Sant Ravidas
(0)
Author:
Mahesh Dutt SharmaPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Academics-and-references₹
300
₹ 240 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
संत रविदास प्रसिद्ध भारतीय संत, कवि और समाज सुधारक थे। उनका प्रेरक जीवन सामाजिक न्याय और समानता के प्रति असीम प्रतिबद्धता का प्रतीक था। उनकी रचनाएँ आध्यात्मिकता, नैतिकता और सामाजिक न्याय की पैरवी करती हैं और सभी मनुष्यों के लिए करुणा तथा प्रेम की गहरी भावना से ओत-प्रोत हैं। संत रविदास कबीरदास के समकालीन थे। वे कबीर की तरह स्वामी रामानंदजी के शिष्य थे। गुरु ग्रंथसाहिब में संत रविदास की वाणियों का भी संकलन है। उनकी योग्यता एवं महत्ता से प्रभावित होकर मीराबाई ने उन्हें अपना गुरु बनाया और उनसे दीक्षा ली। वे मूल रूप से एक भक्त और साधक थे। उनकी वाणियों और पदों में दैन्य भावना, शरणागत, ध्यान की तल्लीनता तथा आत्मनिवेदन की भावना प्रमुखता से पाई जाती है। भक्ति के सहज एवं सरल मार्ग को उन्होंने अपनाया था; सत्संग को भी महत्त्व दिया है। जात-पाँत के भेदभाव को मिटाने का महत्त्वपूर्ण कार्य उनके सरल काव्य ने किया और मानव को जीवन जीने की कला तथा मानवता का पाठ पढ़ाया। अधिक पढ़े-लिखे न होते हुए भी उन्होंने समाज को जाग्रत् करने का अद्भुत कार्य किया। समरसता और समभाव का अमर संदेश देनेवाले शिरोमणि संत रविदास की प्रेरक जीवनगाथा ।
Read moreAbout the Book
संत रविदास प्रसिद्ध भारतीय संत, कवि और समाज सुधारक थे। उनका प्रेरक जीवन सामाजिक न्याय और समानता के प्रति असीम प्रतिबद्धता का प्रतीक था। उनकी रचनाएँ आध्यात्मिकता, नैतिकता और सामाजिक न्याय की पैरवी करती हैं और सभी मनुष्यों के लिए करुणा तथा प्रेम की गहरी भावना से ओत-प्रोत हैं।
संत रविदास कबीरदास के समकालीन थे। वे कबीर की तरह स्वामी रामानंदजी के शिष्य थे। गुरु ग्रंथसाहिब में संत रविदास की वाणियों का भी संकलन है। उनकी योग्यता एवं महत्ता से प्रभावित होकर मीराबाई ने उन्हें अपना गुरु बनाया और उनसे दीक्षा ली। वे मूल रूप से एक भक्त और साधक थे। उनकी वाणियों और पदों में दैन्य भावना, शरणागत, ध्यान की तल्लीनता तथा आत्मनिवेदन की भावना प्रमुखता से पाई जाती है। भक्ति के सहज एवं सरल मार्ग को उन्होंने अपनाया था; सत्संग को भी महत्त्व दिया है।
जात-पाँत के भेदभाव को मिटाने का महत्त्वपूर्ण कार्य उनके सरल काव्य ने किया और मानव को जीवन जीने की कला तथा मानवता का पाठ पढ़ाया। अधिक पढ़े-लिखे न होते हुए भी उन्होंने समाज को जाग्रत् करने का अद्भुत कार्य किया।
समरसता और समभाव का अमर संदेश देनेवाले शिरोमणि संत रविदास की प्रेरक जीवनगाथा ।
Book Details
-
ISBN9789348957665
-
Pages144
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Bhakti Ke Teen Swar : Miraan, Sur, Kabir
- Author Name:
John Stratton Hawley
- Book Type:

- Description: प्रो. हौली पिछले कई दशकों से भक्ति और हिन्दू परम्परा के अन्य पहलुओं पर विचारोत्तेजक काम करते रहे हैं। केनेथ ब्रायंट के साथ मिलकर उन्होंने सूरदास के पदों की प्रामाणिकता और पाठ-निर्धारण पर काम किया है। प्रस्तुत पुस्तक मूल अंग्रेज़ी में 2005 में प्रकाशित हुई थी। इस बीच नई खोजें हुई हैं, भक्ति-विमर्श में नए प्रश्न, नई शब्दावलियाँ आई हैं। प्रो. हौली ने पुस्तक की सामग्री को नई खोजों की रोशनी में अद्यतन किया है, हालाँकि ऐसा करते समय भी वे अपने मूल तर्क, आग्रहों और पद्धति को बनाए रहे हैं। सूरदास रचित पदों की संख्या ठीक-ठीक लाख नहीं तो हजारों में माननेवालों के लिए यह बहुत चौंकानेवाली बात होगी कि प्रो. हौली इनमें से केवल चार सौ तैंतीस को इस अर्थ में प्रामाणिक मानते हैं कि वे सूरदास से सम्बन्धित प्राचीनतम पांडुलिपियों में प्राप्त होते हैं। हौली इस पुस्तक में सूरदास, मीराँ और कबीर से जुड़े विशिष्ट सवालों—समय, रचनाओं की प्रामाणिकता, संवेदना का स्वभाव, लोक-स्मृति में उनका स्थान—आदि पर तो विचार करते ही हैं, वे इनके बहाने भक्ति-संवेदना से जुड़े व्यापक प्रश्नों पर भी विचार करते हैं। वे उस विमर्श में भी हिस्सा लेते हैं, जो भक्ति-संवेदना के ऐतिहासिक और दार्शनिक रूप से अभूतपूर्व पहलुओं को समझने की कोशिश करता रहा है। निर्गुण ही नहीं, यह बात तुलसी, सूर, मीराँ जैसे सगुण कवियों के बारे में भी सच है कि उनकी कविता आचार्यों द्वारा कर दिए गए ब्रह्म-निरूपण का जन-सुलभ मुहावरे में प्रचार करने के लिए नहीं रची गई है। वह सचमुच स्वायत्त और नवाचार सम्पन्न 'निज ब्रह्म विचार' है। इस निज ब्रह्म विचार और इसकी काव्याभिव्यक्ति के तीन सर्वाधिक मनोहर स्वरों को सुनते हुए प्रो. जॉन स्ट्रैटन हौली बहुत ही विचारोत्तेजक निष्कर्षों तक पहुँचे हैं, जिनमें से कुछ इस पुस्तक के माध्यम से आपके सामने मौजूद हैं।
Radhakrishna Angreji-Hindi Vyavharik Kosh
- Author Name:
Santosh Prasad +1
- Book Type:

-
Description:
आज हमारे सामाजिक तथा शैक्षिक जीवन में अंग्रेज़ी का स्थान बहुत महत्त्वपूर्ण है। हिन्दी के साथ-साथ अंग्रेज़ी भी एक सम्पर्क भाषा के रूप में कार्य कर रही है। इसी कारण हिन्दी-अंग्रेज़ी तथा अंग्रेज़ी-हिन्दी शब्दकोशों की प्रासंगिकता भी बढ़ जाती है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए हिन्दी-अंग्रेज़ी कोश का प्रकाशन किया गया है।
इस कोश में विद्वान् कोशकारों ने जहाँ विद्यार्थियों के पाठ्य-क्रम को ध्यान में रखा है, वहाँ सामान्य पाठकों के दैनिक व्यवहार में आनेवाली आवश्यकताओं पर भी ध्यान केन्द्रित किया है। हिन्दी भाषा के उन सभी शब्दों को इस कोश में समाहित किया गया है जो पाठ्य-पुस्तकों, मीडिया माध्यमों व सार्वजनिक जीवन में प्रयुक्त होते हैं। साथ ही, जो लोग हिन्दी की अपेक्षा अंग्रेज़ी में ज्यादा गति रखते हैं, यह कोश उनके लिए भी उपयोगी सिद्ध होगा। हिन्दी से अंग्रेज़ी भाषा में अनुवाद कार्य करनेवाले लोग भी इस कोश से अपेक्षित लाभ उठा सकते हैं।
Jharkhand GK: General Knowledge -2025
- Author Name:
Dr. Manish Rannjan
- Book Type:

- Description: 2025 Book for JPSC, JSSC, JTET, JSERC, SI and All Other Jharkhand Competitive Exam | Current Affairs | Jharkhand Political Map
UPSESSB TGT English 12 Practice Sets Uttar Pradesh Secondary Education Service Selection Board Trained Graduate Teacher Recruitment Examination (English Practice Book)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Lok Sanskriti Ki Rooprekha
- Author Name:
Krishnadev Upadhyaya
- Book Type:

-
Description:
लोक-साहित्य लोक-संस्कृति की एक महत्त्वपूर्ण इकाई है। यह इसका अविच्छिन्न अंग अथवा अवयव है। जब से लोक-साहित्य का भारतीय विश्वविद्यालयों में अध्ययन तथा अध्यापन के लिए प्रवेश हुआ है, तब से इस विषय को लेकर अनेक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों की रचना हुई है। प्रस्तुत ग्रन्थ को छह खंडों तथा 18 अध्यायों में विभक्त किया गया है।
प्रथम अध्याय में लोक-संस्कृति शब्द के जन्म की कथा, इसका अर्थ, इसकी परिभाषा, सभ्यता और संस्कृति में अन्तर, लोक-साहित्य तथा लोक-संस्कृति में अन्तर, हिन्दी में फोक लोर का समानार्थक शब्द लोक-संस्कृति तथा लोक-संस्कृति के विराट स्वरूप की मीमांसा की गई है। दि्वतीय अध्याय में लोक-संस्कृति के अध्ययन का इतिहास प्रस्तुत किया गया है। यूरोप के विभिन्न देशों जैसे—जर्मनी, फ़्रांस, इंग्लैंड, स्वीडेन तथा फ़िनलैंड आदि में लोक-साहित्य का अध्ययन किन विद्वानों द्वारा किया गया, इसकी संक्षिप्त चर्चा की गई है।
दि्वतीय खंड पूर्णतया लोक-विश्वासों से सम्बन्धित है। अतः आकाश-लोक और भू-लोक में जितनी भी वस्तुएँ उपलब्ध हैं और उनके सम्बन्ध में जो भी लोक-विश्वास समाज में प्रचलित है, उनका सांगोपांग विवेचन इस खंड में प्रस्तुत किया गया है।
तीसरे खंड में सामाजिक संस्थाओं का वर्णन किया है जिसमें दो अध्याय हैं—(1) वर्ण और आश्रम तथा (2) संस्कार। वर्ण के अन्तर्गत ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य एवं शूद्रों के कर्तव्य, अधिकार तथा समाज में इनके स्थान का प्रतिपादन किया गया है। चौथे खंड में आश्रम वाले प्रकरण में चारों आश्रमों की चर्चा की गई है। जातिप्रथा से होनेवाले लाभ तथा हानियों की चर्चा के पश्चात् संयुक्त परिवार के सदस्यों के कर्तव्यों का परिचय दिया गया है।
पंचम खंड में ललित कलाओं का विवरण प्रस्तुत किया गया है। इन कलाओं के अन्तर्गत संगीतकला, नृत्यकला, नाट्यकला, वास्तुकला, चित्रकला, मूर्तिकला आती हैं। संगीत लोकगीतों का प्राण है। इसके बिना लोकगीत निष्प्राण, निर्जीव तथा नीरस है।
षष्ठ तथा अन्तिम खंड में लोक-साहित्य का समास रूप में विवेचन प्रस्तुत किया गया है। लोक-साहित्य का पाँच श्रेणियों में विभाजन करके, प्रत्येक वर्ग की विशिष्टता दिखलाई गई है।
BPSC Mains - Bihar Lok Seva Ayog Mukhya Pariksha Solved Papers (Paper I & II 67th Se 48th) Sanyukt Pareeksha
- Author Name:
Dr. Ranjit Kumar Singh, IAS (AIR-49)
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Heart Ki Dekhbhal
- Author Name:
Dr. H.S. Wasir
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Natya Prastuti : Siddhant, Shilp Aur Vidhan
- Author Name:
Ramesh Rajhans
- Book Type:

