Indradhanush Ke Kitne Rang (2nd Edition)
(0)
Author:
Dr. Piyush RanjanPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
300
₹ 240 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
पुस्तक के पहले संस्करण को पढ़ कर बहुत सारे लोगों को सुखद आश्चर्य हुआ। आमतौर पर विज्ञान के विद्यार्थी और चिकित्सक भाषा और साहित्य के मामले में रूखे और नीरस माने जाते हैं। इस पुस्तक के प्रकाशन के बाद (‘डॉ. साहब, आपकी कविताएँ भावना-प्रधान और उच्च स्तरीय है’, ‘बहुत रोचक हैं’, ‘बिल्कुल हटकर हैं’, ‘पढ़ कर मजा आ गया’ आदि सरीखे) प्रशंसा का भाव लिये हुए कई बधाई सूचक शब्द सुनने को मिलते रहे, इस संस्करण में एक नए गीत ‘मोहे रँग दे’ को सम्मिलित किया गया है। इस गीत की रिकॉर्डिंग हो चुकी है और फागुन के अवसर पर लोकार्पण करने की योजना है। पुस्तक के बारे में— भावनाओं के कई रंग होते हैं और सभी रंगों का अपना एक अलग ही मजा होता है। जब से जिंदगी को समझा है, जिंदगी को सिर्फ अपने दिल की सुनकर, भावनाओं से परिपूर्ण जीया है। यह पुस्तक इंसान के इंद्रधनुषी भावनाओं के उन रंगों को सहेजने का एक प्रयास है, जिसका अनुभव जिंदगी के किसी-न-किसी मोड़ पर मुझे हुआ है। ‘इंद्रधनुष के कितने रंग’ जिंदगी के विविध रंगों को पन्नों पर उतरने की एक कोशिश है। ‘फलसफा’ में जिंदगी के मूल्य को समझते हुए, अपने कृत्य के द्वारा जिंदगी को और भी ज्याद मूल्यवान बनाने का संदेश दिया गया है। ‘जिंदगी दो पल की’ होती है। अफसोस, ज्यादातर लोग इस बात को जब तक समझ पाते हैं, तब तक ये पल बीत गए होते हैं। शपथ-पत्र—रचनाकार इस पुस्तक के विक्रय से होनेवाले समस्त धन-लाभ को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के गरीब मरीजों के इलाज के लिए दान देने की शपथ लेता है।
Read moreAbout the Book
पुस्तक के पहले संस्करण को पढ़ कर बहुत सारे लोगों को सुखद आश्चर्य हुआ। आमतौर पर विज्ञान के विद्यार्थी और चिकित्सक भाषा और साहित्य के मामले में रूखे और नीरस माने जाते हैं। इस पुस्तक के प्रकाशन के बाद (‘डॉ. साहब, आपकी कविताएँ भावना-प्रधान और उच्च स्तरीय है’, ‘बहुत रोचक हैं’, ‘बिल्कुल हटकर हैं’, ‘पढ़ कर मजा आ गया’ आदि सरीखे) प्रशंसा का भाव लिये हुए कई बधाई सूचक शब्द सुनने को मिलते रहे,
इस संस्करण में एक नए गीत ‘मोहे रँग दे’ को सम्मिलित किया गया है। इस गीत की रिकॉर्डिंग हो चुकी है और फागुन के अवसर पर लोकार्पण करने की योजना है।
पुस्तक के बारे में— भावनाओं के कई रंग होते हैं और सभी रंगों का अपना एक अलग ही मजा होता है। जब से जिंदगी को समझा है, जिंदगी को सिर्फ अपने दिल की सुनकर, भावनाओं से परिपूर्ण जीया है। यह पुस्तक इंसान के इंद्रधनुषी भावनाओं के उन रंगों को सहेजने का एक प्रयास है, जिसका अनुभव जिंदगी के किसी-न-किसी मोड़ पर मुझे हुआ है।
‘इंद्रधनुष के कितने रंग’ जिंदगी के विविध रंगों को पन्नों पर उतरने की एक कोशिश है। ‘फलसफा’ में जिंदगी के मूल्य को समझते हुए, अपने कृत्य के द्वारा जिंदगी को और भी ज्याद मूल्यवान बनाने का संदेश दिया गया है। ‘जिंदगी दो पल की’ होती है। अफसोस, ज्यादातर लोग इस बात को जब तक समझ पाते हैं, तब तक ये पल बीत गए होते हैं।
