Paltu Bagh Aur Anya Kahaniyan (Hindi Translation of Collected Short Stories)
Author:
Ruskin BondPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references0 Ratings
Price: ₹ 280
₹
350
Available
वह बहुत पहले की बात है''
“कितना लंबा समय ?''
“पाँच साल पहले की ।''
''ओह, पाँच साल ! तो पता करो, पता
करो।!!
“कोई फायदा नहीं। अब उसके पास कोई मूवी कैमरा नहीं है । उसने बेच दिया।'!
“बेच दिया,'' किशोर ने ऐसे कहा जैसे मैंने उसे चोट पहुँचा दी, “परंतु तुमने उसे क्यों नहीं खरीदा ? हमें बस सिर्फ एक मूवी कैमरा की ही जरूरत है। फिर हमारा भाग्य बदल जाएगा। मैं फिल्म प्रोड्यूस कर दूँगा, मैं ही निर्देशित कर दूँगा और मैं गाने लिख दूँगा। चार्ली चैपलिन और राज कपूर दोनों एक साथ ।''
“तुमने कैमरा क्यों नहीं खरीदा ?“
“क्योंकि मेरे पास पैसा नहीं था।“
“परंतु हमसे उधार ले लिया होता।“
“अगर तुम इस स्थिति में हो कि धन उधार दे सकते हो तो जाओ एक दूसरा कैमरा खरीद लो ।''
“कभी नहीं। मुझे फिर से किसी समस्या में नहीं पड़ना ।'
–इसी पुस्तक से
सुप्रसिद्ध कहानीकार रस्किन बॉण्ड के इस कहानी-संग्रह "पालतू बाघ और अन्य कहानियाँ” में बच्चों के बाल मनोविज्ञान को बड़ी बारीकी से उकेरा गया है। कहानियाँ पठनीय हैं और खूब मनोरंजक भी |
ISBN: 9789355214119
Pages: 192
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Pardesi
- Author Name:
Neelam Mishra
- Book Type:

- Description: रामधन ने रामसुख का हाथ पकड़कर कहा, 'भय्या रेलिया देख सकित हा का?' रामसुख ने कहा, 'अरे काहे नाही, चला स्टेशन पर चली', कहकर तीनों प्लेटफार्म पर पहुँच गए। वहाँ एक रेलगाड़ी खड़ी थी। रामदीन अचानक कूदकर रेलगाड़ी पर चढ़ गए। उनके पीछे उत्सुकतावश रामधन, फिर रामसुख भी एकजुट रहने के मकसद से रेलगाड़ी पर चढ़ गए। रामसुख के चढ़ते ही ट्रेन एकाएक चल पड़ी। तीनों भाई एकदम हक्का-बक्का होकर एक सीट पर बैठ गए। रामसुख को समझ ही नहीं आया कि वे क्या करें? पर रामदीन और रामधन तो खुशी से चहक रहे थे। उन लोगों ने रेलगाड़ी पहले देखी भी न थी। रामसुख भाइयों के साथ खिड़की से बाहर देखकर चलती गाड़ी की गति अनुभव करने लगे। थकान से भरा शरीर, पर रेल की मीठी झुलान ने तीनों को सुला दिया। अचानक एक कड़क आवाज से रामसुख की आँख खुली तो सामने एक रोबदार अंग्रेज खड़ा था। वह टिकट जाँच का अधिकारी था। अंग्रेज ने कहा, 'ओ लड़के! टिकट दिखाओ।' रामसुख ने सिर हिलाकर कहा, 'टिकट नहीं है साहब।' —इसी पुस्तक से गाँव-देहात के भोले-भाले सरल निवासियों के अबोध, निश्छल और सहज भावभूमि का दिग्दर्शन करवाता पठनीय एवं मार्मिक उपन्यास, जो पाठकों की संवेदना को झंकृत कर देगा।
Bhartiya Sanskriti Ka Pravah
- Author Name:
Kripashankar
- Book Type:

-
Description:
प्रस्तुत पुस्तक में भारतीय संस्कृति के प्रवाह का संक्षिप्त विवेचन प्रस्तुत किया गया है।
इस पुस्तक में भारतीय संस्कृति के विकास का विवेचन उसके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में किया गया है।
संस्कृति अपरिवर्तनशील नहीं होती, वरन् उत्पादन प्रणाली के विकसित होने के साथ संस्कृति भी रूपान्तरित होती रहती है। मनुष्य सामाजिक चेतना और सौन्दर्यवृत्ति की अभिव्यक्ति हर युग में करता है। संस्कृति की कहानी इसी अभिव्यक्ति की कहानी है।
