Bihar Ke Mere Pachchis Varsh
(0)
Author:
Kalpana SastriPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies₹
350
280 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
जिस कालखंड में देश का पढ़ा-लिखा वर्ग बिहार जाने से डर रहा था और बिहार का पढ़ा-लिखा वर्ग राज्य से बाहर नहीं तो, गाँवों को छोड़ शहरों में अपनी जगह बनाने का जी-तोड़ प्रयास कर रहा था, उस वक़्त कल्पना महाराष्ट्र के सुव्यवस्थित माहौल को छोड़कर स्वेच्छा से बिहार आईं और वहाँ किसी शहर में नहीं बल्कि धुर गाँवों में काम कर रही हैं।</p> <p>बिहार में काम करने के माध्यम के रूप में इन्होंने एक संस्था बनाई और गाँव की मुसहर तथा दुसाध दलित महिलाओं के बीच काम शुरू किया। गांधीवादी विचार को माननेवाले समूहों के साथ चर्चा करने के लिए एक संगठन द्वारा इन्हें जर्मनी बुलाया गया। एक प्रसिद्ध शान्तिवादी संगठन आई.एफ़.ओ.आर. के स्वीडन सम्मेलन में शामिल हुईं और फिलाडेल्फ़िया के क्वेकर समूह द्वारा आयोजित लम्बे प्रशिक्षण कोर्स का भी अनुभव लिया। इन अनुभवों के साथ-साथ बिहार के गाँवों को भी देखना, समझना और वह भी अन्दर घुसकर सामाजिक कार्यों के माध्यम से—ख़ुद लेखिका के लिए भी—बहुत शिक्षाप्रद और रोमांचक रहा है।</p> <p>इस किताब में उन्होंने बिहार के गाँवों के झरोखों से जैसा देखा, वैसा लिखा है। अपने काम का ज़िक्र करते हुए वहाँ के समाज की आवश्यकताएँ बताई हैं, लोगों के स्वभाव बतलाए हैं और सम्बन्धों के पारिवारिक व सामाजिक ताने-बाने को खोलकर दिखाया है।</p> <p>आशा है, विषय की गहराई में जानेवाले लोगों को यह किताब अच्छी लगेगी।
Read moreAbout the Book
जिस कालखंड में देश का पढ़ा-लिखा वर्ग बिहार जाने से डर रहा था और बिहार का पढ़ा-लिखा वर्ग राज्य से बाहर नहीं तो, गाँवों को छोड़ शहरों में अपनी जगह बनाने का जी-तोड़ प्रयास कर रहा था, उस वक़्त कल्पना महाराष्ट्र के सुव्यवस्थित माहौल को छोड़कर स्वेच्छा से बिहार आईं और वहाँ किसी शहर में नहीं बल्कि धुर गाँवों में काम कर रही हैं।</p>
<p>बिहार में काम करने के माध्यम के रूप में इन्होंने एक संस्था बनाई और गाँव की मुसहर तथा दुसाध दलित महिलाओं के बीच काम शुरू किया। गांधीवादी विचार को माननेवाले समूहों के साथ चर्चा करने के लिए एक संगठन द्वारा इन्हें जर्मनी बुलाया गया। एक प्रसिद्ध शान्तिवादी संगठन आई.एफ़.ओ.आर. के स्वीडन सम्मेलन में शामिल हुईं और फिलाडेल्फ़िया के क्वेकर समूह द्वारा आयोजित लम्बे प्रशिक्षण कोर्स का भी अनुभव लिया। इन अनुभवों के साथ-साथ बिहार के गाँवों को भी देखना, समझना और वह भी अन्दर घुसकर सामाजिक कार्यों के माध्यम से—ख़ुद लेखिका के लिए भी—बहुत शिक्षाप्रद और रोमांचक रहा है।</p>
<p>इस किताब में उन्होंने बिहार के गाँवों के झरोखों से जैसा देखा, वैसा लिखा है। अपने काम का ज़िक्र करते हुए वहाँ के समाज की आवश्यकताएँ बताई हैं, लोगों के स्वभाव बतलाए हैं और सम्बन्धों के पारिवारिक व सामाजिक ताने-बाने को खोलकर दिखाया है।</p>
<p>आशा है, विषय की गहराई में जानेवाले लोगों को यह किताब अच्छी लगेगी।
Book Details
-
ISBN9788183610629
-
Pages127
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
The Dhoni Touch
- Author Name:
Bharat Sundaresan
- Book Type:

- Description: For over a decade, Mahendra Singh Dhoni has captivated the world of cricket and over a billion Indians with his incredible ingenuity as captain, wicketkeeper and batsman. Bharat Sundaresan tracks down the cricketer's closest friends in Ranchi and artfully presents the different shades of Dhoni-the Ranchi boy, the fauji, the diplomat, Chennai's beloved Thala, the wicketkeeping Pythagoras-and lays bare the man underneath. He discovers a certain je ne sais quoi about the man who has a magical ability to transform and elevate everything which comes into his orbit-the Dhoni Touch. Funny, candid, and peppered with delicious anecdotes, The Dhoni Touch reveals an ordinary man living an extraordinary life. 'Dhoni is adored, respected, loved wildly, and yet, remains mysterious. Don't we want to know more? I do. And this book by Bharat, a fine journalist, helps' HARSHA BHOGLE 'One of India's most stylish and inquisitive cricket writers unleashes an array of helicopter shots to produce the definitive origin story of a player and captain who changed the sport in his country' ALI MARTIN, GUARDIAN
M.K. Gandhi An Autobiography
- Author Name:
M.K. Gandhi
- Book Type:

- Description: Mohandas Karamchand Gandhi 2 October 1869 – 30 January 1948) was an Indian lawyer, anti-colonial nationalist, and political ethicist, who employed nonviolent resistance to lead the successful campaign for India's independence from British Rule, and in turn inspired movements for civil rights and freedom across the world. The honorific Mahātmā (Sanskrit: "great-souled", "venerable"), first applied to him in 1914 in South Africa, is now used throughout the world. Born and raised in a Hindu family in coastal Gujarat, western India, Gandhi trained in law at the Inner Temple, London, and was called to the bar at age 22 in June 1891. After two uncertain years in India, where he was unable to start a successful law practice, he moved to South Africa in 1893 to represent an Indian merchant in a lawsuit. He went on to stay for 21 years. It was in South Africa that Gandhi raised a family, and first employed nonviolent resistance in a campaign for civil rights. In 1915, aged 45, he returned to India. He set about organising peasants, farmers, and urban labourers to protest against excessive land-tax and discrimination. Assuming leadership of the Indian National Congress in 1921, Gandhi led nationwide campaigns for easing poverty, expanding women's rights, building religious and ethnic amity, ending untouchability, and above all for achieving Swaraj or self-rule. Gandhi's vision of an independent India based on religious pluralism was challenged in the early 1940s by a new Muslim nationalism which was demanding a separate Muslim homeland carved out of India. In August 1947, Britain granted independence, but the British Indian Empire was partitioned into two dominions, a Hindu-majority India and Muslim-majority Pakistan
Nij Nainahin Dekhi
- Author Name:
Keshavchandra Verma
- Book Type:

-
Description:
केशवचन्द्र वर्मा का नाम इस कारण भी रेखांकित किया जाता है कि उन्होंने न केवल व्यंग्य-लेखन की हर विधा में सर्वप्रथम श्रेष्ठ उपलब्धियों वाली रचनाएँ कीं—चाहे हास्य व्यंग्य के उपन्यास हों, कहानियाँ हों, सम्पूर्ण नाटक और निबन्ध हों—परन्तु अन्य गम्भीर रचना के क्षेत्र में अपनी कविताओं और संगीत विषयक अनेक कृतियों को हिन्दी में पहली बार प्रस्तुत करने का श्रेय भी पाया है।
हिन्दी साहित्य के किताबी इतिहास से उसे मुक्त करके केशव जी ने जिस तरह अपनी पुस्तकों—‘ताकि सनद रहे’ और उसी क्रम में ‘निज नैनहिं देखी’ को अपने प्रामाणिक निजी साक्ष्य के रूप में प्रकाशित किया, वह निःसन्देह उन्हें इस क्षेत्र में भी सर्वश्रेष्ठ बनाती है। अपने समकालीनों में तो उनकी पहचान नितान्त विशिष्ट है ही—वे स्वयं अपनी रचना-प्रक्रिया को अपनी विविधता से चुनौती देते हैं। इसका साक्ष्य केशव जी का तमाम लेखन है।
Martial Arts Champion Bruce Lee
- Author Name:
Abhishek Kumar
- Book Type:

- Description: विश्वविख्यात मार्शल आर्ट एक्सपर्ट ब्रूस ली का जीवन संघर्षों की चादर में लिपटा हुआ था। बचपन में उन्हें बार-बार बीमारी से लड़ना पड़ा। शरीर दुर्बल था और राह दिखानेवाला भी कोई नहीं था। बाद के जीवन में उन्हें युद्ध-कला में एक अनिश्चित एवं अस्थिर जीविका से जूझना पड़ा। इसी अनिश्चितता के कारण उसके मन में एक पेशेवर नर्तक बनने का विचार आया। यहाँ तक कि उन्होंने हांगकांग की चा-चा चैंपियनशिप भी जीत ली। लेकिन उनका मन तो कुंगफू में ही रमता था। जीवन भर उन्होंने कुंगफू का ही अभ्यास किया था और जिस शांति की खोज में वह लगे हुए थे। वह शांति उन्हें इससे ही प्राप्त हुई। अपने काम से उन्होंने दुनिया भर में युवा पीढ़ी को प्रेरित किया था और आज भी करते हैं। वे एक उत्तम अभिनेता थे और आज भी उनकी फिल्में बहुत शौक से देखी जाती हैं। पूरे विश्व में किशोरों के कमरों की दीवारें ली के पोस्टरों से सजी रहती हैं, जो उन्हें एक योद्धा, एक शिक्षक और एक अनुकरणीय व्यक्तित्व के रूप में देखते हैं। उनके जीवन के हर पहलू से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। उनमें शिक्षा है, बुद्धिमानी है और जीवन-दर्शन है। उनका जीवन कई मायनों में प्रेरणाप्रद और अनुकरणीय है।
Azim Premji Ki Biography
- Author Name:
A.K. Gandhi
- Book Type:

- Description: भारतीय व्यापार-जगत के एक चमकते सितारे अजीम प्रेमजी सफल व्यापारी, आई.टी. उद्योग के सिरमौर और निवेशक हैं, जिन्होंने अपने अद्भुत कर्तृत्व से सफलता का नया इतिहास लिखा है। भारत सरकार द्वारा ‘पद्म विभूषण’, ‘पदम भूषण’ तथा अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत अजीम प्रेमजी को ‘टाइम’ मैगजीन ने उन्हें दो बार 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में शामिल किया है। 1960 के दशक में जब विप्रो ने उपभोक्ता स्वास्थ्य उद्योग से हाई-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई पारी की शुरुआत की तो अजीम प्रेमजी ने उसे सफलता दिलाई। व्यापारिक सफलता पाकर उन्होंने भारत की सनातन परंपरा ‘लोकोपकार’ को पुष्ट किया। ‘गिविंग प्लेज’ पर साइन किया है। परोपकार के लिए जाना जाता है। प्रेमजी ने ‘अजीम प्रेमजी फाउंडेशन’ को 2.2 बिलियन अमरीकी डॉलर का दान दिया है। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने अद्वितीय काम किए हैं और एक ‘साक्षर भारत’ बनने की यात्रा में अपना अपूर्व योगदान किया है। उद्यमशीलता, नेतृत्व, कौशल, प्रशासनिक दक्षता, सहृदयता और परोपकार के प्रतीक अजीम प्रेमजी ने अपार धन-समृद्धि अर्जित की, पर मुक्त हाथों से उसे समाज को लौटाया भी। एक यशस्वी, लोककल्याणकारी व्यक्तित्व की यह प्रेरक जीवनगाथा समाज को मानवीयता और देने का महत्त्व बताएगी।
Mahatma Gandhi : Jeewan Aur Darshan
- Author Name:
Romain Rolland
- Rating:
- Book Type:

-
Description:
‘सत्याग्रह’ शब्द का आविष्कार गांधी जी ने तब किया था, जब वे अफ़्रीका में थे—उद्देश्य था अपनी कर्म-साधना के साथ निष्क्रिय-प्रतिरोध का भेद स्पष्ट करना। यूरोपवाले गांधी के आन्दोलन को ‘निष्क्रिय प्रतिरोध’ (अथवा अप्रतिरोध) के रूप में समझना चाहते हैं, जबकि इससे बड़ी ग़लती दूसरी नहीं हो सकती। निष्क्रियता के लिए इस अदम्य योद्धा के मन में जितनी घृणा है, उतनी संसार के किसी दूसरे व्यक्ति में नहीं होगी—ऐसे वीर ‘अप्रतिरोधी का दृष्टान्त संसार में सचमुच विरल है। उनके दोलन का सारतत्त्व है—‘सक्रिय प्रतिरोध’, जिसने अपने प्रेम, विश्वास और आत्मत्याग की तीन सम्मिलित शक्तियों के साथ ‘सत्याग्रह’ की संज्ञा धारण की है।
कायर मानो उनकी छाया भी नहीं छूना चाहता, उसे वे देश से बाहर निकालकर रहेंगे। आलसी और अकर्मण्य की अपेक्षा वह अच्छा है, जो हिंसा से प्रेरित है। गांधी जी कहते हैं—“यदि कायरता और हिंसा में से किसी एक को चुनना हो तो मैं हिंसा को ही पसन्द करूँगा। दूसरे को न मारकर स्वयं ही मरने का जो धीरतापूर्ण साहस है, मैं उसी की साधना करता हूँ। लेकिन जिसमें ऐसा साहस नहीं है, वह भी भागते हुए लज्जाजनक मृत्यु का वरण न करे—मैं तो कहूँगा, बल्कि वह मरने के साथ मारने की भी कोशिश करे; क्योंकि जो इस तरह भागता है, वह अपने मन पर अन्याय करता है। वह इसलिए भागता है कि मारते-मारते मरने का साहस उसमें नहीं है। एक समूची जाति के निस्तेज होने की अपेक्षा मैं हिंसा को हज़ार बार अच्छा समझूँगा। भारत स्वयं ही अपने अपमान का पंगु साक्षी बनकर बैठा रहे, इसके बदले अगर हाथों में हथियार उठा लेने को तैयार हो तो इसे मैं बहुत अधिक पसन्द करूँगा।”
बाद में गांधी जी ने इतना और जोड़ दिया— “मैं जानता हूँ कि हिंसा की अपेक्षा अहिंसा कई गुनी अच्छी है। यह भी जानता हूँ कि दंड की अपेक्षा क्षमा अधिक शक्तिशाली है। क्षमा सैनिक की शोभा है लेकिन क्षमा तभी सार्थक है, जब शक्ति होते हुए भी दंड नहीं दिया जाता। जो कमज़ोर है, उसकी क्षमा बेमानी है। मैं भारत को कमज़ोर नहीं मानता। तीस करोड़ भारतीय एक लाख अंग्रेज़ों के डर से हिम्मत न हारेंगे। इसके अलावा वास्तविक शक्ति शरीर-बल में नहीं होती, होती है अदम्य मन में। अन्याय के प्रति ‘भले आदमी’ की तरह आत्मसमर्पण का नाम अहिंसा नहीं है—अत्याचारी की प्रबल इच्छा के विरुद्ध अहिंसा केवल आत्मिक शक्ति से टिकती है। इसी तरह केवल एक मनुष्य के लिए भी समूचे साम्राज्य का विरोध करना और उसको गिराना सम्भव हो सकता है।”
Nindak Niyare Rakhiye
- Author Name:
Surendra Mohan Pathak
- Book Type:

-
Description:
लोकप्रिय फिक्शन के जादूगर कथाकार सुरेन्द्र मोहन पाठक की आत्मकथा के इस खंड में उनके जीवन के उस दौर का वर्णन है, जब वे पाठकों में व्यापक स्वीकृति और प्रसिद्धि पा चुके थे। यह उनका लेखकीय जीवन है जिसमें प्रकाशकों से उनके रिश्ते और प्रशंसकों-पाठकों की बातें आई हैं।
गम्भीर और साहित्यिक हिन्दी समाज, लेखकों और पाठकों के लिए इस आत्मकथा से गुजरना निश्चय ही एक समानान्तर संसार में जाना होगा, लेकिन यह यात्रा लगभग जरूरी है। खास तौर पर यह जानने के लिए कि लेखन की वह प्रक्रिया कैसे चलती है जिसमें पाठक की उपस्थिति बहुत ठोस होती है।
Lokmanya Mayanand
- Author Name:
Deoshankar Navin
- Book Type:

- Description: मैथिलीक प्रसिद्ध आ चर्चित त्रिपुंड मे सँ एक मायानंद मिश्र अपन प्रचुर रचनात्मकताक बलें मैथिल पाठकक जीह पर सतत उच्चरित होइबला एक अनिवार्य नाम थिक। कथा हो वा उपन्यास, कविता हो वा गीत, आलोचना हो वा दर्शन, इतिहास हो वा चिन्तन, रेडियो हो वा मंच, सभठाम मायानंद अपन अखंड प्रतिभाक कारणें उच्चासन पर विराजमान छथि। एक दिस साहित्य आ दोसर दिस मैथिली आन्दोलन आ मंच लेल हुनक जीवन समर्पित छलनि। अपन जीवन काल मे ओ जतेक साहित्य सृजन कयलनि, ताहि सँ थोड़बो कम ओ मैथिली आन्दोलन आ मंच लेल नहि कयलनि। मैथिली आन्दोलन आ मंचक लाथें जन जागरण आ चेतना स्फुरण क' महत्तर कार्यक ओ सम्पादन कयलनि। ओ मैथिली मंचक सम्राट छलाह। हुनक उपस्थिति मात्र सँ मैथिली मंच गौरवान्वित होइत छल। हुनक जीवन आ बहुआयामी साहित्य पर लिखल 'लोकमान्य मायानंद' डा. देवशंकर नवीनक अमूल्य कृति थिक। एहि पोथी मे विस्तृत रूपें मायानंद मिश्रक जीवन आ साहित्य केँ अत्यंत गंभीरता, संलग्नता, सम्बद्धताक संग डा. नवीन विश्लेषित कयलनि अछि जे हुनक गहनता, दृष्टि सम्पन्नता आ गंभीरता केँ अखंड रूपें प्रतिष्ठापित करैत अछि। —केदार कानन
Gandhi Ki Mezbani
- Author Name:
Muriel Lester
- Book Type:

-
Description:
महात्मा गांधी के अपने विपुल साहित्य और लेखन के अलावा उन पर लिखी गई सामग्री भी विपुल है। फिर भी उन्हें और नज़दीक से जानने-समझने की इच्छा भी शिथिल नहीं पड़ती। उनके समकालीनों के अनेक संस्मरणों में गांधी जी जब-तब सजीव होते रहते हैं। ऐसी ही एक पुस्तक बीसवीं शताब्दी के चौथे दशक में एक अंग्रेज़ महिला ने प्रकाशित की थी जिन्होंने कुछ समय के लिए गांधी जी की मेज़बानी की थी। उसमें इस अनोखे व्यक्ति की सहज मानवीयता, आत्मविश्वास, अपनी दृष्टि और मूल्यों पर हर हालत में अड़े रहने के प्रसंग सहज प्रवाह में आए हैं। एक ऐसे समय में जब हम पश्चिम के आतंक और अनुकरण में मुदित मन लगे हैं, यह पुस्तक उस आतंक से सर्वथा मुक्त एक भारतीय आत्मा को एक बार फिर सामने लाती है और उसका हिन्दी अनुवाद प्रकाशित करते हुए हमें प्रसन्नता है।
—अशोक वाजपेयी
Picasso : Ek Jeevani
- Author Name:
Shashidhar Khan
- Book Type:

- Description: "दुनिया के सबसे प्रसिद्ध चित्रकार पाब्लो पिकासो इस सदी के सर्वाधिक प्रभावशाली और महानतम कलाकार माने जाते हैं। वे सिर्फ चित्रकार ही नहीं, अपने समय के सफलतम रंगकर्मी, शिल्पी, रचनाकार और रंगमंच डिजाइनर भी थे। कला का कोई क्षेत्र पिकासो से अछूता नहीं बचा। जिस विधा को छुआ, उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित बना दिया। पाब्लो पिकासो के व्यक्तित्व और कृतित्व में इतनी विविधताएँ हैं कि अभी तक उनके योगदान का सही आकलन नहीं हो सका है। उनका व्यक्तित्व और पारिवारिक से लेकर कलाकार के रूप में जिया गया जीवन भी इतना वैविध्यपूर्ण तथा विशिष्टताओं से भरा है कि जितनी बार चर्चा की जाए, एक नई बात सामने आती है। यही खासियत पिकासो को अतिविशिष्ट कलाकारों की सूची में ऊपर ला देती है। चित्रकारी और शिल्पकला के क्षेत्र में पिकासो विश्व के एकमात्र अमिट हस्ताक्षर हैं। विश्व की सर्वश्रेष्ठ कलाओं का इतिहास पिकासो से ही शुरू होता है और पिकासो पर ही समाप्त हो जाता है। पिकासो का रिकॉर्ड है कि 15 साल की उम्र में ही उन्होंने अपना स्टूडियो बनाकर व्यावसायिक पेंटिंग शुरू कर दी थी। पिकासो के बारे में जाननेवालों का कहना है कि लगता है, वे ब्रश, रंग और तूलिका हाथ में लिये पैदा हुए थे! पिकासो की माँ को भी वैसा ही लगता था। वैसे उनकी माँ पिकासो की कविताएँ ज्यादा पसंद करती थीं। कलाधर्मी पिकासो के जीवन की अंतरंग झाँकी प्रस्तुत करती पठनीय पुस्तक। "
Vishweshwaraiah
- Author Name:
Dinkar Kumar
- Book Type:

- Description: "मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया महान् भारतीय इंजीनियर, विद्वान्, शिक्षाविद्, राजनेता और मैसूर के दीवान रहे। विश्वेश्वरैया को दीर्घायु का स्वस्थ जीवन मिला। 15 सितंबर, 1860 को जनमे विश्वेश्वरैया को सन् 1955 में भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ मिला। उन्होंने ब्रिटिश राज के मातहत भी अनेक उच्च राजपदों पर कार्य किया और सदैव जनहित को सर्वोच्च रखा। मैसूर के कृष्ण राज सागर बाँध का निर्माण उन्हीं की देखरेख में हुआ और हैदराबाद के बाढ़ सुरक्षा तंत्र के प्रमुख डिजाइनर वे ही रहे। इसके अलावा उन्होंने अनेक प्रमुख भवन, बाँध व सड़क निर्माण परियोजनाओं का कार्यान्वयन किया। उनके उत्कृष्ट आभियांत्रिक कार्यों के लिए उन्हें ‘ऑर्डर ऑफ दि इंडियन एंपायर’, ‘भारत रत्न’ जैसे दो दर्जन से अधिक प्रतिष्ठित देशी-विदेशी पुरस्कारों और मानद उपाधियों से सम्मानित किया गया। उनकी जन्मतिथि 15 सितंबर को सम्मानस्वरूप ‘अभियंता दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। छात्रों, युवाओं तथा सभी आयुवर्गों के पाठकों के लिए पठनीय एक महान् विभूति की उत्कृष्ट जीवनी। "
The Life and Times of Sri Aurobindo Ghosh
- Author Name:
Kaushal Kishore
- Book Type:

- Description: Aurobindo's ideology and principles embody divinity, ethics, spontaneity and knowledge. He was an accomplished teacher, a profound scholar, a writer and a spiritual Guru. For him, nationalism was a holy offering to the motherland when viewed from the divine perspective. Aurobindo also played a very prominent role as a revolutionary. His contribution to politics cannot be ignored. Although his writings are philosophical, they also provide valuable social and cultural analysis. He was the one who suggested that "Poorna Swaraj" should be the main aim behind the revolutionary movement against the British. Nationalists were inspired to seize power from foreign masters. Aurobindo was an eminent educationist also. He greatly valued the inherent qualities and talents in each child. He felt that the role of education should be to nurture and enhance these God-given qualities. This book throws light on Sri Aurobindo Ghosh's Life. This is a biographical sketch for readers.
Sabke Apne Bapu
- Author Name:
Shobha Mathur Brijendra
- Book Type:

- Description: गांधीजी के पास विचारों की अमूल्य संपदा थी। उन्होंने भारत ही नहीं, वरन विश्व मानवता को अजस्र अनुदान दिए हैं। उनकी विचारधारा के प्रभाव से न केवल पश्चिमी क्षितिज पर विचारों का उदय हुआ, बल्कि आज भी पश्चिमी और भारतीय विचारक गांधीजी के विचारों से प्रभावित हो रहे हैं। गांधीजी जहाँ भी जाते थे, लोग उन्हें असीम प्यार देते थे। वह फूल चुनने के लिए कभी कहीं नहीं ठहरे, कर्मरत हो आगे बढ़ चले, फूल राहों में खिलते रहे। वह ऐसे घने वृक्ष थे, जो गरमी सहकर भी दूसरों को छाया देते रहे। गांधीजी कहते थे, ‘‘प्रेम की शक्ति घृणा की शक्ति से हजार गुना प्रभावशाली होती है।’’ तभी तो गांधीजी के विरोधी भी उन्हें प्यार करते थे। वे बेहद शरमीले, संकोची थे। बचपन में यह कोई कह भी नहीं सकता था कि इनके अंदर इतना बड़ा तूफान छिपा है, जो अंग्रेजों को तिनके की तरह उड़ाकर रख देगा। सतह से कोई तरंग भी नहीं उठी कि तूफान का अंदेशा होता। यह सब प्रकृति के रेशमी धागों से बन रही तकदीर थी, जो उन्हें राष्ट्रपिता के पद तक ले गई। विश्व की महान् विभूति महात्मा गांधी को संपूर्ण रूप से जानने-समझने में सहायक एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक।
Naye Daur Ki Ore
- Author Name:
Kishore Biyani
- Book Type:

- Description: नए दौर की ओर’ भारतीय ग्राहक तथा फ्यूचर ग्रुप, बिग बाजार एवं पैंटलून्स की किशोर बियानी के अपने शब्दों में लिखी कहानी है। एक मध्यवर्गीय परिवार में जनमे किशोर बियानी ने ‘स्टोन वॉश’ कपड़े को रिटेल व्यापारियों को बेचने से अपने व्यापारिक जीवन की शुरुआत की। कुछ ही वर्षों में पैंटलून्स, बिग बाजार, फूड बाजार, सेंट्रल और अन्य कई रिटेल मॉडल शुरू कर उन्होंने भारतीय रिटेल व्यापार को एक नया आयाम और नई दिशा दी। किशोर बियानी की कोशिश रही कि वे मुंबई के निवेशक से लेकर मेरठ के किसान तक की जेब में रखे हर नए पैसे को अपने रिटेल व्यापार की तरफ आकर्षित कर सकें। बियानी शॉपिंग मॉल बनाने एवं उपभोक्ता ब्रांड्स बनाने से बीमा बेचने तक, हर उस क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं जहाँ उपभोक्ता है और पैसा खर्च करता है। ‘नए दौर की ओर’ में सिर्फ उनके शब्द ही नहीं हैं, बल्कि इस उतार-चढ़ाव की यात्रा में उनके मित्र, सहयोगी, पार्टनर, परिवार के सदस्यों की राय एवं संस्मरण शामिल हैं। ‘रिटेल के राजा’ के रूप में प्रसिद्ध किशोर बियानी अनेक पुरस्कारों एवं सम्मानों से विभूषित हुए हैं। पैंटलून्स को अमेरिका के नेशनल रिटेल फेडरेशन ने ‘अंतरराष्ट्रीय रिटेलर-2007’ से सम्मानित किया है। ‘नए दौर की ओर’ दृढ़ निश्चय, आत्मविश्वास एवं अदम्य इच्छाशक्ति से सपने सच करने की कहानी है और ‘नियमों को बदलो—मूल्यों को बनाए रखो’ मंत्र का सजीव चित्रण है।
Manavputra Isa : Jeewan Aur Darshan
- Author Name:
Raghuvansh
- Book Type:

-
Description:
विश्वविख्यात चरितावली में मानवपुत्र ईसा का नाम प्रथम पंक्ति में है। उनका जीवन एक स्तर पर जितना सुस्पष्ट और सुलिखित है, उतना ही उसके विविध पक्षों की व्याख्या को लेकर विद्वानों और विचारकों में मतभेद रहा है। वे ईश्वर के बेटे हैं पर मानवपुत्र कहे जाते हैं। इस रूप में लौकिक और अलौकिक संसार को वे बड़ी ख़ूबी से जोड़ते हैं। उनके सीधे-सादे जीवनवृत्त में सृष्टि के अनेक रहस्य अन्तर्निहित हैं। इस स्थिति में ईसा का जीवन आरम्भ से ही बड़े-बड़े जीवनीकारों, दार्शनिकों और कलाकारों के लिए सूक्ष्म जिज्ञासा का विषय रहा है। पश्चिमी संसार की कलाओं का एक बहुत बड़ा भाग ईसा के जीवन-चरित से प्रेरित और प्रभावित है। भारत के बड़े-बड़े मनीषी भी उनके व्यक्तित्व से सीखते हैं। महात्मा गांधी के लिए अत्यन्त प्रेरक प्रसंगों में से एक पर्वत-प्रवचन का रहा है।
ऐसे सरल पर उलझे हुए चरित को लिखना किसी भी लेखक के लिए योग्य चुनौती है। डॉ. रघुवंश ने केवल ईसा की कहानी नहीं कह दी है, वरन् अपनी भाषा में उसका पुनःसृजन किया है। वृत्त, चरित और जीवनी से आगे वह रचनात्मक साहित्य बनने के लिए प्रस्तुत है। इलाहाबाद कैथलिक सैमिनरी के कई विद्वानों ने उसे पढ़ा और देखा है। इस रूप में जहाँ एक ओर उसका साहित्यिक पक्ष विकसित है, वहीं उसका वृत्ताधार प्रामाणिक और परीक्षित, और इन दोनों स्तरों पर वह आकर्षक पाठ्य-सामग्री सिद्ध होगी।
Pravasi Ki Kalam Se
- Author Name:
Badal Sarkar
- Book Type:

-
Description:
भारतीय रंगमंच के दिशा-प्रवर्तकों में से एक बादल सरकार के पत्रों, डायरियों आदि का यह संग्रह उनके निर्माणकारी दिनों का लेखा-जोखा है, जिससे हम उनके व्यक्तित्व के साथ-साथ उनके संवेदनशील रंगकर्मी की संरचना को समझने की शुरुआत भी कर सकते हैं।
मूल रूप से बांग्ला में ‘प्रबासेर हिजिबिजी’ शीर्षक से प्रकाशित इस पुस्तक में सितम्बर, 1957 से सितम्बर, 1959 तक के उनके लन्दन प्रवास (दो साल), जुलाई 1963 से मार्च 1964 तक के उनके फ्रांस प्रवास (नौ महीने) और जुलाई 1964 से जून 1967 तक (तीन साल) के नाइजीरिया प्रवास का रचनात्मक साक्ष्य है। यह उनके संघर्षमय जीवन के एक कालखंड का अत्यन्त मार्मिक एवं प्रामाणिक दस्तावेज़ भी है।
ग्रन्थ में एक जगह उन्होंने लिखा है कि जो बातें दूसरों से कही जा सकती थीं, वे पत्रों के माध्यम से कही गई हैं। जिन्हें अपने तईं ही रखना चाहता था, वे डायरी के पृष्ठों में ग्रथित हैं और जो डायरी में भी नहीं कही जा सकीं, वे कविताओं का बाना पहनकर व्यक्त हुई हैं।
क़रीब डेढ़ सौ पृष्ठों की इस सामग्री को काल-क्रमानुसार सँजोया गया है जिससे एक ख़ूबसूरत चित्र बना है जिसकी नाना रेखाएँ, नाना रंग, नाना आकार-प्रकार अपनी पूरी प्रामाणिकता के साथ आवश्यकता एवं प्रसंगानुसार उकेरे गए हैं।
Ghumakkad Swami
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: ‘घुमक्कड़ स्वामी’ बाबा हरिशरणानन्द का जीवन-वृत्त है जिसे राहुल सांकृत्यायन ने जीवनी के साथ-साथ यात्रा-वृत्तान्त का रूप देते हुए लिखा है। स्वामी हरिशरणानन्द का जन्म 1889 में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ जो कानपुर में व्यापार करता था। मात्र पन्द्रह वर्ष की उम्र में उन्होंने कुछ साधुओं के साथ गृह-त्याग कर दिया जो एक अथक, खोजी और जिज्ञासु यात्रा का आरम्भ था। योग-साधना से शुरू होकर उनका यह सफ़र स्वतंत्रता-आन्दोलन में भागीदारी से होते हुए आयुर्वेद में शोध तक चलता रहा, फिर 1941 में बावन वर्ष की आयु में वे गृहस्थ हुए। बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी स्वामी हरिशरणानन्द ने हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों की यात्राएँ भी कीं। वे एक विज्ञान-प्रेमी और दृष्टिवान सन्त थे। रूढ़िवादी कर्मकांड और पंडों आदि के पाखंड को उजागर करते हुए उन्होंने ज्ञान के मार्ग का अवगाहन किया। इस प्रसिद्ध पुस्तक में राहुल जी उनकी जीवन-यात्रा को उस समय के नगरों, व्यवसायों, आध्यात्मिक परम्पराओं, साधु-सन्तों की जीवनचर्या, आश्रमों-मठों के वातावरण और आयुर्वेद की गहरी जानकारियाँ साझा करते हुए लिखते हैं। 19वीं-20वीं सदी का भारत इसमें अपने सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहलुओं के साथ साक्षात दिखता है।
Swatantrata Senani Krantikari Baikunth Sukul Ka Mukadama
- Author Name:
Nandkishore Sukla
- Book Type:

- Description: बिहार के ग्राम जलालपुर, जिला मुजफ्फरपुर (वर्तमान वैशाली) में जन्मे बैकुंठ सुकुल उन स्वतंत्रता सेनानियों में थे, जो गुमनामी के अंधेरों में रहे हैं। उन्हें मुजफ्फरपुर के सत्र न्यायाधीश ने भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु के प्रसिद्ध मुकदमे के इकबालिया गवाह फणीन्द्रनाथ घोष की हत्या के आरोप में फाँसी की सजा सुनाई थी। बंगाल और लाहौर सहित विभिन्न जगहों के 91 सरकारी गवाहों की सुनवाई में सुकुल जी के द्वारा 50 बचाव पक्ष के गवाहों को पेश करने के आग्रह को अस्वीकार कर दिया गया। बैकुंठ सुकुल को सजा सुनाते समय सत्र न्यायाधीश उन तीन निर्णायकों से असहमत रहा जिन्होंने बैकुंठ सुकुल को दोषी नहीं पाया बल्कि बहुमत छोड़कर एक निर्णायक से सहमत रहते हुए फैसला सुनाया गया और 14 मई,1934 को बैकुंठ नाथ सुकुल को फाँसी दे दी गई। यह पुस्तक तत्कालीन राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में शहीद बैकुंठ सुकुल के मुकदमे की कार्यवाहियों को प्रामाणिकता से प्रस्तुत करती है। 24 फरवरी, 1934 का वह पत्र भी इस पुस्तक में शामिल में किया गया है, जो मुजफ्फरपुर के सत्र न्यायाधीश ने पटना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को लिखा था। उस पत्र में स्पष्ट किया गया था कि ‘बैकुंठ सुकुल द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष बचाव वकील खड़ा करने का कोई अर्थ नहीं है।’ साथ ही यहाँ ‘लाहौर षड्यंत्र’ के मुकदमे के फैसले से जुड़े दस्तावेज भी हैं जो सुखदेव और उनके साथियों द्वारा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध किया गया था। इन दस्तावेजों के अतिरिक्त इस पुस्तक में जहाँ हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन गतिविधियों का खुलासा किया गया है, वहीं बिहार की राष्ट्रीय राजनीति में भूमि,जातियों, समुदाय और शिक्षा की सापेक्ष भूमिका पर प्रकाश भी डाला गया है।
Hamare Balasahab Devras
- Author Name:
Ed. Ram Bahadur Rai,Rajeev Gupta
- Book Type:

- Description: बालासाहब देवरसजी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीसरे सरसंघचालक थे। उनका जीवन अत्यंत सरल था तथा वे मिलनसार प्रवृत्ति के थे, परंतु प्रसिद्धि से कोसों दूर रहने के साथ-साथ वे कुशल संगठक और दूरदृष्टा थे। बालासाहबजी के जीवन को समझने हेतु पाठकों के लिए इस पुस्तक में बाबू राव चौथाई वालेजी का संस्मरण उल्लेखनीय है। पुणे में चलनेवाली बसंत व्याख्यानमाला में हुए बालासाहबजी के ऐतिहासिक भाषण ने इस बात को प्रमाणित किया कि वे सामाजिक समरसता के अग्रदूत थे। उन्होंने अपने एक भाषण में कहा था, ‘‘यदि छुआछूत पाप नहीं है तो इस संसार में कुछ भी पाप नहीं है। वर्तमान दलित समुदाय जो अभी भी हिंदू है, जिन्होंने जाति से बाहर होना स्वीकार किया, किंतु विदेशी शासकों द्वारा जबरन धर्म परिवर्तन स्वीकार नहीं किया।’’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर शासन द्वारा लगाए गए तीनों प्रतिबंधों (वर्ष 1948, 1975 और 1992) के बालासाहबजी साक्षी रहे थे। उनके कार्यकाल में ही देश के अंदर कई ऐतिहासिक घटनाएँ घटित हुईं—ऑपरेशन ब्लू स्टार हुआ, पंजाब की समस्या, आरक्षण विवाद, शाहबानो प्रकरण, अयोध्या आंदोलन चला इत्यादि। ऐतिहासिक पुरुष बालासाहब देवरसजी के प्रेरणाप्रद जीवन का दिग्दर्शन कराती पठनीय पुस्तक।
Homi Jahangir Bhabha
- Author Name:
Ganeshan Venkatraman
- Book Type:

- Description: भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के जनक महान् वैज्ञानिक होमी जहाँगीर भाभा बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने भारत के आधुनिक विज्ञान को एक नई दिशा देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी दूरदर्शिता के कारण ही भौतिकी के साथ-साथ विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में भी अनुसंधान कार्य हो रहे हैं, भैंफ- इलेक्ट्रानिक्स, अंतरिक्ष विज्ञान, रेडियो खगोलिकी, सूक्ष्म जैवविज्ञान आदि। लेकिन उनकी रुचि और प्रतिभा किसी सीमा में आबद्ध नहीं थी। भाभा एक महान् स्वन्नद्रष्टा. संस्था- संस्थापक, प्रबंधक, कला व सौंदर्य-प्रेमी तथा प्रकृति-प्रेमी वैज्ञानिक थे। उनकी कार्यशैली, कर्मठता और प्रभावी व्यक्तित्व के कारण ही उनके कार्यकाल के केवल पच्चीस वर्षो में देश की वैज्ञानिक व प्रौद्योगिकी के विकास में जो गति आई. वह बेमिसाल है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए है जिन्हें ज्ञान प्राप्त करने की तीव्र अभिलाषा है। केवल भाभा की जीवनी ही नहीं, बल्कि उनके शोधकार्यो के बारे में महत्त्वपूर्ण विस्तृत जानकारी सरस-सुबोध भाषा में दी गई है। प्रस्तुत पुस्तक सभी आयु वर्ग के लोगों में विज्ञान के प्रति उत्सुकता जगाने में सफल होगी. ऐसी आशा है। विशेषकर भारत की नई पीढ़ी के लिए यह पुस्तक मार्गदर्शक एवं प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book