शपथ-पत्र—रचनाकार इस पुस्तक के विक्रय से होनेवाले समस्त धन-लाभ को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के गरीब मरीजों के इलाज के लिए दान देने की शपथ लेता है।
Book Details
-
ISBN9789395386418
-
Pages160
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Persian Hindi Dictionary : Vols. 1
- Author Name:
Chandrashekhar
- Book Type:

-
Description:
फ़ारसी भाषा, हिन्दी की ही तरह, भारतीय आर्य भाषा उपकुल का एक भाग है। ईरान एवं भारत, दोनों कृषि–प्रधान देश रहे हैं। दोनों की संस्कृतियों में अनेक समानताएँ आज भी विद्यमान हैं। मुग़ल–पूर्व, मुग़ल और मुग़लोत्तर शासन के दौरान हिन्दुस्तान में फ़ारसी भाषा का प्रसार एवं प्रचार अपनी चरम सीमा पर था। कबीरदास, सूरदास, मलिक मुहम्मद जायसी जैसे हिन्दी के कालजयी महान कवियों ने फ़ारसी भाषा के अनेक शब्दों को अपनी भावाभिव्यक्ति का साधन बनाया और उनका रचनात्मक प्रयोग किया। इस प्रकार कहा जा सकता है कि फ़ारसी ने हिन्दी साहित्य की रचनाधर्मिता पर भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है। फ़ारसी के अनेक शब्द ऐसे भी हैं, जिनका चलन आज ईरान में लगभग समाप्त हो चला है, लेकिन हिन्दी में वे अब भी जीवित हैं और साहित्य में ही नहीं, आम बोलचाल की भाषा में प्रयोग किए जा रहे हैं। फ़ारसी के अनेक मुहावरे अनूदित होकर हिन्दी की निधि बन चुके हैं।
प्रस्तुत ‘फ़ारसी–हिन्दी शब्दकोश’ हज़ारों वर्षों में फैले भारत–ईरान के सांस्कृतिक सम्बन्धों को रेखांकित करनेवाला प्रथम शब्दकोश है। विभिन्न विषयों एवं अलग–अलग परिप्रेक्ष्यों से सम्बन्धित लगभग 25,000 शब्द–प्रविष्टियों से सम्पन्न यह शब्दकोश, जिसमें पुरातन और नवीन दोनों प्रकार की अर्थ–परम्पराओं का समावेश है, प्राचीन और अर्वाचीन शब्दों का सुन्दर मिश्रण है।
आशा है, यह शब्दकोश विभिन्न प्रकार के अध्ययनकर्ताओं तथा सामान्य पाठकों के लिए समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगा।
Bhartiya Sanskriti Ka Pravah
- Author Name:
Kripashankar
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत पुस्तक में भारतीय संस्कृति के प्रवाह का संक्षिप्त विवेचन प्रस्तुत किया गया है।
इस पुस्तक में भारतीय संस्कृति के विकास का विवेचन उसके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में किया गया है।
संस्कृति अपरिवर्तनशील नहीं होती, वरन् उत्पादन प्रणाली के विकसित होने के साथ संस्कृति भी रूपान्तरित होती रहती है। मनुष्य सामाजिक चेतना और सौन्दर्यवृत्ति की अभिव्यक्ति हर युग में करता है। संस्कृति की कहानी इसी अभिव्यक्ति की कहानी है।
भारतीय संस्कृति तथा जीवन-दर्शन का प्रारम्भ से ही जीवन के प्रति एकांगी दृष्टिकोण नहीं रहा है। सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास भारतीयों का उद्देश्य था। यह सत्य है कि कुछ धार्मिक समुदायों तथा दार्शनिकों ने जीवन के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया था। परन्तु सामान्य जीवन में जीवन के प्रति उल्लास बना रहा और भारतीय विचारकों ने जीवन के उद्देश्यों को चार पुरुषार्थों के रूप में प्रस्तुत किया।