भारतीय संस्कृति तथा जीवन-दर्शन का प्रारम्भ से ही जीवन के प्रति एकांगी दृष्टिकोण नहीं रहा है। सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास भारतीयों का उद्देश्य था। यह सत्य है कि कुछ धार्मिक समुदायों तथा दार्शनिकों ने जीवन के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया था। परन्तु सामान्य जीवन में जीवन के प्रति उल्लास बना रहा और भारतीय विचारकों ने जीवन के उद्देश्यों को चार पुरुषार्थों के रूप में प्रस्तुत किया।
भारत का इतिहास सहस्रों वर्ष पुराना है और यह आश्चर्य की बात है कि इस काल में अनेक साम्राज्य बने तथा बिगड़े, अनेक जातियों का उत्कर्ष तथा पतन हुआ, भारत ने अनेक विदेशी आक्रमण झेले परन्तु इतिहास की परम्परा नहीं टूटने पाई। भारत का इतिहास संश्लेषण के प्रयत्नों का इतिहास है। अनेक विदेशी जातियों, धर्मों तथा संस्कृतियों ने हमारी वर्तमान भारतीय संस्कृति का निर्माण किया है। इस प्रकार की मिश्रण की प्रक्रिया आज भी हमारे देश में देखी जा सकती है।
यह पुस्तक न केवल इस विषय के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी; वरन् साधारण पाठकों के लिए जो अपनी संस्कृति को समझना चाहते हैं, लाभदायक होगी।
IAS/IPS Pariksha Mein Safalta Ke Secrets
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Nand Chaturvedi Rachanawali : Vol. 1-4
- Author Name:
Pallav
- Book Type:

- Description: नंद चतुर्वेदी की काव्य यात्रा लगभग एक शताब्दी की काव्य यात्रा है। औपनिवेशिक-सामंती भारत से भूमंडलीकृत-आधुनिक भारत की इस सुदीर्घ यात्रा में भाषा और रूप में भी पर्याप्त बदलाव देखे जा सकते हैं। ब्रजभाषा के पारम्परिक सवैयों से प्रारम्भ कर नंद चतुर्वेदी अपनी कविताओं को जिस छंदमुक्त लय में आधुनिक भावबोध के साथ रचते हैं वह हिन्दी काव्य भाषा के विकास का भी सुन्दर उदाहरण है। ‘नंद चतुर्वेदी रचनावली’ के पहले खंड में कवि का समूचा काव्य संसार आ गया है जिसमें उनके सभी प्रकाशित संग्रहों में आई कविताओं के साथ-साथ अप्रकाशित रह गई अनेक कविताएँ और गीत-छंद इत्यादि हैं। कवि नंद चतुर्वेदी मनुष्य की स्वाधीनता और गरिमा की रक्षा के संकल्प के साथ उसके लिए तमाम अवसरों की उपलब्धता चाहते हैं। उनकी आकांक्षा है कि ये अवसर मनुष्य के सम्पूर्ण अभ्युदय के हों, उसके जीवन में सम्पूर्ण प्रकाश और तमाम उल्लासों के हों। वे मनुष्य होने की गरिमा के निर्वाह के लिए किसी भी लड़ाई के लिए तैयार हैं और उसके लिए लोकतंत्र को एक जरूरी उपाय मानते हैं। आकस्मिक नहीं कि औपनिवेशिक दासता के दौर से निकलकर भारतीय लोकतंत्र के बनने और उस पर हो रहे आघातों को वे अपनी कविताओं का विषय बनाते हैं। मनुष्य की स्वाधीनता में उन्हें धर्म जहाँ भी बाधक लगता है वे उसका मुँहतोड़ प्रतिकार करते हैं। इस बिन्दु पर वे बड़े सेक्युलर (सांसारिक) हो जाते हैं जो निर्भय होकर किसी भी सत्ता से भिड़ना जानता है। राजनीति वह क्षेत्र है जहाँ से नंद बाबू का कवि ऊर्जा ग्रहण करता है। वे आततायी राजनीति का चेहरा उघाड़ते हैं और