Aap-Biti
Author:
Marc ChagallPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Biographies-and-autobiographies0 Ratings
Price: ₹ 400
₹
500
Available
इन सफों का वही अर्थ है जो चित्रित सतह का है। यदि मेरे चित्रों में छिपने की कोई जगह होती, तो मैं उसमें सरक जाता...या शायद वे मेरे किसी चरित्र के पीछे चिपके होते या ‘संगीतकार’ के पाजामे के पीछे होते जिसे मैंने अपने म्यूरल में चित्रित किया है?...कौन जानता कि पीठ पर क्या लिखा है? आर.एस.एफ़.एस.आर. के समय में। मैं चाहकर चिल्लाता : हमारे बिजली के मचान हमारे पैरों तले सरक रहे हैं, क्या तुम महसूस कर सकते हो? और क्या हमारी सुघतय कला में पूर्व चेतावनी नहीं थी, हालाँकि हम लोग वास्तव में हवा में हैं और एक ही रोग से ग्रस्त, स्थायित्व के लिए लालायित। वे पाँच साल मेरी आत्मा मथते हैं। मैं दुबला हो चूका हूँ। मैं भूखा भी हूँ। मैं तुम्हें देखना चाहता हूँ फिर से, बी...सी...पी...मैं थक चूका हूँ। मुझे अपनी पत्नी और बेटी के साथ आना चाहिए। मुझे तुम्हारे नज़दीक आकर लेटना चाहिए। और, शायद, यूरोप मुझसे प्रेम करे, उसके साथ, मेरा रूस।
ISBN: 9788126718603
Pages: 212
Avg Reading Time: 7 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: ‘वे भी दिन थे’ शिवनाथ जी की आत्मकथात्मक डोगरी पुस्तक 'ओह बी दिन हे' का अनुवाद है। शिवनाथ बतौर व्यक्ति और लेखक, ऐसी शख़्सियत थे, जिनकी दृष्टि सूक्ष्म और सुदूर दोनों बिन्दुओं पर समान एकाग्रता से रहती थी। इस पुस्तक में उन्होंने 1950 में भारतीय डाक सेवा ज्वाइन करने के बाद से अपने संस्मरण, अनुवाद और विचार अंकित किए हैं। उनके विवरण की विशेषता यह है कि जहाँ-जहाँ वे रहे, उस शहर के वातावरण, साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों और महत्त्वपूर्ण स्थलों को उन्होंने गहरी नज़र से देखा, जिसका वर्णन भी वे इस पुस्तक में देते हैं। साथ ही डाक विभाग की कार्य-प्रक्रिया, संचार के इस देश-व्यापी संजाल की दिक़्क़तों और सम्भावनाओं की भी जानकारी देते चलते हैं। वे जिज्ञासु, ज्ञान-पिपासु और सेवा-भावी व्यक्ति थे। कर्तव्यनिष्ठा को उनके व्यक्तित्व से एक नया ही अर्थ मिलता था, जिसकी झलक हमें इस पुस्तक में भी मिलती है। कुछ स्थानों और व्यक्तियों का विवरण देखते ही बनता है। पुस्तक में डैनिश साधु शून्यता से उनकी पहली मुलाक़ात का वर्णन भी है। उनकी मैत्री 1952 से शुरू होकर 1982 तक चली। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने उनके पत्रों पर केन्द्रित एक पुस्तक 'शून्यता' का सृजन भी किया। डोगरी को स्वतंत्र भाषा के रूप में मान्यता दिलाने में भी उन्होंने अहम भूमिका निभाई, इसका ज़िक्र भी उन्होंने विस्तार से किया है। “हिन्दी में आत्मकथाएँ और जीवनियाँ कम ही हैं। लेखकों की आत्मकथाएँ तो और भी बहुत कम, लगभग गिनती की। शिवनाथ डोगरी के एक बड़े लेखक होने के अलावा सिविल सेवक भी थे। उनकी यह आत्मकथा उनके निरभिमानी व्यक्तित्व, लम्बे सार्वजनिक जीवन, उसके उतार-चढ़ावों और लेखकीय संघर्ष की, बिना किसी नाटकीयता के, तथा कथा है। हमें उसे प्रस्तुत करते हुए प्रसन्नता है।" —अशोक वाजपेयी
Shailendra
- Author Name:
Indrajeet Singh
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- Description: जिस तरह कहानी लिखते लिखते प्रेमचंद कहानी का प्रयाय बन गये, उसी तरह शैलेंद्र गीत रचते रचते गीतों के प्रेमचंद बन गए। शैलेंद्र को इश्क़, इंक़लाब, और इंसानियत के कवि के रूप में जाना जाता है। नामवर सिंह के अनुसार "शैलेंद्र की कविताएँ सामाजिक सरोकारों से जुड़ी हुई हैं। वे सही और सच्चे अर्थों में जनकवि थे।
Maryada Purushottam Bhagwan Ram : Jivan Aur Darshan
- Author Name:
Jairam Mishra
- Book Type:

- Description: श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम तो हैं ही, पूर्ण ब्रह्म के अवतार भी हैं। महामानव और आदर्श मानव के रूप में वह सद्प्रेरणा के अजस्र स्रोत हैं। पर श्रीराम के अवतार स्वरूप को, मोक्ष को जीवन का परम पुरुषार्थ माननेवाला आस्तिक बुद्धिसम्पन्न ईश्वरवादी ही ठीक-ठीक जानता-समझता है। श्रीराम भारतीय धर्म-संस्कृति के अनिवार्य और अपरिहार्य अंग हैं!इसीलिए ईश्वर के विभिन्न नामों में साधना की दृष्टि से रामनाम का महत्त्व सर्वोपरि है। आज के पंकिल कुहासे को नष्ट करने के लिए श्रीराम जैसे चन्दन चर्चित चरित्र में अवगाहन की महती आवश्यकता मानवता को है। वह श्रीराम, जो समस्त भारतीय साधना और ज्ञान-परम्परा के वागद्वार हैं, जिनका दृढ़चरित्र लोक-मर्यादा के कठोर अंकुश से अनुशासित है और जो जन-जन के मन को ‘रस विशेष’ से आप्लावित कर सकता है। इस पुस्तक के लेखक डॉ. जयराम मिश्र राम-साहित्य के मर्मज्ञ विद्वान ही नहीं, राम-स्वरूप के ज्ञाता और उसमें रमे हुए सन्त हैं। हमें विश्वास है कि यह ग्रन्थ वाल्मीकि और तुलसी की रामकथा-परम्परा की एक कड़ी बनेगा।
Irfan
- Author Name:
Ajay Brahmatmaj
- Rating:
- Book Type:

- Description: इरफान की बातों और यादों को समेटती ' ... और कुछ पन्ने कोरे रह गए : इरफान' सभी फिल्म और इरफान प्रेमियों के लिए एक जरूरी पुस्तक है। यह उनकी जीवनी नहीं है। इसमें उनके साक्षात्कार और उन पर लिखे संस्मरण हैं। यह पुस्तक इरफान के अनोखे व्यक्तित्व को उन्हीं के शब्दों में उभारती है। उनके मित्रों-परिचितों के संस्मरण उनके व्यक्तित्व के अनेक पहलुओं को व्यक्त करते हैं। इरफान को जानने-समझने के लिए यह एक अंतरंग पुस्तक है।
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