भारत का इतिहास सहस्रों वर्ष पुराना है और यह आश्चर्य की बात है कि इस काल में अनेक साम्राज्य बने तथा बिगड़े, अनेक जातियों का उत्कर्ष तथा पतन हुआ, भारत ने अनेक विदेशी आक्रमण झेले परन्तु इतिहास की परम्परा नहीं टूटने पाई। भारत का इतिहास संश्लेषण के प्रयत्नों का इतिहास है। अनेक विदेशी जातियों, धर्मों तथा संस्कृतियों ने हमारी वर्तमान भारतीय संस्कृति का निर्माण किया है। इस प्रकार की मिश्रण की प्रक्रिया आज भी हमारे देश में देखी जा सकती है।
यह पुस्तक न केवल इस विषय के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी; वरन् साधारण पाठकों के लिए जो अपनी संस्कृति को समझना चाहते हैं, लाभदायक होगी।
Natya Prastuti : Siddhant, Shilp Aur Vidhan
- Author Name:
Ramesh Rajhans
- Book Type:

- Description: ‘नाट्य प्रस्तुति : सिद्धान्त, शिल्प और विधान’ रंगकर्म में रुचि रखनेवाले उन सभी व्यक्तियों के लिए एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है, जो नाटक के क्षेत्र में नये हैं और नाट्य-विधा के सम्बन्ध में अधिक विस्तृत व गहन जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं। गाँव-कस्बे अथवा छोटे और पिछड़े इलाकों में रहनेवाले वे तमाम प्रतिभाशाली नाट्य-प्रेमी इस कृति से लाभान्वित होंगे जिनके लिए किसी नाट्य-विद्यालय अथवा नाट्य-संस्था में सम्मिलित होना सम्भव नहीं है लेकिन जो छोटी-छोटी रंग-मंडलियाँ बनाकर नाट्य-क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस पुस्तक के माध्यम से वे नाट्य-विधा से विधिवत परिचित होंगे और अपनी प्रस्तुतियों को अधिक सम्प्रेषणीय तथा अधिक अर्थवत्तापूर्ण बना सकेंगे। पुस्तक में भारतीय रंग-पद्धति के साथ-साथ पश्चिमी निर्देशकों और प्रस्तोताओं के विचारों और तकनीक का भी वर्णन है। चूँकि आज के नाट्य-मंच का स्वरूप बहुत कुछ ‘प्रोसीन्यम’ है और यह प्रोसीन्यम थियेटर दरअसल पश्चिमी रंग-पद्धति है, इसलिए पश्चिमी रंग-पद्धति और रंग-परम्परा की चर्चा भी इस पुस्तक के दायरे में है। दोनों ही रंग-पद्धतियों के बुनियादी तत्त्व एक हैं और किसी एक रंग-पद्धति को गम्भीरतापूर्वक समझ लेने से दूसरी को समझना काफी सरल है।
Paap Aur Punya
- Author Name:
Guru Datt
- Book Type:

- Description: "यशस्वी रचनाकार स्व. गुरुदत्त ने रसायन विज्ञान (कैमिस्ट्री) में एम.एस-सी. करने के पश्चात् आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त किया, साथ-ही-साथ भारतीय आर्षषष ग्रंथों का गहन अध्ययन किया। उन्होंने अपने पाठकों को अपने उपन्यासों के पात्रों के माध्यम से इन ग्रंथों का ज्ञान अत्यंत रुचिकर ढंग से दिया। प्रस्तुत उपन्यास 'पाप और पुण्य' की पात्र श्रीमद्भगवद्गीता के संदर्भ से पाप और पुण्य को परिभाषित करती है। वह समझाती है कि कुछ कार्य पाप नहीं होते, परंतु कानून की दृष्टि में अपराध होते हैं । इसी प्रकार कई कार्य कानून की दृष्टि में अपराध न होते हुए भी पाप होते हैं। ऐसा क्यों है ? यही इस उपन्यास का विषय है। रोचकता से भरपूर कथा वर्तमान कानून व्यवस्था पर करारी चोट करती है। लेखक अपने इस पठनीय उपन्यास के पात्रों के माध्यम से हमें उस राह पर चलने का परामर्श देते हैं, जो न पापमय हों और न ही वर्तमान कानून की दृष्टि में अपराध हों। उपन्यास की तेज गति पाठक को बाँधकर रखती है और वह इसे आरंभ कर समाप्त किए बिना नहीं छोड़ सकता । --पद्मेश दत्त