मनुष्यधर्मी राजनीति की प्रस्तावना भी करते हैं। उनका स्वाधीन भारत के समाजवादी दलों से सीधा जुड़ाव भी रहा और वे किसी कार्यकर्ता की तरह आन्दोलनों, रैलियों और चुनावों में भागीदारी करते रहे। उनके ये जीवनानुभव जब कविताओं में रूपान्तरित होकर आते हैं तब नॉस्टेल्जिया उनकी कविताओं की रूढ़ि नहीं शक्ति प्रतीत होता है। युवा आलोचक पल्लव ने परिश्रमपूर्वक रचनावली का सम्पादन किया है। उनकी भूमिका कवि के कृतित्व को गहराई से जानने-समझने के लिए आकृष्ट करती है। नंद चतुर्वेदी की काव्य यात्रा केवल कविताएँ लिखने तक सीमित नहीं थी। इस काव्य यात्रा में प्रभूत गद्य भी लिखा गया है। यह गद्य मोटे तौर पर दो प्रकार का है। चिन्तन-आलोचना-समीक्षा का गद्य और स्मृतियों का गद्य। ‘रचनावली’ के दूसरे खंड में चिन्तन-आलोचना-समीक्षा का गद्य संकलित कर लिया गया है। इस गद्य को पढ़ना नंद बाबू के काव्य सरोकारों को समझने का रास्ता देता है। ‘सप्त किरण’ शीर्षक से उन्होंने राजस्थान के कवियों की एक पुस्तक का सम्पादन भी किया था और इसे वे अस्तित्व रक्षा की संज्ञा देते थे। तो कहना न होगा कि अस्तित्व रक्षा के साथ प्रारम्भ हुआ आलोचना, सम्पादन और समीक्षा का यह सिलसिला पूरी शताब्दी तक नंद बाबू को सक्रिय बनाए रखता है। उन्होंने राजस्थान के हिन्दी कवियों के एक बड़े चयन का सम्पादन भी किया। गद्य लेखन नंद बाबू के लिए जीवनपर्यन्त आपद धर्म बना रहा। वे कवि थे और कविता के सम्बन्ध में निरन्तर विचार करना उन्हें प्रिय था। नंद बाबू कवि होने के साथ सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिक विचार के समर्थक भी हैं। वे साहित्य को लोक शिक्षण का सस्ता औजार भले न मानते रहे हों तब भी उन्हें लोक रुचियों के विविध पक्षों पर लिखना जरूरी लगता था। उनके ऐसे ही निबन्धों की किताब ‘यह हमारा समय’ में उनके दो दर्जन से अधिक निबन्ध संकलित हैं जो हमारे जीवन और समय के विविध समकालीन पक्षों पर विचार करते हैं। नंद बाबू के इन निबन्धों में प्रवाह और ताजगी तो है ही भाषा की सुन्दर छवियाँ भी हैं। मनुष्य की मुक्ति उनकी चिन्ताओं का सबसे बड़ा केन्द्र है और उसके लिए वे समता को आवश्यक शर्त मानते हैं। गैर-बराबरी से अधिक मनुष्य विरोधी उन्हें शायद कुछ नहीं लगता और इस विषय पर वे अनेक बार लिखते हैं। नंद बाबू ने ‘धर्मयुग’ जैसी पत्रिका के लिए लिखा तो लघु पत्रिकाओं और लघु समाचार-पत्रों के लिए भी लिखा। उनके इस गद्य लेखन में जहाँ काव्य की सौन्दर्यपक्षीय चिन्ताएँ हैं वहीं काव्य के उपयोगपक्ष की वस्तुनिष्ठ चिन्ताओं पर भी लगातार जिरह भी। कवि का यह गद्य उनके काव्य संसार को बेहतर ढंग से समझने का रास्ता देता है, मनुष्यता के रास्तों का संधान करता है तो इसे पढ़ना प्रसन्न गद्य को पढ़ना भी है। ‘रचनावली’ के तीसरे खंड में नंद चतुर्वेदी के कथेतर लेखन को सहेजा गया है जिसमें संस्मरण, डायरी, पत्रों के साथ व्याख्यान और साक्षात्कार भी हैं। वे इस गद्य लेखन में अपने समय और समाज की छोटी बड़ी तमाम व्याधियों पर नज़र दौड़ाते हैं और राजनीति व राजनेताओं के सम्बन्ध में भी दो-टूक लिखने में संकोच नहीं करते। एक लेखक के रूप में उन्होंने समाजवादी विचारधारा का पक्ष चुना है