक्षा करना नहीं है, जिसके बारे में किसी को यही मालूम नहीं कि उसे अर्जित कैसे किया गया है, उसका काम उन लोगों के साथ खड़े दिखना है जो व्यवस्था के शिकार हैं, असहाय हैं। बिहार कैडर (1977 बैच) के आई.पी.एस. अधिकारी रहे अभयानंद के ये विचार उन्हें एक पुलिस अधिकारी से कुछ ज़्यादा बनाते हैं। सैंतीस वर्षों के अपने सेवाकाल के दौरान पुलिस-प्रशासन और जनसाधारण के आपसी रिश्तों को पुनर्परिभाषित करते हुए उन्होंने कैसे अपनी प्रयोगधर्मिता से क़ानून-व्यवस्था को सुचारू रूप दिया, कैसे अपने अधीनस्थों को भी उनके कर्तव्य के प्रति सजग बनाया और कैसे समाज के अन्तिम व्यक्ति के भीतर भी भरोसा जगाने का प्रयत्न किया—‘असीम’ उसी की कहानी है। शिक्षा और भौतिकी के प्रति उनका नैसर्गिक झुकाव उन्हें हमेशा नये ढंग से सोचने की प्रेरणा देता रहा जिसका एक सुफल ‘सुपर-30’ जैसे विख्यात शैक्षिक प्रयोग के रूप में सामने आया। इसका भी विस्तृत वर्णन वे इस आत्मवृत्त में करते हैं। मौलिक ढंग से सोचने का साहस देने वाली एक प्रेरक आत्मकथा!
Guru Ghasidas
- Author Name:
Dr. Baldev +2
- Book Type:

- Description: जिस समय छत्तीसगढ़ की जनता भोंसलों के अत्याचार और अंग्रेज़ों की कुटिलता से जूझ रही थी, उसी समय गुरु घासीदास का जन्म एक मध्यवर्गीय किसान परिवार में हुआ था। वे भूख से मरने और बेगार करने के लिए अभिशापित थे, परन्तु उनमें सा हस, सद्बुद्धि और संघर्ष के लिए जन्मजात ज्ञान था। इसलिए बचपन में वे अपने साथियों को सत्य और अहिंसा की पहचान करा सके। गुरु घासीरास ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति को स्वयं या परिवार के किसी सदस्य के भौतिक सुख-सुविधाओं के लिए न लगाकर मानवता के कल्याण के लिए युग-युग से पीड़ित-शोषित जन के लिए लगाया। उन्हें रूढ़ियों से मुक्त किया। चोरी, हिंसा, मद्यपान, जिसमें यह समाज डूब चुका था, जैसी कुरीतियों को पाप बतलाकर जीवनमात्र के लिए दया और प्रेम की शिक्षा दी। सत्य, अहिंसा, समानता का पाठ पढ़ाकर उन्हें कृषि तथा गो-पालन के लिए उत्प्रेरित किया। इस प्रकार देखते हैं कि पं. सुन्दर लाल शर्मा, महात्मा गांधी और बाबा साहेब अम्बेडकर के पूर्व ही उन्होंने सतनाम पंथ की स्थापना कर अपने शिष्यों को स्वावलम्बन और स्वतंत्रता का पाठ सिखला दिया था। सतनाम पंथ एक विचारधारा है जिसका सीधा सम्बन्ध उपनिषदों के एकेश्वरवाद और भगवान् बुद्ध की करुणा से है। छत्तीसगढ़ में शोषित-पीड़ित मानवता के उद्धार के लिए गुरु घासीदास ने कठिन तपस्या की, सत् पुरुष का दर्शन किया और उन्हीं के आदेश पर अपने अनुयायियों को उनका दिव्य सन्देश दिया, जो प्राणिमात्र के लिए अत्यन्त कल्याणकारी है। यह पुस्तक गुरु घासीदास के जीवन और दर्शन का विस्तृत और प्रामाणिक परिचय देती है।
Nij Nainahin Dekhi
- Author Name:
Keshavchandra Verma
- Book Type:

-
Description:
केशवचन्द्र वर्मा का नाम इस कारण भी रेखांकित किया जाता है कि उन्होंने न केवल व्यंग्य-लेखन की हर विधा में सर्वप्रथम श्रेष्ठ उपलब्धियों वाली रचनाएँ कीं—चाहे हास्य व्यंग्य के उपन्यास हों, कहानियाँ हों, सम्पूर्ण नाटक और निबन्ध हों—परन्तु अन्य गम्भीर रचना के क्षेत्र में अपनी कविताओं और संगीत विषयक अनेक कृतियों को हिन्दी में पहली बार प्रस्तुत करने का श्रेय भी पाया है।
हिन्दी साहित्य के किताबी इतिहास से उसे मुक्त करके केशव जी ने जिस तरह अपनी पुस्तकों—‘ताकि सनद रहे’ और उसी क्रम में ‘निज नैनहिं देखी’ को अपने प्रामाणिक निजी साक्ष्य के रूप में प्रकाशित किया, वह निःसन्देह उन्हें इस क्षेत्र में भी सर्वश्रेष्ठ बनाती है। अपने समकालीनों में तो उनकी पहचान नितान्त विशिष्ट है ही—वे स्वयं अपनी रचना-प्रक्रिया को अपनी विविधता से चुनौती देते हैं। इसका साक्ष्य केशव जी का तमाम लेखन है।
Devi Ke DPT Banane Ki Kahani
- Author Name:
Pushpesh Pant
- Book Type:

-
Description:
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में देवी प्रसाद त्रिपाठी के रूप में छात्र सक्रियतावादी का अपना सफ`र शुरू करनेवाले डीपीटी ने जे.एन.यू छात्रसंघ के इतिहास में सबसे लम्बी अवधि तक अध्यक्ष-पद पर बने रहने का गौरव प्राप्त किया। उन्होंने 1973 में श्रीमती इन्दिरा गांधी द्वारा थोपे गए बदनाम आपातकाल के दौरान इस विश्वविद्यालय में एक गौरवपूर्ण प्रतिरोध-आन्दोलन का नेतृत्व किया। परिसर में आज भी उनकी एक नायक की छवि बनी हुई है। डीपीटी भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री राजीव गांधी के विश्वासपात्र और घनिष्ठ सहयोगी थे। मीडिया उनका उल्लेख मानव कम्प्यूटर के रूप में करता था। डीपीटी ने विदेशों में पचास से अधिक विश्वविद्यालयों में व्याख्यान दिए हैं और कुछ समय इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ाया भी।
राज्यसभा के सदस्य रहे डीपीटी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के महासचिव और प्रमुख प्रवक्ता रहे। वह विचार न्यास के संस्थापक और विचार प्रधान पत्रिका ‘थिंक इंडिया क्वार्टरली’ के मुख्य सम्पादक भी थे।
Gautam Adani: A Complete Biography
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description: Gautam Adani is an exceptional entrepreneur, full of determination and vision. From the modest beginnings, he became a global billionaire, showing us the true power of hard work. His diverse business success reflects his smart decision-making and inspires aspiring entrepreneurs everywhere. This book tells the inspiring story of Gautam Adani, a visionary business leader who has made a significant impact on the global corporate world. With remarkable business skills and unwavering determination, Adani built a diverse and successful business empire from humble beginnings. “No business is small or big, and there is no religion greater than the business”. Implementing this maxim in his life, Gautam Adani left the narrow streets behind and became the most famous businessman in India. This book will inspire aspiring entrepreneurs, showcasing the incredible power of determination and forward-thinking in achieving greatness in the business world.
Kalam's Family Tree: Ancestral Legacy of Dr. A.P.J. Abdul Kalam
- Author Name:
Dr. A. P. J. M. Nazema Maraikayar +1
- Book Type:

- Description: "This book is an intimate memoir written by A.P.J. Abdul Kalam’s niece, who is closely connected to him and the family. The book offers a rare glimpse into the family life and ancestral roots of India’s beloved “Missile Man.’ The book was originally written in Tamil and later translated in English and Hindi. It takes you to Dr. Kalam’s humble beginnings in Rameshwaram, Tamil Nadu, where the young Kalam’s curiosity and thirst of knowledge were nurtured within the embrace of a close-knit Muslim family. From the sacrifices of his parents to the wisdom imparted by his grandparents, the book celebrates the indelible impact of family on his journey to becoming the President of India. It emphasises on the cultural and religious roots that he inherited from different generations. It mainly reflects how historical events, wars, societal changes, economic conditions, etc., had an effect on his personality. The book is a tribute to the power of heritage, perseverance and the pursuit of knowledge values that resonated deeply within the Kalam lineage."
Awarn Mahila Constable Ki Diary
- Author Name:
Neerja Madhav
- Book Type:

-
Description:
उपन्यास के क्षेत्र में नीरजा माधव असाधारण सिद्धि-सम्पन्न लेखिका हैं। उनकी विचार-विदग्धता, भाव-प्रवणता, अनछुए विषयों का वैविध्य उन्हें अपने समय के अन्य रचनाकारों से अलग रेखांकित करता है। उनके एक-एक शब्द में एक संस्कृति, जीवन-शैली अथवा सुख-दु:ख की आकृति सिमटी होती है जिसे दृष्टि-ओझल करते ही कथा-सूत्र के छूट जाने का भय होता है। यहाँ पर वे उन लेखकों से बिलकुल भिन्न हैं जो एक ही दृश्य के लम्बे, उबाऊ और शब्दों के मकड़जाल में पाठकों को उलझाए रखने का व्यापार करते हैं। नीरजा माधव के उपन्यासों में अपने युग की व्यापक बेचैनी, वेदना और सार्थक प्रतिक्रिया की अभिव्यक्ति दिखलाई पड़ती है। दलित-विमर्श और स्त्री-विमर्श के प्रचलित मुहावरों से बिलकुल पृथक् वे अपना मुहावरा स्वयं गढ़ती हैं और इस प्रकार अपनी राह भी। कुछ क्षण के लिए शिराओं में झनझनाहट पैदा करनेवाला साहित्य देने के पक्ष में वे कभी नहीं रहीं। इस उपन्यास की भूमिका में भी वे लिखती हैं—‘साहित्य का लक्ष्य मनुष्य के भीतर प्रेम, संयम, समर्पण और त्याग की उदात्त भावनाओं को जाग्रत करना है। ऐसे में यदि साहित्यकार भी मनुष्य की आदिम प्रवृत्ति को ही उत्तेजित करने का व्यापार करने लगेगा तो यह सृजन तो नहीं ही हुआ।’
एक अनछुए विषय पर लिखा गया अप्रतिम और पठनीय उपन्यास है : ‘अवर्ण महिला कान्स्टेबल की डायरी’।
आस्था पर हमलों और धार्मिक संघर्षों का इतिहास प्राचीन होते हुए भी नित नए विकृत रूपों में समाज को प्रभावित कर रहा है। ऐसे ही एक प्राचीन धार्मिक स्थल की सुरक्षा में लगी अवर्ण महिला कान्स्टेबल अपनी कर्तव्यनिष्ठा का निर्वहन करते हुए आसपास के परिवेश को अपनी पैनी दृष्टि से देखती है और इतिहास तथा वर्तमान की अपनी व्याख्या करती है। नायिकाप्रधान यह उपन्यास अतीत की विसंगतियों के साथ वर्तमान में भी जड़ें जमाए अनेक कुंठाओं एवं आग्रहों के साथ दलित-विमर्श के कई अनछुए पक्षों को रेखांकित करता चलता है।
Potraj
- Author Name:
Parth Polke
- Book Type:

- Description: “मेरा बाप पोतराज था। पोतराज कमर में रंग-बिरंगे खंडों के चीथड़े तथा कपड़े पहनते हैं। पोतराज की उस पोशाक को आभरान कहते हैं। आभरान मुझे यहाँ की व्यवस्था द्वारा पोतराज को दिए हुए राजवस्त्र लगते हैं। हाँ, ऐसे राजवस्त्र जो ज़िन्दगी को चीथड़े-चीथड़े कर डालते हैं। आभरान पहनकर अपने बदन को कोड़ों से फटकारता हुआ मेरा बाप—आबा—हमारे लिए घर-घर भीख माँगता रहा। सारी ज़िन्दगी उसने पोतराज के रूप में खटते-घसीटते बिताई। आख़िर उसी में वह मरा। मरना सबको है; लेकिन यहाँ की व्यवस्था ने न जाने कितने लोगों को बिना सहमते-संकोचते, बड़े आराम से बलि चढ़ाया है। मेरे आबा उन्हीं में से एक हैं। पोतराज के जिस आभरान को उतारना आबा के लिए सम्भव नहीं हुआ, मैंने उसे उतारा। उसकी होली जलाते हुए भी मेरा मन भीतर ही भीतर आबा और बाई की यादों से बेचैन रहा। मैं उपेक्षा तथा ग़रीबी की लपटों की आँच सहनेवाले अनेकों में से एक हूँ। व्यवस्था द्वारा दी गई वेदना का साक्षी हूँ। भुक्तभोगी हूँ। ये वेदनाएँ मुझ जैसे अनेक की अनेक पीढ़ियों को चुभती रही हैं। मैं दु:खों और वेदनाओं को कुरेदते हुए जीना नहीं चाहता; लेकिन एक प्रश्न अवश्य पूछना चाहता हूँ कि यह सारा दु:ख-दर्द हमें ही क्यों भोगना पड़ता है।” ‘पोतराज’ में उपस्थित लेखक पार्थ पोलके के ये शब्द सहसा हृदय को विचलित कर देते हैं। मूल मराठी भाषा में लिखित चर्चित आत्मकथा का यह हिन्दी अनुवाद पाठकों को निश्चित रूप से एक नवीन सामाजिक दृष्टि प्रदान करेगा। सघन संवेदना, समानता के तीखे प्रश्न, अभाव के असमाप्त अरण्य और अदम्य जिजीविषा—ये तत्त्व इस रचना को महत्त्वपूर्ण बनाते हैं।
Pao Bhar Jeere Main Brahmbhoj
- Author Name:
Ashok Vajpeyi
- Book Type:

-
Description:
समकालीन संस्कृति और हिन्दी साहित्य के पिछले दशकों के दृश्य में जो कुछ व्यक्ति बेहद सक्रिय और उतने ही विवादास्पद रहे हैं, उनमें अशोक वाजपेयी निश्चय ही एक हैं। जहाँ उनके जीवट, साहस, बेबाकी और अदम्यता की व्यापक सराहना होती रही है वहीं उन्हें समाज-विरोधी, नीचट कलावादी, अभिजात, आत्मकेन्द्रित आदि भी कहा जाता रहा है। अशोक वाजपेयी की कविता आज लिखी जा रही अधिकांश कविता का प्रतिपक्ष है, अपनी ज़िद पर अड़ी कविता। उनकी आलोचना का वितान बहुत व्यापक है : वे कविता, विश्व कविता, साहित्य-चिन्तन से लेकर शास्त्रीय और समकालीन कलाओं का साधिकार विश्लेषण और आकलन करने में समर्थ रहे हैं। युवा प्रतिभा का, फिर वह शास्त्रीय संगीत या नृत्य हो, ललित कलाएँ हों या रंगमंच या लोककलाएँ, अशोक वाजपेयी जैसा उन्नायक बिरला ही होगा लेकिन उन पर हिन्दी की युवतम प्रतिभा को दुर्लक्ष्य करने का आरोप लगता रहता है। अपने समय की सभी प्रमुख बहसों में उनकी हिस्सेदारी रही है और वे इस समय हिन्दी के सबसे प्रखर और विचारोत्तेजक वक्ता माने जाते हैं। उन पर कभी भी कटूक्ति करने से न चूकने का इल्ज़ाम लगता रहता है। हमेशा हँसमुख, मददगार अशोक वाजपेयी अपने गुट के अथक समर्थक माने जाते हैं। बेहद यारबाश होने के बावजूद अशोक वाजपेयी के व्यक्तित्व का दूसरा पक्ष यह है कि वे ऐकान्तिक अवसाद से घिरे रहते हैं। पिछली अधसदी में हिन्दी अंचल में सबसे अधिक संस्कृति सम्बन्धी संस्थाओं के निर्माता और उनमें से अनेक के सफल संचालक अशोक वाजपेयी को सांस्कृतिक ज़ार कहा जाता रहा है।
यह पुस्तक अशोक वाजपेयी के अन्तरंग का आत्मीय, सटीक और मुखर दस्तावेज़ है। इसके गद्य में उनकी कविता की गरमाहट और आलोचना की तीक्ष्णता का ऐसा संयोग है जो उन्हें हमारे समय का समर्थ और साक्षी गद्यकार भी सिद्ध करता है।
Ullas Ki Naav : Usha Uthup
- Author Name:
Vikas Kumar Jha
- Book Type:

- Description: ‘आइ बिलीव इन म्यूजि़क’, ‘आइ बिलीव इन लव’—हमेशा इन दो संगीतमय वाक्यों से अपने शो की शुरुआत करनेवाली भारतीय पॉप संगीत की महारानी उषा उथुप ‘रम्भा हो’, ‘पाउरिंग रेन’, ‘मटिल्डा’, ‘कोई यहाँ नाचे-नाचे’ और ‘दोस्तों से प्यार किया’ सरीखे झूम-धूम-भरे बेशुमार गानों के संग लोगों के अन्तर्मन के धुँधले क्षितिज को हज़ार वाट की अपनी हँसी से सदैव जगमग करती आई हैं। वे देश-दुनिया की बाईस भाषाओं में गाती हैं। पर दुनिया-भर में फैले उनके प्रशंसकों को इस बात का कहीं से भी इल्म नहीं कि ‘उल्लास की नाव’ बनकर निरन्तर जीवन-जय की पताका लहरा रही उषा अपने आन्तरिक संसार में किस दु:ख, शोक और प्रहार की तीव्र लहरों के धक्कों से जूझती रही हैं। दरअसल, पाँच दशकों से भी अधिक के अपने सुदीर्घ करिअर में उषा उथुप ने अपने बारे में कम, अपने संगीत के बारे में ज़्यादा बातें कीं। मुम्बई में जन्मीं और पली-बढ़ीं, तमिल परिवार की उषा उथुप के पति केरल के हैं और उषा की कर्मभूमि कोलकाता है। इस लिहाज़ से वे एक समुद्र-स्त्री हैं, क्योंकि उनके जीवन से जुड़े सभी नगर-महानगर समुद्र तट पर हैं। इसलिए उनका संगीत समुद्र का संगीत है। एक ज़माना था जब पॉप संगीत को भारत में बहुत हल्के व फोहश रूप में लिया जाता था। पर उषा उथुप ने पॉप संगीत को हिन्दुस्तान में न सिर्फ़ ज़मीन दी, बल्कि सम्पूर्ण वैभव भी दिया। उषा ने पॉप संगीत से लेकर जिंगल, गॉस्पेल और बच्चों के लिए भी भरपूर गाया है। मदर टेरेसा उनसे हमेशा कहती थीं—‘तुम्हारा स्वर हमेशा मेरी प्रार्थना में शामिल रहता है, उषा!’ श्रीमती इन्दिरा गांधी ने उन्हें जब भी सुना, तो कहा—‘उषा! यू आर फैब्यलस! शानदार-जानदार हो तुम।‘ यह उषा उथुप ही हैं, जिन्होंने भारतीय स्त्री के परिधान के संग-संग अपनी चूड़ी-बिंदी से पूरित सज्जा को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया। सत्तर पार की उषा की आवाज़ में शाश्वत वसन्त है।
Kaddaver Ki Dastan
- Author Name:
pandit Sunder Lal
- Book Type:

- Description: क्रान्तिकारी से गांधी मार्ग के अनुयायी बने पं. सुन्दरलाल के भीतर वह आग आजीवन विद्यमान रही जिसे उन्होंने अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन में अग्निपथ पर चलते हुए अर्जित किया था। ‘भारत में अंग्रेज़ी राज’ जैसे गौरव-ग्रन्थ के लेखक के रूप में देश-भर में ख्याति पानेवाले सुन्दरलाल की इस कृति की ब्रिटिश हुकूमत द्वारा की गई ज़ब्ती के रोमांचक घटनाक्रम ने ही तब न जाने कितने नौजवानों को क्रान्तिमार्ग का अनुगामी बना दिया था। उन्हें गांधी से लेकर मोतीलाल नेहरू, गोपाल कृष्ण गोखले, लोकमान्य तिलक, महर्षि अरविन्द. लाला लाजपतराय, महामना मदनमोहन मालवीय, गणेशशंकर विद्यार्थी, रासबिहारी बोस, जवाहरलाल नेहरू. पुरुषोत्तम दास टंडन, राजा महेन्द्र प्रताप, पं. बालकृष्ण भट्ट, मंज़र अली सोख़्ता. महात्मा नन्दगोपाल, अबुल कलाम आज़ाद, पं. बनारसीदास चतुर्वेदी सहित न जाने कितने देशभक्तों और समाज-सेवियों के साथ मुक्ति-युद्ध में सघन हिस्सेदारी करने का अवसर प्राप्त हुआ। पंडित सुन्दरलाल ने साम्प्रदायिक सद्भाव के लिए अथक संघर्ष किया। वे भारतचीन मैत्री के लिए भी अपने ढंग से आजीवन कर्मशील बने रहे। यही कारण था कि 1951 में चीन जानेवाले सद्भावना मिशन का उन्हें अगुआ बनाया गया। विश्व शान्ति मिशन के लिए तो वे दुनिया-भर की खाक छानते घूमे। पंडित सुन्दरलाल की इस सार्थक जीवन-यात्रा और साथ ही उनके क्रान्तिकारी विचार-अभियान को समग्रता में जानने-समझने के लिए उनके आत्मवृत्त के साथ ही पंडित जी की कुछेक संस्मृतियों और निबन्धों को इस पुस्तक में पिरोने का ज़रूरी दायित्व क्रान्तिकारी आन्दोलन के सुप्रसिद्ध इतिहास लेखक सुधीर विद्यार्थी ने अनेक वर्षों की खोजबीन से सम्पन्न किया है। ‘क़द्दावर की दास्तान’ पंडित सुन्दरलाल की जीवनगाथा के साथ ही उनके मिशन का भी समग्र और प्रामाणिक लेखा-जोखा है।
UP FROM SLAVERY
- Author Name:
Booker T. Washington
- Book Type:

- Description: "Up from Slavery is the 1901 autobiography of American educator Booker T. Washington (1856-1915). The book describes his experience of working to rise up from being enslaved as a child during the Civil War, the obstacles he overcame to get an education at the new Hampton Institute, and his work establishing vocational schools like the Tuskegee Institute in Alabama to help black people and other persecuted people of colour learn useful, marketable skills and work to pull themselves, as a race, up by the bootstraps. He reflects on the generosity of teachers and philanthropists who helped educate black and Native Americans. He describes his efforts to instill manners, breeding, health, and dignity in students."
Sifar Se Shikhar Tak
- Author Name:
A. P. Mishra
- Book Type:

- Description: अपने चेहरे पर अवध के देहातों की मासूमियत और होंठों पर हर वक़्त एक मेहमाननवाज मुस्कुराहट लिये, आँखों में हमेशा इन्तज़ार के चिराग़ जलाए, दोस्तों के क़दमों पर कान लगाए और कविता तथा शायरी को सीने से लगाए हुए शख़्स का नाम है ए.पी. मिश्र। 'सिफ़र से शिखर तक’ एक ऐसे शख़्स की कहानी है जो अपनी तहज़ीबी विरासत, संस्कारों और जद्दोजहद के बल पर अब एक शख़्सियत बन चुका है। गाँव की धूप-छाँव ने उनके चेहरे की शरीफ़ाना मासूमियत को बरकरार रखा है। ब्यूटीपार्लर कितनी ही तरक़्क़ी क्यों न कर जाए, लेकिन गाँव का अल्हड़पन और सादा-मिज़ाजी उसका मुक़द्दर नहीं बन सकती। महात्मा-मिज़ाज शायर अंगद जी महाराज की क़ुरबत और सोहबत ने उन्हें उस मासूम बच्चे जैसा बना दिया, जो कभी कुंभ के मेले में खो जाता है और कभी महाकुंभ में मिल जाता है। लेकिन उस बच्चे के हाथ में खिलौने नहीं होते, उसके हाथों में होती है मीर, कबीर, तुलसी और ग़ालिब की अमानत। अपनी बेपनाह मसरूफ़ियतों के बावजूद ताज़ादम रहना, पराए ग़मों की चादर ओढ़े हुए मुस्कुराते रहना दुश्वार है, लेकिन ‘सिफ़र से शिखर तक’ के शिल्पकार का यही तो हुनर है कि वह जंगली फूलों से शहर को आबाद करना जानता है। अँधेरे से जंग करते हुए उसे कई दहाइयाँ गुज़र गई हैं, लेकिन आज तक न तो उसके हाथों में कँपकँपाहट है और न चेहरे पर थकान। यूँ तो कुछ लोग किताबें लिखते हैं और कुछ ख़ुद किताब होते हैं। उनके जीवन का हर दिन एक वरक़ होता है और हर बरस एक दास्तान। ऐसे ही लोगों को दुनिया सूफ़ी, सन्त और कलन्दर मान लेती है। ऐसे लोग दूसरों पर अहसान करके भी आँखें नीची रखते हैं। 'सिफ़र से शिखर तक’ एक सन्त-मिज़ाज की जीवनी है, लेकिन इस जीवनी के ढेर सारे पन्नों में ऐसे बहुत से चेहरे शामिल हैं, जो ए.पी. मिश्र को संजीवनी मान लेते हैं। काश, इसी क़तार में कहीं हम भी खड़े दिखाई दे जाएँ— तेरे अहसान की ईंटें लगी हैं इस इमारत में, हमारा घर तेरे घर से कभी ऊँचा नहीं होगा। —मुनव्वर राना
Kya Hain Kalam?
- Author Name:
R. Ramanathan
- Book Type:

- Description: "डॉ. कलाम क्या हैं, कौन हैं? वह सभी के प्रेम, सम्मान तथा प्रशंसा के पात्र क्यों हैं? वे कौन सी बातें हैं, जो उन्हें लोकप्रिय बनाती हैं? कौन सी विशेषताएँ उन्हें दूसरों से भिन्न बनाती हैं? यह पुस्तक इन प्रश्नों का सर्वथा सही, उचित और सार्थक उत्तर देने का प्रयास करती है । यह न तो पारंपरिक अर्थों में जीवनी है, न ही आलोचनात्मक विश्लेषण । यह पुस्तक सामान्य रूप से पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पीजे. अब्दुल कलाम के व्यक्तित्व को उनके साथ निकट रूप से काम कर चुके व्यक्ति की नजरों से देखने का प्रयास करती है । यह डॉ. कलाम के व्यक्तित्व तथा जीवन के अप्रकट पहलुओं पर प्रकाश डालती है और पाठक को उनके व्यक्तित्व के बारे में एक गहरी समझ विकसित करने में मदद करती है । इस पुस्तक के माध्यम से डॉ. कलाम का बहुपक्षीय दूरद्रष्टा व्यक्तित्व हमारे सामने आता है, जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी तथा राष्ट्र के विकास के अलावा संगीत, साहित्य एवं पर्यावरण में भी रुचि रखते हैं । उनके व्यक्तित्व की जो विशेषता सबसे अधिक प्रेरक है, वह है उनकी मानवीय संवेदना ।
Hindi Ke Paryaya Purushottam Das Tandon
- Author Name:
Sant Prasad Tandon +1
- Book Type:

- Description: ‘‘जो भी व्यक्ति टंडनजी के संपर्क में आए, सबने उनसे कुछ-न-कुछ सीखा। यह महापुरुषों की निशानी है, जो उनसे मिले, लेकर गए। हमने भी उनसे लिया, जिससे दिल और दिमाग की दौलत बढ़ी। वे ऐसे व्यक्ति हैं, जो अपने सिद्धांतों पर अटल स्तंभ की तरह डटे रहते हैं।’’ —जवाहरलाल नेहरू ‘‘उनका जीवन भारतीय संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है। वह अनेक प्रकार से राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक कामों में हमारा नेतृत्व करते आए है।’’ —गोविंदवल्लभ पंत ‘‘टंडनजी का व्यक्तित्व प्राचीन भारतीय संस्कृति की उस ओजस्विता का प्रतीक है, जिसने हर नए को अपनी अजस्र ज्ञान-धारा में समा लेने और उनके परस्पर समन्वय का प्रयास किया है।’’ —अनंतशयनम अय्यंगार ‘‘यह पुस्तक केवल एक महापुरुष की उल्लेखनीय जीवनी ही नहीं है, अपितु राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं भाषायी कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए ‘कर्मगीता’ भी है।’’ —गोपाल प्रसाद व्यास
Yug-Pravartak Dularelal Bhargava
- Author Name:
Dr. Pushpa Dwivedi
- Book Type:

-
Description:
ब्रिटिश काल में जब उर्दू बाहुल्य वातावरण था ऐसे में युगान्तकारी हिन्दी प्रकाशक के रूप में दुलारेलाल जी उभरकर सामने आये। उनका संपूर्ण जीवन हिन्दी साहित्य की अभिवृद्धि करने में व्यतीत हुआ। तत्कालीन हिन्दी की लब्धप्रतिष्ठ पत्रिकाएँ 'सुधा', 'माधुरी' आदि का सम्पादन इनके द्वारा किया गया। सम्पादन क्यों हो? किसका हो? इन सभी प्रश्नों के उत्तर उनकी पत्रिकाएँ स्वतः दे देती है। साहित्यिक गतिविधियों के अतिरिक्त सामाजिक, राजनैतिक संचेतना, आर्थिक स्थिति तथा मनोविज्ञान तक की सीमाओं को उन्होंने अपनी पत्रिकाओं द्वारा संस्पर्श किया। इससे यह स्पष्ट होता है कि भार्गव जी केवल साहित्यकार नहीं थे, न उनके प्रोत्साहक, वे बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। जीवन के हर कोने में उन्होंने झाँककर उसकी मर्म छवियाँ अपनी पत्रिकाओं में चित्रित कीं। चित्र से लेकर विचित्र तथ्यों की खोज और प्रकाशन उनके सम्पादन का लक्ष्य था।
पं. सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला जी ने स्पष्ट लिखा है कि श्री दुलारेलाल भार्गव जी ने हिन्दी की जो सेवा की है, उसका मूल्य निर्धारित करना मेरी शक्ति से बिलकुल बाहर है। "सुधा" और "माधुरी" में बराबर आप नवीन लेखकों को प्रोत्साहित करते रहे हैं, कितनी ही महिला- लेखिकाएँ तैयार कीं। यह क्रम हिन्दी की किसी भी पत्रिका में नहीं रहा। इस प्रोत्साहन-कार्य में भार्गव जी का स्थान सबसे पहले है।
Gay-Geka Ki Auratein
- Author Name:
Joram Yalam Nabam
- Book Type:

-
Description:
गाय-गेका की औरतें अरुणाचल प्रदेश के एक सुदूर ग्रामीण क्षेत्र के आदिवासी बाशिन्दों की संस्मृतियों की पुस्तक है। जोराम यालाम नाबाम ने इस पुस्तक में न्यीशी समुदाय के सामाजिक, पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन, उनके सामूहिक विश्वासों, धार्मिक-आध्यात्मिक मान्यताओं, रस्म-रिवाज, तीज-त्योहार तथा आर्थिक क्रिया-कलाप आदि का बहुत सूक्ष्मता से वर्णन किया है।
यहाँ यह उल्लेख करना अनुचित न होगा कि यालाम स्वयं न्यीशी समुदाय से आती हैं जो अरुणाचल प्रदेश के बहुसंख्यक तानी आदिवासी समाज के अन्तर्गत आनेवाले पाँच समुदायों—आदी, आपातानी, तागिन और गालो—में शामिल है। इन संस्मरणों में जो कुछ दर्ज किया गया है, वह निरे ‘आब्ज़र्वेशन’ का नहीं, बल्कि आत्मीय संलग्नता का भी प्रतिफल है।
पुस्तक का जोर न्यीशी समुदाय के रोजमर्रा के जीवन को रेखांकित करने पर है जिससे शेष भारतीय समाज किंचित अपरिचित अथवा बहुत कम परिचित है। ये संस्मरण कथात्मक अन्दाज में लिखे गए हैं, इसलिए सम्मिलित रूप से ये एक औपन्यासिक आस्वाद पैदा करते हैं। हालाँकि यह कोई उपन्यास नहीं है।
वैसे यह समाजशास्त्र या नृतत्वशास्त्र की पुस्तक भी नहीं है, लेकिन इसमें जो कुछ लिखा गया है वह विषय और विधा के प्रश्नों को पीछे छोड़ते हुए पाठक को एक ऐसे समुदाय के बीच ले जाता है जो निरन्तर गतिशील संस्कृति का वाहक तथा ‘विविधता में एकता’ के सूत्र से निर्मित भारतीयता का एक अपरिहार्य अवयव है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book