Urdu-Hindi-Angreji Tribhashi Kosh
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Author:
Badri Nath KapoorPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
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आचार्य रामचन्द्र वर्मा कृत ‘उर्दू-हिन्दी-अंग्रेज़ी’ कोश उर्दू और हिन्दी-प्रेमियों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध हुआ है। प्रस्तुत संशोधित-संवर्द्धित संस्करण में पाठकों के अनेक महत्त्वपूर्ण सुझाव भी सम्मिलित किए गए हैं।</p> <p>इस कोश की विभिन्न उल्लेखनीय विशेषताओं में एक यह कि मुख्य प्रविष्टि के ठीक बाद उसका फ़ारसी लिपि में अंकन किया गया है। यह भी कि इसमें हिन्दी में अर्थ देने के बाद अंग्रेज़ी में भी अर्थ दिया गया है। ऐसी बहुतेरी विशेषताओं के कारण अब इस कोश की उपयोगिता और भी बढ़ गई है।</p> <p>अनेक नवीन शब्दों के समावेश से समृद्ध इस संस्करण से उर्दू, हिन्दी और अंग्रेज़ी के अध्येता अपने भाषा ज्ञान को और अधिक विस्तार दे सकेंगे। दक्षिण भारत के विभिन्न भाषा-भाषी हिन्दी का अध्ययन करते समय फ़ारसी व अरबी आदि के शब्दों का अर्थबोध प्रायः सहजता से नहीं कर पाते। इस कोश से ऐसी बहुत-सी कठिनाइयों का निवारण सरलतापूर्वक हो सकेगा।</p> <p>कोश के शब्दों का अर्थ देते समय यह ध्यान रखा गया है कि जहाँ तक हो सके अर्थ ऐसे हों, जिनसे पाठकों को ठीक-ठीक आशय के अलावा यह भी ज्ञात हो सके कि उन शब्दों का मूल क्या है अथवा वे किन शब्दों के परिवर्तित रूप हैं।</p> <p>यह कोश विद्यार्थियों, अध्यापकों, लेखकों, पत्रकारों और शोधार्थियों के लिए बहुत उपयोगी है।
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आचार्य रामचन्द्र वर्मा कृत ‘उर्दू-हिन्दी-अंग्रेज़ी’ कोश उर्दू और हिन्दी-प्रेमियों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध हुआ है। प्रस्तुत संशोधित-संवर्द्धित संस्करण में पाठकों के अनेक महत्त्वपूर्ण सुझाव भी सम्मिलित किए गए हैं।</p>
<p>इस कोश की विभिन्न उल्लेखनीय विशेषताओं में एक यह कि मुख्य प्रविष्टि के ठीक बाद उसका फ़ारसी लिपि में अंकन किया गया है। यह भी कि इसमें हिन्दी में अर्थ देने के बाद अंग्रेज़ी में भी अर्थ दिया गया है। ऐसी बहुतेरी विशेषताओं के कारण अब इस कोश की उपयोगिता और भी बढ़ गई है।</p>
<p>अनेक नवीन शब्दों के समावेश से समृद्ध इस संस्करण से उर्दू, हिन्दी और अंग्रेज़ी के अध्येता अपने भाषा ज्ञान को और अधिक विस्तार दे सकेंगे। दक्षिण भारत के विभिन्न भाषा-भाषी हिन्दी का अध्ययन करते समय फ़ारसी व अरबी आदि के शब्दों का अर्थबोध प्रायः सहजता से नहीं कर पाते। इस कोश से ऐसी बहुत-सी कठिनाइयों का निवारण सरलतापूर्वक हो सकेगा।</p>
<p>कोश के शब्दों का अर्थ देते समय यह ध्यान रखा गया है कि जहाँ तक हो सके अर्थ ऐसे हों, जिनसे पाठकों को ठीक-ठीक आशय के अलावा यह भी ज्ञात हो सके कि उन शब्दों का मूल क्या है अथवा वे किन शब्दों के परिवर्तित रूप हैं।</p>
<p>यह कोश विद्यार्थियों, अध्यापकों, लेखकों, पत्रकारों और शोधार्थियों के लिए बहुत उपयोगी है।
Book Details
-
ISBN9788180316302
-
Pages490
-
Avg Reading Time16 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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