लेकिन उनकी विचारधारा किसी गिरोहबन्दी से जन्म नहीं लेती। राजस्थान में सक्रिय रहे प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ और जन संस्कृति मंच के साथ उनका संवाद रहा। वे लघु पत्रिकाओं के लिए लिखते रहे और उन्हें पढ़कर एक सजग पाठक के रूप में अपनी प्रतिक्रिया भी देते रहे। उनके संस्मरण प्राय: राजस्थान के साहित्य से जुड़े उन लोगों पर होते थे जिनके अवदान से नई पीढ़ी अनभिज्ञ है। जिनमें पंडित गिरिधर शर्मा नवरत्न, हाड़ौती के कवि भैरूलाल कालाबादल, कवि प्रकाश आतुर के साथ-साथ जैनेन्द्र, श्यामाचरण दुबे, शिवमंगल सिंह सुमन, अश्क दम्पती, यशपाल, देवीलाल सामर, आलम शाह खान, युगलकिशोर चतुर्वेदी, कवि चित्रकार रामगोपाल विजयवर्गीय, भागीरथ भार्गव, कल्याणमल लोढ़ा और क़मर मेवाड़ी जैसे लेखक-साहित्यकार शामिल हैं। नंद बाबू राजस्थान में समाजवादी आन्दोलन के जमीनी सिपाहियों में रहे हैं। अपने साथियों पर लिखते हुए सम्बन्धों की ऊष्मा की आँच नंद बाबू पाठकों तक पहुँचाते हैं। हीरालाल जैन और नरेंद्रपाल सिंह जैसे अपने स्थानीय साथियों के अलावा देश में समाजवादी आन्दोलन के अगुआ रहे जयप्रकाश नारायण और डॉ. राममनोहर लोहिया पर भी उन्होंने लिखा। उनकी डायरी और अपने पत्रों में वे अपने निजी दायरे सार्वजनिक करते हैं। दो-टूक टिप्पणियाँ और निर्भीक कथन। इनमें बहुधा आत्मीयता का रस भी है तो बेहद निजी निराशाएँ भी। कथेतर की विभिन्न विधाओं में संकलित इस खंड में नंद चतुर्वेदी की रचनाशीलता के अनेक रूप विद्यमान हैं जो कवि के व्यापक दाय का प्रमाण बन गए हैं। ‘नंद चतुर्वेदी रचनावली’ के चौथे और अन्तिम खंड में मुख्यत: कवि का अनुवाद कर्म है। नंद बाबू ने कविता और गद्य दोनों का अनुवाद किया। माना जाता है कि काव्यानुवाद बहुत मुश्किल साहित्य कर्म है क्योंकि अनुवादक ऐसा ही व्यक्ति होना चाहिए जो दोनों भाषाओं को ठीक से जानता हो। नंद बाबू ने साहित्यिक पत्रिकाओं के आग्रह पर काव्यानुवाद किये। ये काव्यानुवाद बहुत पुरानी प्राकृत की कविताओं के थे जो हाल कवि की गाथा सप्तशती से अंग्रेजी के रास्ते आए थे। ठीक इसी तरह कुछ संथाली कविताओं का अनुवाद भी उन्होंने किया जिन्हें अंग्रेजी में कवि सीताकांत महापात्र ने प्रस्तुत किया था। इन दोनों काव्यानुवादों में नंद बाबू की अपनी मेधा दिखाई देती है जो इन कविताओं की मूल संवदेना तक पाठकों को पहुँचाने में समर्थ है। इससे पहले उन्होंने अपनी पत्रिका बिंदु और उस दौर की अनेक पत्रिकाओं के लिए साहित्य शास्त्र तथा साहित्य के अन्य प्रासंगिक विषयों पर लिखे प्रसिद्ध अंग्रेजी निबंधों का अनुवाद भी किया। इस खंड में नंद बाबू द्वारा अनुवादित दो सम्पूर्ण कृतियाँ भी पढ़ी जा सकती हैं। ए. अप्पादुराई की एक अत्यन्त विचारोत्तेजक और महत्त्वपूर्ण किताब को उन्होंने अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद के लिए चुना। लगभग सवा दो सौ पृष्ठों की इस किताब का नाम था ‘भारतीय राजनीतिक चिन्तन’ जिसका अनुवाद नंद बाबू ने रघुवर दयाल के साथ मिलकर किया। 