FCI Non-Executive (Junior Engineer, Steno Evam Assistant Grade-III) Bharti Pareeksha Phase-I
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jan Gopal : Sant Dadu Ke Jivanikar
- Author Name:
Purushottam Agarwal +1
- Book Type:

- Description: हालाँकि आज उन्हें बहुत लोग नहीं जानते, लेकिन जन गोपाल आरम्भिक आधुनिक भारत के एक महत्त्वपूर्ण देशज बुद्धिजीवी थे। ‘जन गोपाल : संत दादू के जीवनीकार’ पुस्तक के लेखकों का कहना है कि ऐसे कई निर्गुण भक्त कवि रहे हैं जिन पर उनकी काव्य-मेधा और ऐतिहासिक अहमियत के बावजूद उतना ध्यान नहीं दिया गया जितने के वे हक़दार थे। उन्नींसवीं सदी के राजस्थानी कवि एवं कथावाचक जन गोपाल भी ऐसी ही प्रतिभा हैं। यह पुस्तक उनके जीवन और कृतित्व पर केन्द्रित एक अभूतपूर्व अध्ययन है। जन गोपाल किसी आम निर्गुणपंथी भक्त के साँचे में पूरी तरह फ़िट नहीं बैठते। उनका जन्म एक व्यापारी परिवार में हुआ; निर्गुण पंथ का चुनाव उन्होंने किसी पारिवारिक या सामाजिक परम्परा के चलते नहीं, बल्कि अपने सचेत निजी निर्णय के आधार पर किया। उन्होंने अपने साहित्य में न केवल छन्दशास्त्र, काव्य-परम्परा और शास्त्रीय हिन्दुस्तानी संगीत के अपने अद्भुत ज्ञान का बल्कि एक नागर तथा प्रगतिशील संवेदना का भी परिचय दिया। उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘दादू जनम लीला’ का नाम सबसे पहले आता है जो उनके गुरु और अकबर के समकालीन दादू दयाल की जीवन-गाथा है। भागवत पुराण की कथाओं को भी उन्होंने अपने काव्य में पिरोया जिनमें ‘प्रह्लाद चरित्र’, ‘ध्रुव चरित्र’ और ‘जड़ भरत चरित्र’ मुख्य हैं। इस पुस्तक में स्पष्ट होता है कि जन गोपाल का विशेष महत्त्व इसलिए है कि उन्होंने लोक-प्रचलित पौराणिक कथाओं को अपनी हिन्दी व ब्रज रचनाओं में समकालीनता का एक सूक्ष्म तेवर दिया। साथ ही इन कथाओं के नैतिक पक्ष को नए रूप में रचने की प्रक्रिया में उन्होंने पारम्परिक धर्मशास्त्र के मूल तत्त्व पर भी नई दृष्टि डाली और भक्ति को एक समतावादी और मुक्तिकारी रूप में प्रस्तुत किया। जन गोपाल के जीवन और कृतित्व के विश्लेषण के साथ और भक्ति परम्परा में उन्हें उनका उचित स्थान देते हुए लेखकों ने इस पुस्तक में उनके रचे तीनों चरित्रों (प्रह्लाद, ध्रुव और भरत) के साथ ही उनके बीस पद भी प्रस्तुत किए हैं। देशज बौद्धिक परम्पराओं और निर्गुण भक्ति के अध्ययन के लिए यह पुस्तक निस्सन्देह महत्त्वपूर्ण है।
BPSC Bihar Lok Seva Aayog Samanya Adhyayan (General Studies) Prarambhik Pareeksha 1992 Se 2023 Tak Solved Papers
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Savdhan! Cigarette Pina Mana Hai
- Author Name:
Mahesh Dutt Sharma
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
RAJYABHISHEK (PB)
- Author Name:
Acharya Chatursen
- Book Type:

- Description: आचार्य जी का यह प्रसिद्ध उपन्यास राम द्वारा लंका पर चढ़ाई से प्रारंभ होता है और सीता के भू प्रवेश तक चलता है। इसकी एक-एक पंक्ति, एक-एक दृश्य ऐसा जीवंत है कि पाठक को बरबस लगता है कि वह स्वयं उसी युग में जी रहा है। - बहुमुखी प्रतिभा के धनी आचार्य चतुरसेन ने ५० वर्षों तक विविध विधाओं में निरंतर लेखन कार्य किया। वह एक लेखक और विचारक ही नहीं, बल्कि चिकित्सा शास्त्री भी थे ।
Khwabon Ke Khat
- Author Name:
Tripti Bhatt
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jharkhand GK: General Knowledge -2025
- Author Name:
Dr. Manish Rannjan
- Book Type:

- Description: 2025 Book for JPSC, JSSC, JTET, JSERC, SI and All Other Jharkhand Competitive Exam | Current Affairs | Jharkhand Political Map
1000 VIGYAN PRASHNOTTARI
- Author Name:
Dilip M. Salwi
- Book Type:

- Description: आरंभ से ही मानव स्वभाववश खोजी प्रवृत्ति का रहा है । उसके मस्तिष्क में सवाल कौंधते रहे हैं-यह क्या है, कैसे है, क्यों है आदि । ऐसे ही सवालों से जूझने का नाम विज्ञान है । सवालों की तह में जाने की कोशिश से ही हम जान पाते हैं कि हमारी पृथ्वी पर कभी डायनासोर जैसे विशाल सरीसृप का राज हुआ करता था तथा पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती हैं, न कि सूर्य पृथ्वी की- और ऐसे ही अनंत सवाल हैं, जो विज्ञान ने हमारे समक्ष रखे हैं । आज विज्ञान के प्रभामंडल से हमारी दुनिया ओतप्रोत है । जिधर भी निगाह डालिए उधर उसकी मौजूदगी मिलेगी- रेडियो, टेपरिकॉर्डर सिनेमा, वीडियो, फ्रिज, वाशिंग मशीन, टेलीविजन, कंप्यूटर, कार, रेल, जहाज, रॉकेट, मिसाइल, परमाणु बम आदि । यह सूची और भी लंबी है । जीवन का ऐसा कोई कोना नहीं बचा है जहाँ' उसका हस्तक्षेप नहीं हें, चाहे नितांत व्यक्तिगत हो या सामाजिक । जीवन में विज्ञान की इतनी उपयोगिता के बाद भी इसकी अनेक ऐसी छोटी- छोटी एवं महत्त्वपूर्ण बातें हैं जिनसे हम अनभिज्ञ हैं । इस पुस्तक में इन्हीं बातों को रोचक प्रश्नों के माध्यम से पाठकों तक पहुँचाने का प्रयत्न किया गया है ।
Manas Mein Nari
- Author Name:
Rajendra Arun
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
AYODHYA KA ITIHAS
- Author Name:
Rai Bahadur Lala Sitaram
- Book Type:

- Description: लाला सीताराम ने 1932 में अयोध्या का इतिहास लिखा था। इनके पूर्वज राम के अनन्य भक्त थे। इसलिए जौनपुर छोड़ अयोध्या नगरी में बस गए थे। लाला सीताराम ने अयोध्या में अपने घर के एक कमरे में रामायण मंदिर भी बना रखा था। यहाँ रहते हुए उन्होंने ‘अयोध्या का इतिहास’ लिखना प्रारंभ किया। वेद से लेकर पुराणों में अयोध्या का उल्लेख तो मिलता है लेकिन अयोध्या के इतिहास पर कोई समग्र दृष्टि डालती पुस्तक का अभाव लगातार उन्हें यह इतिहास लिखने के लिए प्रेरित करता रहा। लाला सीताराम ने गहन शोध कर वेद काल से लेकर ब्रिटिश काल के अयोध्या पर प्रकाश डाला है। अयोध्या न सिर्फ हिंदुओं का एक पवित्रतम तीर्थ है वरन् जैन, बौद्ध और सिख के लिए भी उतना ही पावन और श्रद्धा का केंद्र है।
Jawahar Navodaya Vidyalaya Book for Class 9 Entrance Exam -2024 JNV Book in Hindi
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Zindagi XXL
- Author Name:
Abhishek Manoharchanda
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Adyatan Hindi Vyakaran