- Description: ‘नाट्य प्रस्तुति : सिद्धान्त, शिल्प और विधान’ रंगकर्म में रुचि रखनेवाले उन सभी व्यक्तियों के लिए एक महत्त्वपूर्ण पुस्तक है, जो नाटक के क्षेत्र में नये हैं और नाट्य-विधा के सम्बन्ध में अधिक विस्तृत व गहन जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं। गाँव-कस्बे अथवा छोटे और पिछड़े इलाकों में रहनेवाले वे तमाम प्रतिभाशाली नाट्य-प्रेमी इस कृति से लाभान्वित होंगे जिनके लिए किसी नाट्य-विद्यालय अथवा नाट्य-संस्था में सम्मिलित होना सम्भव नहीं है लेकिन जो छोटी-छोटी रंग-मंडलियाँ बनाकर नाट्य-क्षेत्र में सक्रिय हैं। इस पुस्तक के माध्यम से वे नाट्य-विधा से विधिवत परिचित होंगे और अपनी प्रस्तुतियों को अधिक सम्प्रेषणीय तथा अधिक अर्थवत्तापूर्ण बना सकेंगे। पुस्तक में भारतीय रंग-पद्धति के साथ-साथ पश्चिमी निर्देशकों और प्रस्तोताओं के विचारों और तकनीक का भी वर्णन है। चूँकि आज के नाट्य-मंच का स्वरूप बहुत कुछ ‘प्रोसीन्यम’ है और यह प्रोसीन्यम थियेटर दरअसल पश्चिमी रंग-पद्धति है, इसलिए पश्चिमी रंग-पद्धति और रंग-परम्परा की चर्चा भी इस पुस्तक के दायरे में है। दोनों ही रंग-पद्धतियों के बुनियादी तत्त्व एक हैं और किसी एक रंग-पद्धति को गम्भीरतापूर्वक समझ लेने से दूसरी को समझना काफी सरल है।
Belakigintha Bellage
- Author Name:
M.S. Asha Devi
- Rating:
- Book Type:

- Description: discriptation awaited
Maa
- Author Name:
Jagram Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jawahar Navodaya Vidyalaya Book for Class 9 Entrance Exam -2024 JNV Book in Hindi
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Madhya Pradesh Madhyamik Shikshak Patrata Pareeksha Ganit Practice MCQs (MPTET Maths Practice Sets)
- Author Name:
Team Prabhat
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Batla House (Hindi Translation)
- Author Name:
Karnal Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Bharat Ki Sanskritik Kahani
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
- Book Type:

- Description: भारतीय संस्कृति और सभ्यता को केन्द्र में रखकर लिखी गई यह पुस्तक मुख्य रूप से चार बातों पर रोशनी डालती है। पहली बात वह है जब आर्य इस देश में आए और द्रविड़ जाति से मिलकर उन्होंने उस संस्कृति की नींव डाली जिसे हम हिन्दू अथवा भारतीय संस्कृति कहते हैं। दूसरी बात वह है जब यह संस्कृति कुछ पुरानी हो गई और उसके ख़िलाफ़ महात्मा बुद्ध और महावीर ने विद्रोह किया, जिसके फलस्वरूप बहुत-सी रूढ़ियाँ दूर हुईं और यह संस्कृति एक बार फिर से नवीन हो गई। तीसरी बात वह है जब इस देश में मुसलमान आए और हिन्दू-धर्म का इस्लाम से सम्बन्ध हुआ। और चौथी बात वह है जब भारत की मिट्टी पर हिन्दुत्व और इस्लाम, दोनों का सम्बन्ध ईसाई धर्म और यूरोप के विज्ञान और बुद्धिवाद से हुआ। इन चारों बातों के मद्देनज़र हम कह सकते हैं कि यह पुस्तक ‘संस्कृति के चार अध्याय’ का सार रूप है, जिसमें राष्ट्रकवि दिनकर द्वारा सारगर्भित विवेचन प्रस्तुत किया गया है ताकि अनेक तरह के भ्रमों का निराकरण और उनके वास्तविक रूप को उद्घाटित किया जा सके; पहुँचा जा सके किसी मौलिक निष्कर्ष तक। अपने चिन्तन में एक बेहद प्रभावशाली कृति।
Hamari-Tumhari Love Stories (40 Prem stories)
- Author Name:
Suman Bajpai
- Book Type:

- Description: कॉफी के हर घूँट के साथ वह चीज स्टिक को परियों की जादुई छड़ी की तरह घुमाती किस्से सुना रही थी। वह वशीभूत सा बैठा सुन रहा था। जब भी वह कुछ कहती, एक उत्कंठा हमेशा उसे घेर लेती। उसकी दुनिया अजनबी नहीं रही थी, वह बिना दस्तक दिए ही उसके मन पर अपना कब्जा जमा चुकी थी। हम यों ही कभी-कभी मिल सकते हैं क्या? पूछते समय अपने स्वर में लरजते कंपन को महसूस किया उसने। वह उसे किसी भी हाल में खोना नहीं चाहता था। क्योंकि अब उसे पता था, वह क्या चाहता है। वह मुसकराई। हाँ, मिल सकते हैं। वैसे मेट्रो में तो अकसर मुलाकात हो ही जाती है, फिर क्या कॉफी पीने के लिए मिलना जरूरी है? उसकी आँखों में शरारत थी। चलो मिल लेंगे यों भी कभी-कभी, पर नो कमिटमेंट। उम्मीदों के पहाड़ मत खड़े कर लेना देव बाबू। मैं पारो नहीं हूँ, न ही बनना चाहती हूँ। एहसासों को बंद मुट्ठी में कैद करने में यकीन नहीं रखती। दोस्ती जैसा एहसास पंख दें, उड़ान दें, यही चाहती हूँ। अगर ऐसा कर सको तो तुम भी उड़ सकते हो मेरे साथ। —इसी पुस्तक से
Drishtikon
- Author Name:
Lal Krishna Advani
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hindi Ke Purodha : Shri Mahesh Chandra Sharma
- Author Name:
Acharya 'Anmol'
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Sanshipt Hindi Angreji Kosh
- Author Name:
Dwarka Prasad
- Book Type:

-
Description:
आज हमारे सामाजिक तथा शैक्षिक जीवन में अंग्रेज़ी का स्थान बहुत महत्त्वपूर्ण है। हिन्दी के साथ–साथ वह भी एक सम्पर्क भाषा के रूप में कार्य कर रही है। हिन्दी–अंग्रेज़ी कोश का प्रकाशन इसी दृष्टि से किया जा रहा है। इस कोश में विद्वान कोशकारों ने विशेष रूप से छात्रों–विद्यार्थियों की पाठ्यक्रमगत तथा सामान्य पाठकों के दैनिक व्यवहार में आनेवाली आवश्यकताओं पर ख़ास तौर से ध्यान केन्द्रित किया है। हिन्दी भाषा के उन सभी शब्दों को इस कोश में समाहित किया गया है जो पाठ्य–पुस्तकों, मीडिया माध्यमों व सार्वजनिक जीवन में प्रयुक्त होते हैं।
Vishwa Dharohar Mahakumbh
- Author Name:
Ramesh Pokhariyal ‘Nishank’
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Prem Aur Shanti ka Marg
- Author Name:
Dadi Janki
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book