1990 में आई इस पुस्तक की गम्भीर सामग्री को जिस सहज और प्रभावी हिन्दी में नंद बाबू ने अनुवादित किया वह उनकी अद्भुत भाषिक क्षमता का उदाहरण है। दूसरी पुस्तक ‘दहेज पीड़ित महिलाएँ : एक अध्ययन’ लेखिका रंजना कुमारी की है जो भारत में महिला आन्दोलन में अग्रणी रही हैं। मुजफ्फरपुर, बिहार से 1991 में छपी इस छोटी-सी किताब में उस दौर की दहेज समस्या का गम्भीरता से अध्ययन किया गया था। ये दोनों पुस्तकें हिन्दी अनुवाद के बाद और चर्चित हो गईं। अपने जीवन के उत्तरार्ध में भी वे अनुवाद करते रहे। कभी कला प्रयोजन के सम्पादक हेमन्त शेष के आग्रह पर तो कभी और किसी पत्रिका के कहने पर। असल बात यही है कि साहित्य में जिस जीवन दृष्टि के लिए नंद बाबू संकल्पवान थे उसे बनाए रखने और गति देने के लिए अनुवाद भी एक जरूरी रास्ता लगता था।
UPSSSC PET PARIKSHA SAMUH-G (20 PRCT SETS)-NEW
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ek Super-Star Ki Maut
- Author Name:
Richa Lakhera
- Book Type:

- Description: जब उसकी चीख पहली बार टीले के उस पार से आई तो मैं नहीं जानता था कि उस दिन मैं माँ की हत्या होते देखूँगा! पिटाई और बेरहमी से बलात्कार की शिकार हुई, जिसका शव कभी बरामद नहीं किया जा सका। लेकिन हत्यारे एक गलती तो करते ही हैं। वे एक चश्मदीद पीछे छोड़ जाते हैं। चश्मदीद भी ऐसा, जिसके जीने का मकसद प्रतिशोध के सिवाय और कुछ नहीं होता। और समय आने पर जब वह दोषियों से हिसाब चुकता करने निकलता है, तो कई शैतान सामने आते हैं। वेलेंटाइन, एक सुपरस्टार ब्रांड एंबेसडर—जो कीमत मिले तो कुछ भी बेच सकता है। मेडिसी, एक दवा कंपनी, जो धोखाधड़ी से प्रतिबंधित दवाओं का निर्माण करती है। दुष्ट रंगा, और एस्टे, जो एक वेश्या है, जिसके क्रूर रहस्य एक बेटी के होश उड़ा देंगे। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, साँसे रोक देनेवाला सस्पेंस पैदा होता है—क्या एक और हत्या होनेवाली है? क्या इंस्पेक्टर सिल्वा एक और अपराध को रोकने के लिए समय पर सुरागों को जोड़ पाएगा? क्या लालच के देवता आखिरकार बेनकाब हो जाएँगे? पैसा, सत्ता और सेक्स की भूख की क्रोधित और आक्रोशित कर देनेवाली कहानी।
Michael Faraday
- Author Name:
Mamta Jha
- Book Type:

- Description: The renowned scientist Michael Faraday discovered benzene in chemistry, a name widely used today; introduced the concept of oxygen number, which is used in balancing chemical equations. Electricity, a gift from Michael Faraday, has proven to be a boon for humanity. Indeed, his successor, Sir William Bagge, Nobel Prize winner in physics, once said, "It is said that Prometheus brought fire to mankind; Faraday brought us electricity." Faraday was a sensitive and modern-minded man. He declined the presidency of the Royal Society. When he was offered the title of Sir Knight, he refused, saying, "I just want to be Michael Faraday." Faraday's entire life exemplifies how, with a strong will, a person can overcome struggles and adversities in life and change their destiny. A comprehensive book on the scientific vision and inventions of the great scientist Michael Faraday, which will inspire readers.