- Author Name:
B.N. Pandey
- Book Type:

- Description: "यह पुस्तक चार अध्यायों में विभक्त है : प्रथम अध्याय में हिंदी भाषा में उपलब्ध सभी ध्वनियों एवं उनके लिखित रूप अक्षरों एवं संयुक्ताक्षरों की लेखन विधि, उच्चारण एवं उनसे शब्द-निर्माण की व्याख्या की गई है, ताकि हिंदीतरभाषी भारतीय एवं विदेशी परीक्षार्थी उनकी स्पष्ट समझ के साथ-साथ कम-से-कम समय में उनका अभ्यास कर उनपर अधिकार कर सकें। दूसरे अध्याय में सभी प्रकार के शब्दों की प्रकृति, निर्माण एवं पहचान की व्याख्या के साथ-साथ वाक्य गठन के दौरान लिंग, वचन विभक्ति, काल आदि के प्रभाव से उनमें होनेवाले रूप परिवर्तन को विवेचित-विश्लेषित किया गया है। तीसरे अध्याय में हिंदी भाषा में उपलब्ध सभी प्रकार के वाक्यों के गठन के अंतर्निहित नियमों को विश्लेषित किया गया है। वाक्य किसी भाषा के दैनिक प्रयोग की सबसे महत्त्वपूर्ण इकाई हैं और सभी प्रकार के अधिक-से-अधिक वाक्यों के निरंतर अभ्यास से ही भाषा का कार्यसाधक ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। चौथे अध्याय में उपसर्ग, प्रत्यय, संधि एवं समास समाहित हैं : व्याकरण पुस्तकों की महत्ता विषय के चयन में नहीं उनकी सुबोध एवं सुग्राह्य प्रस्तुति में होती है। व्याकरण की सार्थकता इसमें है कि वह साध्य नहीं, अपितु भाषा की सम्यक् समझ एवं प्रयोग का साधन बने।
Gita Ek Chikitskiya Drishtikon
- Author Name:
Dr. Shyam Sakha "Shyam"
- Book Type:

- Description: यूरोपियन उपनिवेशवादी गोरे लोगों के अलावा सबको उजड्ड समझते थे। उन्होंने एक सिद्धांत प्रतिपादित किया था कि ईश्वर ने उन्हें दुनिया को सभ्य बनाने का अधिकार सौंपा है। उन्होंने भारतीय ग्रंथों को कबीलाई धर्म के रूप में प्रचारित किया। इसलिए आरंभ में 'गीता' को भी एक धर्मग्रंथ बताया गया था, जबकि यह एक श्रेष्ठ आध्यात्मिक ग्रंथ ही नहीं, मनोविज्ञान की अद्भुत पुस्तक है, जिसे अब तो सारे संसार में मान लिया गया है और पश्चिमी लोग इसी के आधार पर mindfullness yoga का व्यापार कर करोड़ों डॉलर कमा रहे हैं। मानव मन की चंचल वृत्ति (संशय, द्वंद्व) को साधने, काबू करने की विधियों को योग कहा जाता है। इसमें सबसे गुह्य शिक्षा यह कि मनुष्य अपने गुण, कर्म, स्वभाव के विपरीत आचरण करने पर दु:ख प्राप्त करता है, अत: उसे अपने गुण-कर्म-स्वभाव को पहचानकर अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। मनुष्य का व्यक्तित्व त्रिगुण—सत्त्व, रजस एवं तमस पर आधारित होता है, इन्हीं गुणों के अनुसार हम सात्त्विक, राजसी एवं तामसिक व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। मानव जीवन के लिए आधार-ग्रंथ 'श्रीमद्भगवद्गीता' के मनोवैज्ञानिक एवं चिकित्सीय शास्त्र भी है, जो जीवन में बेहद उपयोगी एवं पठनीय है।
Uttar Pradesh Madhyamik Shiksha Seva Chayan Board Pravakta (PGT) Chayan Pareeksha, Vanijya 12 Practice Sets in Hindi (UPSESSB PGT Commerce Book Hindi)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Batla House (Hindi Translation)
- Author Name:
Karnal Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book