Sabhyata Ka Sankat Banam Adivasiyat
- Author Name:
Ghanshyam
- Book Type:

- Description: सभ्यता का संकट बनाम आदिवासियत' पुस्तक कोरोनाकाल के लॉकडाउन के बीच लिखी गई। यह एकांतवास की चेतना और संवेदना से उपजा एक अनुभवजन्य दस्तावेज है, जिसमें मानव इतिहास की असह्य पीड़ा और करोड़ों लोगों की मौत की गुंजलक को समझने की कोशिश है। मानव सभ्यता के इतिहास में यह एक ऐसी परिघटना है, जिसे आनेवाले सैकड़ों वर्षों तक एक काला अध्याय माना जाएगा। पिछले कुछ सौ वर्षों का इतिहास यह बतलाता है कि जब-जब मानव ने प्रकृति को जीतने का दुस्साहस दिखाया है, तब-तब प्रकृति ने मानव को सुधारने के लिए एक सबक सिखाया है। इन्हीं में एक है—कोरोना महामारी, जिसने यह साबित कर दिया है कि विज्ञान और तकनीक की ऊँचाइयाँ अभी भी प्रकृति को जीत पाने में अक्षम हैं और शायद आगे भी रहेंगी। विशेषज्ञों ने यह भी जताया है कि इनसान की प्रतिरोधक क्षमता जितनी दुरुस्त रहेगी, यह महामारी उसके सामने फटक तक नहीं पाएगी। इस अर्थ में देखें तो आदिवासी इलाकों का अनुभव इसे सच साबित करता है। कोरोना काल का अनुभव यह बतलाता है कि अपने देश के अधिकांश आदिवासी इलाके अपेक्षाकृत महानगरों से ज्यादा सुरक्षित रह पाए। इसका बड़ा कारण यह है कि आज भी आदिवासियत इस तरह की महामारियों से इसलिए लडऩे में सक्षम है, क्योंकि उनका रिश्ता प्रकृति के साथ ज्यादा जीवंत और सहज है। इसलिए इस पुस्तक का शीर्षक 'सभ्यता का संकट बनाम आदिवासियत' है।
RRB RAILWAY TARKSHAKTI PARIKSHAN NTPC, LEVEL-I POSTS BHARTI PARIKSHA-2021
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Railway Samanya Gyan (Vastunisth)
- Author Name:
Vivek Mishra
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
SSC Staff Selection Commission Constable (GD) (Male and Female) Computer Based Examination (15 Practice Sets)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Arthashastra Shabdakosh
- Author Name:
Shri Rajesh Kumar Singh +1
- Book Type:

- Description: देश की हिंदी पट्टी के विद्यार्थियों एवं प्रतियोगी छात्रों के लिए कठिन माने जानेवाले विषय ‘अर्थशास्त्र’ पर हिंदी भाषा में अच्छी पुस्तकों की कमी हमेशा से रही है। अर्थशास्त्र एवं भारतीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी शब्दावलियों की एक सामान्य समझ आम पाठक को हो सके, इसी सोच केसाथ यह पुस्तक लिखी गई है। इस पुस्तक में अंग्रेजी वर्णमाला क्रम के अनुसार ‘आर्थिक शब्दावलियों’ की बहुत ही आसान एवं साधारण शब्दों में उदाहरण सहित व्याख्या की गई है, जिसे कोई भी आम पाठक समझ सकता है। यह पुस्तक कॉलेज एवं विश्वविद्यालय के छात्रों से लेकर प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करनेवाले छात्रों के लिए भी अत्यंत उपयोगी साबित होगी।
Nachiket
- Author Name:
Sanjay Rai Sherpuria
- Book Type:

- Description: भारतीय संस्कृति एक ऐसी महान् संस्कृति है, जिसका दुनिया में कोई सानी है ही नहीं। हमारे वेद-उपनिषद् और भगवद्गीता ने मनुष्य को जन्म के साथ ही मृत्यु तक जो जीवन जीना है, उन सब चीजों के लिए अलग-अलग उपाय दिए हुए हैं। इस पुस्तक के माध्यम से हमने एक प्रामाणिक प्रयत्न किया है कि आज की जो सामान्य या अहम समस्या है, पति-पत्नी के संबंध और माँ-बाप का पुत्र-पुत्री के साथ व्यवहार, जिसे हम संस्कारों की मूलभूत बात भी कह सकते हैं, उसको वेद-उपनिषद् की ही बातों को थोड़ा सरल करके सामान्य व्यक्ति समझ सके और उसका उपयोग करके अपने घर को ‘धन्यो गृहस्थाश्रम’ कर सके। इस पुस्तक का नाम ‘नचिकेत’ इसलिए रखा गया है, क्योंकि हमारे वेद और उपनिषद् में नचिकेत पात्र को कई जगहों पर अंकित किया गया है, जो पात्र एक अद्भुत दैवी संतान की प्रतिकृति है, जिसको पढ़कर भी हमें ऐसा लगता है कि भगवान् हमारे घर पर ऐसी संतान को जन्म देना। ‘नचिकेत’ एक रूपक है—अद्भुत, अविस्मरणीय और असामान्य बालक का।
Indonesia Mein Hindu Punarutthan
- Author Name:
Ravi Kumar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Vaishwik Rachnakar : Kuchh Moolbhoot Jigyasayen
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
- Book Type:

- Description: Book
Tukantak Shabdkosh
- Author Name:
Parmanand Chaturvedi
- Book Type:

-
Description:
‘तुकान्तक शब्दकोश'—तुक से अन्त होनेवाले शब्दों का संकलन। लय, स्वर और ताल के बिना जैसे संगीत निष्प्रभ है, वैसे ही तुक के बिना कविता नीरस है।
तुक से ही एक सामान्य वाक्य को कविता में ढाला जा सकता है। अभिव्यक्ति को प्रभावी बनाया जा सकता है।
परमानन्द चतुर्वेदी का यह तुकान्तक कोश उनके अनेक सालों के कड़े परिश्रम का परिणाम है। वर्ष 1964 से ही वह इस कोश की रचना-प्रक्रिया में जुट गए थे। कोश में तुक से अन्त होनेवाले अनेक शब्द संकलित किए गए हैं और उन्हें भी अकारान्त, आकारान्त, इकारान्त आदि क्रम में रखा गया है।
'तुक' की महत्ता का वर्णन करते हुए परमानन्द महाकवि भूषण के उस छन्द का ज़िक्र करते हैं जो उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रशंसा में अपने प्रथम मिलन के अवसर पर उन्हें सुनाया था—
“इन्द्र जिमि जंभ पर, बाडव सुअंभ पर, रावन सदंभ पर, रघुकुल राज है।
पौन बारिकाह पर, संभु रतिनाह पर, ज्यों सहस्रबाह पर रामद्विज राज है॥”
जंभ, अंभ तथा सदंभ आदि के तुकान्तक शब्दों ने, प्रभावी उपमाओं के योग से जो प्राण इस छन्द में फूँक दिए हैं, उन पर शिवाजी महाराज तक रीझे बिना न रह सके। कहते हैं शिवाजी महाराज ने यह छन्द भूषण से बार-बार सुना और प्रत्येक बार एक स्वर्ण-मुद्रा पारितोषिक रूप में प्रदान की।
Pranayama Aur Sudarshan Kriya
- Author Name:
Francois Gautie +1
- Book Type:

- Description: प्राणायाम का शाब्दिक अर्थ है—‘प्राण या ऊर्जा का ज्वार-भाटा’। ऊर्जा का समुचित प्रवाह शरीर को स्वस्थ व निरोग रखता है। आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक पूज्य श्रीश्री रविशंकरजी ने प्राणतत्त्व और ऊर्जा के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए असंख्य लोगों को प्रेरित व प्रशिक्षित किया है। नींद में हम थकावट से छुटकारा पा जाते हैं, पर गहरे तनाव तो हमारे शरीर में कायम रहते हैं। सुदर्शन क्रिया हमारे तंत्र की गहराई से सफाई करती है। प्राणायाम के व्यापक फायदों में कुछ प्रमुख हैं—तनाव दूर होना, रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ना, मानसिक संतुलन व संपूर्ण स्वास्थ्य। सुदर्शन क्रिया कैंसर व हृदय रोग सहित कई बीमारियों से बचाव करती है। यही नहीं, ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के स्वैच्छिक कार्यकर्ता मतभेदों और द्वंद्वों में फँसे दलों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करने का महत्त्वपूर्ण काम करते हैं। असहिष्णुता, असुरक्षा, संशय और मतभेदों की दुनिया में श्रीश्री सद्भाव, विश्वास और सहनशीलता का सेतु बनाने के लिए प्रयत्नशील हैं। आतंक, युद्ध और अन्य संकटों से जूझते अफगानिस्तान, कोसोवो, पाकिस्तान, इजराइल, लेबनान आदि देशों में ‘आर्ट ऑफ लीविंग’ के कोर्स ने चमत्कारिक सकारात्मक परिणाम दिखाए हैं। श्रीश्री रविशंकर द्वारा उद्भूत ‘आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन’ व ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ कोर्स के माध्यम से सुदर्शन क्रिया और प्राणायाम का महत्त्व दरशाती एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण पुस्तक। यह आपको निरोग, संतुलित व तनाव मुक्त रहने का मार्ग दिखाएगी।
NVS NAVODAYA VIDYALAYA SAMITI PGT HINDI 14 PRACTICE PAPERS
- Author Name:
Suman Mishra
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Dharohar
- Author Name:
Kunwar Kanak Singh Rao
- Book Type:

- Description: Grade-I, Grade-II, Sharirik Shiksha Adhyapak Rajasthan Bhugol Evem Arthvyavastha
Jharkhand Samanya Gyan
- Author Name:
Dr. Manish Rannjan
- Book Type:

- Description: बिहार राज्य से पृथक् राज्य बने झारखंड के गठन में सुविधा-वितरण असमानताओं का बड़ा हाथ रहा। पृथक् झारखंड की माँग 19वीं शताब्दी के प्रारंभ से ही होने लगी थी, जबकि उस समय भारत अंग्रेजी शासन के अधीन था। सौ साल तक चला यह आंदोलन पृथक् राज्य के गठन के लिए विश्व में सबसे अधिक अवधि तक चलनेवाला आंदोलन रहा। जनजातीय बहुल झारखंड वैसे तो प्राकृतिक संपदाओं से भरपूर है, लेकिन शिक्षा के अभाव ने इस क्षेत्र को बहुत समय तक विकास की मुख्यधारा से दूर रखा। अपने अस्तित्व को बचाने और अपने अधिकारों को प्राप्त करने में झारखंड का आंदोलन और भी विशेष हो जाता है। जनजातियों का दमन और शोषण रोकने के लिए झारखंड की भूमिका पर ऐसे अनेक आंदोलन हुए, जो अठारहवीं शताब्दी के प्रारंभ से ही हो रहे थे। इन आंदोलनों में यहाँ की जनजातियों ने क्या कुछ सहा और देखा, इसकी कल्पना करना भी कठिन है। आज झारखंड पृथक् राज्य बनकर विकास के पथ पर अग्रसर है। प्रस्तुत पुस्तक ‘झारखंड सामान्य ज्ञान’ में झारखंड की भौगोलिक स्थिति, खनिज-संपदा, राजनीतिक-सामाजिक स्थिति पर सम्यक् जानकारी जुटाई गई, जो पाठकों के लिए अनेक रूपों में उपयोगी सिद्ध होगी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book